गैर प्रतिस्पर्धी कीमतों के कारण भारत के सोयामील निर्यात में भारी गिरावट

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मुम्बई। घरेलू थोक मंडियों में सोयाबीन का भाव काफी ऊंचा एवं तेज रहने से सोयामील का लागत खर्च बहुत बढ़ गया है जिससे इसका निर्यात ऑफर मूल्य अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अन्य प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों- अर्जेन्टीना, ब्राजील एवं अमरीका की तुलना में गैर प्रतिस्पर्धी तथा अनाकर्षक हो गया है।

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2026 में देश से 62,844 टन सोया डीओसी का निर्यात हो सका जो अप्रैल 2025 के शिपमेंट 2,30,743 टन से काफी कम रहा। भारतीय बंदरगाहों पर सोयाबीन मील का फ्री ऑन बोर्ड औसत इकाई निर्यात ऑफर मूल्य लगातार बढ़ता जा रहा है।

अप्रैल 2026 में वह 477 डॉलर प्रति टन था जो मई में बढ़कर 594 डॉलर प्रति टन तथा जून 2026 में उछलकर 621 डॉलर प्रति टन की ऊंचाई पर पहुंच गया। अन्य प्रतिद्वंदी आपूर्तिकर्त्ता देशों की तुलना में भारतीय सोयामील का निर्यात ऑफर मूल्य करीब 190 डॉलर प्रति टन ऊंचा चल रहा है जो आयातकों के लिए बड़ा अंतर है।

भारत में गैर जीएम सोयाबीन एवं सोयामील का उत्पादन होता है इसलिए इसका ऑफर मूल्य अन्य निर्यातक देशों की तुलना में ऊंचा रहता है। यदि मूल्यान्तर 50 से 100 डॉलर प्रति टन तक रहता है तो आयातक इसकी खरीद में दिलचस्पी दिखाते हैं लेकिन जब यह अंतर बढ़कर 150-200 डॉलर प्रति टन पर पहुंचता है तब खासकर दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में इसका आकर्षण घट जाता है और फलस्वरूप निर्यात प्रभावित होने लगता है।