Thursday, July 16, 2026
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एम्स में 200 सीटें बढ़ीं, परीक्षा के लिए आवेदन 5 फरवरी से

अरविंद, कोटा। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की प्रवेश परीक्षा 26 एवं 27 मई,2018 को आयोजित होगी। एम्स, नईदिल्ली के सहायक परीक्षा नियंत्रक द्वारा शुक्रवार को जारी प्रवेश सूचना के अनुसार, विद्यार्थी अधिकृत वेबसाइट www.aiimsexam.org पर 5 फरवरी से ऑनलाइन आवेदन कर विवरण देख सकेंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 5 फरवरी से 5 मार्च तक होंगे।

प्रवेश सूचना के अनुसार, इस वर्ष एम्स, नई दिल्ली तथा एम्स, जोधपुर, पटना, भोपाल, भुवनेश्वर, ऋषिकेश, रायपुर के साथ नागपुर (महाराष्ट्र) तथा गुंटूर (आंध्रप्रदेश) सहित 9 एम्स में एमबीबीएस की कुल 907 सीटों पर प्रवेश दिए जाएंगे। प्रत्येक एम्स में 50 सीटें सामान्य वर्ग, 27 ओबीसी, 15 एससी, 8 एसटी एवं 3 सीटें दिव्यांग वर्ग के लिए निर्धारित हैं।

सामान्य वर्ग के लिए आवेदन शुल्क 1000 रू. तथा एससी, एसटी वर्ग के लिए 800 रू. है। दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आवेदन निःशुल्क रहेगा। परीक्षा की पात्रता के लिए सामान्य एवं ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 12वीं बोर्ड में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी व इंग्लिश में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक तथा एससी, एसटी व दिव्यांग वर्ग के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। आवेदक को फोटो, हस्ताक्षर एवं अंगूठे का निशान स्केन कर 50 से 100 केबी की फाइल में अपलोड करना होगा।

दो पारियों में होगी ऑनलाइन परीक्षा
कम्प्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षा देश के 29 राज्यों के 167 शहरों में निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर दो पारियों में सुबह 9ः00 बजे से 12ः30 बजे तथा अपरान्ह 3ः00 से शाम 6ः30 बजे तक होगी।

साढे़ तीन घंटे के पेपर में 200 अंकों के 200 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी के 60-60, जनरल नॉलेज के 10 तथा एप्टीट्यूड व लॉजिकल थिंकिंग के 10 प्रश्न होंगे। प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का होगा तथा गलत उत्तर होने पर एक तिहाई अंक की निगेटिव मार्किंग रहेगी।

इसलिए कठिन है एम्स परीक्षा
मेडिकल की सबसे कठिन एम्स प्रवेश परीक्षा में गत वर्ष केवल 1.72 प्रतिशत विद्यार्थियों को सीट मिल सकी। एम्स-यूजी, 2017 में 3.64 लाख स्टूडेंट रजिस्टर्ड हुए थे, जिनमें से 2,84,737 ने पेपर दिया। इसमें 1.50 लाख छात्र तथा 1.34 लाख छात्राएं थी।

11 थर्ड जेंडर थे। परीक्षा में 4905 स्टूडेंट क्वालिफाई हुए, जिसमें 2209 को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया था। एम्स,2017 एलन कॅरिअर इंस्टीट्यूट,कोटा की छात्रा निशिता पुरोहित में ऑल इडिया टॉपर रही। इस वर्ष एम्स में 200 सीटें बढ़ जाने से परीक्षार्थियों की संख्या 3 लाख से अधिक होने की उम्मीद है।

दो पारी के अंकों से मिलेगा परसेंटाइल स्कोर
एम्स द्वारा मेरिट सूची मे दोनों पारियों के अंकों को नॉर्मलाइज कर परसेंटाइल से ऑल इंडिया रैंकिंग दी जाती है। गत वर्ष सामान्य वर्ग की कटऑफ 99.0014 परसेंटाइल, ओबीसी में 97.4205 तथा एससी, एसटीवर्ग में 94.1220 परसेंटाइल कटऑफ रही।

आरटीयू के ‘क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू’ को एआईसीटीई ने आदर्श माना

अरविंद, कोटा । राजस्थान टेक्निकल यूनिवर्सिटी ने डिग्री की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इस वर्ष पहली बार इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों में ग्रेडिंग सिस्टम लागू करने की अनूठी पहल की। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई), नईदिल्ली ने आरटीयू को पत्र भेजकर इसकी सराहना की।

एआईसीटीई के सलाहकार प्रो.राजीव कुमार ने कहा कि कॉलेज या संस्थान की एक हजार अंकों के स्केल पर क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू (क्यू आई वी) जांचने से विद्यार्थियों को बहुत लाभ मिलेगा। देश के अन्य विश्वविद्यालयों के लिए यह अनुकरणीय उदाहरण है।

अकादमिक डीन प्रो.एच.डी.चारण ने कहा कि नए सत्र से कोई भी विद्यार्थी आरटीयू वेबसाइट पर संबद्ध 116 सरकारी व प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेजों की रैंकिंग देखकर अपने लिए सर्वश्रेष्ठ कॉलेज का चुनाव करेंगे। इस वर्ष आरटीयू से जुडे़ कॉलेजों में संचालित कोर्सेस में लगभग 2.25 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

2017 में यूनिवर्सिटी से 14 हजार विद्यार्थियों ने बीटेक डिग्री ली। कई कॉलेजों में प्लेसमेंट कम होने से आरटीयू ने शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के प्रयास तेज किए हैं।

क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू से जांचा कॉलेजों का लेवल
यूनिवर्सिटी ने इस सत्र में राज्य के सभी कॉलेजों से एआईसीटीई के अनुसार 18 मापदंडों की ऑनलाइन जानकारी ली। फिर एक कमेटी ने इंफ्रास्ट्रक्चर, फैकल्टी व विद्यार्थियों के बारे में भौतिक सत्यापन किया। इसके बाद 1000 अंकों से मूल्यांकन कर कॉलेज को ग्रेडिंग दी गई।

क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू में छात्र शिक्षक अनुपात, कोर्सेस की संख्या, कुल नामांकित छात्र, फैकल्टी की संख्या, कम्प्यूटर व इंटरनेट सहित स्मार्ट क्लास, हॉस्टल, मैस, इंश्योरेंस, प्ले ग्राउंड, लैब आदि, प्रतिवर्ष पास होने वाले स्टूडेंट, उनमें फर्स्ट डिविजन या ऑनर्स वाले कितने, इंटरनेशनल या नेशनल कॉन्फ्रेंस, सेमीनार, वर्कशॉप, जर्नल्स मे ंप्रकाशित पेपर, प्रतिवर्ष कितने स्टूडेंट को प्लेसमेंट मिला, 3 लाख से अधिक पैकेज कितनों को मिला जैसे 18 मापदंडों पर कॉलेजों का लेवल परखा। फिर कॉलेज को इस सत्र के लिए ग्रेडिंग दी गई।

1000 अंकों पर होगी कॉलेजों की परख
आरटीयू में उप-कुलसचिव (अकादमिक) दिवाकर जोशी ने बताया कि क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू के मापदंडों पर राज्य में 1000 में से 600 से अधिक अंक पाने वाले 9 इंजीनियरिंग कॉलेजों को ए-ग्रेड मिली।

सभी कॉलेज क्वालिटी में सुधार कर वर्ष 2018-19 के लिए अच्छी ग्रेडिंग ले सकते हैं। ए-ग्रेड मिलने पर कॉलेजों को 5 वर्ष की संबद्धता, बी-ग्रेड पर 3 वर्ष तथा सी-ग्रेड पर अस्थाई संबद्धता दी जाएगी ताकि सभी कॉलेज रैंकिंग में सुधार के लिए क्वालिटी के मापदंडों का पालन करें।

क्वालिटी एजुकेशन से होंगे रोजगार सृजन
यूजीसी ने देश के सभी कॉलेजों को दर्जा देने के लिए एक्सीलेंट स्कीम प्रारंभ की है। आरटीयू से क्वालिटी इंडेक्स वैल्यू के आधार पर अच्छी ग्रेड पाने वाले इंजीनियरिंग कॉलेज नेशनल एक्सीलेंस कॉलेज का दर्जा हासिल कर सकते हैं। प्रतिवर्ष अच्छी परफॉर्मेंस से कोई भी कॉलेज ग्रेड सुधार सकते हैं। क्वालिटी एजुकेशन मिलने से ग्रेजुएट इंजीनियर्स को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
– प्रो.एन.पी कौशिक, कुलपति, आरटीयू

कोटा का अपमान सहन नहीं किया जाएगा

कोटा। कोटा शहर कोचिंग के नाम से प्रसिद्व है, लेकिन किसी साजिश के तहत शहर को देशभर में बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। व्यावसायिक हितों को देखते हुए मीडिया को प्रभावित कर कोटा के लिए गलत समाचार प्रकाशित करवाए जा रहे हैं। कोटा का यह अपमान नहीं सहा जाएगा।

कोटा व्यापार महासंघ के अध्यक्ष क्रांति जैन और महासचिव अशोक माहेश्वरी, महेश विजय – महापोर नगर निगम, कोटा पंकज मेहता, प्रेम भाटिया (अध्यक्ष एसएसआई एसोसियेशन), राजकुमार जैन महासिचव, नरेश जैन, ने शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में यह बात कही।

कोटा को बदनाम करने वाली संस्थाओं के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा। इसके लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा तो भी पीछे नहीं हटेंगे। न्यूज के द्वारा कोटा शहर को सेक्सुअल सिटी, गांजा, सिगरेट,बीड़ी, शराब, और कोटा में बच्चों को पढ़ने भेजना, मौत को बुलावा देना है आदि है, सेक्सुअल सिटी बताने से हमारे शहर की बहु बेटियों और संस्कृति को बदनाम किया गया।

कोटा ऐसा शहर है जहां स्टूडेंट को बेस्ट माहौल मिल रहा है। यही कारण है कि हर वर्ष यहां से टॉपर आ रहे हैं। मेडिकल हो या इंजीनियरिंग दोनों तरह की प्रवेश परीक्षाओं में कोटा से कोचिंग करने वाले विद्यार्थी बाजी मार रहे हैं।

स्वच्छता महाअभियान के साथ स्वच्छता जन जागृति अभियान भी

कोटा । नगर निगम एवं कोटा व्यापार महासंघ द्वारा चलाये जा रहे स्वच्छता महाअभियान के साथ-साथ स्वच्छता जनजाग्रति अभियान भी चलाया जायेगा।

यह जानकारी शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में महासंघ के अध्यक्ष क्रान्ति जैन एव महासंचिव अशोक माहेश्वरी देते हुए बताया कि स्वच्छता महाअभियान को आमजन का अभियान बनाने में पूरी सफलता मिल रही है। अभी इसमें बहुत कुछ करना है। इसमें आमजन व्यापारी, उद्यमी पूरी तरह से जुडते जा रहे हैं।

साथ ही समाज सेवी संस्थाएं भी इसमें भरपूर सहयोग प्रदान कर रही है। उनके उत्साह एंव सहयोग को देखते हुए हमारा उत्साह भी बढ़ता जा रहा है। साथ सभी व्यापार संगठन अपने अपने क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चलाने के लिए सम्पर्क करे रहे है। थोडी सी समझाईश से अतिक्रमण जैसी समस्याऐं भी हल होती जा रही है।

अब आमजन भी महसूस कर रहा है कि अतिक्रमण व गन्दगी शहर के विकास में बाधक है। इसके चलते कई पूराने बाजारो के व्यापार पर प्रभाव पड़ा है। जैन व माहेश्वरी ने कहा कि जिन बाजारों में स्वच्छता अभियान चला है उनमें पूरी तरह असर दिख रहा है।

पुरोहित जी की टापरी, हरिओम नगर, वीरसावरकर नगर, शिवपुरा, इन्द्रा गाँधी नगर, कन्सुआ जैसे बाहरी क्षेत्रों में काफी गन्दगी व्याप्त है। इन क्षेत्रों में भी अभियान चलाया जाना है,इसके लिये पूरे वर्ष इस अभियान को चलाया जायेगा।

10 मार्च को हास्य कवि सम्मेलन
इस दिशा स्वच्छता जनजागृति अभियान को लेकर कोटा व्यापार महासंघ एवं दी.एस.एस.आई. एसोसिएशन के सयुक्त तत्वावधान में 10 मार्च को अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।

महासंघ के महासंचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि कल सबसे व्यस्त मार्केट कोटा के प्रवेश द्वार अनंतपुरा में एवं पिछले 15 वर्षा से अतिक्रमण से ग्रस्त औद्योगिकक्षेत्र में चले स्वच्छता महाअभियान में स्वच्छता के साथ-साथ उस क्षेत्र में हो रहे भारी अतिक्रमण को भी हटाया गया, जिसका बिना किसी विवाद के सफल हो जाना कोटा के इतिहास में अनुठी पहल है।इस मौके पर स्वच्छता जनजागृति अभियान पोस्टर का विमोचन भी किया गया। 

आज गोबरिया बावड़ी क्षेत्र में
इस कडी में 3 फरवरी को दोपहर 1 बजे से दी.एस.एस.आई. एवं गोबरिया बावड़ी, व्यापार संघ क्षेत्र में स्वच्छता महाअभियान चलाया जायेगा। इस अभियान में नगर निगम के महापौर महेश विजय,उप महापौर सुनिता व्यास उपायुक्त राजेश डागा सहित नगर निगम की टीम एवं दी.एस.एस.आई. के अध्यक्ष प्रेम भाटिया, संचिव राज कुमार जैन गोबरिया बावडी व्यापार संघ के अध्यक्ष रामपाल प्रजापति एवं संचिव चोथमल पारेता सहित कई व्यापारी व उद्यमी मोजूद रहेंगे। 

नया धनिया 200 रुपये प्रति क्विंटल टूटा, सोया, धान भी ढीला

कोटा। भामाशाह अनाज मंडी में शुक्रवार को माल की कुल आवक 40000 हजार बोरी की रही। लहसुन की आवक 2000 हजार कट्टे की रही। गेहूं 25 रुपये प्रति क्विंटल, धनिया नया 200 रुपये प्रति क्विंटल, सोया 50 रुपये प्रति क्विंटल, धान 100 रुपये प्रति क्विंटल मंदा रहा ।

गेहूं मिल 1500 से 1545 लोकवान 1570 से 1600 पीडी 1600 से 1620 टुकडी 1600 से 1650 रुपये प्रति क्विंटल रहे।  धान सुगंधा 2600 से 2975 पूसा-1 2500 से 2875 पूसा-4 (1121) 2500 से 3475 धान (1509) 2000 से 3200 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

सोयाबीन 2400 से 3560 सरसो 3200 से 3650 तिल्ली 6000 से 7600 रुपये प्रति क्विंटल रहे। मैथी 2000 से 2900 धनिया बादामी 4000 से4500 ईगल 4200 से 4700 रंगदार 5000 से 5500 धनिया नया 3000 से 6100 रुपये प्रति क्विंटल रहे।

मूंग 3300 से 4300 उडद 2400 से 3850 चना 3000 से 3600 चना काबुली 7000 से 10500 चना पेपसी 3400 से 3800 चना मौसमी 3000 से 3800 मसूर 3000 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल रहे। ग्वार 3000 से 4050 मक्का नई 1000 से 1250 जौ 1100 से 1200 ज्वार 1300 से 2400 रुपये प्रति क्विंटल रहे। लहसुन 2000 से 2100 रुपये प्रति क्विंटल रहे। 

कोटा सर्राफा 
चांदी 40000 रुपये प्रति किलोग्राम। 
सोना केटबरी 31300 रुपये प्रति दस ग्राम। सोना 36510 रुपये प्रति तोला। 
सोना शुद्ध 31450 रुपये प्रति दस ग्राम। सोना 36680 रुपये प्रति तोला।

सेंसेक्स 840 और निफ्टी 256 प्वाइंट गिरा, इन्वेस्टर्स के 4.5 लाख करोड़ डूबे

नई दिल्ली। बजट में शेयर से कमाई पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का प्रोविजन करने का असर लगातार दूसरे दिन शेयर बाजार पर दिखा। सेंसेक्स 840 अंक गिरकर 35,067 अंक पर और निफ्टी 256 अंक गिरकर 10,761 अंक पर बंद हुआ। अगस्त 2017 के बाद पहली बार मार्केट इतना नीचे गया है।

कारोबार के आखिरी घंटे में बिकवाली बढ़ने से सेंसेक्स 900 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी में 281 प्वाइंट्स की गिरावट दर्ज की गई। आईटी को छोड़ सभी सेक्टोरल इंडेक्स में गिरावट रही। गिरावट के चलते इन्वेस्टर्स के 4.5 लाख करोड़ रुपए डूब गए।

BSE की कंपनियों का मार्केट कैप घटा
– गिरावट से एक दिन में इन्वेस्टर्स के 4,58,581.38 करोड़ रुपए डूब गए। 1 फरवरी 2018 को बीएसई पर लिस्टेड कुल कंपनियों का मार्केट कैप 1,53,13,033.38 करोड़ रुपए था। जो बजट के बाद घटकर अब 1,48,54,452 करोड़ रुपए हो गया है।

सेंसेक्स में 7वीं सबसे बड़ी गिरावट
– पिछले 10 वर्षों में सेंसेक्स में यह 7वीं सबसे बड़ी गिरावट है। एक दिन में सेंसेक्स में सबसे बड़ी 24 अगस्त 2015 को हुई थी। इस दिन सेंसेक्स 1624.51 अंक टूटकर बंद हुआ था।
– वहीं 24 अक्टूबर 2018 सेंसेक्स में 1070.63, 17 मार्च 2008 को 951.03, 3 मार्च 2008 को 900.84, 6 जुलाई 2009 को 869.65, 6 फरवरी 2015 को 854.86, 02 जनवरी 2018 को 839.91 11 फरवरी 2008 को 833.98, 11 फरवरी 2016 को 807.07 और 10 अक्टूबर 2008 को 800.51 अंक टूटा था।

क्यों आई बाजार में गिरावट ?
– वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को बजट 2018-19 में शेयर से होने वाली कमाई पर लॉन्ग्‍ा टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCGT) लगाने का एलान किया है। इससे इन्वेस्टर्स का सेंटीमेंट बिगड़ा है। इसमें एक साल से ज्यादा रखे गए शेयरों पर अगर 1 लाख से ज्यादा इनकम होती है, तो निवेशकों को 10% टैक्स देना होगा।
– बजट में सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को हटाने का भी एलान नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि निवेशकों को दोनों तरह के टैक्स देने होंगे।

एशियाई बाजारों में कमजोरी
– शुक्रवार को एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिली।
– सिंगापुर का एसजीएक्स निफ्टी 1.11% टूटा। जापान का बाजार निक्केई 304 प्वाइंट गिर गया।

फिस्कल डेफिसिट
– सरकार ने FY 18 का फिस्कल डेफिसिट 3.5% रहने का टारगेट रखा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार ने फिस्कल डेफिसिट को 3.2% या नीचे रखा होता तो मार्केट के लिए यह पॉजिटिव हो सकता था, लेकिन 3.5% का टारगेट मार्केट को निराश करने वाला है।

फिच की टिप्पणी
– क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग ने कहा कि सरकार पर कर्ज के भारी दबाव के कारण भारत की रेटिंग में सुधार रुक गया है। फिच का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बजट में जेटली ने फिस्कल डेफिसिट का टारगेट जीडीपी के 3.2% से बढ़ाकर 3.5% किया है।

निफ्टी पर 45 स्टॉक्स में रही गिरावट
– बिकवाली के दबाव में निफ्टी 50 में शामिल 45 स्टॉक्स गिरकर बंद हुए, जबकि सिर्फ 5 स्टॉक्स में बढ़त दर्ज की गई। बढ़ने वाले शेयरों में टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, टीसीएस, इंफोसिस और एचयूएल शामिल हैं।
– गिरनेवाले शेयरों में अल्ट्राटेक सीमेंट, बजाज फाइनेंस, बजाज ऑटो, गेल, इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस, एक्सिस बैंक, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारती एयरटेल, रिलायंस इंडस्ट्रीज, मारुति और टाटा 5.77-4 फीसदी तक गिरकर बंद हुए।

मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में मुनाफावसूली
– मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली है। जिससे बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 4.03% टूट गया है। मिडकैप शेयरों में जीएमआर इंफ्रा, अडानी पावर, बायर क्रॉप, वक्रांगी, आरकॉम, कमिंस इंडिया, मुथुट फाइनेंस, रिलायंस इंफ्रा, आईडीबीआई, एलएंडटी फाइनेंस होल्डिंग में 15.38-7.77% की गिरावट रही।
– बीएसई के स्मॉलकैप इंडेक्स में 4.65% की कमजोरी आई है।

आईटी को छोड़ सभी सेक्टोरल इंडेक्स टूटे
– शुक्रवार के कारोबार में सेक्टरोल इंडेक्स में सिर्फ निफ्टी आईटी इंडेक्स बढ़त के साथ बंद हुआ। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 0.15% की बढ़त रही।
– सबसे ज्यादा गिरावट निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 6.17% की रही। बैंक निफ्टी में 2.83%, ऑटो में 3.35%, एफएमसीजी में 0.63%, निफ्टी मेटल में 3.02%, निफ्टी मीडिया में 3.53%, निफ्टी फार्मा में 1.27%, निफ्टी पीएसयू बैंक में 2.09% और निफ्टी प्राइवेट बैंक में 3.03% की गिरावट रही।

139 स्टॉक 52 हफ्ते के निचले स्तर पर
– चौतरफा बिकवाली के दबाव में बीएसई पर 139 से ज्यादा स्टॉक 52 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गए। इनमें भूषण स्टील, अपोलो माइक्रो सिस्टम्स, एनईसीसी लिमिटेड, मुक्ता एग्रीकल्चर, ओरिएंट बैंक शामिल हैं।

पर्सनल फाइनैंस पर कहाँ फायदा, कहाँ नुकसान, जानिए

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नई दिल्ली।  वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा गुरुवार को पेश किया गया बजट, देने से कहीं ज्यादा देने और लेने पर आधारित था। एक तरफ, वित्त मंत्री ने स्टैंडर्ड डिडक्शन को दोबारा शुरू किया, वरिष्ठ नागरिकों को खुश होने के कुछ मौके दिए और महिला कर्मचारियों को कर्मचारी भविष्य निधि में पहले तीन साल के दौरान योगदान घटाकर 8 फीसदी किया।

इससे महिलाएं अब ज्यादा पैसा घर ले जा सकेंगी। दूसरी तरफ, उन्होंने सैलरीड क्लास को मिलने वाली ट्रांसपॉर्ट अलाउंस और मेडिकल रीइंबर्समेंट की सुविधा वापस ले ली। इसके साथ ही उन्होंने इक्विटी पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लगा दिया और आपकी आयकर पर लगने वाला सेस भी बढ़ा दिया। अगले साल होने वाले आम चुनावों से पहले मोदी सरकार के इस आखिरी बजट पर सबकी नजरें थीं।

1. व्यक्तिगत रूप से आयकर स्लैब्स में कोई बदलाव नहीं
सरकार ने पिछले तीन वर्षों में पर्सनल इनकम-टैक्स रेट में कई सकारात्मक बदलाव किए हैं। यह कहते हुए, जेटली ने इस बजट में आयकर के स्लैब्स में कोई बदलाव नहीं किया।

2. आयकर पर सेस बढ़कर अब 4%
बजट 2018 में आयकर पर लगने वाले सेस को 3% से बढ़ाकर 4% करने का प्रस्ताव किया गया है। इसके बाद अब सभी श्रेणियों के करदाताओं को ज्यादा कर चुकाना होगा। इस बदलाव के कारण कर देनदारी सबसे ऊंचे टैक्स ब्रैकेट (15 लाख रुपये इनकम) के लिए अब 2,625 रुपये होगी।

मिडिल आयकरदाताओं के लिए (5 लाख से 10 लाख रुपये के बीच) कर देनदारी बढ़कर 1,125 रुपये हो जाएगी। वहीं, सबसे नीचे वाले टैक्स ब्रैकेट (2.5 लाख से 5 लाख रुपये के बीच) के लिए यह बढ़कर 125 रुपये हो जाएगी।

3. स्टैंडर्ड डिडक्शन दोबारा शुरू
बजट 2018 में कर्मचारियों की सैलरी इनकम से 40,000 रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन का प्रावधान किया गया है। गौरतलब है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन एक ऐसा अमाउंट होता है जिसे कर योग्य आय की गणना से पहले ही सैलरी इनकम से घटा दिया जाता है। पहले यह इनकम-टैक्स ऐक्ट का हिस्सा था पर 2005-06 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने इसे वापस ले लिया था।

4. सैलरी से मेडिकल रीइंबर्समेंट और ट्रांसपॉर्ट अलाउंस पर छूट खत्म
एक तरफ बजट में कर्मचारियों की सैलरी पर 40 हजार रुपये स्टैडर्ड डिडक्शन की बात कही गई है। वहीं, बजट में मौजूदा सालाना 19,200 रुपये ट्रांसपॉर्ट अलाउंस और 15,000 रुपये मेडिकल रीइंबर्समेंट पर कर छूट हटाने का प्रावधान किया गया है।

पहली नजर में टैक्स से छूट वाली इनकम और लाभ-हानि मिलाकर देखा जाए तो यह केवल 5,800 रुपये बैठती है। इस इनकम पर प्रत्येक कर्मचारी के लिए कितना कर बचेगा यह उसके टैक्स स्लैब पर निर्भर करेगा। जैसे, अगर किसी की आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है तो स्टैंडर्ड डिडक्शन, अलाउंसेज हटाने और सेस बढ़ाने के बाद भी कुछ पैसा बचेगा।

5. नई महिला कर्मचारियों के लिए EPF योगदान अब 8%
वित्त मंत्री ने औपचारिक क्षेत्र में अधिक से अधिक महिलाओं को रोजगार में प्रोत्साहन प्रदान करने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा है कि इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ेगी।

जेटली ने कहा, ‘कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम 1952 में संशोधन के जरिए पहले तीन साल के दौरान महिला कर्मचारियों का योगदान घटाकर 8 फीसदी करने का प्रस्ताव है जो फिलहाल 12 फीसदी या 10 फीसदी है। हालांकि नियोक्ता के योगदान में कोई बदलाव नहीं होगा।’ इसके अलावा EPFO के तहत नए कर्मचारियों को सरकार की ओर से 12 फीसदी योगदान दिया जाएगा।

6. एक लाख से ज्यादा LTCG पर 10% टैक्स
वित्त मंत्री ने अपने बजट 2018 में लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स को दोबारा लगाने का प्रस्ताव रखा है। एक लाख रुपये से अधिक के दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 10 प्रतिशत की दर से टैक्स लगेगा, जिसमें कोई भी इंडेक्सेशन बेनिफिट नहीं मिलेगा। हालांकि 31 जनवरी तक के सभी लाभ इसके दायरे में नहीं आएंगे। इस समय इक्विटी शेयर्स और इक्विटी ऑरियंटेड म्यूचुअल फंड्स के सेल से मिलने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स को टैक्स से पूरी तरह छूट मिली हुई है।

7. वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेक्शन 80D सीमा 50,000 रुपये बढ़ी
वरिष्ठ नागरिकों को बजट से कई अच्छी खबरें मिली हैं। उन्हें सेक्शन 80D के तहत मिलने वाली डिडक्शन सीमा 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है।

8. वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिपॉजिट्स पर भी मिली राहत भरी खबर
बजट में प्रस्ताव किया गया है कि वरिष्ठ नागरिकों द्वारा बैंक और पोस्ट ऑफिस में जमा कराए गए धन पर मिलने वाले ब्याज पर छूट की सीमा 10,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपये की जाएगी। खास बात यह है कि यह सभी प्रकार के FDs और RDs पर लागू होगा।

9. इक्विटी MF पर DDT का प्रस्ताव, लाभांश चाहने वालों को झटका
बजट में इक्विटी-ऑरियंटेड म्यूचुअल फंड्स पर 10% की दर से डिविडेंड डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। जाहिर है कि इससे निवेशकों के हाथ में पैसा कम जाएगा।

10. बजट में PMVVY सीमा को बढ़ाने का प्रस्ताव
वरिष्ठ नागरिकों के लिए और भी कई अच्छी खबरें मिली हैं। वित्त मंत्री ने पेंशन स्कीम, प्रधानमंत्री वय वंदना योजना (PMVVY) में इनवेस्टमेंट लिमिट मौजूदा 7.5 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये करने का प्रस्ताव रखा है।

50 करोड़ लोग कैसे ले पाएंगे राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना का लाभ

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नई दिल्ली।सरकार ने बजट में ‘आयुष्मान भारत’ नाम से बड़ी फ्लैगशिप योजना को लॉन्च करने का ऐलान किया है। इसे परवान चढ़ाने के लिए नैशनल हेल्थ प्रॉटेक्शन स्कीम की घोषणा वित्त मंत्री अरुण जेटली ने की। दूसरे दिन शुक्रवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने संवाददाताओं के साथ ओपन हाउस मीटिंग में एक सवाल के जवाब में राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।

कैसे लागू होगी योजना?
वित्त मंत्री ने कहा कि नैशनल हेल्थ प्रॉटेक्शन स्कीम जिसे मोदी केयर भी कहा जा रहा है, ट्रस्ट मॉडल या इंश्योरेंस मॉडल पर काम करेगा। उन्होंने रीईंबर्स मॉडल की संभावना को यह कहते हुए खारिज कर दी कि इसमें बहुत गड़बड़ियां होती हैं। यानी, योजना का लाभ उठानेवाले गरीब मरीजों का इंश्योरेंस किया जाएगा और उनका कैशलेस इलाज किया जाएगा। पहले खुद के खर्चे से इलाज करवाकर सरकार से पांच लाख रुपये तक की रकम वापस पाने का झंझट नहीं होगा।

कब से लागू होगी योजना?
ओपन हाउस में जेटली ने कहा कि नई योजना नए वित्त वर्ष के आगाज यानी 1 अप्रैल 2018 से लागू होगी। यानी, गरीब परिवारों के लोग 1 अप्रैल से 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में करवा सकेंगे।

कहां होगा मुफ्त इलाज?
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि योजना के तहत गरीब परिवार न केवल सरकारी बल्कि प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज करवा सकेगा। उन्होंने कहा कि चुनिंदा अस्पतालों में लोग कैशलेस इलाज करवा कर इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।

बाकी परिवारों का क्या?
वित्त मंत्री जेटली ने बजट भाषण में स्पष्ट किया कि बाद में इस योजना का विस्तार कर देश की बाकी बची आबादी को भी इसके दायरे में लाया जा सकता है।
सरकार ने इसके लिए 2,000 करोड़ रुपये की रकम आवंटित की है। इसने गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए 2008 में पेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा की जगह ली है जिसमें 30,000 रुपये का सालाना बीमा कवर दिया गया था।

योजना को पर्याप्त फंड मिला?
पूर्व केंद्रीय मंत्री के पूर्व सलाहकार डॉ. सुनील नंदराज ने 10 करोड़ परिवारों के हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम के लिहाज से 2,000 करोड़ रुपये का आवंटन को पर्याप्त बताया। हालांकि, जन स्वास्थ्य अभियान के नैशनल कन्वीनर अभय शुक्ला का कहना है कि अगर इस योजना का मकसद 50 करोड़ लोगों को लाभ देना है तो प्रति व्यक्ति प्रीमियम 40 रुपये पड़ेगा।

नीति आयोग की परिकल्पना
जेटली ने बताया कि नीति आयोग ने इस योजना की परिकल्पना की है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में जीवनभर काम करनेवालों ने उनके और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्रजेंटेशन दिया था। जेटली ने कहा, ‘उन्होंने यूनिवर्सल हेल्थकेयर स्कीम का प्रजेंटेशन दिया था। चूंकि इसकी लागत बहुत ज्यादा पड़ रही थी। इसलिए हमने सभी 25 करोड़ की जगह 10 करोड़ परिवारों से शुरुआत की ताकि योजना प्रभावी तौर पर लागू हो सके।’

वादा निभाने में लगे पौने चार साल
बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में सभी को हेल्थ कवर देने का वादा किया था, लेकिन करीब पौने चार साल बाद उसने इसे पूरा करने के लिए कदम उठाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी साल करीब होने के कारण सरकार इस योजना के तहत गरीबों के वोटों पर फोकस कर रही है। इस योजना को विशेषज्ञ खासा अहम बता रहे हैं, लेकिन इस पर अमल कैसे होगा, इसे लेकर शंकित भी हैं।

‘आयुष्मान भारत’ के तहत दो स्कीमें
1. नैशनल हेल्थ प्रॉटेक्शन स्कीम के तहत देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का हेल्थ इंश्योरेंस कवर मुहैया कराना। अमेरिका में ओबामा केयर की तर्ज पर वित्त मंत्री जेटली ने नैशनल हेल्थ प्रॉटेक्शन स्कीम का ऐलान करते हुए इसे दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थ केयर प्रोग्राम करार दिया। जेटली ने कहा कि इससे कम-से-कम 50 करोड़ लोगों को फायदा मिलेगा। स्कीम पर अमल के लिए पर्याप्त रकम मुहैया कराई जाएगी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत गरीब परिवारों को महज 30 हजार रुपये सालाना की कवरेज हासिल है।

2. हेल्थ और वेलनेस सेंटर
देशभर में डेढ़ लाख से ज्यादा हेल्थ और वेलनेस सेंटर खोलना, जो जरूरी दवाएं और जांच सेवाएं फ्री में मुहैया कराएंगे। इन सेंटरों में गैर-संक्रामक बीमारियों और जच्चा-बच्चा की देखभाल भी होगी। इतना ही नहीं, इन सेंटरों में इलाज के साथ-साथ जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, मसलन हाई ब्लड प्रेशर, डाइबिटीज और टेंशन पर नियंत्रण के लिए विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सरकार ने इस मद में 1200 करोड़ रुपये का इंतजाम किया है। सरकार इन केंद्रों को चलाने के लिए कॉर्पोरेट का भी सहयोग चाहती है।

नए मेडिकल कॉलेज और अस्पताल
देश में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए 24 जिला अस्पतालों को अपग्रेड कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल खोले जाएंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि हर तीन संसदीय क्षेत्र में एक मेडिकल कॉलेज खोले जाएंगे। अभी देश में प्राइवेट और सरकारी मेडिकल कॉलेजों से हर साल 67 हजार एमबीबीएस और 31 हजार पोस्ट ग्रैजुएट (पीजी) डॉक्टर निकल रहे हैं। एम्स के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा था कि 130 करोड़ की आबादी वाले देश में इलाज के लिए डॉक्टरों की यह तादाद बहुत कम है।

टीबी के खिलाफ मुहिम
जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा कि सरकार ने टीबी के रोगियों को हर महीने 500 रुपये देने का इंतजाम किया है, जिसके लिए 600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। गौरतलब है कि सरकार ने 2025 तक देश से टीबी के खात्मे का लक्ष्य रखा है और इसके लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं। भारत दुनिया का ऐसा देश है, जहां चीन के बाद टीबी के सबसे ज्यादा मरीज हैं। यहां हर साल टीबी के करीब 28 लाख नए केस सामने आते हैं और करीब 5 लाख पेशंट्स की मौत हो जाती है।

स्वास्थ्य योजनाएं
1. मिशन इंद्रधनुष के तहत 15 दिसंबर 2017 तक 528 जिलों के 2.55 करोड़ बच्चों को विभिन्न बीमारियों के बचाव के टीके लगाए गए। इनमें 67 लाख बच्चों को सभी प्रकार के टीके लगा दिए गए।

2. प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना में लोगों को सस्ते दामों में क्वॉलिटी मेडिसिन मुहैया कराई जाती है। दिसंबर 2017 तक सभी राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में 3,013 जन औषधि केंद्र चलाए जा रहे हैं।

3. स्वास्थ्य सेवाओं पर अपनी जेब से खर्च करने के मामले में मिडल इनकम वाले 50 देशों में भारत का स्थान छठा है। देश की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने पर भी जोर देना जरूरी है। क्वॉलिटी हेल्थ सर्विसेज की कमी के कारण 56 फीसदी शहरी और 49 फीसदी ग्रामीण भारत निजी अस्पतालों में भारी-भरकम राशि देकर इलाजा करता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
पॉप्युलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया की एग्जिक्युटिव डायरेक्टर पूनम मुटरेजा कहती हैं कि इससे जनसंख्या पर लगाम लगाने और परिवार कल्याण की अन्य योजनाएं चलाने में दिक्कत आएगी। बजट में दवाओं की क्वॉलिटी पर नजर रखने के लिए इस बार कोई आवंटन नहीं किया गया है। इस बार अंगदान को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ी पहल की है।

पिछली बार जहां इस मद में 9 करोड़ रुपये दिए गए, वहीं इस बार इसके लिए 90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार स्वास्थ्य स्कीम (सीजीएचएस) के सदस्यों के इलाज के लिए पिछली बार 1654 करोड़ रुपये का इंतजाम किया गया था। इस बार इस राशि को कम करके 1558.86 करोड़ कर दिया गया है।

इसी तरह कई और मदों में भी बजट में कमी या बढ़ोतरी की गई है। अगर बीजेपी इसे भुनाने में कामयाब रही तो अगले साल होने वाले आम चुनाव में काफी लंबी माइलेज हासिल कर सकती है।

कहां कितना खर्च?
पिछले साल के मुकाबले 12 प्रतिशत वृद्धि के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय का पूरा बजट 56,226 करोड़ रुपये का हो गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में स्वास्थ्य पर खर्च को जीडीपी के 2.5 प्रतिशत तक लाने की बात कही थी, लेकिन यह लक्ष्य अभी दूर दिख रहा है क्योंकि अब तक जीडीपी का 1.2 प्रतिशत ही हेल्थ सेक्टर को मिला है।

बजट से निराश बाजार : सेंसेक्स 550, निफ्टी 200 अंक फिसला

नई दिल्ली। स्टॉक से कमाई पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का बजट में प्रोविजन करने का असर शुक्रवार को शेयर बाजार पर दिखा। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 600 अंकों तक टूट गया। वहीं, निफ्टी में 200 अंकों तक गिरावट दिखी। सेक्टोरल इंडेक्स में फार्मा, आईटी और एफएमसीजी इंडेक्स को छोड़ बाकी सेक्टरों के शेयर में मंदी दिखी।

हैवीवेट शेयरों एचडीएफसी, ओएनजीसी, मारुति, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचयूएल में बिकवाली से गिरावट से बाजार पर दबाव बना है। फिलहाल सेंसेक्स 574 अंक टूटकर 35,333 अंक पर औऱ निफ्टी 173 अंक की गिरावट के साथ 10,843 अंक पर कारोबार कर रहा है।

क्यों आई बाजार में गिरावट
LTCG टैक्स- वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को बजट 2018-19 में शेयर से होने वाली कमाई पर लॉन्ग्‍ा टर्म कैपिटल गेन टैक्स (LTCGT) लगाने का एलान किया है। इससे निवेशकों का सेंटीमेट्स बिगड़ा है। इसके तहत एक साल से ज्यादा रखे गए शेयरों पर अगर 1 लाख से ज्यादा इनकम होती है, तो निवेशकों को 10% टैक्स देना होगा।
– वहीं, बजट में सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) को हटाने का भी एलान नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि निवेशकों को दोनों तरह के टैक्स देने होंगे।

एशियाई बाजारों में मंदी दिखी
– शुक्रवार को एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिल रही है।
– सिंगापुर का एसजीएक्स निफ्टी 1.11 फीसदी टूटा। जापान का बाजार निक्केई 304 अंक गिरा गया।

फिस्कल डेफिसिट
– सरकार ने FY 18 का फिस्कल डेफिसिट 3.5% रहने का लक्ष्‍य रखा है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर सरकार ने फिस्कल डेफिसिट को 3.2% या नीचे रखा होता तो मार्केट के लिए यह पॉजिटिव हो सकता था, लेकिन 3.5 फीसदी का टारगेट मार्केट को निराश करने वाला है।

मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में भारी गिरावट
– लार्जकैप शेयरों के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 1.61% टूट गया है। वहीं, बीएसई के स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.70% की कमजोरी आई है।

FII रहे खरीददार, डीआईआई ने की बिकवाली
गुरुवार के कारोबार में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (एफआईआई) ने घरेलू शेयर बाजार में 1099.78 करोड़ रुपए निवेश किए। हालांकि डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (डीआईआई) ने 358.5 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।

अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला कारोबार
गुरुवार के कारोबार में अमेरिकी बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिला। डाओ जोंस 37 अंक की मामूली बढ़त के साथ 26,187 अंक पर बंद हुआ। वहीं नैस्डैक 26 अंक गिरकर 7,386 अंक पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.06 फीसदी की कमजोरी के साथ 2,822 अंक पर बंद हुआ। दरअसल बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बाजार पर दबाव आया।

नरेंद्र मोदी की बुक : स्टूडेंट्स को दिए स्ट्रेस से निपटने के टिप्स

नई दिल्ली। बोर्ड एग्जाम से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्टूडेंट्स के लिए लिखी एक बुक शनिवार को लॉन्च होगी। इसे ‘एग्जाम वॉरियर्स’ नाम दिया गया है।

मोदी ने इसमें बच्चों को एग्जाम स्ट्रेस से निपटने और अच्छा परफॉर्म करने के टिप्स दिए हैं। प्रवासी भारतीय केंद्र में होने वाले बुक लॉन्च के मौके पर पीएम मोदी और सुषमा स्वराज भी मौजूद रहेंगी। बता दें कि देश में हर साल परीक्षाओं से तनाव में आए कई स्टूडेंट सुसाइड कर लेते हैं। मोदी ‘मन की बात’ में भी इस पर चिंता जता चुके हैं।

बोर्ड एग्जाम में स्टूडेंट्स को मिलेगी मदद
किताब में 10th और 12th के बोर्ड एग्जाम देने वाले स्टूडेंट्स की परेशानियों पर फोकस किया गया है। पीएम ने इसमें बताया है कि नॉलेज हमेशा एग्जाम मार्क्स से ज्यादा अहम होती है। पीएम मोदी ने किताब को सीधे संवाद/बात करने के अंदाज में लिखा है। इसमें कई उदाहरण दिए गए हैं। साथ ही स्टूडेंट्स को योगा और फिजिकल एक्टिविटीज की जरूरत भी समझाई गई है।

पेंग्विन बुक्स करेगा पब्लिश
208 पेज वाली किताब को पेंग्विन पब्लिशिंग हाउस छापेगा। इसकी कीमत 100 रुपए रखी गई है। बता दें कि पीएम पहले भी मन की बात प्रोग्राम में बोर्ड एग्जाम की तैयारी करने वाले बच्चों को दबाव ना लेने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि बच्चे प्रेशर नहीं बल्कि प्लेजर से पढ़ें। उन्होंने सचिन तेंदुलकर और अब्दुल कलाम का उदाहरण देकर बच्चों को हमेशा डटे रहने की सलाह दी थी।

5 मार्च से 10वीं-12वीं के बोर्ड एग्जाम्स
– बोर्ड एग्जाम्स के लिए सीबीएसई पहले ही 5 मार्च का एलान कर चुका है। 7 साल के लंबे गैप के बाद बोर्ड ने एक बार फिर 10वीं के एग्जाम्स को कंपल्सरी कर दिया है।