Thursday, June 25, 2026
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नशे सी चढ़ गयी’ गाना यूट्यूब पर 23.4 करोड़ बार देखा गया

मुंबई। आदित्य चोपड़ा की निर्देशित फिल्म ‘बेफिक्रे’ का गाना ‘नशे सी चढ़ गयी’ यूट्यूब पर अब तक का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला हिंदी गाना बन गया है। इससे पहले विशाल-शेखर के गाने ने 24 घंटे के भीतर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले गाने का रेकार्ड तोडा था।

6 महीने के अंदर इसे यूट्यूब पर 23.4 करोड़ बार देखा गया। यह सबसे तेजी से न केवल 20 करोड़ बार देखे जाने का आंकड़ा पार करने वाले हिंदी फिल्म विडियो में से एक बन गया बल्कि इसने विडियो शेयरिंग साइट पर सबसे ज्यादा देखे जाने वाले हिंदी गाने का मुकाम भी हासिल किया।

‘यशराज फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड की डिजिटल शाखा के उपाध्यक्ष आनंद गुरनानी ने कहा कि यशराज फिल्म्स इस गाने को मिली शानदार प्रतिक्रिया, सराहना से अभिभूत है। रणवीर सिंह और वाणी कपूर पर फिल्माए इस गाने को पैरिस में शूट किया गया था। रणवीर सिंह ने ट्विटर पर लिखा,’यूट्यूब पर अब तक सबसे ज्यादा देखा जाने वाला हिंदी गाना। यह शानदार है।’

बैंकों के NPA का फैसला अब RBI के हाथों में 

नई दिल्ली। सरकार ने बैंकों के फंसे कर्ज (एनपीए) की समस्या को हल करने के लिए अमोघ अस्त्र छोड़ दिया है। सरकार ने फंसे कर्ज की पहचान करने और उनका हल निकालने का अधिकार बैंकों से लेकर रिजर्व बैंक को दे दिया है। अब रिजर्व बैंक एक उच्च स्तरीय समिति बनाएगा जो यह तय करेगा कि फंसे कर्ज के मामलों को किस तरह निपटाया जाए।

सरकार ने आरबीआई को यह अधिकार “बैंक नियमन (संशोधन), कानून, 2017” के जरिये दिया है जिसे बृहस्पतिवार देर रात राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने मंजूरी दी है। इस संशोधन के जरिये सरकार ने रिजर्व बैंक को यह अधिकार दिया है कि अगर कोई व्यक्ति या कंपनी कर्ज चुकाने में नाकाम रहता है या डिफॉल्ट होता है तो आरबीआई बैंकों को दिवालियेपन पर बने नए कानून के तहत कार्रवाई करने को कह सकता है।

 फंसे कर्ज के 60 मामले सरकार चिन्हित भी कर चुकी है, जिन पर आरबीआई को कदम उठाने हैं।अध्यादेश के जरिये सरकार ने “बैंक नियमन, कानून, 1949” की धारा 35ए के बाद दो नई धाराएं- 35एए और 35एबी जोड़ी हैं। धारा 35एए के तहत केंद्र सरकार आरबीआई को डिफॉल्टरों के दिवालियेपन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए बैंकों को निर्देश देने के अधिकार का प्रावधान किया गया है।

इसी तरह धारा 35एबी के तहत रिजर्व बैंक एक समिति का गठित करेगा जो बैंकों को फंसे कर्ज के मामलों को सुलझाने के लिए परामर्श देगी। बैंक इस समिति को प्रस्तावित हल के विकल्प सौंप देंगी जिसके बाद यह समिति बेहतर विकल्प का चयन कर बैंकों को कदम उठाने का निर्देश देगी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को कहा कि फंसे कर्ज का हल तलाशने के लिए परिसंपत्तियों की बिक्री, अलाभकारी शाखाओं को बंद करने और कारोबार बढ़ाने की पहल जैसे उपाय शामिल हैं। जेटली ने कहा कि जब भी नॉर्थ ब्लॉक यानी वित्त मंत्रालय ने बिना शक्तियों के बैंकों के कामकाज में दखल दिया है, उससे बैंकों का भला नहीं हुआ है।

उल्लेखनीय है कि बैंकों के फंसे कर्ज की राशि बढ़कर उनके कुल लोन की 17 प्रतिशत हो गयी है जो कि देश की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में सर्वाधिक है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि दिसंबर, 2016 तक देश के बैंकों के पास 6.40 लाख करोड़ रुपये का सकल एनपीए हो चुका है।

बढ़ते एनपीए से सरकारी बैंकों की स्थिति बेहद खराब है। इन्हें घाटा हो रहा है और इनकी स्थिति सुधारने के लिए सरकारी खजाने से राशि दी जा रही है। यही नहीं बढ़ते एनपीए की वजह से ये बैंक कर्ज की दर भी सस्ता नहीं कर पा रहे हैं जिससे आम जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं।

कोटा के निखिल और श्रेयांश का स्टार्टअप दुनिया के टॉप-10 में

दिनेश माहेश्वरी 
कोटा । देश में कोचिंग हब के रूप में प्रसिद्ध शहर के दो युवाओं ने मेडिकल से संबंधित रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष ऐप तैयार किया है। इस ऐप से मरीज का मेडिकल रिकॉर्ड हमेशा सुरक्षित रखा जा सकेगा। इस ऐप को दुनिया के टॉप-10 स्टार्टअप में शामिल किया गया। इस ऐप की शुरुआत नौ मई को कोटा के भीमगंज मंडी से होगी।

देश के करीब दस लाख मेडिकल स्टोर को इस ऐप से जोड़ा जा सकेगा।इस ऐप को अमेरिका में एक और दो मई को आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल किया गया है। इस आयोजन में विभिन्न देशों से करीब एक लाख आवेदन आए थे, लेकिन कोटा के युवक निखिल बाहेती और श्रेयांश मेहता द्वारा बनाए गए ऐप को दुनिया के टॉप-10 स्टार्टअप में शामिल किया गया।

ऐप के माध्यम से चिकित्सकों द्वारा दिए जाने वाला प्रिसक्रिप्शन, रिपोर्ट व दवाईयां एक ही स्थान पर आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। ऐप तैयार करने वाले श्रेयांश मेहता का कहना है कि पांच वर्ष में पांच करोड़ मरीजों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।श्रेयांश का कहना है कि ऐप तैयार करने की सोच उस समय उनके दिमाग में आई जब एक बार वह अपने पिता के साथ भवानी मंडी चिकित्सालय स्वास्थ्य परीक्षण कराने गए। साथ में पुरानी पर्ची न ले जाने से चिकित्सक ने उन्हें पूरा रिकॉर्ड लाने के लिए कहा। काफी मुश्किल के बाद पिता का इलाज शुरू हो सका। इसके बाद उन्होंने यह ऐप बनाने का निर्णय लिया। 

अंबुजा सीमेंट के साथ होगा एसीसी का विलय

नई दिल्ली। करीब 12 वर्षों के बाद स्विटजरलैंड की सीमेंट दिग्गज होल्सिम सीधे तौर पर भारत में प्रवेश की तैयारी में है। इसके लिए कंपनी भारत में दो बड़ी सीमेंट कंपनियों – एसीसी और अंबुजा का अधिग्रहण करेगी। प्रवर्तक कंपनी ने इन दोनों कंपनियों के विलय की तैयारी भी शुरू कर दी है। लाफार्ज होल्सिम की इकाई एसीसी लिमिटेड समूह की कंपनी अंबुजा सीमेंट्स के साथ विलय की संभावनाओं को तलाशेगी।
 
कंपनी ने अपने बयान में कहा कि एसीसी ने निदेशक मंडल की आज हुई बैठक में संभावित विलय का मूल्यांकन करने का निर्णय किया। कंपनी की ओर से कहा गया कि यह कदम दोनों कारोबार को एकीकृत करने को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है ताकि सभी हितधारकों को इसका लाभ मिल सके।

कंपनी ने कहा कि इसका मूल्यांकन करने के लिए निदेशकों की एक विशेष समिति का गठन किया गया है, जिसमें स्वतंत्र निदेशकों की संख्या संख्या ज्यादा है। हालांकि विलय पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है और इस बारे में विशेष समिति और लेखा समिति की सिफारिशों के आधार पर निदेशक मंडल द्वारा अंतिम निर्णय किया जाएगा।

मार्च 2017 को खत्म हुई तिमाही में अंबुजा सीमेंट के पास एसीसी की 50.05 फीसदी हिस्सेदारी थी जबकि लाफार्ज के पास 4.48 फीसदी हिस्सेदारी थी। दूसरी ओर प्रवर्तक कंपनी लाफार्ज होल्सिम का अंबुजा सीमेंट में 63.62 फीसदी की हिस्सेदारी है। अगस्त 2016 में होल्सिम (इंडिया) प्रा. लि. (एचआईपीएल) के साथ विलय के बाद एसीसी अंबुजा की सहायक इकाई बन गई थी।

विलय के बाद एसीसी की प्रवर्तक अंबुजा सीमेंट कंपनी बन गई। अगर प्रस्तावित विलय पूरा होता है तो एकीकृत इकाई का सालाना कारोबार 20,425 करोड़ रुपये से ज्यादा का होगा। जनवरी-दिसंबर वित्त वर्ष का पालन करने वाली एसीसी ने 2016 में 11,158.34 करोड़ रुपये की आय अर्जित की थी। इसी तरह अंबुजा सीमेंट ने 2016 में 9,267.82 करोड़ रुपये की आय हासिल की थी।

NCDEX पर मार्जिन में 7.5% की बढ़ोतरी, गोदाम में माल रखने पर अतिरिक्त चार्ज भी बढ़ा

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मुंबई। धनिया की कीमतों में आ रही एकतरफा गिरावट को देखते हुए कमोडिटी एक्सचेंज NCDEX ने और ज्यादा मार्जिन लगाने का फैसला किया है । नया 7.5 फीसदी मार्जिन सोमवार 8 मई से लागू होगा। एक्सचेंज ने पहले बुधवार को धनिया में बिकवाली पर स्पेशल मार्जिन लगाने की घोषणा की थी, लेकिन इसके बावजूद गुरुवार को फिर से धनिया में निचला सर्किट देखने को मिला। अब एक्सचेंज ने एक बार फिर से बिकवाली पर और 7.5 फीसदी स्पेशल मार्जिन लगाने का ऐलान किया है। 

एक्सचेंज ने इसके अलावा गोदामों में रखे जाने वाले धनिया पर लगने वाले अतिरिक्त चार्ज की लिमिट में भी बदलाव किया है। अब तक गोदामों में रखने जाने वाले 2000 टन से ऊपर के धनिया पर अतिरिक्त चार्ज लगता लेकिन 8 मई से 1,000 टन से ऊपर के धनिया पर अतिरिक्त चार्ज की लिमिट लागू होगी। इस हफ्ते वायदा बाजार में धनिया की कीमतों में एकतरफा गिरावट देखने को मिली है। 

बीते 3 दिन से रोजाना धनिया निचले सर्किट के साथ बंद हो रहा है, महज 3 दिन में भाव 700 रुपये  प्रति क्विंटल से ज्यादा घट चुका है, पिछले शुक्रवार को NCDEX पर धनिया 6,567 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ था और गुरुवार को भाव घटकर 5,860 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गया है। महीने भर में तो इसकी कीमतों में 2,000 रुपये से ज्यादा की गिरावट आ चुकी है। 

11.38 लाख परीक्षार्थियों का नीट में होगा मुकाबला

  • नीट-यूजी 2017 : राज्य के 5 शहरों में 88000 परीक्षार्थी देंगे परीक्षा
  • डॉक्टर बनने के लिए 17 से 30 वर्ष उम्र के परीक्षार्थियों के बीच फाइनल 

-अरविंद

कोटा। मेडिकल की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी,2017 में 7 मई को 11 लाख  38 हजार 888 परीक्षार्थियों के बीच रोचक दिमागी मुकाबला होगा। 12वीं के बाद डॉक्टर बनने के लिए 17 वर्ष के लाखों फ्रेशर्स विद्यार्थी 30 वर्ष के रिपीटर्स परीक्षार्थियों से स्पर्धा करेंगे।

31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नीट-यूजी के लिए केवल इस वर्ष अधिकतम उम्र सीमा में छूट दिए जाने से 4-5 वर्ष से तैयारी कर रहे रिपीटर्स की संख्या अचानक कई गुना बढ़ गई। सामान्य वर्ग के 25 वर्ष तथा एससी, एसटी व ओबीसी वर्ग के 30 वर्ष तक के रिपीटर्स इस वर्ष नीट-2017 में बैठेंगे। परीक्षा देने के लिए अधिकतम तीन अवसर मिलेंगे, जिसमें इस वर्ष से पहला अटैम्प्ट होगा।

नीट,यूजी में 11.38 लाख परीक्षार्थी पंजीकृत होने से 103 शहरों के 1921 सेंटर्स पर परीक्षा होगी। राज्य के 5 शहरों कोटा, जयपुर, उदयपुर, अजमेर व जोधपुर में 57 परीक्षा केंद्रों पर 88000 परीक्षर्थी पेपर देंगे। कोटा के 14 केंद्रों पर 8160 में  से  8000 गर्ल्स होंगी।  जयपुर के 24 केंद्रों पर 53,000, उदयपुर के 14 केंद्रों पर 7100, जोधपुर के 9 केंद्रों पर 4564 परीक्षार्थी पेपर देंगे। सीबीएसई ने कोटा में गर्ल्स को सेंटर आवंटित करने में वरीयता दी है 

नीट-यूजी, 2017 एक नजर में –

  • 11,38,888  देश में कुल पंजीकृत परीक्षार्थी
  • 6.41 लाख गर्ल्स 
  • 4.97 लाख बॉयज
  • 1.45 लाख  गर्ल्स ज्यादा
  • 8 ट्रांसजेंडर परीक्षार्थी
  • 3.33  लाख रु (41.42 प्रतिशत) परीक्षार्थी बढे़
  • 103  शहरों में 1921 परीक्षा केंद्र
  • 10  भाषाओं में होगी प्रवेश परीक्षा
  • 8  जून को रिजल्ट

राजस्थान की स्थिति 

  • 88000 राजस्थान में परीक्षार्थी
  • 53000 जयपुर में सर्वाधिक
  • 16000 अजमेर में
  • 8160 कोटा में

मारुति ने नई डिजायर की बुकिंग शुरू की

नयी दिल्ली। देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया ने अपनी पूरी तरह से नई तैयार की गई डिजायर कॉम्पैक्ट सेडान की बुकिंग शुरू कर दी है। देश में कंपनी के 2,000 से अधिक डीलर के पास इस वाहन की बुकिंग की जा रही है।

कंपनी ने इस मॉडल को भारतीय बाजार में मार्च, 2008 में उतारा था। अभी तक कंपनी इसकी 13.81 लाख इकाइयां बेच चुकी है। कंपनी इस कॉम्पैक्ट सेडान का पूर्ण रूप से नया संस्करण 16 मई को पेश करने जा रही है।

नए मॉडल के लिए बुकिंग राशि 11,000 रपये रखी गई है। कंपनी ने इस मॉडल के मूल्य की घोषणा नहीं की है। इसकी घोषणा वह मॉडल को पेश करते हुए करेगी। मौजूदा मॉडल की कीमत 5.35 लाख से 8.57 लाख रपये है। कंपनी का यह मॉडल हुंडई की एक्ससेंट , होंडा की अमेज, फोर्ड की एस्पायर और फॉक्सवैगन की एमियो को प्रतिस्पर्धा देगा।

इन मॉडलों की कीमत 4.7 लाख से 8.41 लाख रपये के बीच है। बीते वित्त वर्ष में 10 सबसे अधिक बिकने वाले यात्री वाहनों की सूची में डिजायर का स्थान तीसरा रहा था। इस दौरान कंपनी ने डिजायर की 1,99,878 इकाइयां बेची थीं। 2015-16 में यह दूसरा सबसे अधिक बिकने वाला यात्री वाहन रहा था।

ट्रैन में बिना टिकट होने पर अब जुर्माना नहीं लगेगा

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नई दिल्ली। जो लोग कई बार ट्रैन छूटने के डर से जल्दबाजी में कई बार टिकट नहीं ले पाते, ऐसे में उन्हें ट्रैन में जुर्माने का डर रहता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा और भले ही आप टिकट ना ले पाएं हों तो भी आपको ट्रैन में जुर्माना नहीं भरना पड़ेगा।

रेलवे ने ऐसे यात्रियों को सुविधा देने के लिए एक आसान उपाय खोज निकाला है। दरअसल रेलवे ने एक नई सेवा शुरू की है जिसके चलते अब यात्रियों को ट्रैन का टिकट मिल सकेगा। रेलवे सूत्रों के अनुसार इससे उन यात्रियों को राहत मिलेगी जो टिकट नहीं लो पाए हैं साथ ही वो लोग भी नहीं बच पाएंगे जो जान बुझकर टिकट नहीं लेते हैं।

ऐसे मिलेगा टिकट

इसके लिए आपको ट्रैन से उतरने की जरूरत नहीं है और न ही इंटरनेट का इस्तेमाल करना है। यात्री ट्रैन में टीटीई से संपर्क कर टिकट ले सकेंगे। आपको टीटीई को बताना होगा कि किस कारण से आप बिना टिकट यात्रा कर रहे हैं। रेलवे की हैंड हेल्ड मशीन पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम के सर्वर से कनेक्ट होगी।

खाली बर्थ की जानकारी भी 

जैसे ही यात्री टिकट मांगेगा, मशीन में नाम और जगह डालते ही टिकट निकल आयेगी। मशीन की मदद से ट्रेन में खाली बर्थों की जानकारी भी आसानी से मिलेगी।वेटिंग क्लीयर होने पर भी ट्रैन में खाली बर्थ की जानकारी हैंड हेल्ड मशीन में उपलब्ध होगी। यदि किसी यात्री की वेटिंग क्लीयर नहीं हुई है, तो वह टीटीई के पास जाकर अपनी टिकट दिखाकर खाली सीट की जानकारी लेकर उसे कन्फर्म करा सकता है।

टीटीई देगा टिकट 

टीटीई आपको टिकट काटकर देगा। टीटीई संबंधित यात्री से तय किराये के साथ ही 10 रुपये अतिरिक्त शुल्क लेकर हैंड हेल्ड मशीन से टिकट निकालकर देगा।फिलहाल आरक्षित टिकट देने की यह सुविधा केवल सुपरफास्ट ट्रेनों में शुरू हुई है, जो कि बाद में व्यापक पैमाने पर अन्य ट्रेनों में भी जारी की जा सकती है। –

आत्महत्या रोकने के लिए फेसबुक उठाएगा कारगर कदम 

फेसबुक करेगा 3000  एक्सपर्ट कर्मचारियों की भर्ती 

कोटा ।  पिछले कुछ समय से कोचिंग सिटी कोटा समेत देश के कई शहरों में आत्महत्या के कई ऐसे मामले सामने आए हैं जो फेसबुक पर लाइव ब्रॉडकास्ट हुए। इस तरह के कॉन्टेंट से अपने यूजर्स को बचाने के लिए फेसबुक कारगर कदम उठाएगा। फेसबुक  ने अब अपनी रिव्यू टीम में 3000 लोगों की भर्ती करने की घोषणा की है।

ये लोग बच्चों से जुड़ी प्रताड़ना के पोस्ट और खुद को नुकसान पहुंचाने वाले विडियो पर नजर रखेंगे। फेसबुक की रिव्यू टीम इस मुद्दे पर लॉ इनफॉर्समेंट एजेंसियों के साथ मिलकर काम करेगी। कंपनी के CEO मार्क जकरबर्ग ने कहा, ‘पिछले कई हफ्तों से फेसबुक पर लाइव या फिर विडियो के जरिए कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें लोगों को खुद को और दूसरों को नुकसान पहुंचाते देखा गया है।

यह देखना काफी तकलीफदेह रहा है।’ अपने फेसबुक प्रोफाइल पर उन्होंने लिखा, ‘कंपनी नए टूल बनाएगी ताकि आपत्तिजनक कॉन्टेंट पर जल्द कार्रवाई हो सके। हमारी रिव्यू टीम में पहले ही 4500 लोग हैं और अगले साल तक इस टीम में 3000 नए लोगों को जोड़ने की योजना है। हमें हर हफ्ते कई लाख शिकायतें मिलती हैं, जिससे निपटने के लिए अब इसपर तेजी से काम किया जाएगा।

हम लोक कम्यूनिटी और लॉ इनफॉर्समेंट के साथ भी काम करते रहेंगे क्योंकि यह खुद को या फिर किसी और को नुकसान पहुंचाने से रोकने में सबसे ज्यादा मददगार साबित होंगे। पिछले साल फेसबुक लाइव विडियो के जरिए कई हत्या व आत्महत्या के मामले सामने आए। कोटा में भी पिछले दो वर्ष में कोचिंग के कई छात्र-छात्राएं सुसाइड कर चुके हैं। 

अप्रैल में एक स्टूडेंट ने मुंबई के एक होटल के 19वें फ्लोर से छलांग लगाने से कुछ मिनट पहले फेसबुक लाइव किया। वहीं, यूएस और थाईलैंड में भी ऐसे कई मामले सामने आए। बहरहाल कंपनी ने इसे गंभीरता से लेते हुए इस मामले से निपटने के लिए बड़े स्तर पर लोगों को भर्ती करने की तैयारी कर ली है।

नीट-पीजी में सरकारी डॉक्टर्स को मिलेंगे 10 से 30 फीसदी बोनस अंक

  • राजस्थान फ्रेेशर्स डॉक्टर्स काउंसिल की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज
  • इस वर्ष मेडिकल कॉलेजों की पीजी सीटों पर सरकारी डॉक्टर्स को अनुभव के आधार पर 10, 20 व 30 प्रतिशत बोनस अंक दिए जाएंगे

कोटा। राज्य के सभी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेजों में पीजी की सीटों पर सरकारी अस्पतालों में सेवारत डॉक्टर्स को अनुभव के आधार पर 10, 20 एवं 30 प्रतिशत बोनस अंक दिए जाएंगे। गुरूवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला देते हुए फ्रेशर्स एमबीबीएस डॉक्टर्स की याचिका खारिज कर दी। एमसीआई के नियमानुसार, रिमोट या दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले सरकारी डॉक्टरों को 10 से 30 प्रतिशत बोनस अंक दिए जा सकते हैं।

नॉन-सर्विस केटेगरी के फ्रेेशर एमबीबीएस डॉक्टर्स का कहना है कि नीट-पीजी की आवंटन सूची में 30 प्रतिशत तक बोनस अंक मिल जाने से रेडियोलॉजी, आर्थोपेडिक्स, पीडिएट्रिक्स जैसी शीर्ष ब्रांचों में केवल सरकारी डॉक्टरों को ही पीजी सीटें मिल सकी। फ्रेेशर डॉक्टर्स इससे वंचित रह गए।

राजस्थान फ्रेेशर्स डॉक्टर्स काउंसिल के अध्यक्ष डॉ नवेंदु रंजन ने बताया कि राज्य में 20 हजार से अधिक युवा डॉक्टर्स 2 माह से सरकार के नियम के विरोध कर रहे थे। क्योंकि भविष्य में कई फ्रेशर डॉक्टर्स पीजी नहीं कर पाएंगे। इस पर राज्य हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एक याचिका पर निर्देश दिए थे कि राज्य सरकार बोनस अंक देने से पहले रिमोट या दुर्गम क्षेत्रों को चिन्हित करे।

इसके बाद 7 अप्रैल को हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार को ऐसे क्षेत्रों के सरकारी डॉक्टर्स को 30 प्रतिशत तक बोनस अंक देने की अनुमति दे दी। 4 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर मुहर लगा दी।

क्या है बोनस अंकों का मामला

नीट-पीजी,2016 का रिजल्ट घोषित होने पर राज्य सरकार ने 8 अप्रैल को मेरिट सूची जारी की जिसमें सरकारी अस्पतालों में सेवारत डॉक्टर्स को पीजी कोर्स के लिए अनुभव के आधार पर क्रमशः 10, 20 एवं 30 प्रतिशत अतिरिक्त बोनस अंक देने की घोषणा की गई। जबकि इससे पहले 20 मार्च को सरकार ने स्पष्ट किया था कि राज्य में आदिवासी, रेगिस्तानी या पहाड़ी क्षेत्रों में सरकारी सेवाएं देने वाले एमबीबीएस डॉक्टर्स को पीजी के लिए 10 प्रतिशत बोनस अंक दिए जाएंगे।

नॉन सर्विस फ्रेेशर्स डॉक्टर्स के अवसर घटे

काउंसिल के सूत्रों का कहना है कि नीट-पीजी में प्रवेश के लिए सरकारी डॉक्टर एवं फ्रेेशर्स नॉन सर्विस डॉक्टर का कोटा 50-50 प्रतिशत निर्धारित है। उन्हें ऑल इंडिया रैंक के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों पर एडमिशन मिलते रहे। लेकिन इस वर्ष सरकार ने सरकारी एमबीबीएस डॉक्टर्स को 30 प्रतिशत तक बोनस अंकों देने की घोषणा की।

1800 पीएचसी सेंटर पर मिलेगा लाभ

राज्य के 1800 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सेवारत एमबीबीएस डॉक्टर्स को यह लाभ मिलेगा, जबकि सभी पीएचसी दुर्गम क्षेत्रों में नहीं हैं। डॉ शुभम शर्मा ने बताया कि जयपुर एवं अन्य शहरी क्षेत्रों के प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स (पीएचसी) को भी ट्राइबल एडवांस रिमोट एरिया मानकर वहां के डॉक्टर्स को बोनस अंकों का तोहफा मिलेगा। इससे नीट-पीजी में रैंक-4000 अर्जित करने वाले फ्रेेशर्स रैंक-40,000 पर पहुंचकर पीजी में एडमिशन से वंचित रह जाएंगे।
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काउंसिल संपर्क सूत्र- डॉ शुभम शर्मा- 9413012159