नई दिल्ली। चीनी की बैलेंस शीट में आ रही जटिलता एवं मानसून की कमजोर स्थिति के कारण गन्ना के उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए लगता है कि केन्द्र सरकार 2026-27 के मार्केटिंग सीजन में एथनॉल के निर्माण में गन्ना जूस तथा बी हैवी शीरा के उपयोग को नियंत्रित करने का निर्णय ले सकती है।
खुदरा बाजार में अब भी चीनी का भाव काफी ऊंचे स्तर पर है जिससे आम उपभोक्ताओं की कठिनाई बरकरार है। समझा जाता है कि 30 सितम्बर को स्वदेशी उद्योग के पास महज 35 लाख टन चीनी का स्टॉक बच जाएगा। यदि अक्टूबर के लिए 25 लाख टन का फ्री सेल कोटा जारी किया गया तो सितम्बर में क्या होगा ?
जानकार सूत्रों के अनुसार सरकार एथनॉल के उत्पादन में गन्ना जूस एवं हैवी शीरा के उपयोग को रोकने का मन बना चुकी है और जल्दी ही इसके लिए नया आदेश जारी कर सकती है। उद्योग को भी इस बात की आशंका है। डिस्टीलरीज को सरकारी निर्णय से झटका लग सकता है लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए उसे यह झटका बर्दाश्त करना ही पड़ेगा।
लेकिन एथनॉल निर्माण में में सी-हैवी शीरा के उपयोग पर रोक लगने की संभावना बहुत कम या नगण्य है। वर्ष 2023 में भी सरकार ने इस तरह का आदेश जारी किया था जिससे घरेलू प्रभाग में चीनी के अभाव का संकट टालने में सहायता मिली थी।
इस्मा के उपाध्यक्ष का कहना है कि चीनी उद्योग सी हैवी शीरा का उपयोग करने के लिए तैयार है जिसमें सुक्रोज का नगण्य अंश होता है। एथनॉल निर्माण में इसका उपयोग आसानी से किया जा सकता है। सरकार का ध्यान चीनी का उत्पादन बढ़ाने पर केन्द्रित है क्योंकि इसका घरेलू बाजार भाव काफी ऊंचे स्तर पर है।
2026-27 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान चीनी के उत्पादन में पर्याप्त इजाफा होना आवश्यक है। इस बार हालात बिगड़ने से सरकार को 10 लाख टन कच्ची (चीनी) के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने के लिए बाध्य होना पड़ा।
वह अगले सीजन में इसकी पुनरावृत्ति नहीं होने देना चाहेगी। इसके साथ-साथ चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने पर ही कीमतों को नियंत्रित रखा जा सकेगा।

