वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच अमेरिका और इराक ने करीब 60 अरब डॉलर के बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों का सबसे अहम मकसद तेल और गैस की आपूर्ति के लिए नए रास्ते तैयार करना है, ताकि दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति केवल होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर न रहे।
अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स में हुए इस समझौते में ऊर्जा के अलावा स्वास्थ्य, संचार और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े निवेश भी शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ये परियोजनाएं समय पर पूरी होती हैं, तो वैश्विक तेल बाजार को एक नया और सुरक्षित विकल्प मिल सकता है।
दुनिया के समुद्री तेल कारोबार का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। ऐसे में जब भी इस इलाके में तनाव बढ़ता है, पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बाद होर्मुज मार्ग प्रभावित है। इसी वजह से अब अमेरिका और उसके सहयोगी देश ऐसे वैकल्पिक रास्ते तैयार करना चाहते हैं, जिनसे तेल की आपूर्ति बिना रुकावट जारी रह सके।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि नई पाइपलाइन बनाना आसान नहीं होगा। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, एक देश के भीतर पाइपलाइन बनाने में ही करीब ढाई साल लग सकते हैं। कई देशों से होकर गुजरने वाली पाइपलाइन परियोजनाओं को पूरा होने में इससे भी अधिक समय लग सकता है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आई है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की कीमत करीब 88 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि युद्ध शुरू होने से पहले यह लगभग 67 डॉलर प्रति बैरल थी। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में तनाव बना रहेगा, तब तक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
इराक ने अमेरिकी कंपनियों को दिया निवेश का न्योता
इराकी प्रधानमंत्री अली फलाह अल जैदी ने अमेरिकी ऊर्जा कंपनियों से देश में निवेश बढ़ाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि इराक केवल ठेकेदार नहीं, बल्कि लंबे समय तक साथ निभाने वाले निवेश साझेदार चाहता है। इसी कड़ी में अमेरिकी ऊर्जा कंपनी शेवरॉन ने इराक सरकार के साथ तीन अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें दो परियोजनाएं तेल उत्पादन बढ़ाने से जुड़ी हैं, जबकि तीसरी परियोजना नई निर्यात पाइपलाइन विकसित करने पर केंद्रित है।
डील से जुड़ी पांच बड़ी बातें
- अमेरिका और इराक के बीच करीब 60 अरब डॉलर के समझौते।
- नई पाइपलाइन के जरिए तेल आपूर्ति के वैकल्पिक रास्तों पर काम।
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम करने की कोशिश।
- शेवरॉन समेत कई अमेरिकी कंपनियों का बड़ा निवेश।
- वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और तेल बाजार पर पड़ सकता है बड़ा असर।
कैसे बदलेगा वैश्विक ऊर्जा कारोबार?
नई पाइपलाइन परियोजनाओं का मकसद इराक, सीरिया और तुर्किये के रास्ते तेल को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है। अगर ये योजनाएं सफल होती हैं, तो होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता कम होगी और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पहले से ज्यादा सुरक्षित हो सकेगी। गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि वर्ष 2028 तक प्रस्तावित पाइपलाइनें होर्मुज से गुजरने वाले तेल का बड़ा हिस्सा संभालने में सक्षम हो सकती हैं।

