नई दिल्ली। खरीफ सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न धान का रकबा इस वर्ष 7 अगस्त तक 344.78 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंचा जो गत वर्ष की समान अवधि के उत्पादन क्षेत्र 360.68 लाख हेक्टेयर से 15.90 लाख हेक्टेयर या करीब 2 प्रतिशत कम है। इस बार धान का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 412 लाख हेक्टेयर आंका गया है जिसकी तुलना में वास्तविक रकबा काफी पीछे है।
दरअसल पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान सकल उत्पादन क्षेत्र में जो 18 लाख हेक्टेयर की गिरावट आई है उसमें अकेले धान का योगदान करीब 16 लाख हेक्टेयर कम है।
धान की खेती अभी कुछ सप्ताहों तक जारी रहेगी। देश के विभिन्न भागों में मानसून की अच्छी बारिश हो रही है जिससे रोपाई में किसानों को मदद मिल रही है। यदि आगामी समय के दौरान सूखे का गंभीर संकट नहीं रहा तो एक बार फिर धान का अच्छा उत्पादन हो सकता है।
सरकारी गोदामों में पहले से ही चावल का विशाल भंडार मौजद है जबकि अक्टूबर 2026 से धान की सरकारी खरीद का नया मार्केटिंग सीजन आरंभ हो जाएगा। इसका कुल क्षेत्रफल कहां तक पहुंचता है इसका पता सितम्बर के दूसरे सप्ताह में ही चल सकेगा।

