भारत-चीन के लिए सऊदी अरब ने खोला 10 करोड़ बैरल तेल का खजाना, जानिए कैसे

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नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में उपजे जलमार्ग संकट के बीच एशिया में तेल की किल्लत को टालने के लिए सऊदी अरब आगे आया है। सऊदी अरब ने भारत और चीन सहित एशियाई देशों को लगभग 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल बेचने की डील की है। सऊदी अरामको अक्टूबर और नवंबर महीने में डिलीवर होने वाले इस तेल की पूरी लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की जिम्मेदारी खुद उठाएगी।

ट्रेडर्स के मुताबिक, चीन की सरकारी और निजी रिफाइनरियों के अलावा भारत, जापान और दक्षिण कोरिया की कंपनियां भी इस क्रूड को खरीदने वालों में शामिल हैं। इन डील्स से एशिया में संभावित तेल संकट के दबाव को कुछ हद तक कम करने में मदद मिल सकती है।

सऊदी अरब की ओर से की गई करीब 10 करोड़ बैरल की बिक्री काफी बड़ी है। यह मात्रा दुनिया की करीब एक दिन की कुल तेल मांग के बराबर है। हाल की अवधि में सऊदी अरब से एशिया जाने वाले तेल की तुलना में यह मात्रा दोगुने से भी ज्यादा है। खास बात यह है कि यह तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते एशिया तक पहुंचाया जाएगा।

पाइपलाइन पर हमले से बढ़ी मुश्किल

  • सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन अभी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रही है। यह पाइपलाइन होर्मुज को बायपास करते हुए सऊदी अरब के तेल को रेड सी तक पहुंचाती है।
  • 10 सितंबर को पाइपलाइन पर हमला हुआ था। इसके बाद सऊदी अरामको ने इसे दोबारा चालू करने की प्रक्रिया शुरू की है।
  • कंपनी शनिवार तक पाइपलाइन की क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
  • पाइपलाइन के पूरी तरह सामान्य नहीं होने के कारण सऊदी अरब को ज्यादा तेल होर्मुज के रास्ते भेजना पड़ रहा है। सैटेलाइट डेटा में भी फारस की खाड़ी से तेल की लोडिंग बढ़ने के संकेत मिले हैं।

एशियाई रिफाइनरियों को बड़ी राहत
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं, जिससे भारतीय और चीनी रिफाइनरियां अपनी प्रोसेसिंग क्षमता घटाने पर विचार कर रही थीं। सऊदी अरब के इस कदम से न केवल एशिया में मंडरा रहा तेल का संकट टल गया है, बल्कि भारत और चीन की रिफाइनिंग कंपनियों को स्थिर आपूर्ति का भरोसा भी मिला है।