Thursday, July 9, 2026
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मंडी व्यापारियों को इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगाने जरूरी

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कोटा| भामाशाह मंडी में अब हर व्यापारी को इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगाने होंगे। अब पुराने परंपरागत कांटे नहीं चलेंगे। इसके लिए मंडी समिति ने मंडी के सभी व्यापारियों को नोटिस दे दिए हैं। इसमें कहा गया है कि वे 25 अगस्त तक अपनी दुकानों के कांटे बदल लें।

इसके बाद समिति कार्रवाई करेगी। यह निर्णय सरकार ने किसान आंदोलन के बाद किया और पूरी मंडियों में इसके आदेश जारी कर दिए। भामाशाह कृषि उपज मंडी समिति के सचिव आरपी कुमावत ने बताया कि जब से मंडी बनी है, तब से व्यापारी पल्ले वाले कांटे में जिंस की तुलाई करते थे।

पुराने कांटे पर किसानों को 100 किलो पर 100 से 200 ग्राम तक नुकसान होता है। किसानों ने हाल में आंदोलन कर यह मांग उठाई थी। इसे देखते हुए सीएम ने आदेश जारी किए हैं कि मंडी में व्यापारी इलेक्ट्रॉनिक्स कांटे लगाएं।

 

 

 

राजस्व संग्रह पर निर्भर करेगा जीएसटी स्लैब में बदलाव: मेघवाल

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कोलकाता। वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज कहा कि नयी माल एवं सेवा कर जीएसटी प्रणाली के तहत कर स्लैब को युक्तिसंगत बनाए जाने का फैसला तो आने वाले दिनों में राजस्व संग्रह
में बढोतरी पर निर्भर करेगा।

इस समय जीएसटी प्रणाली में पांच कर स्लैब हैं जिनमें छूट वाली शून्य प्रतिशत के साथ साथ 5, 12, 18 व 28 प्रतिशत के कर स्लैब है। मेघवाल ने कहा कि जीएसटी से पहले जहां केवल 80 लाख डीलर ही पंजीबद्ध थे वहीं इसके कार्यान्वयन के बाद 13.2 लाख और जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि इनमें से 56,000 तो केवल पश्चिम बंगाल से ही हैं जो सर्वाधिक हैं। जीएसटी नेटवर्क जीएसटीएन के संबंध में उन्होंने कहा कि इसमें और सुधार होगा। उन्होंने कहा, पंजीबद्ध डीलरों को कुछ परेशानियां हो सकती हैं लेकिन यह प्रणाली अपने आप में संपूर्ण है।

यहां एक संगोष्ठी में मेघवाल ने कहा कि डीलरों को इनपुट क्रेडिट तथा रिवर्स चार्ज प्रणाली के संबंध में रिकार्ड को कंप्यूटरीकृत रूप में रखना होगा। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की अघोषित आर्थकि गतिविधियों को समाप्त करने के लिए यह जरूरी है।

पूर्वोत्तर , हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में कर प्रोत्साहनों के बारे में मेघवाल ने कहा कि इसका फैसला तो जीएसटी परिषद करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने सभी राज्यों के साथ विचार विमर्श के बाद ही जीएसटी को लागू किया है। यह बहुमत के आधार पर नहीं किया गया।

 

 

एक इंडस्ट्री जो बन गई मिसाल, देखिए वीडियो

कोटा।  राजस्थान का कानपुर कहे जाने वाले कोटा शहर में धीरे -धीरे उद्योग ख़त्म होते जा रहे हैं। गोपाल मिल ,जेके इंडस्ट्रीज, सेमकोर, आईएल समेत कई बड़े उद्योग बंद हो गए। इससे कई श्रमिक बेरोजगार हो गए।

परन्तु डीसीएम श्रीराम ग्रुप की एक यूनिट श्रीराम रेयॉन्स करीब तीन दशक पूर्व बंद हो गई थी। फिर ऐसा क्या हुआ जो एक -डेढ़ साल बंद रहने के बाद यह उद्योग उठ खड़ा हुआ। ऐसा कौन सा चमत्कार या करिश्मा हुआ, जो दुनिया के लिए मिसाल बन गया। वही मशीने, वही श्रमिक, सब कुछ वही। क्या आप नहीं जानना चाहेंगे इसकी कहानी।

जो कुछ भी हुआ उसका राज जानने के लिए आपको यह वीडियो देखना पड़ेगा। हमारा चैनल LEN DEN NEWS आपके लिए लिए लेकर आया है एक दास्ताँ। बता रहे हैं कम्पनी के सीनियर वाईस प्रेसिडेंट वीके जेटली –

कच्चे व रिफाइंड पाम तेल के आयात शुल्क में बढ़ोतरी

नयी दिल्ली।  सरकार ने विदेशों से सस्ता आयात रोकने और किसानों तथा घरेलू उद्योगों को समर्थन देने के लिये कच्चे पाम तेल पर आयात शुल्क 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया। इसी तरह रिफाइंड पाम तेल पर भी आयात शुल्क को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया।

सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर कीमतों को बल मिलेगा जिससे घरेलू किसानों व रिफाइनर फर्मों को समर्थन मिलेगा। केंद्रीय उत्पाद व सीमा शुल्क बोर्ड सीबीईसी की शुक्रवार को जारी अधिसूचना के मुताबिक सोया व सूरजमुखी जैसे अन्य कच्चे खाद्य तेलों के लिए भी आयात शुल्क 12.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 17.5 प्रतिशत किया जा चुका है।

आयात शुल्क में इस बढोतरी से मलेशिया तथा इंडोनेशिया से कच्चे तेल व रिफाइंड पाम आयल के सस्ते आयात पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी और किसानों का इसका फायदा होगा। तिलहनों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी नीचे गिरने की वजह से किसान काफी निराश हैं।

तिलहनों की बंपर पैदावार होने और विदेशों से बढ़ते सस्ते आयात की वजह से कई तिलहनों के दाम बाजार में गिरे हैं। वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में एक अंतर मंत्रालयी समिति ने 27 जुलाई को देश में खाद्य तेल उपलब्धता की समीक्षा की थी।

समिति ने देश में बढ़ते आयात पर भी गौर किया। इसके बाद देश में खाद्य तेलों के सस्ते आयात की निगरानी करने और आयात शुल्क ढ़ाचे को देखने के लिये एक समिति का गठन किया गया। खाद्य तेल उद्योग के संगठन साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसियेसन एसईए ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। संगठन ने कहा है कि इससे किसानों का मदद मिलेगी।

हालांकि, संगठन कच्चे पाम तेल और रिफाइंड पॉम तेल के बीच आयात शुल्क में 15 प्रतिशत तक का अंतर चाहता है ताकि घरेलू उद्योगों को सहारा मिल सके। उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक जून माह में खाद्य तेल आयात 15 प्रतिशत बढ़कर 13.44 लाख टन हो गया।

चालू 2016-17 विपणन वर्ष के आठ माह में खाद्य तेलों का आयात पिछले साल के 97.63 लाख टन से बढ़कर 98.63 लाख टन हो गया। देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिये हर साल खाद्य-अखाद्य तेलों का कुल 1.45 करोड़ टन तक आयात किया जाता है।

 

 

 

ऑडिट रिटर्न :अंतिम तारीख का इंतजार क्यों, देखिए वीडियो

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कोटा। ऑडिट वाली कंपनियों या फर्मों को अपनी आयकर रिटर्न 30 सितम्बर के पहले भरनी है। अगर आप परेशानी से बचना चाहते हैं तो आप अंतिम तारीख का इंतजार नहीं करें, क्योंकि जब सब एक साथ रिटर्न भरते हैं तो आयकर विभाग का सर्वर डाउन हो जाता है। समय पर रिटर्न नहीं भरने पर भारी पेनल्टी लग सकती है।

जिन कंपनियों या फर्मों का दो करोड़ रुपए सालाना से ज्यादा टर्नओवर है, उन्हें ऑडिट रिटर्न फाइल करना जरूरी है आपको इसकी जानकारी देने के लिए हमारे चैनल LEN DEN NEWS ने टैक्स बार एसोसिएशन कोटा के अध्यक्ष राज ठाकुर से बातचीत की। देखिये यह वीडियो —

जीएसटीआर 3B ऑनलाइन कैसे भरें, देखिये Live वीडियो

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कोटा। जीएसटी में पंजीकृत करदाता डीलर्स को 20 अगस्त तक अपनी रिटर्न भरनी है। शुरूआती दौर में करदाताओं के लिये सरलीकृत रिटर्न जीएसटीआर-3बी भरने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यह सुविधा जुलाई 2017 एवं अगस्त 2017 में की गई सप्लाई के सम्बन्ध में दी गयी है।

व्यापारी जुलाई 2017 की रिटर्न जीएसटीआर-3बी 5 अगस्त से जीएसटीएन पोर्टल पर भर सकते हैं एवं इसे भरने की अंतिम तारीख 20 अगस्त 2017 निर्धारित की गयी है। करदाता डीलर्स की सुविधा के लिए इस खबर के साथ वीडियो दे रहे हैं जिससे आपको समझने में आसानी होगी।

यह वीडियो आपके लिए बहुत उपयोगी साबित होगा। यहाँ हमारे टैक्स कंसल्टेंट अंशुल काला आपको वीडियो के माध्यम से समझा रहे हैं । आप हमें www.youtube.com, www.facebook.com, http/tweeter.com पर भी फॉलो कर सकते हैं। 

 

4 दिन में निवेशकों ने गंवाए 6.4 लाख करोड़

मुंबई। अमेरिका और उत्तर कोरिया में संभावित युद्ध का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी नजर आ रहा है। इसका खमियाजा भारतीय शेयरधारकों को भी उठाना पड़ रहा है। पिछले चार दिनों के ट्रेडिंग सेशन में भारतीय निवेशकों को करीब 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी 6.4 लाख करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मार्केट कैप अब 133.1 लाख करोड़ रुपये है। 7 अगस्त को यह अपने सर्वोच्च स्तर, 139.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। बाजार का मार्केट कैप 6 जुलाई को 133 लाख करोड़ रुपये था। इसके बाद 23 ट्रेडिंग सेशन के बाद बाजार 7 अगस्त को 139.5 लाख करोड़ के अपने सर्वोच्च स्तर तक पहुंचा।

रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर के निवेशकों को करीब एक ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 640 खरब 85 अरब रुपये का नुकसान हो चुका है। शुक्रवार को सेंसेक्स में 318 अंकों की गिरावट के साथ 31214 अंको के करीब बंद हुआ। यह पिछले महीनों का इसका निम्नतर स्तर है।

निफ्टी में 1.1 फीसदी यानी करीब 109 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। यह 9711 अंकों पर बंद हुआ। इस सप्ताह में सेंसेक्स में कुल 1100 अकों की गिरावट दर्ज हुई है।

डीलर्स का कहना है कि भारत और चीन के बीच डोकलाम विवाद, सेबी द्वारा मंगलवार से 331 शैल कंपनियों को ट्रेडिंग से रोकना और कॉर्पोरेट सेक्टर में कमजोरी के चलते भी इस सप्ताह बाजार को नुकसान हुआ है। भारत ही नहीं दुनियाभर के शेयर बाजारों में यही चलन देखा जा रहा है।

गुरुवार रात को अमेरिका के डाउ जॉन्स इंडेक्स में करीब 1 फीसदी और एसऐंडपी 500 इंडेक्स में करीब 1.45 फीसदी की गिरावट हुई। वहीं यूके के एफटीएसई में भी 1.5 प्रतिशत की गिरावट हुई।शुक्रवार की शुरुआती खरीदारी में अमेरिकी शेयर बाजार स्थिर थे वहीं यूके में अच्छे संकेत नहीं थे।

दुनियाभर के बाजार विशेषज्ञों को अभी तक इस बात का अंदाजा नहीं है कि अगर अमेरिका और उत्तर कोरिया में युद्ध के हालात पैदा होते हैं तो बाजार की क्या स्थिति होगी। वहीं बाजार में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इस करेक्शन को अच्छा मान रहे हैं। उनका मानना है कि यह अभी रुका नहीं है।

निवेश फर्म क्रिस (KRIS) के निदेशक अरुण केजरीवाल का कहना है, ‘चूंकि इसने रिचली वैल्यूड स्टॉक्स और फेयरली वैल्यूड स्टॉक्स के बीच के अंतर को कुछ कम कर दिया है। लेकिन यह अभी काफी नहीं है। हालांकि इस हफ्ते के दूसरे हिस्से में कुछ समय के लिए कीमतों में फिर इजाफा हो सकता है।

“हार ही जीत की प्रथम सीढ़ी”

कोटा। एस.आर.पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को हाउस कॉम्पीटिशन के तहत प्रतियोगिताओं का आयोजन रखा गया। जिसमें विद्यालय के चारों हाउस अरावली, हिमालय,नीलगिरी एवं शिवालिक के छात्रों ने हिस्सा लिया।

जूनियर वर्ग के लिए देशभक्ति कविता एवं सीनियर वर्ग के लिए नाटक मंचन प्रतियोगिता आयोजित की गई। जूनियर वर्ग में हिमालय हाउस की वर्तिका सिंह ने प्रथम एवं हिमालय हाउस की ही सानवी कसेरा ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। सीनियर वर्ग में अरावली हाउस ने प्रथम, नीलगिरी हाउस ने द्वितीय एवं हिमालय हाउस ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

विजयी छात्रों को प्राचार्या सीमा शर्मा एवं उप प्राचार्या सपना शर्मा ने पुरस्कार देकर उनका हौसला बढ़ाया एवं संदेश दिया कि हार से कभी हार न मान कर उसे जीत की प्रथम सीढ़ी मानकर स्वीकार करना और आगे बढ़ते जाना।

झालावाड़ मेडिकल कॉलेज में मेडकॉर्ड्स को मिली मंजूरी

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डिजिटल इंडिया मिशन :

  • हर रोगी की बनेगी डिजिटल हैल्थ प्रोफाइल।
  • एमओयू से प्रतिवर्ष 5 लाख मरीजों को मिलेगी निःशुल्क डिजिटल रिकॉर्ड सुविधा, डॉक्टर का पर्चा व जांच रिपोर्ट रहेगी सुरक्षित।

अरविंद
कोटा। ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को समय पर सस्ता इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से मेडकॉर्ड्स हेल्थकेअर सिस्टम द्वारा झालावाड़ मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल को डिजिटल किया जाएगा।

इस बारे में शनिवार को कॉलेज के डीन डॉ.आरके आसेरी तथा मेडकॉर्ड्स के सीईओ श्रेयांस मेहता व निखिल बाहेती ने एमओयू किया। मुख्यमंत्री के जिले में ग्रामीण स्तर तक यह सुविधा मिलने से ग्रामीण रोगियों को इलाज में बहुत राहत मिलेगी। 

मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सभी विभागों में 100 से अधिक चिकित्सकों को मरीजों के पंजीयन, डिजिटल रिकॉर्ड को देखने तथा सुरक्षित रखने के बारे में प्रशिक्षण दिया गया। मरीजों के लिए यह डिजिटल सुविधा बिल्कुल निशुल्क रहेगी।

अतिरिक्त प्रिंसीपल (प्रथम) डॉ.दीपक गुप्ता ने कहा कि इससे मरीजों को बहुत फायदा मिलेगा। वो कहीं भी इलाज करवाए, उसके पर्चे और रिपोर्ट्स दोनों उसके पास सुरक्षित रहेंगे। गांवों के मरीजों को यह सुविधा मिलने से स्वस्थ भारत अभियान में यह मील का पत्थर साबित होगा।

डॉक्टर व मरीज दोनों के लिए फायदेमंद
झालावाड़ मेडिकल कॉलेज को मेडकॉर्ड्स के सहयोग से अत्याधुनिक बनाया जाएगा, ताकि यह कॉलेज देश में उदाहरण बन सके। डिजिटल तकनीक से जुड़ने के बाद रोगियों की पुरानी जांच रिपोर्ट सुरक्षित रहेगी। उन्हें जल्द व सही इलाज मिलेगा। मेडकॉर्ड्स डॉक्टर व मरीज के बीच सेतु का काम करेगा।
– डॉ.आरके आसेरी, डीन, मेडिकल कॉलेज, झालावाड़

डिजिटिल हेल्थकेअर की शुरुआत हाड़ौती से
सांसद ओम बिरला ने निःशुल्क डिजिटल हेल्थ केअर सुविधा से कोटा-बूंदी जिले के हर नागरिक को जोड़ने की पहल की। कोटा में दादाबाडी व रामपुरा सेटेलाइट अस्पताल में इसे चालू किया गया।

जल्द ही यह सुविधा मेडिकल कॉलेज, एमबीएस हॉस्पीटल व जेके लोन हॉस्पिटल में भी प्रारंभ होगी। जहां पूरे संभाग से लाखों मरीज इलाज के लिए आते हैं। 

मेहता ने बताया कि ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के मरीजों के लिए अलग-अलग एप बनाए गए हैं, जो उस क्षेत्र में बीमारियों का सर्वे कर बनाए गए। दुनिया के टॉप-10 स्टार्टअप में शामिल तकनीक को ग्रामीण मरीजों तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था, जिसे अच्छी सफलता मिल रही है। 

पर्सनल हैल्थ असिस्टेंट है मेडकॉर्ड्स
मेडकॉर्ड्स के सीइओ श्रेयांस मेहता एवं निखिल बाहेती ने कहा कि डिजिटल होने से हर रोगी को मेडिकल प्रोफाइल एक पेज पर मिल जाएगी, जिसे मोबाइल से वह देश-विदेश के विशषज्ञ को भेजकर इलाज करवा सकता है। हमारी व्यस्त दिनचर्या में यह पर्सनल हैल्थ असिस्टेंट की भूमिका निभाएगा। 

 

 

ईपीएफ अंशदान में एक फीसद का इजाफा कर सकती है सरकार

नई दिल्ली । संगठित क्षेत्र में नौकरी के नए अवसर सृजित करने के लिए सरकार प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना (पीएमआरपीवाई) के तहत कर्मचारियों के कर्मचारी भविष्य निधि में योगदान बढ़ाने का विचार कर रही है। इसमें बेसिक पे का एक फीसद हिस्सा बढ़ाया जा सकता है।

सरकार ने यह स्कीम बीते वर्ष अगस्त में लॉन्च की थी। सरकार रोजगार के पहले तीन वर्षों के दौरान कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के अंतर्गत उन कर्मचारियों का ईपीएस (इम्प्लॉई पेंशन स्कीम) योगदान का पूरा हिस्सा भुगतान करने के लिए बाध्य है, जिनका वेतन 15,000 रुपये प्रति माह है। 

ईपीएफ के कुल योगदान में से 8.33 फीसद ईपीएस में, 3.67 फीसद ईपीएफ में, 0.65 फीसद एडमिनिस्ट्रेटिव, 0.5 फीसद इम्प्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड (ईडीएलआई) स्कीम में और 0.01 फीसद ईडीएलआई के मेंटेनेंस में जाता है।

पीएमआरपीवाई के तहत ईपीएस का हिस्सा सरकार की ओर से उपलब्ध कराया जाता है ताकि कंपनियां बेरोजगार लोगों को नौकरी देने के लिए प्रोत्साहित हों और असंगठित कर्मचारियों को पेरोल पर लाएं।

पीएमआरपीवाई को अब तक सुस्त प्रतिक्रिया मिली है। इसमें केवल 6588 इस्टेबिलिशमेंट्स ने ही इस योजना का लाभ उठाया है और करीब तीन लाख कर्मचारियों ने 30 जून, 2017 तक इसमें एनरोल किया है। इस योजना के लिए 1000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन अब तक महज 31 करोड़ रुपये ही इसके लिए खर्च किये गये हैं।