किसान अपनी सुविधा से ले सकेगा खाद, एफएमएस ऐप पर रोक लगाने का आश्वासन

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खाद वितरण समस्या पर भारतीय किसान संघ ने स्पीकर बिरला से की मुलाकात

कोटा। ​भारतीय किसान संघ के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल ने मगंलवार को लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर किसानों को खाद वितरण में आ रही गंभीर व्यावहारिक समस्याओं से अवगत कराया।

इस प्रतिनिधि मंडल में संभाग अध्यक्ष गिरिराज चौधरी, जिलाध्यक्ष जगदीश कलमंडा, प्रांत प्रचार प्रमुख आशीष मेहता, जिला मंत्री रूपनारायण यादव, कोषाध्यक्ष देवीशंकर गुर्जर, अखिलेश दाधीच तथा महावीर नागर प्रमुख रूप से शामिल रहे।

किसान नेताओं ने लोकसभा स्पीकर को एक ज्ञापन सौंपकर डिजिटल व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर व्याप्त अनियमितताओं के कारण किसानों को हो रही परेशानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

प्रतिनिधिमंडल ने चर्चा के दौरान बताया कि हाल ही में शुरू की गई एफएफएस (Framework for Fertilizer Cell) मोबाइल ऐप प्रणाली खाद वितरण में राहत देने के बजाय किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है।

ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या और मोबाइल ऐप चलाने में आ रही कठिनाइयों के कारण किसान दर-दर भटकने को मजबूर हैं। इसके अलावा, ई-मित्र केंद्रों पर अनिवार्य पंजीयन कराने से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

कई किसानों की फार्मर आईडी अब तक नहीं बन सकी है, तो कहीं जमीन के रिकॉर्ड ऑनलाइन दर्ज नहीं हैं। मुनाफा काश्त (बटाई) और मंदिर माफी की जमीनों पर खेती करने वाले किसानों को भी ऐप आधारित व्यवस्था के कारण खाद नहीं मिल पा रही है।

किसान प्रतिनिधियों ने यह मुद्दा भी उठाया कि किसानों के पास वास्तव में जितनी जोत या रकबा है, उसके अनुपात में और बोई गई फसल की आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। खाद लेने के लिए किसानों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है।

इसके साथ ही, बाजार में खाद के साथ अन्य अवांछित सामान (अटैचमेंट) जबरन थमाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इन तमाम जटिलताओं और प्रशासनिक दबाव के कारण कई स्थानों पर तो स्थानीय व्यापारियों ने खाद का उठाव और ऑर्डर मंगाना ही बंद कर दिया है। जिससे किल्लत और अधिक गहरा गई है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भारतीय किसान संघ की सभी मांगों और समस्याओं को बेहद गंभीरता से सुना। उन्होंने तुरंत संज्ञान लेते हुए आश्वस्त किया कि एफएफएस ऐप के माध्यम से खाद का वितरण फिलहाल रोक दिया जाएगा, ताकि किसानों को तकनीकी समस्याओं से राहत मिल सके।

बिरला ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि किसान अपनी सुविधानुसार कहीं से भी खाद खरीद सकेंगे। खाद की बिक्री के साथ किसी भी प्रकार का जबरन अटैचमेंट देने वाले डीलरों, कंपनियों या होलसेलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनके लाइसेंस निरस्त किए जाएंगे। इस निर्णय से क्षेत्र के किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।