Guar: ग्वार का भाव 13 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, जानिए आगे का अनुमान

0
15

नई दिल्ली। Guar Seed Price: चालू सीजन में कमजोर मानसून, कम बुवाई और मंडियों में बेहद कम आवक के कारण ग्वार की कीमतों में अचानक तूफानी तेजी आई है। ग्वार सीड की कीमत 7,900 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को पार कर गई है। ऐसा सितंबर 2013 के बाद पहली बार देखा गया है। वहीं, ग्वार गम नवंबर 2014 के बाद पहली बार 15,500 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को पार कर गया है। कम उत्पादन की आशंका और मजबूत वैश्विक मांग के कारण कीमतों में लगातार उछाल देखा जा रहा है।

अक्टूबर 2026 में ग्वार के बाजार में रिकॉर्ड तेजी का रुख बना हुआ है। कम उत्पादन की आशंका और मजबूत वैश्विक मांग के कारण कीमतों में लगातार उछाल आ रहा है। देश की प्रमुख मंडियों में ग्वार सीड का औसत भाव 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास है। कुछ मंडियों में उच्च गुणवत्ता वाले ग्वार का भाव 9,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। हाजिर बाजार के साथ वायदा बाजार में भी तेजी देखने को मिल रही है।

एनसीडीईएक्स पर ग्वार सीड का भाव 7,900 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया, जो पिछले 13 साल का उच्चतम स्तर है। ग्वार सीड की बढ़ती कीमतों के साथ ग्वार गम के दाम में भी तेजी आई है। पिछले सप्ताह ही ग्वार गम नवंबर 2014 के बाद पहली बार 15,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को पार कर गया। एनसीडीईएक्स पर ग्वार गम का भाव उछलकर 15,500 रुपये प्रति क्विंटल के पार पहुंच गया।

हाजिर और वायदा, दोनों बाजारों में मजबूती देखी जा रही है। बाजार के जानकारों के अनुसार, ग्वार सीड का भाव जल्द ही 8,000 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर को पार कर सकता है। अगर तेजी जारी रही, तो आने वाले समय में यह 10,000 रुपये प्रति क्विंटल का स्तर भी छू सकता है। इसी तरह, ग्वार गम का भाव 18,000 से 20,000 रुपये प्रति क्विंटल की ओर बढ़ सकता है।

बीकानेर की ग्वार मंडी के कारोबारी पुखराज चोपड़ा का कहना है कि इस बार फसल कम है। नई फसल की मंडियों में आवक शुरू हो गई है, लेकिन कीमतों में तेजी देखकर किसानों ने अपनी उपज रोक ली है। इससे मंडियों में आवक कमजोर हो गई है।

पिछले कुछ वर्षों से ग्वार की खेती में घाटा होने के कारण कई किसानों ने इसकी खेती छोड़ दी थी। इस साल बारिश के अनियमित वितरण ने भी फसल को नुकसान पहुंचाया है, जिससे उत्पादन कम रहने का अनुमान है। दूसरी ओर, किसानों को उम्मीद है कि बाजार में वर्ष 2012 जैसी तेजी आ सकती है। इसी उम्मीद में वे फिलहाल अपनी उपज बेचने से बच रहे हैं।

कम उत्पादन और बढ़ती मांग से चढ़ीं ग्वार की कीमतें
अक्टूबर में ग्वार की कीमतों में आई तूफानी तेजी पर केडिया कमोडिटी का कहना है कि पुरानी फसल की कम उपलब्धता और प्रमुख उत्पादक राज्यों में मानसून से जुड़े आपूर्ति जोखिमों के कारण कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। नई फसल की आवक शुरू हो गई है। इसके बावजूद खरीदार शुरुआती आपूर्ति के लिए ऊंची कीमतें चुका रहे हैं, क्योंकि कमजोर मानसून के बाद फसल कम रहने की आशंका है।

राजस्थान में मानसूनी बारिश में 17.33 फीसदी की कमी से बारिश पर निर्भर ग्वार की खेती और नई फसल की उपलब्धता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे ग्वार की कीमतों को समर्थन मिल सकता है। भारत में ग्वार की खेती का रकबा घटने और औद्योगिक मांग में लगातार सुधार के कारण ग्वार सीड और ग्वार गम का बाजार मजबूत बना हुआ है।

साल 2012 में ग्वार में आई थी ऐतिहासिक तेजी
भारतीय कृषि बाजार के इतिहास में ग्वार की कीमतों में सबसे बड़ी तेजी वर्ष 2012 में देखने को मिली थी। मार्च 2012 में ग्वार सीड का भाव रिकॉर्ड 30,000 से 32,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। वहीं, ग्वार गम की कीमतें उछलकर 98,350 रुपये प्रति क्विंटल के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई थीं। इस अप्रत्याशित तेजी के पीछे सामान्य मांग और आपूर्ति के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों की भी अहम भूमिका थी। उस समय अमेरिका में शेल गैस और कच्चे तेल के निष्कर्षण के लिए हाइड्रोलिक फ्रैक्चरिंग तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल बढ़ रहा था। इस प्रक्रिया में ग्वार गम की भारी मांग पैदा हुई। मांग के मुकाबले उपलब्ध स्टॉक कम होने की आशंका के बीच वायदा बाजार में सट्टेबाजी भी तेज हो गई। इसके बाद बाजार में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए ग्वार के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध लगाया गया था।

ग्वार का क्या है उपयोग?
ग्वार के बीजों से ग्वार गम तैयार किया जाता है। इसमें पानी सोखने और तरल पदार्थों को गाढ़ा करने की खास क्षमता होती है। इसी गुण के कारण ग्वार गम का इस्तेमाल कृषि से लेकर कई बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। ग्वार गम का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग कच्चे तेल और शेल गैस के निष्कर्षण में होता है। इसके अलावा, इसका इस्तेमाल कपड़ा, कागज, विस्फोटक, पैकेज्ड फूड, आइसक्रीम, डेयरी उत्पाद, बेकरी उत्पाद, दवाइयों और कॉस्मेटिक्स जैसे क्षेत्रों में भी किया जाता है। वैश्विक बाजार में ग्वार गम के निर्यात में भारत की बड़ी हिस्सेदारी है। भारत से दुनिया के विभिन्न देशों को ग्वार गम का निर्यात किया जाता है। राजस्थान देश का प्रमुख ग्वार उत्पादक राज्य है।