नई दिल्ली। Gold Price: घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हालिया दिनों में सोने में भले ही मुनाफावसूली दिख रही हो, लेकिन सोने की बुनियादी चमक पर कोई आंच नहीं आई है। 24 कैरेट सोने का घरेलू बेंचमार्क सितंबर 2022 के लगभग 50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से उछलकर सितंबर 2026 में 1.55 लाख रुपये के स्तर पर टिका हुआ है यानी महज चार साल में 210 फीसदी का बंपर रिटर्न।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में 29 जनवरी को सोना 5,608 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक शिखर पर पहुंचा था। वहां से 20 फीसदी फिसलकर अब यह 4,500 डॉलर के आसपास है। बाजार विश्लेषक इसे मंदी नहीं, बल्कि एक लंबे बुल-रन के बीच की हेल्दी प्रॉफिट बुकिंग मान रहे हैं।
इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी के अनुसार, घरेलू बाजार में 1,49,000 रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4,400 डॉलर प्रति औंस का स्तर सुरक्षित रहने पर दिवाली तक घरेलू भाव 1,60,000 से 1,62,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।
घरेलू बाजार रुपये का मजबूत समर्थक
इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी के अनुसार, घरेलू बाजार में 1,49,000 रुपये का स्तर मजबूत सपोर्ट बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4,400 डॉलर प्रति औंस का स्तर सुरक्षित रहने पर दिवाली तक घरेलू भाव 1,60,000 से 1,62,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है।
एसएमसी ग्लोबल सिक्यूरिटीज की कमोडिटी रिसर्च हेड वंदना भारती की सलाह है कि शादियों के लिए खरीदार कीमतें और गिरने का इंतजार न करें। 1,45,000 से 1,52,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में जब भी नीचे मिले, 40-50 फीसदी खरीदारी तुरंत निपटा लें।
तेजी के तीन बड़े कारण
- केंद्रीय बैंकों का डी-डॉलराइजेशन अभियान : 2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस की 300 अरब डॉलर से अधिक की संप्रभु संपत्तियों को फ्रीज किया, जिसने दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की आंखें खोल दीं। विदेशी बैंकों में रखा डॉलर या बॉन्ड प्रतिबंधों की भेंट चढ़ सकता है, लेकिन अपनी तिजोरियों में रखे सोने पर किसी विदेशी शक्ति का नियंत्रण नहीं होता। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, केंद्रीय बैंक लगातार 1,000 टन से अधिक की सालाना खरीदारी कर रहे हैं। पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने जुलाई में लगातार 21वें महीने सोना जोड़ा है और इसका भंडार 2,366 टन पहुंच चुका है। पोलैंड ने अकेले 2026 में 90 टन सोना खरीदकर शीर्ष स्थान हासिल किया है।
- मौद्रिक परिसंपत्ति के रूप में पुनर्जन्म : सोना अब सिर्फ महंगाई से बचाव का पारंपरिक जरिया नहीं रहा। वैश्विक विखंडन के इस दौर में देश इसे डिफॉल्ट-मुक्त कोलैटरल और करेंसी अवमूल्यन के खिलाफ सबसे मजबूत संप्रभु ढाल के रूप में देख रहे हैं।
- आपूर्ति की तंग स्थिति और एशियाई मांग : रूस और तुर्की जैसे देश अपनी वित्तीय मजबूरियों और मुद्रा सुरक्षा के लिए सीमित बिक्री कर रहे हैं, लेकिन उभरते बाजारों की संस्थागत मांग उसकी तुरंत भरपाई कर रही है। इसके साथ ही भारत और चीन में त्योहारी व शादियों की भौतिक मांग कीमतों को तगड़ा आधार प्रदान कर रही है।

