Thursday, June 25, 2026
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एसबीआई के शेयरधारक 15 जून को करेंगे चार स्वतंत्र निदेशकों का चयन

मुंबई। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने अपने केंद्रीय बोर्ड में चार स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन स्वतंत्र निदेशकों का चयन 15 जून को बैंक के शेयरधारक करेंगे।

बैंक ने एक नोटिस में कहा है कि सुनील मेहता के इस्तीफे और तीन अन्य  निदेशकों दीपक अमीन, संजीव मल्होत्रा और एमडी माल्या का तीन साल का कार्यकाल पूरा होने के मद्देनजर यह चयर जरूरी हो गया है। इन चार नए निदेशकों की नियुक्ति तीन साल के लिए 2020 तक होगी इन चयन शेयर धारकों  की 15 जून को होने वाली आमसभा में  किया जाएगा।

बैंक ने कहा है कि निदेशकों का चयन सेवानिवृत्ति-इस्तीफे की वजह से पैदा हुई रिक्तियों  के आधार पर किया जा रहा है। कोई भी शेयरधारक जिसके पास 5,000 या अधिक शेयर उसके खुद के नाम या संयुक्त रूप में रखे शेयरों में पहला नाम है, यह चुनाव लड़ सकता है।

एसबीआई की चेयरमैन अरंधति भट्टाचार्य को सितंबर तक विस्तार मिला हुआ है। चेयरमैन की अगुवाई वाले एसबीआई के केंद्रीय बोर्ड में चार स्वतंत्र निदेशक, दो सरकार की ओर से नामित लोग, रिजर्व बैंक का एक प्रतिनिधि तथा चार प्रबंध निदेशक शामिल हैं।

NEET 2017: किसी की कान की बाली उतरवाई तो , किसी के जूते, धूप में नंगे पांव चले

 जयपुर। सीबीएसई की ओर से रविवार को राष्ट्रीय पात्रता एवं प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी) 2017 जयपुर , कोटा और अजमेर समेत देश के 103 शहरों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजित की गई। । इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से नकल की रोकथाम के लिए परीक्षा केंद्रों पर व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। 

 ब्लू ट्रुथ से नकल की आशंका को देखते हुए परीक्षा केंद्रों के बाहर छात्राओं की चुन्नियां उतरवाई गईं। कानों में पहनी बालियां व नाक की लौंग के साथ ही उनके गले में पड़े मन्नत के धागे व नेकलेस आदि भी उतरवाए लिए गए। 

परीक्षा केंद्रों के बाहर विद्यार्थियों के साथ ही उनके अभिभावकों का भी जमावड़ा था। अजमेर के माकड़वाली रोड स्थित एक परीक्षा केंद्र पर परीक्षा देने पहुंचे विद्यार्थियों विशेषकर छात्राओं की चुन्नी उतरवा ली गईं। बालों में लगे हेयर पिन, नौज पिन और नेकलेस उतरवा गए।

कानों की बालियां व लौंग उतारने की मशक्कत मां-बाप दोनों ही करते नजर आए। जो छात्राएं व छात्र कलाइयों में मन्नत के धागे बांधे, पहुंचे वे सेंटर पर मौजूद स्टाफ ने कैंची से काट डाले। एक महिला कार्मिक चाकू से इन धागों को काटते नजर आई।

धूप में नंगे पांव

 बड़ी संख्या में छात्र जूते पहन कर केंद्र पर पहुंचे। केंद्र पर मौजूद स्टाफ ने ऐसे सभी छात्रों के जूते उतरवा लिए। मोजे भी नहीं पहनने दिया गया। केंद्र के मुख्य द्वार से परीक्षा हाल तक लंबी दूरी छात्रों को नंगे पांव ही तपती धूत में चलना पड़ा।

मैटल डिटेक्टर से हुई जांच

केंद्रों पर विद्यार्थियों की जांच के लिए हैंड मेटल डिटेक्टरों की व्यवस्था की गई थी। प्रत्येक विद्यार्थी की जांच इन मेटल डिटेक्टर से की गई। छात्राओं की जांच के लिए महिला कार्मिकों की व्यवस्था की गई।

 

 

 

 

रावतभाटा में बनेगा 500 टन यूरेनियम फ्यूल बंडल

कोटा। देश का दूसरा यूरेनियम फ्यूल बंडल कॉम्पलेक्स का प्रोजेक्ट 2021-22 तक बनकर तैयार हो जाएगा। 2400 करोड़ के इस प्रोजेक्ट में 2021 के बाद प्रति वर्ष 500 टन यूरेनियम फ्यूल बंडल बनेंगे। जिससे राजस्थान परमाणु बिजलीघर की 7वीं8वीं इकाई, काकरापार गुजरात की 7 वीं 8वीं इकाई, उत्तरी भारत में भविष्य में लगने वाली सभी 700-700 मेगावाट के परमाणु बिजलीघरों को यूरेनियम फ्यूलबंडल की आपूर्ति शहर से 50 किलोमीटर दूर स्थित रावतभाटा से की जाएगी।

शनिवार को परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. शेखरबसु को यह जानकारी एनएफसी प्रोजेक्ट के दौरे के दौरान न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्पलेक्स के जी कल्याणकृष्णन ने दी। परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष डॉ. शेखरबसु, एनपीसीआईएल के सीएमडी एसके शर्मा, भारी पानी बोर्ड के चेयरमैन एवं सीईओ एएन वर्मा, परमाणु बिजलीघर के स्थल निदेशक टीजे कोटेश्वरन, नवनियुक्त स्थल निदेशक विजयकुमार जैन सहित अधिकारियों ने एनएफसी प्रोजेक्ट का निरीक्षण किया।

इस दौरान परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष ने प्रशासनिक भवन का लोकार्पण किया। एनएफसी के विस्तार और भविष्य में न्यूक्लियर फ्यूलबंडल के निर्माण की जानकारी विस्तार से दी गई। डॉ.शेखरबसु ने इस मौके पर देश में परमाणु बिजलीघरों को यूरेनियम फ्यूल आपूर्ति की जानकारी भी ली। इस दौरान एनपीसीआईएल के अधिशासी निदेशक बीसी पाठक, लोकेशकुमार, बालाकृष्णन, परियोजना निदेशक विवेक जैन, केंद्र निदेशक एके राजपूत, एम श्रीनिवास, आरके गुप्ता, एनके पुष्पकार मौजूद थे।

 

घटिया प्लेसमेंट पर उदयपुर समेत 13 IIM से एमएचआरडी ने किया जवाब तलब

नई दिल्ली। उदयपुर समेत 13 नए मैनेजमेंट संस्थानों में घटिया प्लेसमेंट्स के मामले में मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) ने संज्ञान लिया है। उन संस्थानों से एमएचआरडी ने पूछा है कि 2015-2017 के बैच में कितने छात्रों का प्लेसमेंट हुआ और उनको कितनी-कितनी सैलरी ऑफर की गई।

हालांकि पुराने मैनेजमेंट संस्थानों में प्लेसमेंट बेहतर रहा लेकिन नए आईआईएम छात्रों की भर्ती के लिए कंपनियों को आकर्षित करने में संघर्ष कर रहे हैं। आईआईएम रोहतक ने टीओआई को बताया कि उसके 14 छात्रों का प्लेसमेंट नहीं हो पाया जबकि हिमाचल प्रदेश स्थित आईआईएम सिरमौर ने जानकारी साझा करने से इनकार कर दिया है।

आईआईएम अमृतसर ने बताया कि इसके सभी छात्रों का प्लेसमेंट हो गया है। दो साल पहले इस संस्थान की स्थापना हुई थी। यहां के छात्रों को औसत 11 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला जो पुराने आईआईएम के मुकाबले काफी कम है। पुराने आईआईएम में छात्रों को 24 लाख से 50 लाख रुपये सालाना के बीच में सैलरी ऑफर की गई।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी)  ने 2015-2017 के  बैच में सिरमौर, रोहतक, अमृतसर, काशीपुर, उदयपुर, रांची, त्रिची, शिलॉन्ग, रायपुर, बोधगया, नागपुर, संबलपुर और विशाखापट्टनम स्थित आईआईएम से फाइनल प्लेसमेंट्स और  कंपनियों के सैलरी ऑफर  का विवरण मांगा है।

पेप्सिको कंपनी की पसंद आज भी सचिन तेंदुलकर

दोनों एक साथ मिलकर एक नई पारी की करेंगे शुरुआत 

नई दिल्ली। एक दशक बाद भी पेप्सिको कंपनी के लिए मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर सही पसंद बने हुए हैं। दोनों एक साथ मिलकर एक नई पारी की शुरुआत  करने जा रहे हैं। पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनी पेप्सीको ने शुक्रवार को कहा कि वह ओट्स से लेकर पैक्ज्ड दूध बनाकर डेयरी मार्केट में विस्तार कर रही है।

पेप्सिको इंडिया की वाइस प्रेसिडेंट (न्यूट्रीशियन) दीपिका वैरिएर ने कहा कि फाइबर के भरे ओट्स को क्वेकर ब्रांड के तहत बेचा जाएगा। पेप्सिको ने कहा कि पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर न सिर्फ क्वेकर ओट्स प्लस मिल्क के नए उत्पाद का प्रचार कर रहे हैं, बल्कि उन्होंने इसे को-क्रिएट करने में भी अहम भूमिका निभाई है।

दीपिका ने कहा कि सचिन ने हेल्दी मॉर्निंग की जरूरत पर बल दिया। वह लगातार व्यक्ति के ऊर्जावान रहने के लिए सही न्यूट्रीशिन लेने पर जोर देते हैं। पेप्सिको ने कहा कि उनके उत्पाद में पेंटेंटेड ‘सोलूओट्स’ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें दूध को ओट्स के साथ मिलाया जाता है।

दीपिका ने आगे कहा कि पेप्सिको का लक्ष्य परफॉर्मेंस विथ परपज है और हम ऐसे कई तरीकों के बारे में देख रहे हैं, जिससे हमारे न्यूट्रीशियर पोर्टफोलियो को सुधारा जा सके। यह उत्पाद युवा उपभोक्ताओं की पोषण की जरूरतों को पूरा करता है। गौरतलब है कि पिछले साल की शुरूआत में कोका-कोला ने विओ मिल्क लॉन्च करने के साथ ही डेयरी सेगमेंट में कदम रखा था।

क्या है  ‘बाहुबली’ के सांड वाले सीन की असलियत, आप भी जानिए 

-दिनेश माहेश्वरी 

कोटा।  फिल्म ‘बाहुबली 2’ बॉक्स ऑफिस पर 1000 करोड़ का आंकड़ा छूने से बस कुछ कदम ही दूर है। फिल्म के लिए दीवानगी ऐसी है कि दर्शक दो-दो बार फिल्‍म देखने जा रहे हैं। अब तक तो पूरा देश जान ही गया है कि कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा। आज हम आपको  बताते हैं  कि फिल्म ‘बाहुबली’ के सांड वाले सीन की असलियत  क्या है, आप भी जानिए ।

साल 2015 में बाहुबली का पहला पार्ट आया था। इस फिल्म में भल्लालदेव की सांड के साथ लड़ाई दिखाई गई थी। हम आपको इस सीन की सच्चाई बताने जा रहे हैं। इसकी हकीकत जानकर आपकी हंसी नहीं रुकेगी।ये सीन फिल्‍म के बेहतरीन सीन में एक माना जाता है। इस सीन को शूट करते समय वीएफएक्स यानी विजुअल  इफेक्ट्स का इस्तेमाल किया गया।

भल्लालदेव की सांड के साथ लड़ाई की यह है असलियत

इसमें जिस सांड से भल्लालदेव लड़ते नजर आ रहे थे वो असली में कुछ ऐसा था। जब सांड भागता हुआ भल्लाल की तरफ आता है तो दर्शकों की सांसे थम जाती हैं। वो असल में ऐसा दिखता था। ‘बाहुबली’ के सांड वाले सीन की असलियत जान आप हंस पड़ेंगे। भल्लाल ने पहले सिर्फ एक्‍शन किए। इसके बाद वी‌एफएक्‍स की सहायता से सीन में सांड को जोड़ दिया गया। 

VFX क्या है इसका इस्तेमाल कहां  होता है

वीडियो प्रोडक्शन में जब कोई सीन शूट करने में महंगा हो या खतरनाक हो तो उस सीन को Shoot करने के लिए कुछ Special Effetcs का इस्तेमाल किया जाता है । यह Effects वीडियो बनाने के साथ में किया जा सकता है या वीडियो एडिट करते समय किया जाता है तो इन सभी इफेक्ट्स को ही VFX कहा जाता है।

वीडियो एडिटिंग में आज के समय में बहुत ज्यादा विजुअल इफेक्ट्स का इस्तेमाल हो रहा है और इसे इस्तेमाल करने का बहुत ही फायदा भी है । इससे समय और पैसे दोनों की बचत होती है और जैसा कि मैंने बताया जिस सीन को शूट करने में ज्यादा खतरा हो या ज्यादा महंगा हो तो वह VFX की मदद से बहुत ही सस्ते में सूट किया जा सकता है ।

‘दंगल’ गर्ल फातिमा सना ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान में’

मुंबई। फिल्म ‘दंगल’ से अपनी अभिनय की पारी की शुरुआत करने वाली ऐक्ट्रेस फातिमा सना शेख आमिर खान और अमिताभ बच्चन के साथ ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ में नजर आएंगी।

फिल्म के निर्देशक विजय कृष्णा आचार्य ने कहा, ‘फिल्म में लड़की की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए हमें इसके लिए ऐसी अभिनेत्री की जरूरत थी, जो इसके साथ पूरा न्याय कर सके। कई ऑडिशन और कार्यशालाओं के बाद हमें लगा कि फातिमा एक शानदार अभिनेत्री हैं। हमें अपनी फिल्म के लिए बिल्कुल उपयुक्त अभिनेत्री मिल गई, जिसे लेकर हम बेहद खुश हैं।’

फिल्म का निर्माण यशराज फिल्म्स के बैनर तले होगा। कंपनी के बयान के मुताबिक, ‘धूम 3’ के बाद आचार्य और आमिर की एक साथ यह दूसरी फिल्म है। फिल्म 1839 के उपन्यास ‘कन्फेशन्स ऑफ अ ठग’ पर आधारित है और इसे 2018 में दिवाली के मौके पर रिलीज किए जाने की योजना है। फिल्म की शूटिंग एक जून से शुरू होगी।

जिसे बंद करने की साजिश की गई, उसमें रिकॉर्ड बिजली उत्पादन

कोटा सुपर पावर थर्मल में 1240 की जगह 1270 मेगावाट का हो रहा उत्पादन 

कोटा । सुपर पावर की जिन इकाइयाें को अवधि पार बताते हुए बंद करने की साजिश की जा रही थी, वही अभी उत्पादन का रिकॉर्ड बना रही हैं। हालत यह है कि तीन दिन पहले सभी इकाइयों को चालू करने के आदेश दिए गए, जिस पर यहां 1240 मेगावाट की जगह 1270 मेगावाट तक बिजली बनाने का काम शुरू हो गया है।

कोटा सुपर पावर थर्मल की चार इकाइयों को 25 साल से अधिक पुरानी होने के कारण अवधिपार बताते हुए बंद करने की साजिश की जा रही थी। 25 जनवरी को तो इनमें से तीन इकाइयों की हाइड्रोलिक गैस भी निकाल दी गई थी, इससे यह तय हो गया था कि इन इकाइयाें को तो बंद ही किया जाएगा।

इस बीच इकाइयों को बंद करने निजी हाथों में देने की संभावना को देखते हुए कर्मचारियों ने आंदोलन किया। आखिर में उत्पादन निगम एमडी, ऊर्जा सचिव तथा मंत्री को कहना पड़ा कि कोटा की इकाइयों को बंद करने या निजी हाथों में देने का कोई प्रस्ताव नहीं है। विधानसभा में विधायक के प्रश्न पर दिए जवाब के बारे में भी खुलासा कर दिया गया था।

चीफ इंजीनियर हरि बाबू गुप्ता का कहना है कि जैसे ही एलडी से आदेश मिला सबसे कम समय में इन इकाइयों को चालू करके बिजली का उत्पादन शुरू किया गया। तीनदिन से सभी इकाइयां पूरी क्षमता से अधिक चल रही है। हालांकि एलडी की डिमांड पर उत्पादन कभी कम ज्यादा भी हो रहा है। सभी इकाइयां पूरी तरह से फिट होकर उत्पादन कर रही है।

यह रही इकाइयों की उत्पादन क्षमता
1                110                  110.13
2               110                  107.11
3               210                 213.79
4               210                 215.64
5               210                 207.34
6               195                 214.58
7               195                 215.54

बस मालिकों के ठिकानों पर छापा, टैक्स चोरी का सामान पकड़ा

कोटा । शहर में निजी बसों में कर चोरी कर लगेज ले जाने वालों के खिलाफ वाणिज्यिक कर विभाग की टीम ने दो दिन में बस ट्रैवल्स के ऑफिस में छापेमारी की। इस टीम ने लगेज जब्त करने के साथ ही बस मालिकों पर बड़ा जुर्माना भी लगाया।  

उपायुक्त नरेन्द्र गुप्ता ने बताया कि विभाग ने दो टीमों का गठन कर शहर में आने वाली सभी बसों की जांच की। कई बसों में अवैध रूप से लाए जा रहे माल को जब्त कर ट्रैवल्स एजेंसी मालिकों पर जुर्माना किया गया। गुप्ता ने बताया कि कार्रवाई को लगातार जारी रखा जाएगा। 

निजी बस संचालकों द्वारा बस की छत व अंदर लगेज रख भेजा जा रहा था, जिससे सरकार को लाखों रुपए की चपत लग रही थी। साथ ही छतों पर लगेज रखा होने के कारण बस दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई थी।

वाणिज्यिक  कर विभाग की टीम ने शहर में अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर बाबू ट्रैवल्स पर 85895, नवरंग ट्रैवल्स पर 22690 और विश्वकर्मा ट्रैवल्स पर  48462 रुपए का जुर्माना लगाया। इसके साथ ही बसों और दफ्तरों से मिला माल भी जब्त कर लिया। 

क्रूड ऑयल 13 साल पुराने स्तर के करीब, तो पेट्रोल के दाम दोगुना क्यों?

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मुंबई। करीब 2 साल से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम उस स्तर के करीब है जिस स्तर के करीब 2004 यानि 13 साल पहले होता था, तो फिर पेट्रोल और डीजल के लिए हमे ज्यादा भाव क्यों देना पड़ रहा है? कच्चे तेल के भाव की तरह पेट्रोल और डीजल का भाव भी 13 साल पुराने स्तर पर क्यों नहीं है? 

2004 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम 30-40 डॉलर प्रति बैरल के करीब था और उस समय देश में पेट्रोल का दाम 33-40 रुपये प्रति लीटर के बीच होता था, डीजल की बात करें तो उस समय डीजल का दाम 23-28 रुपये प्रति लीटर के बीच था।

पिछले 2 साल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम 27 डॉलर से लेकर 55 डॉलर के बीच रहा है लेकिन इसके बावजूद बहुत कम समय में ऐसा देखने को मिला है कि पेट्रोल का दाम 60 रुपये के नीचे आया हो, मौजूदा समय में भी पेट्रोल का दाम 66 रुपये से लेकर 75 रुपये प्रति लीटर के करीब है।

ऊपर से भारतीय करेंसी रुपये में भी शानदार तेजी देखने को मिली है जिस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चा तेल आयात करने पर पहले के मुकाबले कम डॉलर चुकाने पड़ रहे हैं। इन हालात में भारत में कच्चे तेल का आयात और भी सस्ता हुआ है। फिर हमें पेट्रोल-डीजल के लिए ज्यादा पैसे क्यों देने पड़ रहे हैं?

दरअसल पेट्रोलियम उत्पादों पर सरकार की तरफ से भारी टैक्स लगाया जाता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के आधार पर पेट्रोल और डीजल की जितनी कीमत मौजूदा समय में होनी चाहिए उस कीमत पर करीब उतना ही टैक्स सरकार वसूलती है जिस वजह से पेट्रोल और डीजल के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।

अप्रैल 2014 से मार्च 2016 के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम करीब 64 फीसदी घटे हैं जबकि इस दौरान सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में 127 फीसदी की बढ़ोतरी की है, 2014 से पहले तक पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 9.48 रुपये प्रति लीटर थी और मार्च 2016 में इसे बढ़ाकर 21.48 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया।

डीजल के मामले में तो एक्साइज ड्यटी में करीब 5 गुना तक की बढ़ोतरी की गई, 2014 से पहले तक डीजल पर सिर्फ 3.56 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी थी और मार्च 2016 में इसे बढ़ाकर 17.33 रुपये प्रति लीटर किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जो भी गिरावट आई है उसका पूरा फायदा सरकार उठा रही है ।