Saturday, July 25, 2026
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करदाता 30 अप्रैल तक दाखिल कर सकते हैं ट्रांजिशनल क्रेडिट फॉर्म

नई दिल्ली । वो करदाता जो कि जीएसटीएन पोर्टल पर तकनीकी खामी के कारण ट्रांजिशनल क्रेडिट फॉर्म ट्रेन-1 नहीं भर पाए थे वो अब 30 अप्रैल तक इसे भर सकते हैं। यह जानकारी केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने दी है। हालांकि इन करदाताओं को ट्रांजिशनल क्रेडिट फॉर्म में उस राशि को संशोधित करने की अनुमति नहीं होगी, जिसे उन्होंने फॉर्म फिल करने के दौरान दर्ज किया था।

मंत्रालय ने बताया कि करदाता बड़ी संख्या में ट्रेन-1 फॉर्म को भरकर प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाए थे, क्योंकि वो आईटी संबंधी खामियों के चलते इसे नहीं कर सके थे। साथ ही मंत्रालय ने यह भी कहा कि जीएसटीएन कुछ ऐसे ही करदाताओं की इलेक्ट्रॉनिक ऑडिट ट्रायल के जरिए पहचान करेगी।

मंत्रालय की ओर से जारी किए गए सर्कुलर में कहा गया, “यह फैसला लिया गया है कि ऐसे करदाता जिन्होंने कोशिश की लेकिन तकनीकी खामी के कारण ट्रेन-1 प्रक्रिया को 27 दिसंबर 2017 या फिर उससे पहले पूरा करने में सक्षम नहीं थे उन्हें ट्रेन-1 फाइलिंग को पूरा करने की सुविधा प्रदान की जाएगी।”

इसमें आगे कहा गया कि अगर जरूरत पड़ी तो जीएसटीएन केंद्र और राज्य को फील्ड फॉर्मेशन के लिए कह सकता है ताकि अतिरिक्त दस्तावेज और डेटा को कलेक्ट किया जा सके या फिर इसके सत्यापन के जरिए उन करदाताओं की पहचान की जा सके जिन्हें यह सुविधा दी जानी चाहिए। अब ऐसे करदाताओं को 30 अप्रैल तक इस प्रक्रिया को पूरा करना होगा।

ट्रेड वॉर: चीन का पलटवार, अमेरिकी उत्पादों पर 25% शुल्क लगाने का फैसला

पेइचिंग। चीन ने बुधवार को जवाबी कार्रवाई करते हुए 50 अरब डॉलर मूल्य के 106 अमेरिकी उत्पादों के आयात पर 25% शुल्क लगाने का फैसला किया। इन उत्पादों में विमान और कार शामिल हैं। अमेरिका और चीन के बीच एक दूसरे के खिलाफ शुल्क लगाये जाने को दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में ट्रेड वॉर के तौर पर देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि मंगलवार को ट्रंप प्रशासन ने करीब 1,300 चीनी उत्पादों की सूची जारी की जिस पर शुल्क लगाया जा सकता है। अमेरिका ने चीन से 50 अरब डॉलर की इन वस्तुओं के आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है। चीन के वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि स्टेट काउंसिल के चीनी कस्टम टैरिफ कमीशन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए 50 अरब डॉलर मूल्य की आयातित 106 जिंसों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया है।

इसमें कहा गया है कि क्रियान्वयन की तारीख इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिकी सरकार कब चीनी उत्पादों पर शुल्क लगाती है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने आज कहा, ‘चीन के कड़े विरोध को दरकिनार करते हुए अमेरिका ने शुल्क लगाने का प्रस्ताव किया है। यह पूरी तरह बेमतलब, एकतरफा और संरक्षणवादी गतिविधियां हैं। चीन पुरजोर तरीके से इसकी निंदा और विरोध करता है।’

बयान के अनुसार यह कदम चीन, अमेरिका और वैश्विक अर्थव्यवस्था के हित के खिलाफ है साथ ही विश्व व्यापार संगठन के मूल सिद्धांतों तथा भावना के खिलाफ है। अमेरिकी की 50 अरब डालर मूल्य की चीनी वस्तुओं पर शुल्क लगाने की योजना है। उसने सॉफ्टवेयर, पेटेंट और अन्य प्रौद्योगिकी समेत व्यापार गोपनीयता कथित रूप से चुराने को लेकर चीन को दंडित करने के इरादे से यह कदम उठाया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप चीन से 375 अरब डॉलर के व्यापार घाटे में करीब एक महीने में 100 अरब डॉलर की कमी लाने की मांग कर रहे हैं। अमेरिका के इस कदम को दुनिया के दो देशों के बीच व्यापार युद्ध की आशंका बढ़ने के तौर पर देखा जा रहा है।

ट्रेड वार से 500 अंक टूटा सेंसेक्स, निफ्टी 10150 से नीचे

नई दिल्ली। ट्रेड वार बढ़ने के डर से दुनिया के बड़े बाजारों में गिरावट बढ़ गया है। इसी के असर से घरेलू मार्केट में तेज गिरावट आ गई हे। कारोबार के अंत में सेंसेक्स ऊपरी स्तरों से करीब 500 अंक टूटकर 33019 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी भी 116 अंक कमजोर होकर 10150 के स्तर से नीचे आ गया है।

चीन ने यूएस के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए 106 प्रोडक्ट पर अतिरिक्त 25 फीसदी ड्यूटी लगाने का एलान किया है। जिसके बाद हैंगसेंग में 500 अंकों की गिरावट आ गई। वहीं, डाओ फ्यूचर्स में 285 अंकों की गिरावट है। सुबह ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ खुले थे।

दुनियाभर के बाजारों में दबाव
आज के कारोबार में ट्रेड वार बढ़ने के डर से दुनियाभर के बाजारों में दबाव दिख रहा है। हैंगसेंग में 661 अंकों की गिरावट है, वहीं, KOSPI में 34 अंकों, स्ट्रेट टाइम्स में 65 अंक, FTSE में 34 अंक, CAC40 में 37 अंक और DAX में 144 अंकों की गिरावट है।

ब्याज दरों पर फैसले से पहले निवेशक सतर्क
आरबीआई की पॉलिसी मीटिंग 4 से 5 अप्रैल को हो रही है। पॉलिसी मीटिंग के चलते निवेशक मार्केट को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं। ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि आरबीआई ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं करेगा। जबकि इंडस्ट्री की डिमांड है कि महंगाई कम होने की वजह से दरों में राहत मिले। असल में एक्सपर्ट्स और खुद आरबीआई को लगता है कि महंगाई में कमी टेम्परेरी है, आगे क्रूड की महंगी कीमतों से महंगाई दर 5 फीसदी से ऊपर रह सकती है।

ऑटो को छोड़कर सभी इंडेक्स लाल निशान में
कारोबार के दौरान निफ्टी पर ऑटो इंडेक्स को छोड़कर सभी इंडेक्स लाल निशान में चले गए हैं। ऑटो इंडेक्स में 0.60 फीसदी तेजी है। वहीं, पीएसयू बैंक इंडेक्स में 1.69 फीसदी, प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 1.52 फीसदी, फार्मा इंडेक्स में 1.01 फीसदी, निफ्टी बैंक इंडेक्स में 1.55 फीसदी, एफएमसीजी इंडेक्स में 0.22 फीसदी, आईटी इंडेक्स में 0.99 फीसदी, मेटल इंडेक्स में 2.57 फीसदी गिरावट है।

मिडकैप में सुबह अच्छी तेजी
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीददारी देखी जा रही है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.4 फीसदी बढ़ा है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 50 इंडेक्स में 0.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5 फीसदी बढ़त देखी जा रही है।

किन शेयरों में तेजी, किनमें गिरावट
बाजार में कारोबार के इस दौरान टाटा मोटर्स डीवीआर, टाटा मोटर्स, आयशर मोटर्स, बजाज फिनसर्व, हीरो मोटो, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और यस बैंक में 4.2 फीसदी तक तेजी देखी जा रही है। वहीं, लॉर्जकैप में एचपीसीएल, आईसीआईसीआई बैंक, कोल इंडिया, यूपीएल, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी में 1.2 फीसदी तक की गिरावट है।

मिडकैप में एसजेवीएन, भारत फोर्ज, नाल्को, आरबीएल बैंक और डिवीज लैब में 3 फीसदी तक तेजी है। वहीं, वक्रांगी, ओरेकल फाइनेंशियल, एनबीसीसी और सन टीवी में 5 फीसदी तक गिरावट है। स्मॉलकैप में मोनेट इस्पात, उज्जास एनर्जी, आईटीआई, डी-लिंक इंडिया और क्यूपिड में 9 फीसदी तक तेजी है। वहीं, गैलेंट इस्पात, टीआरएफ में गिरावट है।

आधार की जगह इस्तेमाल करें वर्चुअल आईडी, ऐसे करेगी काम

नई दिल्ली। मोबाइल सिम लेने, बैंक अकाउंट खुलवाने से लेकर अन्य तमाम सरकारी और गैर-सरकारी सुविधाओं के लिए अब आपको अपने आधार की प्रिवेसी की चिंता की जरूरत नहीं है। अब आप एक वर्चुअल आईडी के जरिए ही अपनी पहचान को सत्यापित करा सकेंगे और आधार कार्ड नंबर देने की भी जरूरत नहीं होगी।

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने वर्चुअल आईडी का बीटा वर्जन जारी कर दिया है। इसे यूआईडीएआई की वेबसाइट पर आप जनरेट कर सकते हैं। 16 अंकों की यह आईडी जनरेट करने के बाद कहीं भी आधार वेरिफिकेशन के लिए आप इस आईडी को दे सकेंगे।  क्या होंगे इसके फायदे और कैसे यह करेगी काम…

हल होगा प्रिवेसी का मसला
आधार कार्ड की अनिवार्यता के विरोध और उसके चलते प्रिवेसी के खतरे के मद्देनजर यूआईडीएआई ने यह कदम उठाया है। 16 अंकों की इस आईडी के जरिए आपके पते और फोटो का सत्यापन हो सकेगा। इससे पहले भी आधार नंबर आपकी ओर से दर्ज करने के बाद कोई कंपनी उसका इस्तेमाल नहीं कर सकती थी, क्योंकि वह डेटा एन्क्रिप्टेड होता था। फिर भी तमाम आशंकाओं को देखते हुए यूआईडीएआई ने वीआईडी की सुविधा लॉन्च करने का फैसला लिया। इसे पते को ऑनलाइन अपडेट करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

खुद ही जनरेट कर सकेंगे वीआईडी
यूआईडीएआई के मुताबिक आधार कार्ड धारक अपनी वीआइडी खुद ही जनरेट कर सकेंगे। वीआइडी की वैलिडिटी सिर्फ एक दिन के लिए होगी। यह एक तरह का अस्थायी नंबर है। इसे चाहे जितनी बार आप जनरेट कर सकते हैं।

ऐसे जनरेट कर सकेंगे वर्चुअल आईडी
इसे आप यूआईडीएआई की वेबसाइट पर जनरेट कर सकते हैं। इसके लिए आपको आधार नंबर और सिक्योरिटी क्वेश्चन दर्ज करने के बाद रिसीव हुए ओटीपी को दर्ज करना होगा और उसके बाद वर्चुअल आईडी जनरेट करने का ऑप्शन आ जाएगा। उस पर क्लिक करते ही आपके मोबाइन नंबर पर वीआईडी आ जाएगी। यह सिर्फ एक दिन के लिए होगा यानी जरूरत पड़ने पर आप इसे रोजाना हासिल कर सकते हैं।

एक जून से कंपनियां स्वीकार करेंगी वर्चुअल आईडी
एक जून से सभी कंपनियों के लिए आधार के विकल्प के तौर पर वर्चुअल आईडी स्वीकार करना अनिवार्य हो जाएगा। कोई भी कंपनी आधार यूजर की ओर से वर्चुअल आईडी जनरेट नहीं कर सकती। इसे सिर्फ यूजर ही जनरेट कर सकता है क्योंकि वन टाइम पासवर्ड उसके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर ही आएगा।

सुप्रीम कोर्ट में सरकार को मिलेगी राहत?
वर्चुअल आईडी लॉन्च करने के बाद आधार की अनिवार्यता और प्रिवेसी लीक होने की आशंका को लेकर केस लड़ रही सरकार को भी सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने में मदद मिलेगी। आधार का विरोध करने वालों का कहना है कि इससे यूजर की प्रिवेसी लीक होने का खतरा है। ऐसे में वर्चुअल आईडी उनके इस तर्क की काट है।

सेंसेक्स 100 अंक मजूबत, निफ्टी 10250 के पार

नई दिल्ली।  ग्लोबल मार्केट से मिले-जुले संकेतों के बीच घरेलू शेयर बाजार हल्की बढ़त के साथ खुला। कारोबार के शुरू में सेंसेक्स 68 अंकों की बढ़त के साथ 33439 और निफ्टी 22 अंकों की बढ़त के साथ 10274 के स्तर पर खुला। फिलहाल सेंसेक्स 100 अंकों की मजबूती के साथ कारोबार कर रहा है।

वहीं, निफ्टी 10263 के स्तर पर है। कारोबार के दौरान ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी देखी जा रही है। निफ्टी पर ऑटो इंडेक्स में 1.54 फीसदी बढ़त है। मंगलवार को सेंसेक्स 33370 और निफ्टी 10245 के स्तर पर बंद हुए थे। 

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीददारी देखी जा रही है। बीएसई का मिडकैप इंडेक्स 0.4 फीसदी बढ़ा है, जबकि निफ्टी के मिडकैप 50 इंडेक्स में 0.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। बीएसई का स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.5 फीसदी बढ़त देखी जा रही है।

किन शेयरों में तेजी, किनमें गिरावट
बाजार में कारोबार के इस दौरान टाटा मोटर्स डीवीआर, टाटा मोटर्स, आयशर मोटर्स, बजाज फिनसर्व, हीरो मोटो, बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और यस बैंक में 4.2 फीसदी तक तेजी देखी जा रही है। वहीं, लॉर्जकैप में एचपीसीएल, आईसीआईसीआई बैंक, कोल इंडिया, यूपीएल, भारती एयरटेल, एक्सिस बैंक और एचडीएफसी में 1.2 फीसदी तक की गिरावट है। 

मिडकैप में एसजेवीएन, भारत फोर्ज, नाल्को, आरबीएल बैंक और डिवीज लैब में 3 फीसदी तक तेजी है। वहीं, वक्रांगी, ओरेकल फाइनेंशियल, एनबीसीसी और सन टीवी में 5 फीसदी तक गिरावट है। स्मॉलकैप में मोनेट इस्पात, उज्जास एनर्जी, आईटीआई, डी-लिंक इंडिया और क्यूपिड में 9 फीसदी तक तेजी है। वहीं, गैलेंट इस्पात, टीआरएफ में गिरावट है। 

चना खरीद कर सरकार नहीं कर रही किसानों का करोड़ों का भुगतान

कोटा । केंद्र सरकार की समर्थन मूल्य पर चना खरीदने की योजना किसानों के लिए छलावा साबित हो रही है। 4400 रुपए प्रति क्विंटल के भाव में समर्थन मूल्य पर चना बेचने वाले संभाग के 4241 किसानों को अभी तक भी राजफेड ने एक रुपए का भी भुगतान नहीं किया है।

जबकि अब तक राजफेड संभाग में संचालित 18 खरीद केंद्रों के माध्यम से 91 हजार 729 क्विंटल चना समर्थन मूल्य पर खरीद कर चुका है। 4400 रुपए प्रति क्विंटल के भाव में जिसका मूल्य 49 करोड़ 53 लाख 36 हजार 600 रुपए होता है।

मापदंडों के मुताबिक खरीद नहीं
मापदंडों के मुताबिक खरीद नहीं होने पर नैफेड ने राजफेड द्वारा खरीदे गए 91729 क्विंटल चने में से 37743.5 क्विंटल चना निरस्त कर दिया है। जिसे भंडारण करने से भी मना कर दिया है। ऐसे में अब यह चना राजफेड के खरीद केंद्रों, गोदामों के बाहर ही पड़ा है। साथ ही अब तक खरीदे गए पूरे चने का भुगतान भी राजफेड को नहीं किया है।नैफेड ने चना भंडारण में आपत्ति जताई है। 5 प्रतिशत से अधिक अपमिश्रित चने का वे भंडारण नहीं कर रहे। जबकि हाड़ौती में अधिकांश चना अपमिश्रित आ रहा है।
नरेश शुक्ला, क्षेत्रीय अधिकारी, राजफेड

खरीद की स्थिति
4400 रुपए प्रति क्विंटल चना का समर्थन मूल्य
18 खरीद केंद्र हाड़ौती में
91729 क्विंटल चने की खरीद
49.53 करोड़ का चना खरीदा गया

इंतजार खत्म, बाघ की दहाड़ से गूंजी मुकुंदरा हिल्स

कोटा। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मुकुंदरा को अपना पहला राजा मिल ही गया। मुकुन्दरा हिल्स को 9 अप्रेल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था, इसके बाद पहले बाघ को यहां आने में 5 साल लग गए। दरअसल रामगढ़ के जंगलों में बाघ टी-91 को ट्रेंकुलाइज करने की जो कोशिश कई समय से जारी थी वो मंगलवार को रंग लाई। सुबह पांच बजे टी-91 को ट्रेंकुलाइज कर लिया गया।

वाइल्ड लाइफ एक्सपट्र्स ने बाघ के पूरी तरह बेहोश होने के बाद उसे स्ट्रेक्चर पर रखा और केज में शिफ्ट कर दिया। इसके थोड़ी देर बार टी-91 का बीपी चैक कर ब्लड सेम्पल लिए गए। करीब 7 बजे होश आने के बाद बाघ को रामगढ़ अभ्यारण्य के लिए रवाना कर दिया। और इस तरह टी-91 को भी मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के तौर पर अपना नया घर मिल गया।

देश में बाघों की बसावट व आबादी के लिए एक से बढ़कर एक प्राकृतिक व मुफीद वन्यक्षेत्र हैं, लेकिन फिर भी कई अभयारण्यों में बाघों का कुनबा बढ़ाने व उन्हें सुरक्षित माहौल देने में सरकार व वन विभाग को पसीने आ रहे हैं। इसके उलट मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व बाघों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं। 

ऐसा है टाइगर रिजर्व
मुकुन्दरा हिल्स को 9 अप्रेल 2013 को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यह करीब 760 वर्ग किमी में चार जिलों कोटा, बूंदी, झालावाड़ व चित्तौडगढ़़ में फैला है। करीब 417 वर्ग किमी कोर और 342 वर्ग किमी बफर जोन है। इसमें मुकुन्दरा राष्ट्रीय उद्यान, दरा अभयारण्य, जवाहर सागर व चंबल घडिय़ाल अभयारण्य का कुछ भाग शामिल है।

ऐतिहासिक व धार्मिक स्थल भी
रिजर्व में 12वीं शताब्दी का गागरोन का किला, 17वीं शताब्दी का अबली मीणी का महल, पुरातात्विक सर्वे के अनुसार 8वीं-9वीं शताब्दी का बाडोली मंदिर समूह, भैंसरोडगढ़ फोर्ट, 19वीं शताब्दी का रावठा महल, शिकारगाह समेत कई ऐतिहासिक व रियासतकालीन इमारतें, गेपरनाथ, गरडिय़ा महादेव भी हैं, जो कला-संस्कृति व प्राचीन वैभव को दर्शाती हैं।

सूचना तकनीक की जानकारी के लिए सेवन वंडर्स में दिखाएंगे 7-डी मूवी

कोटा।  युवाओं को सूचना तकनीक की जानकारी देने के उद्देश्य को लेकर सेवन वंडर्स में गुरुवार काे सेवन-डी मूवी दिखाई जाएगी। सूचना एवं प्राद्यौगिकी विभाग की ओर से प्रदेश में पहली बार कोटा में यह मूवी दिखाई जा रही है। इसमें नि:शुल्क प्रवेश दिया जाएगा।

विभागीय सूत्रों ने बताया कि इस तरह की मूवी अभी तक विदेशों में दुबई व अन्य जगहों पर ही दिखाई जाती है, लेकिन राजस्थान में कोटा को चुना, क्योंकि कोटा शैक्षणिक नगरी होने के कारण यहां युवाओं की तादाद अधिक है। युवाओं व आमजन को सूचना तकनीक से रुबरु कराने के लिए सेवन-डी मूवी दिखाई जाएगी।

एसी से सुसज्जित रहेगी वैन
सेवन-डी मूवी वैन में दिखाई जाएगी। पूरी वैन एसी से सुसज्जित रहेगी। यह 16 सीटर की रहेगी। 3 से 4 मिनट की एक मूवी रहेगी। मूवी सुबह 10 से शाम 7 बजे तक दिखाई जाएगी। मूवी के दौरान आंखों में पिक्चर वाले कैमरे लगाए जाएंगे।

पहले आओ-पहले पाओ पर मिलेगा प्रवेश
मूवी सात दिन तक दिखाई जाएगी। यदि अच्छा रेसपोंस मिलता है तो दिन बढ़ा दिए जाएंगे। गर्मी को देखते हुए मूवी समय में परिवर्तन किया जा सकेगा। इसे रात 10 बजे तक भी चलाया जा सकता है। इसमें पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। प्रवेश के लिए आमजन को अपनी कोई भी एक आईडी साथ लानी होगी। इसमें एक बार में एक ही व्यक्ति को मूवी दिखाई जाएगी।

बुधवार को पहुंचेगी वैन
सेवन-डी मूवी वैन बुधवार को शाम तक कोटा पहुंच जाएगी। सेवन वंडर्स में पार्किंग स्थल पर जगह का चयन किया गया है। यहां आमजन के नगर विकास न्यास की ओर से भी छाया व अन्य समुचित व्यवस्था की जाएगी।

कोटा यूनिवर्सिटी : खराब ग्रेडिंग से स्वायत्तता पर मंडराया खतरा

कोटा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से तैयार की गई नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क की वर्ष 2018 की रैंकिंग में कोटा यूनिवर्सिटी टॉप 200 यूनिवर्सिटी की सूची से बाहर हो गई। यह रैंकिंग मंगलवार दोपहर को मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर की अध्यक्षता में दिल्ली में आयोजित समारोह में की गई।

पिछले दो साल से कोटा यूनिवर्सिटी ने टाॅप 200 में जगह बना रखी थी। साल 2016 में 78वीं रैंक हासिल करके टॉप 100 क्लब यूनिवर्सिटी शामिल हुई थी, लेकिन इस पर भी सवाल उठे थे। इसके बाद यूनिवर्सिटी की परफॉरमेंस गिरती चली है। साल 2017 में यूनिवर्सिटी की रैंक 150 से 200 के बैंड में आई थी।

इस साल तो यूनिवर्सिटी टॉप 200 से ही बाहर हो गई है। इससे पहले नैक की ग्रेडिंग ने भी यूनिवर्सिटी के कामों की हकीकत को बयां किया था। खराब ग्रेडिंग के कारण यूनिवर्सिटी की स्वायत्तता पर खतरा मंडरा ही रहा है और अब इस रैंकिंग ने यूनिवर्सिटी को और भी पीछे कर दिया है।

इन 5 मापदंडों पर परखा यूनिवर्सिटी का काम
यह रहे कारण : टॉप 200 से बाहर होने का मुख्य कारण स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति का रहा। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी के आंतरिक मामलों ने भी पीछे ही धकेला है। इसमें काम से सही विभाजन नहीं होना, सभी को अवसर प्रदान नहीं करना, कुछ लोगों ही यूनिवर्सिटी के प्रमुख पदों पर लंबे समय तक रखना रहा।

एमएनआईटी आगे, आईआईटी जोधपुर पीछे
एनआईआरएफ रैंकिंग में राजस्थान से जुड़ा एक और तथ्य भी शामिल आया है। आईआईटी जोधपुर 54वीं रैंक पर है, जबकि एमएनआईटी जयपुर को 52वीं रैंक मिली है। बिट्स पिलानी को 17वीं, बनस्थली विद्यापीठ को 64वीं, राजस्थान यूनिवर्सिटी 100 से 150 के बैंड में आई है।

कोटा के लिहाज यह तथ्य महत्वपूर्ण है कि आईआईटी मद्रास को इंजीनियरिंग संस्थानों में टॉप रैंक दी गई है। टॉपर्स की च्वॉइस आईआईटी मुंबई को दूसरा व दिल्ली को तीसरा स्थान हासिल किया है। एनआईटी में सबसे अच्छी 11वीं रैंक त्रिचनापल्ली की आई है।

ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं, आज से RBI की रिव्यू मीटिंग

नई दिल्ली। इंडस्ट्री के दबाव के बाद भी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के रिव्यू मीटिंग में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम है। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड के दामों में तेजी से घरेलू मार्केट में महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है। इस बात के संकेत आरबीआई भी द्वारा भी दिया जा चुका है। ऐसे में एक्सपर्ट्स का कहना है कि आरबीआई इस बार पॉलिसी रेट में बिना बदलाव किए पुराने स्तर पर बरकरार रख सकता है।

4-5 अप्रैल को ब्याज दरों पर आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी की मीटिंग है। फाइनेंशियल ईयर 2018-19 के लिए यह आरबीआई का पहला रिव्यू मीटिंग है। इसे इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि बजट के बाद भी ह आरबीआई की पहली पॉलिसी मीटिंग है। बता दें कि आरबीआई हर 2 महीने पर पॉलिसी रेट की समीक्षा करता है।

RBI पर है दबाव
रिटेल इनफ्लेशन में कमी आने से और ग्रोथ को बढ़ावा देने की जरूरत की वजह से आरबीआई पर पॉलिसी रेट में कटौती करने का दबाव है। इंडस्ट्री द्वारा भी ब्याज दरों में राहत की मांग की गई है। हालांकि एक्सपर्ट्स ये मान रहे हैं कि महंगाई में कमी टेम्परेरी है, आगे महंगाई बढ़ने का डर बना हुआ है।

आरबीआई ने भी कहा था कि नए फाइनेंशियल की पहली छमाही में महंगाई दर ऊंची बनी रह सकती है। इंडस्ट्री बॉडी फिक्की का कहना है कि इकोनॉमी में रिवाइवल के मजबूत संकेत दिख रहे हैं। ऐसे में मॉनेटरी पॉलिसी में राहत की जरूरत हे। फिक्की का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग में टर्न अराउंड की जरूरत है। वहीं, बेहतर इकोनॉमी के लिए निवेश बढ़ाने की भी जरूरत है।

FY19 में महंगाई बढ़ने का डर
कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्‍योरेंस फंड मैनेजर कुणाल शाह का कहना है कि एमपीसी कमिटी पहले ही महंगाई बढ़ने का डर जता चुकी है। एमएसपी बढ़ाने के एलान और क्रूड की कीमतों के बढ़ने से कमिटी को डर है कि फाइनेंशियल ईयर 2018-19 में महंगाई दर 5 फीसदी रह सकती है। ऐसे में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम है। उनका कहना है कि अगर मानसून सामान्य रहता है तो आगे रेट की गुंजाइश दिखेगी।

क्या कहना है ग्लोबल एजेंसियों का
अमेरिकी ब्रोकरेज कंपनी मॉर्गन स्टैनली ने एक रिपोर्ट में कहा है कि हमारा अनुमान है कि मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) रेट में कोई बदलाव नहीं करेगी। वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (बीएफएमएल) का भी मानना है कि इस बात की संभावना कम है कि ब्याज दरों में कोई बदलाव हो। मेरिल लिंच का कहना है कि इस साल अगर मॉनसून सामान्य रहता है तो अगस्त के रिव्यू में आरबीआई रेट घटाने का फैसला कर सकता है।

क्या कहना है इंडिया इंक का
औद्योगिक संगठनों का भी मानना है कि आरबीआई इस बार रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा। एसोचैम का कहना है कि रिजर्व बैंक के पास रेट घटाने की काफी कम गुंजाइश है। अभी रेपो रेट 6 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट 5.75 फीसदी पर है।