Friday, July 17, 2026
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स्मृतिवन में मनाई पौधरोपण की तीसरी वर्षगांठ, टैंकरों से पिलाया पानी

कोटा। महाशिवरात्रि के अवसर पर अनंतपुरा कर्णेश्वर महादेव स्थित वन विभाग के स्मृतिवन में स्वयंसेवी संगठनों एवं पर्यावरण प्रेमियों ने पौधरोपण की तीसरी वर्षगांठ पर टैकरों से पानी पिलाया और मृत पौधों के स्थान पर नए पौधे लगाए।

वन कर्मचारियों और स्वयसेंवी संस्थाओं ने खुद की जेब से पैसा एकत्र कर पौधों को बचाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर उप वन संरक्षक ललित सिंह राणावत ने कहा कि तीन वर्ष तक काफी पौधे जिंदा रहे हैं, तो वन विभाग एवं जनता की लगन के कारण ही ।

उन्होंने लाडपुरा के रैंजर दाताराम वर्मा को एक सप्ताह में क्षतिग्रस्त दीवारों की मरम्मत करने के निर्देश दिए । उसके लिए आपात व्यवस्था कर फण्ड दिलाया जाएगा।

राणावत ने बताया कि कैम्पा फण्ड को दिल्ली में वन महानरिक्षक के कार्यालय से मंजूर कराने के प्रयास किए जा रहे है। इसके लिए सांसद को भी कहा गया है। स्मृतिवन सलाहकार समिति के सचिव बृजेश विजयवर्गीय ने कहा कि स्मृतिवन में वन विभाग की प्रभावी चौकसी की आवश्यकता है।

उसके लिए धन की कमी को वन विभाग पूरा करें। प्रत्येक वृक्ष शिव जी की भांति खुद कार्बनडाईऑक्साईड का सेवन कर प्राणियों के लिए ऑक्सीजन प्रदान प्रदान करते हैं।  स्मृतिवन नए कोटा के लिए फेफड़ों का काम करेगा।

खुद की जेब से 20 हजार रुपये एकत्र 
सरकारी मदद के अभाव में पौधों को जिंदा रखने के लिए वन विभाग के कर्मचारियों एवं समिति के सदस्यों ने खुद की जेब से 20 हजार रुपये एकत्र कर आागामी समय में पौधों को पानी पिलाने और सुरक्षा खर्च की व्यवस्था करने का संकल्प दोहराया। 

वन रक्षक राजपाल सिंह, महेंद्र सिंह, बाबू सिंह, सुजाता,  केटलगार्ड आबिद के अलावा अर्जुन क्लसेसेज के निर्देशक मुकेश सुमन, सोसायटी फॉर ईकॉलॉजी रिसोर्स शेर के भवानी शंकर मीणा, आनंद जाटव आदि ने भी श्रमदान कर पौधों को बचाया तथा नए पौधों को रोपा।

वैश्विक तेजी से सोना 50 रुपये उछला, जानिए क्या रहे दाम

नई दिल्ली/कोटा ।  सर्राफा बाजार में मंगलवार को सोना 50 रुपये चमककर 31,300 रुपये दस ग्राम पर हो गया। चांदी भी 50 रुपये उछलकर 39,250 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। दोनों धातुओं में आई तेजी का मुख्य कारण जेवराती मांग का बढ़ना है। दुनिया में डॉलर के कमजोर पड़ने से भी सोना-चांदी की कीमतों में उछाल आया है। कोटा में भी सोना 100 रुपये प्रति दस ग्राम और चांदी 300 रुपये प्रति किलोग्राम ऊँची बोली गई 

वैश्विक तेजी के दम पर सोना स्टैंडर्ड 50 रुपये की तेजी में 31,300 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। सोना बिटुर भी इतनी ही तेजी में 31,150 रुपये प्रति दस ग्राम पर पहुंच गया। आठ ग्राम वाली गिन्नी हालांकि 24,800 रुपये पर टिकी रही। औद्योगिक मांग आने से चांदी भी महंगी हो गयी।

चांदी हाजिर 50 रुपये की बढ़त में 39,250 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। चांदी वायदा भी 280 रुपये की तेजी में 38,270 रुपये प्रति किलोग्राम बोली गई। सिक्का लिवाली और बिकवाली गत दिवस के क्रमश: 74 हजार और 75 हजार रुपये प्रति सैकड़ा पर अपरिवर्तित रहे।

दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में डॉलर के कमजोर पड़ने से वैश्विक स्तर पर सोने के भाव बढ़े हैं। लंदन का सोना हाजिर 6.17 डॉलर चमककर 1,328.70 डॉलर प्रति औंस के भाव बिका। अप्रैल का अमेरिकी सोना वायदा भी 4.8 डॉलर की तेजी में 1,331.20 डॉलर प्रति औंस बोला गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी हाजिर भी 0.13 डॉलर की बढ़त में 16.65 डॉलर प्रति औंस पर बोली गई। डॉलर के टूटने और जेवराती मांग आने से स्थानीय बाजार में पीली धातु की चमक लगातार चौथे दिन बढ़ गई है।

कोटा सर्राफा 
चांदी 39300 रुपये प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी 31200 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 36400 रुपये प्रति तोला। 
सोना शुद्ध 31350 रुपये प्रति दस ग्राम, सोना 36570 रुपये प्रति तोला। 

जीएसटी संग्रहण एक लाख करोड़ रुपये मासिक तक संभव

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नई दिल्ली। जीएसटी से होने वाला राजस्व संग्रहण अगले वित्त वर्ष के आखिर तक करीब एक लाख करोड़ रुपये मासिक हो सकता है। यह कहना है वित्त मंत्रालय का। मंत्रालय के अधिकारियों का मानना है कि यदि टैक्स चोरी रोकी जा सके तो ऐसा संभव है। मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि सरकार टैक्स आंकड़ों का मिलान और ई-वे बिल जैसी पहल कर रही है, ताकि किसी भी तरह की टैक्स चोरी रोकी जा सके।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, जीएसटी रिटर्न फाइलिंग प्रक्रिया पूरी तरह स्थिर होने के बाद विश्लेषण और जोखिम प्रबंधन महानिदेशालय (डीजीएआरएम) जोर शोर से काम करना शुरू कर देगा ताकि जीएसटी दाखिल करने वाले लोगों द्वारा दिए गए आंकड़ों का उनके आईटीआर से मिलान किया जा सके।

सरकार ने एक अप्रैल से शुरू हो रहे वित्त वर्ष 2018-19 में जीएसटी से 7.44 लाख करोड़ रुपये मिलने का बजटीय अनुमान लगाया है। मौजूदा वित्त वर्ष आठ महीनों जुलाई फरवरी में अनुमानित संग्रहण 4.44 लाख करोड़ रुपये रहा। मार्च संग्रहण अप्रैल में आएगा जो कि नये वित्त वर्ष 2018-19 की शुरुआत होगी।

अधिकारियों का कहना है कि अगले वित्त वर्ष के लिए राजस्व अनुमान काफी सतर्कता से लगाए गए हैं और सरकार द्वारा उठाए गए प्रवर्तन कदमों के आधार पर ये अधिक भी रह सकते हैं।

जीएसटी का कार्यान्वयन एक जुलाई 2017 से किया गया। पहले महीने में इससे 95000 करोड़ रुपये मिले, जबकि अगस्त में यह राशि 91,000 करोड़ रुपये, सितंबर में 92,150 करोड़ रुपये, अक्तूबर में 83,000 करोड़ रुपये, नवंबर में 80,808 करोड़ रुपये व दिसंबर में 86,703 करोड़ रुपये रही। दिसंबर 2017 तक 98 लाख कारोबारी इकाइयों ने जीएसटी के तहत पंजीकरण करवाया।

अधिकारी ने कहा, ‘हम जल्द ही जीएसटी रिटर्न में दिखाए गए कारोबार का आयकर विभाग के यहां दाखिल आयकर रिटर्न से मिलान शुरू करेंगे। यह काम अगले वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में शुरू होगा।’ उन्होंने कहा कि एक बार ये पहलें लागू होने के बाद जीएसटी राजस्व औसत एक लाख करोड़ रुपये मासिक हो ही जाएगा।

भारतीय विकास दर अगले वित्त वर्ष में 7.5 फीसद रहने की संभावना: डायचे बैंक

नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार हो रहा है। अगले वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर 7.5 फीसद की दर को छू सकती है। जर्मन ब्रोकरेज डायचे बैंक की रिपोर्ट में यह संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में महंगाई नियंत्रित रहने और दरों में बढ़ोतरी नहीं होने का अनुमान भी व्यक्त किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है।

चालू वित्त वर्ष के 6.6 फीसद विकास दर की तुलना में अगले साल इसमें अच्छी तेजी देखने को मिलेगी। जून, 2017 में समाप्त तिमाही में विकास दर तीन साल के निचले स्तर 5.7 फीसद पर पहुंच गई थी। गिरावट में नोटबंदी और जीएसटी बड़े कारण रहे थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था इन झटकों से उबर चुकी है। रिजर्व बैंक के कदमों पर रिपोर्ट में कहा गया, ‘जब तक महंगाई में कुछ ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होती, केंद्रीय बैंक जल्दबाजी में दरें बढ़ाने का कदम नहीं उठाना चाहता है।’ रिजर्व बैंक महंगाई की दर को चार फीसद पर सीमित रखने का लक्ष्य लेकर चलता है।

दिसंबर में आईआईपी के आंकड़ों में आई गिरावट
इंडस्ट्रीयल ग्रोथ की रफ्तार में दिसंबर महीने में कमजोरी दर्ज की गई है। दिसंबर में यह 7.1 फीसद के स्तर पर रही है जबकि नवंबर महीने में यह 8.4 फीसद रही थी। दिसंबर महीने में मैन्युफैक्चरिंग आउटपुट 8.4 फीसद के स्तर रही है जबकि नवंबर में यह 10.2 फीसद के स्तर पर रही थी।

वहीं, इलेक्ट्रीसिटी प्रोडक्शन 4.4 फीसद के स्तर पर रही है जो कि बीते महीने 3.9 फीसद के स्तर पर रही थी। इसी तरह माइनिंग आउटपुट 1.2 फीसद के स्तर पर रहा है जो कि नवंबर महीने में 1.1 फीसद पर रही थी। दिसंबर में प्राइमरी गुड़्स का आउटपुट 3.7 फीसद के स्तर पर रहा है जो कि नवंबर में 3.2 फीसद रहा था।

ट्रेन 18 और 20 दिल्ली-जयपुर-दिल्ली के बीच साल के अंत तक

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जयपुर। रेलवे साल के अंत तक हाईस्पीड ट्रेन से सफर का मौका दे सकता है। रेलवे ने इसे ‘ट्रेन 18’ और ‘ट्रेन 20’ नाम दिया है। इस साल जून तक ट्रेन 18 का एक सेट पटरी पर दौड़ने लगेगा। आईसीएफ के चीफ डिजाइन इंजीनियर श्रीनिवास ने बताया ट्रेन 18 शताब्दी को और ट्रेन 20 राजधानी को स्टेप वाइज रिप्लेस करेंगी।

2018 में लांचिंग के कारण इसे ट्रेन 18 नाम दिया गया है, जबकि ट्रेन 20 को 2020 तक लाने की तैयारी है। ट्रायल रन के दौरान इसकी गति 175 किलोमीटर/घंटा रही। हालांकि पटरी पर यह 160-170 किमी प्रतिघंटे दौड़ेगी। ट्रेन पूरी तरह स्टील की बनी होगी और पूरी तरह वाइब्रेशन लैस होगी।

ट्रेन 18 के पहले सेट को दिल्ली-जयपुर, आगरा और लखनऊ के बीच चलाया जा सकता है। फिलहाल रेल मंत्रालय ने इसके लिए 120 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं। 

प्रत्येक ट्रेन सेट में 6 मोटर कोच (इंजन) होंगे, जिसके इसे मेट्रो की तरह एक ही प्लेटफॉर्म से आगे और पीछे संचालित किया जा सकेगा। वहीं ट्रेन 20 का मोटर बनाने की जिम्मेदारी जापान, जर्मनी या फ्रांस की किसी कंपनी को देने की योजना बनाई जा रही है।

यह सहूलियतें होंगी ट्रेन में
ट्रेन 18’ पहली ऐसी ट्रेन होगी जिसमें 32 इंच के एलईडी टीवी लगाए जाएंगे। इसमें तेजस, हमसफर और स्वर्ण शताब्दी ट्रेनों की तरह सीटों के पीछे टच स्क्रीन डिस्प्ले सिस्टम नहीं होंगे।  

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले तीन साल लगभग 270 डिस्प्ले चोरी किए गए हैं। एक कोच में 32 इंच के चार एलईडी टीवी लगाए जाएंगे। इन पर फिल्में, संगीत आदि कार्यक्रम देखे जा सकेंगे।

कई मामलों में डिस्प्ले सिस्टम उखड़ नहीं पाया, तो एलसीडी स्क्रीन तोड़ देने की घटनाएं भी देखने को मिलीं। शुरूआत में फैसला किया गया कि स्क्रीन तोड़ने वाले यात्री पर सीट नंबर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। मगर मुकदमा और समय की बर्बादी को देखते हुए इसे वापस ले लिया गया।

अब NPA के नि‍यम हुए सख्‍त, RBI ने कई स्‍कीमों को लि‍या वापस

नई दि‍ल्‍ली। रि‍जर्व बैंक ऑफ इंडि‍या ने बैंकों में बढ़ते एनपीए से नि‍पटने के लि‍ए सख्‍त कदम उठाया है। आरबीआई ने बैड लोन रेजलूशन के लि‍ए नि‍यमों को सख्‍त करते हुए बड़े एनपीए नि‍पटाने के लि‍ए समय सीमा तय कर दी है। इसके तहत बैंकों को इन खातों को दि‍वालि‍या कार्यवाही के तौर मानना अनि‍वार्य हो जाएगा। इसके अलावा, आरबीआई ने SDR और S4A जैसी मौजूदा डेट रीस्‍ट्रक्‍चरिंग स्‍कीमों को भी वापस ले लि‍या है।

बड़े कर्ज मामलों का करें खुलासा
आरबीआई ने वि‍भि‍न्‍न रेजलूशन प्‍लांस की परि‍भाषा जारी की है और वि‍त्‍तीय दि‍क्‍कतों की सांकेति‍क लि‍स्‍ट दी है। साथ ही, बैंकों को निर्देश दि‍या है कि‍ वह चुनिंदा डि‍फाल्‍ट कर्जधारकों पर बने डाटा को आरबीआई के साथ प्रत्‍येक शु्क्रवार को शेयर कि‍या जाए। बड़े खाते ऐसे हैं जि‍नहें बैंकों ने रेजलूशन में डाल दि‍या है और उनहें रीस्‍ट्रक्‍चर्ड स्‍टैंडर्ड एसेट्स के तौर पर देखा जा रहा है।

180 दि‍न के भीतर लि‍या जाएगा फैसला
भारतीय बैंकों में इस वक्‍त 10 लाख करोड़ रुपए से ज्‍यादा फंसे कर्ज हैं। अगर कोई कंपनी दिवालिया हो चुकी है तो 180 दिन के भीतर उसे बंद करने का निर्णय भी लिया जा सकता है। इसके अलावा दूसरे जो एनपीए हैं उन पर भी 6 महीने के भीतर प्लान सौंपा जाएगा।

बिना आधार के नहीं कर पाएंगे 15 फरवरी से म्‍युचुअल फंड में निवेश

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नई दिल्‍ली। म्‍युचुअल फंड में 15 फरवरी से निवेश के लिए आधार देना जरूरी हो जाएगा। निवेशक सिर्फ 14 फरवरी तक ही बिना आधार के निवेश कर सकते हैं। बीएसई ने इस बात का सर्कुलर जारी कर दिया है। इस सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि म्‍युचुअल फंड में निवेश करने वालों को 31 मार्च 2018 तक अपना आधार लिंक कराना जरूरी है, नहीं तो उनका निवेश ब्‍लॉक कर दिया जाएगा। ऐसे निवेशक अपने निवेश को बिना आधार लिंक कराए निकाल नहीं सकेंगे।

सरकार ने नियमों को किया है संशोधन
सरकार ने पिछले साल जून में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉड्रिंग (मेन्‍टीनेंस ऑफ रिकॉर्ड) रूल्‍स में संशोधन किया है। इसके तहत सभी तरह म्‍युचुअल फंड, शेयर बाजार और बैंकों में आधार को लिंक कराना जरूरी हो गया है। इसके अनुसार अगर निवेशकों के म्‍युचुअल फंड में एक से ज्‍यादा फोर्टफोलिया (खाते) हैं तो सभी को अाधार से लिंक कराना जरूरी है।

BSE ने जारी किया सर्कुलर
BSE ने अपने सर्कुलर में साफ-साफ कहा है कि वर्तमान और 14 फरवरी तक निवेश करने वाले इन्‍वेस्‍टर अपने म्‍युचुअल फंड फोलियो में 31 मार्च 2018 तक आधार को लिंक करा लें। ऐसा न करने वालों के म्‍युचुअल फंड फोलियो को सीज कर दिया जाएगा। इसके बाद निवेशक इन फोलियो में कोई ट्रांजैक्‍शन नहीं कर पाएंगे। जब निवेशक अपना आधार म्‍युचुअल फंड फोलियो से लिंक करा लेंगे तभी वह फिर से ट्रांजैक्‍शन कर पाएंगे।

बाद में आधार देने वालों के अंतिम मौका
फाइनेंशियल एडवाइजर फर्म बीपीएन फिनकैप के डायरेक्‍टर एके निगम के अनुसार अगर किसी के पास अभी आधार नहीं है और वह बाद में देना चाहता है तो उसके लिए अभी मौका है। ऐसे निवेशक 14 फरवरी तक निवेश कर सकते हैं। यह निवेशक बाद में 31 मार्च तक अपना आधार इन फोलियो में लिंक करा सकते हैं।

हालांकि इन्‍होंने कहा कि सरकार ने पहले आधार लिंक कराने की अंतिम तिथि 31 दिसबंर 2017 तय की थी, जिस बाद में बढ़ाकर 31 मार्च 2018 किया गया था। ऐसे में अगर सरकार अपने फैसले में संशोधन करे तो ठीक हैं, नहीं तो निवेशकों को ऐसा करना जरूरी होगा।

6 करोड़ से ज्‍यादा हैं म्‍युचुअल फंड फोलियो
देशभर में म्‍युचुअल फंड में दिसबंर 2017 तक 66,486,373 फोलियो (खाते) थे। इन म्‍युचुअल फंड फोलियो में 62,539,805 रिटेल इंवेस्‍टर के थे। बाकी फोलियाे में से 3,546,756 हाई नेथवर्थ (HNI) और 399,812 संस्‍थागत निवेशकों के थे।

“वक्रांगी” सेबी की जांच के दायरे में, बाजार पूंजीकरण भी घटा

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मुंबई। वक्रांगी कंपनी संचालन से जुड़े मुद्दों की वजह से भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की जांच के दायरे में आ गई है। पिछले कुछ दिनों से बड़ी गिरावट के शिकार हुए वक्रांगी के शेयर में शुक्रवार को इस बार ऊपर का सर्किट लग गया। शुक्रवार को यह शेयर बीएसई में 182.80 पर खुला था और 5 प्रतिशत के सर्किट के साथ 202 पर बंद हुआ।

पिछले कई दिनों से गिरावट की वजह से इस शेयर में खरीदारों की दिलचस्पी लगभग समाप्त हो गई थी। गिरावट की वजह से कंपनी का बाजार पूंजीकरण भी 265 अरब रुपये कम होकर 251 अरब रुपये रह गया था। 2017 की पहली छमाही में कीमतों और कारोबार में छेड़छाड़ के लिए कंपनी भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की जांच के दायरे में आ गई है।

हालांकि सूचना-प्रौद्योगिकी क्षेत्र की इस कंपनी ने कहा कि उस पर लगे आरोप आधारहीन हैं। कंपनी ने कहा कि उसे बाजार नियामक या एक्सचेंजों की तरफ से कोई आधिकारिक संवाद प्राप्त नहीं हुआ है।

पीसी ज्वैलर भी सुधरने से पहले बड़ी गिरावट का शिकार हुई थी और वक्रांगी से जुड़े होने की वजह से इसमें कुछ ही दिनों में लगभग 26 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई। वक्रांगी ने 25 जनवरी को पीसी ज्वैलर में अपने 15 अरब रुपये के टे्रजरी फंड से 1.12 अरब रुपये निवेश किए थे।

नियामक की नजर में आने के अलावा वक्रांगी की ट्रेजरी निवेश नीतियों में अचानक बदलाव से भी बाजार का माथा ठनक गया। हाल के बदलाव से पहले इसके ट्रेजरी फंड का 70 प्रतिशत हिस्सा फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में जमा था, जबकि शेष रकम म्युचुअल फंडों और प्रत्यक्ष इक्विटी निवेश में थीे। कंपनी ने संकेत दिया था कि डायरेक्ट इक्विटी और प्राइवेट प्लेसमेंट फंड में कोई रकम निवेश नहीं की जाएगी।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कंपनी संचालन से जुड़े मुद्दों की वजह से वक्रांगी का बाजार मूल्यांकन प्रभावी होगा। वक्रांगी की अहमियत घटाने वाली बीऐंडके रिसर्च पहले कंपनी की वित्तीय और ग्रामीण क्षेत्रों में संभावनाओं को लेकर सकारात्मक थी। हालांकि अब कंपनी का कहना है कि वक्रांगी के कंपनी संचालन में सुधार का इसका आकलन मौजूदा परिवेश में सटीक नहीं बैठ रहा है, इसलिए उसने कंपनी की रेटिंग कम की है।

दूसरे बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वक्रांगी के कारोबार प्रारूप पर खतरा मंडरा सकता है। कंपनी का कारोबारी प्रारूप ग्रामीण ग्राहकों को ऑनलाइन सेवाओं के लिए एक्सेस पाइंट प्रदान काम करता है। विश्लेषकों की नजर में दूरसंचार और आईटी सुविधाएं तेजी से पहुंचने से कंपनी का एक्सेस पाइंट का महत्त्व कम हो सकता है।

दिसंबर तिमाही में वक्रांगी और पीसी ज्वैलर दोनों ने राजस्व में क्रमश: 80 प्रतिशत और 40 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की थी। साथ ही आलोच्य अवधि में इनके शुद्ध मुनाफे में भी करीब 80 प्रतिशत और 50 प्रतिशत तेजी आई थी। वित्तीय प्रदर्शन मजबूत रहा है, लेकिन अनिश्चितता और कंपनी संचालन से जुड़ी चिंताओं की वजह से विशेषज्ञ इन शेयरों से परहेज करने की सलाह दे रहे हैं।

फ्लाई ऐश पर कारोबारी कर रहे ऐश, फ्री के बजाय हो रही अवैध वसूली

कोटा। कोटा सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन से निकलने वाली गीली राख (बॉटम/वेट एश) पर अवैध कारोबारियों का कब्जा है। वह ब्रिक ब्लॉक टाइल्स (बीबीटी) उद्योगों को मुफ्त में दी जाने वाली इस राख को बेच हर महीने करोड़ों रुपए की वसूली कर रहे। थर्मल प्रशासन इसे रोकने के बजाय आंख मूंदे बैठा है।

कोटा थर्मल में कोयला जलने से हर रोज पांच हजार टन से ज्यादा फ्लाई एश उत्सर्जित होती है। इसमें से 80 फीसदी सूखी (ड्राई एश) और 20 फीसदी गीली एश होती है। थर्मल प्रशासन सूखी एश छह सीमेंट कंपनियों को बेचता है। जबकि वेट एश थर्मल प्लांट के 300 किमी दायरे में स्थापित बीबीटी उद्योगों और सरकारी निर्माण कार्यों में भराव आदि के लिए मुफ्त देने के आदेश हैं।

ड्राई एश इकट्ठा करने और प्लांट तक ले जाने के लिए सीमेंट कंपनियों ने थर्मल में 5 साइलो (पोन्ड) का निर्माण कराया है। सुरक्षा के लिए चौकीदार तैनात हैं, लेकिन मुफ्त में दी जाने वाली वेट एश को थर्मल प्रशासन 250 हेक्टेयर के खुली डाइक (पोन्ड) में फेंक देता है। इस पर अवैध कारोबारियों ने कब्जा जमा रखा है। मिली भगत के चलते थर्मल प्रशासन इस एश की निगरानी तक नहीं करता।

अवैध कारोबारियों ने इस एश डाइक पर न केवल कब्जा कर लिया, बल्कि निगरानी के लिए निजी स्तर पर चौकीदार तैनात कर दिए हैं। डंपरों में फ्लाई एश की लोडिंग के लिए अपने बुल्डोजर लगा रखे हैं। यही लोग बाकायदा दाम लेकर फ्लाईएश की सप्लाई करते हैं। बीबीटी इंडस्ट्रीज वालों को भी यह एश अवैध कारोबारियों को पैसा देकर लेनी पड़ती है। ये अवैध कारोबारी इससे करोड़ों की वसूली कर रहे हैं।

कोटा थर्मल के चीफ इंजीनियर एचबी गुप्ता का कहना है कि थर्मल प्रशासन की जिम्मेदारी वेट एश को प्लांट से ले जाकर न्यू एश डाइक में इकट्ठा करने की है। यहां से इसे बीबीटी उद्योगों को बांट दिया जाता है। इतनी बड़ी एश डाइक की सुरक्षा का खर्च थर्मल प्रशासन नहीं उठा सकता। यह मुफ्त में दी जाती है, इसलिए कौन और कितनी ले जा रहा है इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखते, ना ही ऐसी किसी निगरानी की कोई व्यवस्था है

वेट फ्लाईएश का उत्सर्जन
1500 टन प्रतिदिन केएसटीपीएस से वेट फ्लाईएश का उत्सर्जन
250 हेक्टेयर से ज्यादा

न्यू वेट फ्लाईएश पांड का क्षेत्रफल
02 लाख टन से ज्यादा पांड में पड़ी वेट फ्लाई एश
90 हजार टन केएसटीपीएस फ्लाईएश का स्टॉक 

डीएलसी रेट से होगी जमीन की रजिस्ट्री भी 10 फीसदी सस्ती

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जयपुर। प्रदेश में कृषि, कॉमर्शियल व इण्डस्ट्रियल जमीन की डीएलसी रेट में मुख्यमंत्री ने 10 फीसदी कमी करने की घोषणा की है। वहीं अगले एक साल 2018-19 में डीएलसी रेट नहीं बढ़ाने की राहत दी है। जमीन की डीएलसी रेट कम होने से अब रजिस्ट्री करवाना सस्ता हो गया है। डीएलसी व रजिस्ट्रेशन शुल्क कम करने से अब जमीन की रजिस्ट्री बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। जानिए और इस बारे में …

रियल एस्टेट पर मंदी की मार के बाद जमीनों के सौदे कम हो रहे थे। डीएलसी रेट ज्यादा होने के कारण ज्यादातर सौदे स्टांप पर एग्रीमेंट से ही हो रहे थे। इससे सरकार को स्टांप व पंजीयन शुल्क का टारगेट कम हुई है।

20 लाख की डीएलसी अब 18 लाख हुए
जमीन की रजिस्ट्री पर एक फीसदी व 3 लाख रुपए तक रजिस्ट्रेशन शुल्क लगता है। इसके साथ ही सामान्य के लिए 5 फीसदी, महिला को 4 फीसदी व एससी-एसटी को 3 फीसदी स्टांप ड्यूटी देनी होती है।

वहीं स्टांप ड्यूटी पर 20 फीसदी सरचार्ज लगता है। ऐसे में पहले 20 लाख कीमत (डीएलसी) के फ्लैट पर रजिस्ट्री के एक लाख 25 हजार रुपए देने होते थे, लेकिन अब 18 लाख की डीएलसी पर एक लाख 10 हजार रुपए देने होंगे। ऐसे में करीब 12 से 15 हजार का फायदा होगा।

रिंग रोड की अवाप्ति से किसानों को होगा नुकसान
डीएलसी रेट कम होने से जहां जमीन के दस्तावेज की रजिस्ट्री सस्ती हुई है वहीं सरकारी अवाप्ति के दायरे में आ रही जमीनों को नुकसान होगा। शहर की नॉर्थ रिंग रोड के लिए करीब 40 किमी लंबाई में आगरा रोड से दिल्ली रोड तक जमीन अवाप्त की जाएगी। अब इस जमीन की मुआवजा कम डीएलसी रेट से ही मिलेगा।