जैविक खेती: कम खर्च में मुनाफे का सौदा

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जैविक खेती पर जानकारी देते पद्मश्री हुकुमचंद पाटीदार।

कोटा। भारतीय किसान संघ कोटा संभाग की ओर से रविवार को सरस्वती विद्या मंदिर सुल्तानपुर में जैविक खेती पर अभ्यास वर्ग का आयोजन किया गया। जिसमें पद्मश्री से सम्मानित हाॅर्टिकल्चर बोर्ड नई दिल्ली के सदस्य हुकुम पाटीदार के द्वारा जैविक खेती का लाइव प्रशिक्षण दिया गया।

भारतीय किसान संघ के प्रान्त जैविक प्रमुख तथा भारत सरकार के द्वारा सम्मानित मोतीसिंह रावत ने पोली हाऊस में जैविक खेती के बारे में विचार रखे। इस दौरान कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ के किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

हुकुमचन्द पाटीदार ने अभ्यास वर्ग में जैविक खेती का प्रशिक्षण देते हुए कहा कि 2030 तक कृषि में व्यापक परिवर्तन नहीं किए तो देश की 45 प्रतिशत आबादी कैंसर की शिकार होगी। किसानों के लिए वैज्ञानिक शोध होने चाहिए, लेकिन अब हमें उपज को बढाने की आवश्यकता नहीं है।

हमारी उपज विश्व मानकों के अनुसार हो
उन्होंने कहा कि किसानों को रिसर्च और अनुसंधान किसानों को स्वयं करने होंगे। जिससे किसानों की उपज की गुणवत्ता में वृद्धि हो सके। जब तक हमारी उपज विश्व मानकों के अनुसार नहीं होगी, तब तक उपज के बेहतर दाम मिलना मुश्किल है। देश के वैज्ञानिक शोध भी अब इसी दिशा में होने चाहिए।

हुकुमचन्द पाटीदार ने अभ्यास वर्ग में जैविक खेती का प्रशिक्षण देते हुए कहा कि 2030 तक कृषि में व्यापक परिवर्तन नहीं किए तो देश की 45 प्रतिशत आबादी कैंसर की शिकार होगी। किसानों के लिए वैज्ञानिक शोध होने चाहिए, लेकिन अब हमें उपज को बढाने की आवश्यकता नहीं है।

कहा कि किसानों को रिसर्च और अनुसंधान किसानों को स्वयं करने होंगे। जिससे किसानों की उपज की गुणवत्ता में वृद्धि हो सके। जब तक हमारी उपज विश्व मानकों के अनुसार नहीं होगी, तब तक उपज के बेहतर दाम मिलना मुश्किल है। देश के वैज्ञानिक शोध भी अब इसी दिशा में होने चाहिए।

पाटीदार ने कहा कि हमारे पशुधन को निरुपयोगी बनाकर आर्थिक रूप से कमर तोड़ने का कुचक्र रचा गया है। आज 1 किलो गेहूं पर 32 रुपए का खर्च आ रहा है। 25 फीसदी मुनाफे समेत 40 रुपए किलो बिकने पर ही किसानों को फायदा हो सकता है। ऐसे में, खेती को मुनाफे में लाने के लिए हमें खर्च में कटौती करनी होगी। जो केवल जैविक खेती के द्वारा ही संभव है।

बीज से बाजार तक किसानों का अधिकार हो
खेती से 1 किलो गेहूं पर केवल 10 रुपए का खर्च आएगा। उन्होंने कहा कि बीज से बाजार तक किसानों का अधिकार होना चाहिए। आज देश में गरीबों को दो रुपए किलो के गेहूं के नाम पर जहर का स्प्रे किया गया और सल्फास में सुरक्षित रखा गया गेहूं बांटा जा रहा है।

मोतीलाल रावत ने कहा कि जहरीली खेती ने पर्यावरण, हवा, पानी और धरती को प्रदूषित करने का काम किया है। अब आवश्यकता प्रदूषण मुक्त कृषि को बढावा देने की है। हमें पर्यावरण फ्रेंडली कृषि करके देश के स्वास्थ्य के साथ अपना मुनाफा भी बढाना होगा।

कृषि वैज्ञानिक पवन कुमार टांक ने कहा कि कृषि को बाजार पर आधारित नहीं होना चाहिए। कृषि जितनी अधिक खेत पर आधारित होगी, उतना ही मुनाफा अधिक होगा। खेती की सारी आवश्यकताएं बीज से लेकर बाजार तक खेत पर ही पूरी होनी चाहिए। प्रान्त संगठन मंत्री हेमराज ने कहा कि जैविक खेती को बिना गाय के कर पाना संभव नहीं है। संभागीय उपाध्यक्ष जगदीश खाती ने आभार प्रकट किया।

इस दौरान कोटा जिलाध्यक्ष गिर्राज चौधरी, प्रान्त संगठन मंत्री हेमराज, जिला संघचालक डालचंद नागर, कोटा संभाग के उपाध्यक्ष जगदीश खाती, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मोहनलाल नागर, पा्रन्त महामंत्री जगदीश कलमंडा, प्रान्त मंत्री शंकरलाल धाकड़, संभाग मंत्री प्रहलाद नागर, संभाग मीडिया प्रभारी आशीष मेहता, संभाग के युवा सदस्य हरिसिंह समेत कईं लोग उपस्थित रहे।