10% tariff: अमेरिका ने भारत पर 12.5 की जगह 10% टैरिफ लगाया, जानिए क्यों

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नई दिल्ली। US 10% tariff imposed On India: अमेरिका ने भारत समेत 17 देशों से आयात होने वाले सामान पर 10 फीसदी शुल्क लगाने का फैसला किया है। यह कदम उन वस्तुओं के उत्पादन में जबरन मजदूरी (Forced Labour) के इस्तेमाल पर रोक लगाने के प्रयासों के तहत उठाया गया है।

पिछले महीने जब अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था, तब भारत को उन देशों की सूची में रखा गया था जिन पर 12.5 फीसदी शुल्क लगाने का प्रस्ताव था।

हालांकि, अमेरिका ने इस बात का संज्ञान लिया कि भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन मजदूरी से तैयार किए गए सामान के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने गुरुवार को जारी एक मेमोरेंडम में कहा, “इन कदमों के परिणामस्वरूप, व्यापार प्रतिनिधि ने मुझे सलाह दी है कि इन देशों से आने वाले सामान पर 10 फीसदी शुल्क लगाया जाए, ताकि ये देश ऐसे प्रतिबंधों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए और प्रोत्साहित हों।”

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने गुरुवार को ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत 60 देशों पर नए शुल्क लगाने की घोषणा की। यह घोषणा सभी देशों पर लागू अतिरिक्त 10 फीसदी अस्थायी शुल्क की अवधि समाप्त होने से एक दिन पहले की गई।

जिन देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर रोक लगाने वाले कानून नहीं हैं, जैसे चीन, ब्रिटेन और जापान, उन पर 12.5 फीसदी शुल्क लगाया जाएगा।

हालांकि, यह शुल्क उन कच्चे माल पर लागू नहीं होगा जिन पर शुल्क लगाने से अमेरिका में घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, ऐसे उत्पाद जिनसे पूरी अर्थव्यवस्था में बाधा आने की आशंका हो या जिन्हें अमेरिका में पर्याप्त मात्रा में बनाया या उगाया नहीं जा सकता, उन्हें भी इस शुल्क से छूट दी गई है।

60 देशों में से 17 देशों पर 10% शुल्क
शुल्क का सामना करने वाले 60 देशों में से 17 देशों, जिनमें भारत, कनाडा, ब्रिटेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान शामिल हैं, पर 10 फीसदी शुल्क लागू होगा। बाकी 43 देशों पर 12.5 फीसदी शुल्क लगाया जाएगा।

यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के निर्देश पर ग्रीर ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत अंतिम कार्रवाई करते हुए 60 अर्थव्यवस्थाओं पर शुल्क लगाया है। इन देशों पर आरोप है कि उन्होंने जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसे प्रभावी ढंग से लागू करने में विफलता दिखाई।

नया शुल्क शुक्रवार रात 12 बजकर 1 मिनट से प्रभावी हो गया। इसी समय सभी देशों पर लागू अस्थायी 10 फीसदी आयात शुल्क की अवधि भी समाप्त हो गई। यह अस्थायी शुल्क फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद लगाया गया था, जिसमें अप्रैल 2025 में राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए “लिबरेशन डे” शुल्क को अवैध ठहराया गया था।

सुधार की दिशा में बड़ा कदम
ग्रीर ने एक बयान में कहा कि यह कदम मानवाधिकारों के उल्लंघन और व्यापार में विकृति पैदा करने वाली इस प्रथा को सुधारने की दिशा में शुरुआत करेगा और दुनिया भर के श्रमिकों के हितों को बेहतर बनाएगा। इस संबंध में जारी फेडरल नोट में जून में प्रस्तावित शुल्क की घोषणा के बाद भारत द्वारा जबरन मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का उल्लेख किया गया है। 14 जून को भारत ने अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर जबरन मजदूरी से तैयार किए गए सामान के आयात पर रोक लगा दी थी।

ट्रंप प्रशासन ने ये दोनों जांच फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले वर्ष लगाए गए ‘जवाबी शुल्क’ को आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाया गया और अवैध घोषित किए जाने के बाद शुरू की थीं। इसके जवाब में प्रशासन ने सभी देशों पर 10 फीसदी शुल्क लगाया था, जिसकी अवधि शुक्रवार को समाप्त हो गई।

नियमों के संतुलित रखने के पक्ष में अमेरिका
उद्योग संगठन से जुड़े अभिक सेनगुप्ता ने कहा कि 12.5 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी शुल्क करना प्रतिशत के हिसाब से भले ही मामूली बदलाव हो, लेकिन इसका संकेत काफी महत्वपूर्ण है। इससे पता चलता है कि अमेरिका नियमों को लागू करने में संतुलित रुख अपनाने के साथ भारत और अमेरिका की रणनीतिक आर्थिक साझेदारी को भी बनाए रखना चाहता है।

भारत ने यूएसटीआर द्वारा शुरू की गई दोनों जांचों का विरोध किया है और कहा है कि इन मुद्दों पर दोनों देशों के बीच चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की वार्ता के तहत चर्चा की जा सकती है। अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और भारतीय निर्यात का सबसे बड़ा गंतव्य है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर का था।