Saturday, July 18, 2026
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जौहरियों की मांग से सोना महंगा, जानिए क्या रहे दाम

नई दिल्ली/कोटा । दिल्ली सर्राफा बाजार में शनिवार को सोने की कीमतों में सुधार देखने को मिला। शनिवार के कारोबार में सोना 140 रुपए बढ़कर 31,500 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया। सोने की कीमतों में आई यह तेजी मजबूत वैश्विक संकेत और घरेलू बाजार में स्थानीय जौहरियों की ओर से तेज खरीदारी के चलते देखने को मिली है।

सोने की ही तरह चांदी में भी तेजी देखने को मिली है। चांदी भी शनिवार को 320 रुपए मजबूत होकर 39,530 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई। चांदी की कीमतों में तेजी की वजह औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की ओर से तेज उठान रही।

वहीं बुलियन व्यापारियों ने इसके लिए विदेशी बाजारों में सोने की कीमतों में बढ़ोतरी को जिम्मेदार ठहराया, क्योंकि डॉलर में कमजोरी ने सोने की मांग को सुरक्षित निवेश के रूप से सुरक्षित रखा है।

वैश्विक स्तर पर सिंगापुर में सोना 0.43 फीसद की तेजी के साथ 1322.60 औंस प्रति डॉलर और चांदी 0.27 फीसद की तेजी के साथ 16.51 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। इसके अलावा वेडिंग सीजन में सोने-चांदी की तेज मांग को पूरा करने के लिए स्थानीय ज्वैलर्स की ओर से की गई खरीदारी ने भी कीमतों को समर्थन दिया है।

राजधानी दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता वाला सोना 140 रुपए की तेजी के साथ 31,500 और 31,350 रुपए प्रति दस ग्राम के स्तर पर आ गया है।  इसके पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में सोने की कीमतों में 490 रुपए की गिरावट आई थी। हालांकि गिन्नी के भाव 24,800 रुपए प्रति पीस आठ ग्राम पर बरकरार रहे हैं।

कोटा सर्राफा
चांदी 39300 रुपये प्रति किलोग्राम।
सोना केटबरी 31450 रुपये प्रति दस ग्राम,  सोना 36680 रुपये प्रति तोला।
सोना शुद्ध 31600 रुपये प्रति दस ग्राम,  सोना 36860 रुपये प्रति तोला।

ITअफसरों का फ्रॉड, इन्फोसिस स्टाफ और फर्जी सीए से मिलकर लगाया चूना

बेंगलुरु। पंजाब नैशनल बैंक धोखाधड़ी में उसके कुछ अधिकारियों के शामिल होने की खबर अभी सुर्खियां बटोर ही रही हैं। इस बीच इनकम टैक्स डिपार्टमेंट में भी ऐसा ही मामला सामने आ गया है।

सीबीआई ‘रिवाइज्ड टैक्स रिटर्न्स’ से जुड़े एक फर्जीवाड़े की जांच कर रही है जिसमें इन्फोसिस टेक्नॉलजीज के कुछ अज्ञात कर्मचारी, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के कुछ अधिकारी और बेंगलुरु के एक फर्जी चार्टर्ड अकाउंटंट (सीए) की मिलीभगत सामने आ रही है।

में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इन्फोसिस के कर्मचारियों को फायदा पहुंचानेवाले इस फर्जीवाड़े का पता जनवरी महीने के आखिरी दिनों में लगाया था। FIR में कहा गया है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के कुछ अधिकारियों, इन्फोसिस के कुछ कर्मचारियों और एक फर्जी सीए की मिलीभगत से 1,010 रिवाइज्ड टैक्स रिटर्न्स फाइल किए गए।

इन्होंने तीन आकलन वर्षों (असेसमेंट इयर्स) में फर्जी दस्तावेजों के जरिए विभिन्न प्राइवेट कंपनियों के 250 करदाताओं के नाम रिवाइज्ड टैक्स रिटर्न्स फाइल करके अवैध तरीके से रिफंड्स क्लेम किए थे। चार्टर्ड अकाउंटंट्स की नियामकीय संस्था इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) ने इस फर्जीवाड़े में शामिल सीए को फर्जी करार दिया है।

गौरतलब है कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने ई-रिटर्न्स प्रोसेस करने का काम इन्फोसिस को ही दे रखा है। सीबीआई का कहना है कि जब फर्जी सीए नागेश शास्त्री रिटर्न्स फाइल कर रहा था, उस वक्त इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के कुछ अधिकारियों और इन्फोसिस के कुछ कर्मचारियों ने इन फर्जी रिटर्न्स को सिस्टम के रेडार से बचाने का काम किया और उन्हें स्वीकृति मिल गई। 

मामले में पहला आरोपी नागेश शास्त्री एसएसके असोसिएट्स का पार्टनर है जिसने सीपीसी एवं इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अज्ञात अधिकारियों और कुछ अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलीभगत से फर्जी रिटर्न्स फाइल किए और गलत जानकारियां भरकर 5 करोड़ रुपये का रिफंड क्लेम कर दिया।

एफआईआर के मुताबिक, ‘ई-रिटर्न्स की प्रोसेसिंग इन्फोसिस टेक्नॉलजीज लि. को आउटसोर्स की गई है जो थोक में रिटर्न्स को वैलिडेट करता है और जिन रिफंड्स क्लेम के अप्रूवल की जरूरत होती है, उसकी लिस्ट तैयार करता है। सीपीसी में कार्यरत आई-टी डिपार्टमेंट के असेसिंग ऑफिसरों ने असेसीज के बैंक अकाउंट्स में रिफंड्स रिलीज करने के अप्रूवल दे दिए।’

सीबीआई को जांच में पता चला है कि असेसमेंट सिस्टम रिवाइज्ड रिटर्न्स को टैग करता है और उनकी प्रोसेसिंग कर रहे लोगों के साथ-साथ असेसिंग ऑफिसरों भी का ध्यान आकर्षित करने के लिए पॉप-अप मेसेज देता रहता है।

एफआईआर कहती है, ‘प्रोसेसिंग के काम में लगे इन्फोसिस टेक्नॉलजीज के अज्ञात अधिकारियों और रिफंड्स क्लेम को अप्रूव करने के लिए अधिकृत आई-टी अधिकारियों ने शास्त्री की मिलीभगत से झूठी जानकारियों के आधार पर भरे गए इन रिवाइज्ड रिटर्न्स या दस्तावेजों को जानबूझकर अप्रूव कर दिया और इनकम टैक्स रिफंड जारी कर दिए।’

पीएनबी के बाद ओबीसी में सामने आया 390 करोड़ का घोटाला
दरअसल, शास्त्री पिछले कुछ वर्षों से प्राइवेट सेक्टर के कुछ वेतनभोगी कर्मचारियों को रिटर्न्स फाइल करने में मदद कर रहा था। इसलिए, उसे पास उनके यूजर आईडी और पासवर्ड्स पता था।

राजीव आवास योजना की जांच कराएगी मोदी सरकार

नई दिल्‍ली। मोदी सरकार ने यूपीए के कार्यकाल में शुरू हुई राजीव आवास योजना की जांच करने का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत बने व बन रहे 1 लाख से अधिक घरों की क्‍वालिटी की जांच की जाएगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए बनी सेंट्रल सेंक्‍शनिंग एंड मॉनिटरिंग कमेटी (सीएसएमसी) ने उन राज्‍यों को इसका पालन करने को कहा है, जहां राजीव आवास योजना के प्रोजेक्‍ट्स पूरे हो चुके हैं या प्रोजेक्‍ट्स चल रहे हैं।

क्‍या है राजीव आवास योजना ?
यूपीए सरकार ने पिछले कार्यकाल में स्‍लम फ्री इंडिया मिशन शुरू किया था, जिसका मकसद साल 2022 तक देश को स्‍लम फ्री बनाना था। इस मिशन के तहत राजीव आवास योजना शुरू की गई थी। मोदी सरकार बनने के बाद इस योजना को प्रधानमंत्री आवास योजना के साथ मर्ज कर दिया गया

क्‍या है प्रोग्रेस रिपोर्ट ? 
मिनिस्‍ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स की ताजा रिपोर्ट बताती है कि राजीव आवास योजना के तहत राज्‍यों में 162 प्रोजेक्‍ट्स चल रहे हैं। इनमें 1 लाख 17 हजार 707 घर बनाने की मंजूरी दी गई। इसमें से 46611 घर बन चुके हैं। लगभग 26234 घरों में लोग रहने भी लगे हैं। 44225 घर बन रहे हैं। 26871 घर बनाने का काम अभी शुरू होना है।

क्‍यों दिए जांच के आदेश ?
प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए गठित सेंट्रल सेंक्‍शनिंग एंड मॉनिटरिंग कमेटी (सीएसएमसी) की 30 वीं मीटिंग में पाया गया कि कई राज्‍यों और यूटी में अभी तक थर्ड पार्टी क्‍वालिटी एंड मॉनिटरिंग एजेंसी नियुक्‍त नहीं की गई है।

इसलिए सेंट्रल कमेटी ने राज्‍यों से कहा कि वे जल्‍द से जल्‍द अपने राज्‍य में एजेंसी नियुक्‍त कर लें। जो न केवल प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रोजेक्‍ट्स की मॉनिटरिंग के साथ-साथ क्‍वालिटी जांच करें, बल्कि इस एजेंसी से राजीव आवास योजना के प्रोजेक्‍ट्स की क्‍वालिटी टेस्‍ट और मॉनिटरिंग भी कराई जाए।

दो करोड़ घरों का टारगेट
प्रधानमंत्री आवास योजना (अर्बन) के तहत देश भर में दो करोड़ घर बनाने का लक्ष्‍य है। यह घर 2022 तक बनाए जाने हैं। मिनिस्‍ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स को यह जिम्‍मेवारी सौंपी गई है।

इसी योजना में राजीव आवास योजना को भी शामिल कर लिया गया है। मिनिस्‍ट्री की रिपोर्ट बताती है कि पीएमएवाई के तहत लगभग 3 लाख 19 हजार घर बन चुके हैं, जिसमें राजीव आवास योजना के तहत बने घर भी शामिल हैं।

PNB फ्रॉड :नीरव मोदी और मेहुल चोस्‍की के खिलाफ गैर जमानती वारंट

नई दिल्‍ली। मुंबई की स्‍पेशल पीएमएलए कोर्ट ने पीएनबी फ्रॉड मामले में नीरव मोदी और मेहुल चोस्‍की के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया है। इससे पहले एनफोर्समेंट डायरेक्‍टोरेट (ईडी) नीरव मोदी ओर उनकी कंपनी की अचल संपत्ति को अटैच कर चुका है।

नीरव मोदी ने जांच में सहयोग से मना किया
इससे पहले सीबीआई ने नीरव मोदी को नोटिस जारी कर पेश होने को कहा था। लेकिन उसने जांच में सहयोग करने से मना कर दिया। उसने कहा कि वह अपनी कारोबारी व्‍यस्‍तता के चलते अभी नहीं आ सकता है।

सीबीआई ने मोदी को अगले हफ्ते जांच के लिए बुलाया था
सीबीआई ने नीरव मोदी को अगले हफ्ते जांच के लिए बुलाया था। सीबीआई ने अपने लेटर में कहा था कि जहां भी हों वहां के दूतावास से संपर्क करें, जिससे जांच के लिए भारत लाने की व्‍यवस्‍था की जा सके। सीबीआई का कहना है कि जांच के लिए लिए जिसे बुुलाया जाए उसका अाना जरूरी होता है।

बैंक के ऑडिटर गिरफ्तार
सीबीआई ने इस बीच पीएनबी के ऑडिटर एम के शर्मा को गिरफ्तार कर लिया है। यह बैंक में चीफ मैनेजर रैंक 4 के अधिकारी हैं। इस जांच में किसी ऑडिटर की पहली गिरफ्तारी है। इन्‍हीं ऑडिटर के पास फ्रॉड में शामिल ब्रांच की ऑडिट की जिम्‍मेदारी थी। इनको अगर ऑडिट में कुछ गड़बड़ मिलता तो इनको उसकी रिपोर्ट जोनल कार्यालय में करनी थी।

GST रिकॉर्ड ठीक नहीं तो लगेगी पेनल्टी, 1 अप्रैल से पहले कर लें यह काम

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कोटा। कारोबारी और ट्रेडर्स 1 अप्रैल से पहले अपना जीएसटी रिकॉर्ड और रिटर्न फाइलिंग का पैटर्न ठीक कर लें, नहीं तो आगे उन्हें परेशानी हो सकती है। सरकार पहले ही कह चुकी है कि 1 अप्रैल से उनका रिटर्न फाइलिंग का जीएसटी सिस्टम समय अनुसार काम करेगा और तब समय पर रिटर्न फाइल नहां करने पर कारोबारियों को जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। ऐसे में कारोबारी पेंडिंग रिटर्न और मार्च महीने की रिटर्न समय पर फाइल कर दें।

अपना रिकॉर्ड करें ठीक
टैक्स एक्सपर्ट अनिल काला ने LEN-DEN NEWS को कहा कि कारोबारी और ट्रेडर्स मार्च तक अपनी पेंडिंग रिटर्न भर लें और मार्च से पहले अपना ट्रैक रिकॉर्ड ठीक कर लें। सरकार का टारगेट था कि जीएसटी सिस्टम को 1 अप्रैल 2018 तक रेगुलर करेगी यानी सभी रिटर्न अपनी डेडलाइन वाले समय पर मंथली जाएगी।

1 अप्रैल के बाद से रिटर्न देर से फाइल करने पर कारोबारियों को लेट फीस चार्ज भी देना पड़ेगा। ऐसे में कारोबारी अपनी पिछली पुरानी पेंडिंग रिटर्न भर दें और मार्च की रिटर्न भी समय पर फाइल कर दें। ताकि, 1 अप्रैल से कारोबारी किसी भी परेशानी में न फंसे।

मार्च में जाएंगी ये रिटर्न
मार्च में जनवरी 2018 की जीएसटीआर-1 रिटर्न जाएगी जिसकी डेडलाइन 10 मार्च 2018 तक है। 31 मार्च 2018 तक जुलाई 2017 से फरवरी 2018 तक जीएसटीआर-6 रिटर्न फाइल करनी है।

जीएसटीआर-6 इन्पुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर को भरनी है, जिसमें इन्पुट टैक्स क्रेडिट रिसीवड की जानकारी होगी। ये जीएसटीआर रिटर्न सभी कारोबारियों और ट्रेडर्स को भरनी होगी क्योंकि ज्यादतर सभी इन्पुट टैक्स क्रेडिट रिसीव करते हैं।

1.50 करोड़ रुपए तक टर्नओवर वाले कारोबारी जिन्होंने कंपोजिशन स्कीम ली है और जिन्होंने नहीं ली है वह अपनी पेंडिंग रिटर्न फाइल कर दे।

यहां से डाउनलोड कर सकते हैं जीएसटीआर फॉर्म
कारोबारी और ट्रेडर्स इस लिंक https://www.gst.gov.in/download/returns पर क्लिक करके जीएसटीआर रिटर्न के फॉर्म और ऑफलाइन टूल डाउनलोड कर सकते हैं। ये एक तरह की जिप फाइल है जिसमें रिटर्न फॉर्मेट से लेकर इन्वॉयस की ऐक्सल शीट भी है।

पोर्टल पर रिटर्न और बिल बनाने का है ऑफलाइन टूल
जीएसटी के पोर्टल पर जीएसटी सॉफ्टवेयर टूल है जिसे कारोबारी अपने कंप्यूटर पर डाउनलोड कर सकते हैं। ये सॉफ्टवेयर टूल एक्सल फॉरमेट और जावा स्क्रिप्ट में है। इस एक्सल फॉरमेट पर आप अपने बिल बना सकते हैं। बिल की जानकारी एक्सेल शीट में सेव करके इसे ही जीएसटी के पोर्टल पर रिटर्न के साथ अपलोड कर सकते हैं।

ऑफलाइन टूल की जिप फाइल में मिलेंगी ये डिटेल्स
– जीएसटी ऑफलाइन टूल
– सेक्शन वाइज सीएसवी फाइल्स]
– जीएसटीआर ऐक्सल वर्कबुक टेम्पलेट
– यूजर मैनुअल
– टैक्सपेयर्स के सवालों के जवाब भी इसमें हैं।
– टैक्सपेयर्स को जीएसटी ऑफलाइन टूल पर डबल क्लिक कर अपने कंप्यूटर सिस्टम पर डाउनलोड करना होगा।
कंप्यूटर सिस्टम पर ये होना है जरूरी

ऑफलाइन टूल डाउनलोड करने के लिए आपके सिस्टम पर ये सिस्टम इन्स्टॉल होने जरूरी है।
– विंडो 7
– इंटरनेट एक्सप्लोरर 10+, गुगल क्रोम 49+
– माइक्रोसॉफ्ट ऐक्सेल 2007

जीएसटी के पोर्टल पर ऐसे अपलोड होगी रिटर्न
टैक्सपेयर्स को https://www.gst.gov.in/ पर लॉग इन करना होगा। वेबसाइट पर सर्विस के ऑप्शन पर क्लिक करें। सर्विस के नीचे ‘रिटर्न’ का ऑप्शन आएगा। इस पर क्लिक करें। सिस्टम आपसे आपका यूजर नाम और पासवर्ड मांगेगा। इसमें आप अपना यूजर नाम और पासवर्ड भरें। अपने जीएसटीआर रिटर्न को अपलोड कर दें।

बैंक स्टाफ की मिलीभगत से दक्षिण में 49% मामलों में फर्जीवाड़ा

बेंगलुरु। पंजाब नैशनल बैंक में घोटाला उजागर होने के बाद जो बातें सामने आ रही हैं उनमें सबसे चौंकानेवाली बात यह है कि सालों से हो रहे विभिन्न फर्जीवाड़ों में सरकारी बैंकों के अधिकारी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के आंकड़ों की गहन छानबीन की है, जिनमें विभिन्न राज्यों में स्टाफ की मिलीभगत से हुई धोखाधड़ी के मामलों और इनसे हुए नुकसान की रकम का रेकॉर्ड है।

अप्रैल 2013 से जून 2016 के आंकड़े बताते हैं कि बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से एक लाख रुपये या इससे ज्यादा रुपये की धोखाधड़ी के कुल 1,232 मामलों में 2,450 करोड़ रुपये का चूना लगा है। आरबीआई अभी तिमाही आधार पर राज्यवार आंकड़ा तैयार कर रहा है। इनमें कुल मामलों का 49% यानी 609 मामले दक्षिणी राज्यों के हैं।

हालांकि, ऐसे अपराध में बैंकों को हुए नुकसान की कुल रकम का महज 19% यानी 462 करोड़ रुपये ही इनके हिस्से आए हैं। तुलनात्मक रूप से राजस्थान में कर्मचारियों की मिलीभगत से हुए बैंकिंग फर्जीवाड़े का प्रतिशत तो सिर्फ 3 (38 मामले) है, लेकिन यहां 44% रकम यानी 1,096 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र में बैंक कर्मचारियों के फर्जीवाड़े में शामिल होने के सबसे ज्यादा मामले सामने आए हैं जबकि राजस्थान, चंडीगढ़, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में बैंकों को सबसे ज्यादा (कुल नुकसान का 70%) चूना लगा है।

दुनिया के 500 सबसे धनी शख्सियतों ने खो दिए 8345 अरब रुपये

नई दिल्ली। दुनिया के 500 सबसे धनी शख्सियतों ने इस सप्ताह करीब 83.45 खरब रुपये (128 अरब डॉलर) गंवा दिए। यह रकम नेटफ्ल्किस या मैकडॉनल्ड कॉर्प के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन के बराबर है। दुनियाभर के बाजार में आई गिरावट के सबसे बड़े भुक्तभोगी बर्किशियर हैथवे के चेयरमैन वॉरन बफेट बने। सोमवार से वॉरन बफेट की संपत्ति में करीब 243 अरब रुपये (3.74 अरब डॉलर) का बट्टा लग चुका है।

संपत्ति गंवानेवालों में फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्ग दूसरे नंबर पर रहे जिन्हें पिछले सोमवार से शुक्रवार के दौरान करीब 241 अरब रुपये (3.71अरब डॉलर) का झटका लगा। सोमवार को शेयर मार्केट खुलने के बाद से गूगल की पैरंट कंपनी ऐल्फाबेट इंक के लैरी पेज और सर्गेई बिन ने क्रमशः करीब 202 अरब रुपये (3.1 अरब डॉलर) और करीब 195 अरब रुपये (3 अरब डॉलर) खो दिए।

उनके बाद स्पेन के अमांसियो ऑर्टेगा का नंबर आता है जिनकी संपत्ति 162 अरब रुपये (2.5 अरब डॉलर) घट गई जबकि मेक्सिको के कार्लोस स्लिम को भी करीब-करीब इतनी रकम का ही चूना लगा। वहीं, चीन की दिग्गज हस्तियों को करीब 912 अरब रुपये ( 14 अरब डॉलर) का झटका लगा।

दरअसल, गुरुवार को एसऐंडपी 500 1.3 प्रतिशत टूट गया और लगातार तीन दिनों की कुल गिरावट बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गई। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ट्रेड वॉर की धमकी दी तो अगले ही दिन डॉ जोन्स पर इंडस्ट्रियल ऐवरेज में 420 पॉइंट्स की गिरावट आ गई, जिसका नतीजा दुनियाभर के दिग्गज उद्योगपतियों को भुगतना पड़ा।

सरकारी बैंकों की 165 में से 35 विदेशी शाखाएं बंद

नई दिल्ली। सरकारी बैंक ने विदेशों में 35 शाखाएं और प्रतिनिधि कार्यालय बंद कर दिये हैं। बैंकों के कामकाज को तर्कसंगत और जिम्मेदार बनाने के क्रम में यह कदम उठाया गया है। पिछले साल नवंबर में हुए पीएसबी मंथन में तय एजेंडा के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को विदेशों में अपने सभी 216 कार्यालयों और शाखाओं की समीक्षा करनी है।

पीएनबी में पिछले दिनों 12 हजार 700 करोड़ रुपये का घोटाला सामने आने के बाद बैंकों की यह पहल और अहम हो गई है। सूत्रों के अनुसार बैंक ऑफ इंडिया, आंध्रा बैंक, आइडीबीआइ बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक ने दुबई में अपना कारोबार समेट लिया है जबकि पीएनबी, केनरा बैंक और यूनियन बैंक ने शंघाई कार्यालय बंद किये हैं।

बैंक ऑफ इंडिया ने यंगून और बोत्सवाना में भी कारोबार समेट लिया है जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन ओवरसीज बैंक ने हांगकांग शाखाएं बंद की हैं। इसके अलावा बैंक ने कई प्रतिनिधि कार्यालय भी बंद किये हैं। जनवरी के अंत में सरकारी बैंकों की विदेश में 165 शाखाएं थीं।

इसके अलावा संयुक्त उपक्रम और प्रतिनिधि कार्यालय भी हैं। भारतीय स्टेट बैंक की सबसे ज्यादा 52 शाखाएं हैं। जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा की 50 और बैंक ऑफ इंडिया की 29 शाखाएं हैं। एसबीआइ की ब्रिटेन में 32, हांगकांग व संयुक्त अरब अमीरात में 13-13 और सिंगापुर में 12 शाखाएं हैं।

KYC प्रक्रिया में अटके ई-वॉलिट ग्राहक

नई दिल्ली। भारत की मोबाइल वॉलिट कंपनियों को इन दिनों ग्राहकों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। इसके पीछे की वजह प्रीपेड ई-वॉलिट्स में नो योर कस्टमर (KYC) प्रक्रिया को पूरा करने की बाध्यता है।

बता दें कि जिन लोगों ने इस प्रक्रिया को पूरा करने की आखिरी तारीख (28 फरवरी, 2018) तक अपना फुल केवाईसी अपडेट नहीं किया था, उन्हें ई-वॉलिट्स के इस्तेमाल में दिक्कत आ रही है। इससे पहले ई-वॉलिट्स कंपनियां सिर्फ मोबाइल नंबर वेरीफाई करके काम चला रही थीं।

मगर अब KYC के लिए प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट अकाउंट को आधार से जोड़ना जरूरी है। इंडस्ट्री एग्जिक्युटिव्स के अनुमान के मुताबिक, देशभर में मोबाइल वॉलिट का इस्तेमाल करने वाले 10 ग्राहकों में से 8 ने अभी तक KYC प्रक्रिया को पूरा नहीं किया है।

ऐसे में अपने ग्राहकों से KYC प्रक्रिया पूरी करवाकर उन्हें अपनी सेवाओं से जोड़े रखने का काम ई-वॉलिट कंपनियों के लिए आसान नजर नहीं आ रहा। इन कंपनियों के ग्राहकों की शिकायत है कि छोटी सी राशि ट्रांसफर करने के लिए उनसे इतने ज्यादा डिटेल्स साझा करने को क्यों कहा जा रहा है।

बता दें कि पेटीएम, मोवीक्विक, ओला मनी और फ्रीचार्ज जैसे ई-वॉलिट के जिन ग्राहकों ने KYC प्रक्रिया पूरी नहीं की, उन्हें गुरुवार से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस बीच पेटीएम के कुछ यूजर जब अपने वॉलिट रीचार्ज कर रहे हैं तो रीचार्ज की राशि सीधे उनके वॉलिट में न आकर गिफ्ट वाउचर्स के रूप में आ रही है।

बता दें कि गिफ्ट वाउचर्स को सिर्फ पेटीएम पेमेंट लेने वाली मर्चेंट लोकेशन्स पर ही इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा कुछ पेटीएम यूजर्स को वॉलिट रीचार्ज के वक्त एरर मेसेज दिख रहा है।

US में नीरव मोदी की तीन कंपनियों ने दी दिवाला अर्जी

न्यूयार्क।  नीरव मोदी की तीन कंपनियों द्वारा यहां दायर दिवालिया अर्जी में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) का ऋणदाता के रूप में कोई उल्लेख नहीं किया गया है। गौरतलब है कि सरकारी बैंक पीएनबी में हुए 2 अरब डॉलर के घोटाले का नीरव मोदी मुख्य आरोपी है।

नीरव मोदी की कंपनियों द्वारा दाखिल दिवालिया अर्जी के दस्तावेजों में केवल एचएसबीसी और इजरायल डिस्काउंट बैंक (आईडीबी) बैंक का ऋणदाता के रूप में उल्लेख है, जिनका कुल 2 करोड़ डॉलर दो कंपनियों पर बकाया है। आईडीबी से ऋण लेने के लिए मोदी ने निजी गारंटी प्रदान की थी, साथ ही दो अन्य कंपनियों ने भी गारंटी प्रदान की थी।

हालांकि, नीरव मोदी की इन तीन कंपनियों द्वारा अमेरिकी में दाखिल दिवालिया अर्जी अगर मंजूर हो जाती है तो पीएनबी को इन कंपनियों से अपने ऋण की वसूली में बाधाएं खड़ी हो जाएगी।

क्योंकि दिवालिएपन के मामले में दाखिल करने से कर्जदार और देनदार की संपत्ति के खिलाफ स्वचालित रूप से कर्ज की वसूली और कर्जदार की संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने पर रोक लग जाती है।

दिवालिया दस्तावेजों में कहा गया है, ‘अगर आप अपने कर्ज की वसूली की कोशिश करते हैं या कोई अन्य कार्रवाई करते हैं तो यह दिवालिया संहिता का उल्लंघन होगा और आपको इसके लिए दंडित किया जा सकता है।’

नीरव मोदी की तीन कंपनियों – फायरस्टार डायमंड इंक (एफडीआई), फैंटेसी इंक (एफआई), और ए जेफे इंक (एजेआई) ने अमेरिका के दक्षिणी न्यूयार्क दिवालिया अदालत में दिवालिया होने की याचिका दाखिल की है।