कर्मयोगी सेवा संस्थान का 27वां श्राद्ध तर्पण श्रद्धांजलि महोत्सव कल से

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देश-दुनिया की दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए होंगे वैदिक विधि-विधान के साथ अनुष्ठान

कोटा। कर्मयोगी सेवा संस्थान की ओर से पितृ पक्ष के पवित्र अवसर पर 27वां 16 दिवसीय श्राद्ध तर्पण श्रद्धांजलि महोत्सव 26 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष राजाराम जैन कर्मयोगी एवं जिला अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा के नेतृत्व में यह आयोजन रोटेदा रोड, गुरुधाम कॉलोनी (सोगरिया स्टेशन के पास), कोटा में संपन्न होगा।

अनुष्ठान में प्रतिदिन पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 12 बजे तक क्रियाकांडी पंडित पवन शर्मा के आचार्यत्व में वैदिक विधि-विधान के साथ तर्पण एवं श्राद्ध कर्म के तत्पश्चात प्रतिदिन 12 से 2:00 बजे तक गरीबों एवं ब्राह्मणों को खीर पूरी सब्जी का भोजन कराया जाएगा।

इस 16 दिवसीय आयोजन की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें केवल परिजनों ही नहीं, बल्कि संपूर्ण सृष्टि, समाज, देश एवं दुनिया की विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी दिवंगत आत्माओं की आत्मशांति और उनके कार्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए तिथिवार विशेष श्राद्ध समर्पित किए गए हैं।

राजाराम जैन कर्मयोगी ने बताया कि 26 सितंबर (पूर्णिमा) को मानव कल्याणकारी दिव्य आत्माओं, देश व कोटा के विकास में योगदान देने वाले समाज सेवकों व जनप्रतिनिधियों को तर्पण समर्पित रहेगा।

इसके बाद 27 सितंबर (प्रतिपदा) को समस्त जलचर, थलचर, नभचर व पशु-पक्षियों, 28 सितंबर (द्वितीया) को शहीद पुलिसकर्मियों, अधिकारियों, दिवंगत न्याय प्रिय विधि वेताओ, 29 सितंबर (तृतीया) को अन्नदाता किसानों, 30 सितंबर (चतुर्थी व पंचमी) को देश की सीमा पर शहीद सैनिकों व स्वतंत्रता सेनानियों, 1 अक्टूबर (छठमी) को वैज्ञानिकों तथा 2 अक्टूबर (सप्तमी) को भ्रूण हत्या की शिकार अजन्मी कन्याओं की आत्मशांति के लिए श्राद्ध किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि 3 अक्टूबर (अष्टमी) को आतंकवाद व षड्यंत्रों के शिकार दिवंगतों, 4 अक्टूबर (नवमी) को प्रेरणाप्रद महिलाओं, 5 अक्टूबर (दशमी) को खिलाड़ियों, कलाकारों, पत्रकारों, साहित्यकारों व शाही राजघरानों के शासकों, 6 अक्टूबर (एकादशी) को दुर्घटनाओं व अकाल मृत्यु के शिकार व्यक्तियों, 7 अक्टूबर (द्वादशी) को साधु-संन्यासियों, 8 अक्टूबर (त्रयोदशी) को किन्नर समाज तथा 9 अक्टूबर (चतुर्दशी) को प्राकृतिक त्रासदियों व कोरोना महामारी के दिवंगतों को तर्पण किया जाएगा।

कर्मयोगी ने बताया कि ​महोत्सव का समापन 10 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या के श्राद्ध के साथ होगा। इस दिन आर्थिक अभाव के कारण वंचित रहे परिवारों के दिवंगतों, लावारिसों, भुखमरी से शिकार हुए लोगों तथा समस्त भूली-बिसरी आत्माओं के निमित्त विशेष तर्पण किया जाएगा। शाम 6 बजे सभी दिवंगत आत्माओं की भावभीनी विदाई पर भव्य दीपदान कार्यक्रम तथा आम भंडारे का आयोजन कर 16 दिवसीय महोत्सव का समापन किया जाएगा।