ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार; हफ्ते में 13% चढ़ा, भारत में सप्लाई पर असर

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नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल जारी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका के बीच शुक्रवार को ब्रेंट और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों में करीब 1 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। खास बात यह है कि दोनों प्रमुख कच्चे तेल के भाव मई के मध्य के बाद पहली बार किसी हफ्ते का अंत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर करने की ओर बढ़ रहे हैं।

Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड 1.05 डॉलर यानी करीब 1 फीसदी चढ़कर 108.68 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 95 सेंट यानी करीब 1 फीसदी की तेजी के साथ 103.45 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इससे पहले गुरुवार को दोनों में 6 फीसदी से ज्यादा की जोरदार तेजी आई थी।

कच्चे तेल में तेजी सिर्फ एक-दो कारोबारी सत्र तक सीमित नहीं है। Reuters के मुताबिक, साप्ताहिक आधार पर ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई दोनों करीब 13 फीसदी ऊपर चल रहे हैं। यह 17 जुलाई को खत्म हुए हफ्ते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है।

होर्मुज के बाद लाल सागर में भी बढ़ी चिंता
ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने गुरुवार को यमन के मोखा बंदरगाह पर कब्जा कर लिया। इससे लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है। दूसरी तरफ फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही पहले ही सीमित बनी हुई है और हाल के दिनों में तेल टैंकरों पर हमले बढ़े हैं।

Reuters के मुताबिक, यमन की तरफ से सऊदी अरब की ऊर्जा सुविधाओं पर हुए हमलों ने संघर्ष का दायरा ईरान और होर्मुज से आगे बढ़ा दिया है। विश्लेषकों को डर है कि अगर तनाव लंबे समय तक चला तो पूरे इलाके से तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।

ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ा सप्लाई का खतरा
ईरान ने कहा है कि उसने बुधवार को होर्मुज के पास 10 जहाजों पर हमला किया, जबकि अमेरिका ने पांच ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके बाद ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने कहा कि आगे हमला होने पर उसकी जवाबी कार्रवाई और तेज होगी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भी ईरान के पिकऐक्स माउंटेन को निशाना बनाए जाने की संभावना की चेतावनी दी है। यह जगह ईरान की बुरी तरह क्षतिग्रस्त नतांज यूरेनियम संवर्धन सुविधा के पास स्थित है। इन बयानों से बाजार में यह चिंता बढ़ रही है कि संघर्ष जल्दी खत्म होने के बजाय लंबा खिंच सकता है।