जैन समाज के कानूनी हितों की रक्षा के लिए देशभर में बनेंगे मध्यस्थता केंद्र

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कोटा में भी जल्द गठित होगी समिति, परिवारों के विवाद सुलझाने में मिलेगी मदद

कोटा। जैन समाज के धार्मिक स्थलों, परंपराओं, साधु-संतों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े विषयों पर कानूनी पैरवी को प्रभावी बनाने के लिए समाज और अधिवक्ताओं के बीच समन्वय मजबूत करने की आवश्यकता है।

कॉन्फ्रेंस के मुख्य कॉर्डिनेटर एडवोकेट अनिल काला ने बताया कि समाज के कानूनी हितों की रक्षा और पारिवारिक विवादों के समाधान की दिशा में यूनिवर्सल जैन लॉयर्स एसोसिएशन (भारत) के तत्वावधान में देशभर में मध्यस्थता केंद्र स्थापित किए जाएंगे। कोटा में भी शीघ्र केंद्र स्थापित करने की तैयारी है।

इसके लिए दो पूर्व न्यायाधीशों और तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं की समिति गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश करेंगे। साथ ही, अगले वर्ष से समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले पांच अधिवक्ताओं और पूर्व न्यायाधीशों को प्रतिवर्ष सम्मानित किया जाएगा।

ये घोषणाएं रविवार को मुनि सुव्रतनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, केशवरायपाटन में आयोजित यूनिवर्सल जैन लॉयर्स एसोसिएशन (भारत) के राजस्थान चैप्टर के अधिवेशन में की गईं। सम्मेलन में राजस्थान सहित विभिन्न क्षेत्रों से 150 से अधिक जैन अधिवक्ताओं ने भाग लिया।

कॉन्फ्रेंस-को-ऑर्डिनेटर सुशील बिलाला एवं संजय पाटौदी ने  ने बताया कि इसमें सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों से जुड़े वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ पूर्व न्यायाधीश भी शामिल हुए। अधिवेशन में जैन समाज के प्रति अधिवक्ताओं की भूमिका, धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और समाज से जुड़े कानूनी मामलों में सामूहिक सहयोग पर विचार-विमर्श किया गया।

समाज और अधिवक्ताओं के बीच बने समन्वय समिति: गणिनी आर्यिका स्वस्तिभूषण माताजी ने अपने उद्बोधन में कहा कि जैन समाज को कानूनी मामलों में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए एक सशक्त समन्वय समिति बनानी चाहिए। समाज के अधिवक्ता जरूरत पड़ने पर कानूनी पैरवी के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन उन्हें संबंधित मामलों में समाज का संगठित सहयोग भी मिलना जरूरी है। किसी तीर्थ, मंदिर या धार्मिक परंपरा से जुड़े मामले में शास्त्रों और आगम के जानकार विद्वानों की सहायता, आर्थिक संसाधन, आवश्यक साक्ष्य और दस्तावेज जुटाने वाले जिम्मेदार लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

मंदिर, तीर्थ और धार्मिक विरासत की सुरक्षा जरूरी: माताजी ने जैन समाज के मंदिरों, तीर्थस्थलों, शास्त्रों, साधु-संतों और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समाज की प्राथमिकता धार्मिक विरासत की सुरक्षा और आने वाली पीढ़ियों तक उसके मूल्यों को पहुंचाना होनी चाहिए। इसके लिए समाज के विभिन्न संगठनों, विद्वानों, आर्थिक सहयोग देने वाले लोगों और अधिवक्ताओं को साझा मंच पर लाने की जरूरत है।

मुख्य अतिथि एवं मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश  अभय कुमार गोहिल ने बताया  कि कानूनी मामलों में केवल अधिवक्ताओं पर जिम्मेदारी डालना पर्याप्त नहीं है। संबंधित विषय की जानकारी जुटाने, गवाहों की व्यवस्था करने, दस्तावेज उपलब्ध कराने और न्यायालय में चल रही प्रक्रिया की निगरानी के लिए भी लोगों को जिम्मेदारी निभानी चाहिए। यदि समाज संगठित होकर अधिवक्ताओं का सहयोग करे, तो धार्मिक और सामाजिक विषयों से जुड़े मामलों की पैरवी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है।

नरेंद्र कुमार जैन, पूर्व चेयरमैन, ऑल इंडिया माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशन कमीशन, दिल्ली ने बताया कि उन्होंने जनगणना में धर्म, जाति और भाषा से संबंधित प्रविष्टियों पर भी समाज के स्तर पर स्पष्ट मार्गदर्शन की आवश्यकता बताई। उनके अनुसार, ऐसे विषयों पर समन्वित दृष्टिकोण विकसित किया जाना चाहिए, ताकि समाज के लोगों तक एकरूप और स्पष्ट जानकारी पहुंच सके।

पारिवारिक विवादों के समाधान में मिलेगी मदद: उजला के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सुप्रीम  कोर्ट ऑफ इंडिया के अधिवक्ता सुशील कुमार जैन बताया कि  मध्यस्थता केंद्रों का उद्देश्य पारिवारिक मतभेदों और विवादों को संवाद तथा परामर्श के माध्यम से सुलझाने में सहायता करना है। एसोसिएशन के अंतर्गत देशभर में ऐसे केंद्र स्थापित करने की योजना है। प्रत्येक केंद्र के संचालन के लिए दो पूर्व न्यायाधीशों और तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं की समिति गठित की जाएगी। कोटा में केंद्र की स्थापना के लिए भी जल्द समिति बनाने की बात कही गई।

सम्मेलन में समाजहित में कानूनी सेवाएं देने वाले अधिवक्ताओं के योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें प्रोत्साहित करने की पहल भी की गई। माताजी ने घोषणा की कि अगले वर्ष से समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले पांच अधिवक्ताओं और पूर्व न्यायाधीशों को प्रतिवर्ष सम्मानित किया जाएगा।

अधिवेशन का उद्घाटन न्यायाधिपति नरेंद्र कुमार जैन, पूर्व चेयरमैन, ऑल इंडिया माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशन कमीशन दिल्ली ने किया। मुख्य अतिथि न्यायाधिपति अभय कुमार गोहिल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, यूजेएलए के चीफ पैट्रन एवं एएएलएफआर के चेयरमैन रहे। अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं यूजेएलए के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने की।

कार्यक्रम में सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं यूजेएलए के राष्ट्रीय महामंत्री अजयवीर सिंह जैन, जयपुर के वरिष्ठ अधिवक्ता सुधांशु कासलीवाल और सुधीर कुमार जैन, अधिवक्ता हेमंत सोगानी एवं जितेंद्र मोहन जैन, कोटा के अधिवक्ता एवं पूर्व जिला न्यायाधीश जे.के. जैन और एस.के. जैन, टोंक के पूर्व जिला न्यायाधीश पारस कुमार जैन तथा कोटा के एम.एल. पाटोदी सहित अनेक विशिष्टजन उपस्थित रहे।

इनका किया सम्मान: सम्मेलन में वरिष्ठ अधिवक्ता सुधांशु कासलीवाल, अधिवक्ता हेमंत सोगानी और यूजेएलए के मुख्य समन्वयक वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेंद्र मोहन जैन को अभिनंदन पत्र देकर सम्मानित किया गया। मुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र, केशवरायपाटन की प्रबंध कार्यकारिणी का भी सम्मान किया गया। तीर्थ क्षेत्रों से जुड़े मामलों की न्यायालयों में पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं के योगदान को भी सराहा गया। अधिवेशन का संचालन एस एम जैन एवं यथार्थ पाटनी ने किया एवं  धन्यवाद प्रबन्ध कार्यकारिणी के महामंत्री राकेश जैन चपलमन ने किया।