नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार, 18 सितंबर को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट देखने को मिल रही है। पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहने के बावजूद बाजार को उम्मीद है कि तेल की सप्लाई में आई रुकावट उतनी बड़ी नहीं होगी, जितनी पहले आशंका जताई जा रही थी। इसी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में बना अतिरिक्त दबाव कम हो रहा है।
शुरुआती कारोबार में ब्रेंट क्रूड करीब 1 फीसदी गिरकर 103.77 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 1 फीसदी की गिरावट के साथ 100.88 डॉलर प्रति बैरल पर था। आपके दिए ताजा आंकड़ों में ब्रेंट 0.87 फीसदी गिरकर 103.91 डॉलर और डब्ल्यूटीआई 0.76 फीसदी नीचे 101.14 डॉलर के आसपास दिख रहा है।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह सऊदी अरब से तेल सप्लाई को लेकर चिंता कम होना है। पिछले सप्ताह ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब की अहम ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद डर था कि लाल सागर की तरफ से होने वाली तेल सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रह सकती है। लेकिन अब सऊदी अरब इस पाइपलाइन की करीब आधी क्षमता कुछ दिनों में दोबारा शुरू करने की कोशिश कर रहा है। अगर ऐसा होता है तो बाजार में तेल की कमी का खतरा कुछ कम होगा।
दूसरी बड़ी वजह तेल भेजने के दूसरे रास्ते तलाशना है। सऊदी अरब एशियाई खरीदारों को ओमान के सोहर बंदरगाह के पास जहाज से जहाज में तेल पहुंचाने के जरिए अतिरिक्त कार्गो देने की कोशिश कर रहा है। इससे बाजार को संकेत मिला है कि ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन में दिक्कत रहने के बावजूद कुछ तेल दूसरे रास्तों से खरीदारों तक पहुंच सकता है। इसी उम्मीद ने कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
मुनाफावसूली भी बनी गिरावट की वजह
कच्चे तेल में इससे पहले लगातार दो सप्ताह तेजी देखने को मिली थी। पश्चिम एशिया में सप्लाई रुकने की आशंका से कीमतें तेजी से बढ़ी थीं। अब सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम होने के बाद ऊंचे भाव पर कारोबारियों की मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है।

