नई दिल्ली। Crude Oil Price : कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार सुबह फिर गिरावट देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड का नवंबर वायदा 0.36 फीसदी की गिरावट के साथ 88.20 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
वहीं डब्ल्यूटीआई क्रूड का अक्टूबर वायदा 0.25 फीसदी टूटकर 83.32 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। ब्रेंट दिन में अब तक 88.10 से 88.73 डॉलर के बीच रहा, जबकि डब्ल्यूटीआई 83.03 से 83.76 डॉलर के दायरे में कारोबार करता दिखा।
कच्चे तेल में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। आम तौर पर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर तेल की कीमतें चढ़ती हैं, क्योंकि बाजार को सप्लाई में रुकावट का डर रहता है।
लेकिन इस बार तस्वीर थोड़ी अलग है। तनाव बना हुआ है, इसके बावजूद बाजार में तेल की सप्लाई को लेकर पहले जैसा डर नहीं दिख रहा। यही वजह है कि ब्रेंट 90 डॉलर के नीचे आ गया है।
पूरे हफ्ते की बात करें तो कच्चे तेल में अच्छी-खासी गिरावट आ चुकी है। ब्रेंट इस हफ्ते करीब 5.3 फीसदी नीचे है, जबकि डब्ल्यूटीआई में करीब 4.3 फीसदी की गिरावट आई है। अगर शुक्रवार को भी यही कमजोरी बनी रहती है तो लगातार दो हफ्तों की तेजी के बाद कच्चे तेल में पहली साप्ताहिक गिरावट होगी।
कच्चे तेल की कीमतों पर सबसे ज्यादा असर इस समय अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव का पड़ रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन ईरान के साथ जून में बनी पुरानी सहमति की शर्तों पर वापस लौटने के लिए तैयार नहीं है।
इससे दोनों देशों को दोबारा बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश मुश्किल हो सकती है। अमेरिका ने गुरुवार को भी कहा था कि फिलहाल ईरान के साथ उसकी कोई बातचीत नहीं चल रही है। हालांकि कुछ दूसरे देश दोनों के बीच बातचीत दोबारा शुरू कराने की कोशिश कर रहे हैं।
अमेरिका ने सोमवार को ईरान के खिलाफ नए प्रतिबंधों का भी ऐलान किया था। अमेरिकी प्रशासन ने इन्हें ईरान पर अब तक लगाए गए सबसे सख्त प्रतिबंध बताया। दूसरी तरफ ईरान ने इन कदमों की आलोचना की और इन्हें अमानवीय और शत्रुतापूर्ण बताया।
क्यों गिर रहा है कच्चा तेल
यह सबसे बड़ा सवाल है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है, फिर भी कच्चा तेल नीचे क्यों आ रहा है? कोटक सिक्योरिटीज के कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च प्रमुख अनिंद्य बनर्जी के मुताबिक, इसकी कई वजहें हैं। ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंध उतने सख्त नहीं निकले, जितनी बाजार को पहले आशंका थी। इसके अलावा पाकिस्तान के जरिए बातचीत का एक नया रास्ता खुलने की उम्मीद बनी है। एक और अहम बात होर्मुज स्ट्रेट से तेल टैंकरों की आवाजाही है। यहां स्थिति धीरे-धीरे बेहतर हो रही है। इससे बाजार में सप्लाई रुकने का डर कुछ कम हुआ है।

