सीए, इंजीनियर, बीटेक स्नातक और पूर्व प्राचार्य ने चुना आत्मकल्याण का मार्ग

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  • चातुर्मास में आत्मशुद्धि, संयम और स्वाध्याय का मिलेगा संदेश
  • पांच दीक्षार्थी ब्रह्मचारियों की हुई पारंपरिक गोद भराई
  • मंगल विहार के साथ रिद्धि-सिद्धि नगर पहुंचे गणधर मुनि विवर्धनसागर

कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर में शुक्रवार को ‘विराग वर्धन वर्षायोग-2026’ के अंतर्गत विवर्धनसागर महाराज ससंघ (6 पिच्छी) का चातुर्मासिक मंगल प्रवेश श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के बीच सम्पन्न हुआ। यह आयोजन अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन मंदिर समिति एवं सकल दिगम्बर जैन समाज समिति, रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

मंदिर समिति के अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड़ ने बताया कि प्रातः रिवर फ्रंट, नयापुरा से मंगल विहार यात्रा प्रारंभ हुई। यात्रा नीचे की पुलिया, प्लेटिना चौराहा एवं विभिन्न प्रमुख मार्गों से होती हुई मंदिर परिसर पहुंची। मार्ग में 21 भव्य स्वागत द्वार सजाए गए थे। श्रद्धालु धर्मध्वज, मंगल कलश एवं जयघोष के साथ मुनिसंघ की अगवानी करते हुए चल रहे थे। बैंड-बाजों और ढोल-नगाड़ों की मधुर धुनों पर हजारों श्रावक-श्राविकाएं धर्ममय वातावरण में विहार यात्रा के साथ आगे बढ़े। पांच सुसज्जित बग्घियों में विराजमान नवदीक्षार्थी ब्रह्मचारी आकर्षण का केंद्र रहे।

मंदिर पहुंचने पर 108 थालियों से मुनिसंघ का पाद प्रक्षालन एवं पूजन किया गया। आरती, मंगलाचरण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ चातुर्मास का मंगल प्रवेश सम्पन्न हुआ। मंगलाचरण मोना कासलीवाल एवं अन्य सदस्यों ने प्रस्तुत किया। गुरुदेव के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य पारस-मीरा लुहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। पांच परिवारों ने मुनिसंघ को शास्त्र भेंट कर धर्म प्रभावना का संकल्प लिया। दीप प्रज्ज्वलन सकल दिगम्बर जैन समाज के पदाधिकारियों ने किया।

इस अवसर पर विश्वदक्ष सागर, विश्वहित सागर, विश्वभद्र सागर एवं विश्ववास सागर महाराज का भी मंगल सान्निध्य प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में समाज के संरक्षक राजमल पाटौदी, परमसंरक्षक विमल जैन नांता, अध्यक्ष प्रकाश बज, महामंत्री पदम बड़ला, विनोद टोरड़ी, मनोज जैसवाल, नरेश वेद, ताराचंद बड़ला, टीकम पाटनी, पारस कासलीवाल, पारस लुहाड़िया, राजकुमार पाटनी, पूर्व न्यायाधीश जिनेन्द्र जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मंदिर समिति के कोषाध्यक्ष ताराचंद बड़ला ने बताया कि मंगल प्रवेश के उपरांत संत भवन में पट्टाचार्य विशुद्धसागर महाराज के संघस्थ पांच दीक्षार्थी ब्रह्मचारियों की पारंपरिक गोद भराई का आयोजन श्रद्धा एवं उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। समाजजनों ने दीक्षार्थियों को सूखे मेवे, श्रीफल, धार्मिक साहित्य एवं मंगल उपहार भेंट कर उनके संयममय जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं। धार्मिक मंगलगीतों और जयघोषों के बीच वातावरण भक्तिमय बना रहा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने दीक्षार्थियों के वैराग्य भाव की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

इस अवसर पर पांच दीक्षार्थियों का परिचय भी कराया गया। प्रतापगढ़ के चार्टर्ड अकाउंटेंट एवं नेट-जेआरएफ उत्तीर्ण अंकित जैन, कल्याण (मुंबई) के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर अनिकेत, छत्रपति संभाजीनगर के बी.टेक. स्नातक प्रसन्न पाटनी, भिंड निवासी युवा यश जैन तथा उत्तर प्रदेश के बड़ौत निवासी पूर्व प्राचार्य वकीलचंद जैन ने सांसारिक जीवन का त्याग कर संयम एवं आत्मकल्याण का मार्ग अपनाया है। सभी आचार्य विशुद्धसागर महाराज के प्रवचनों से प्रेरित होकर ब्रह्मचर्य एवं प्रतिमाधारी जीवन स्वीकार कर चुके हैं। चातुर्मास के समापन पर इनमें से चार दीक्षार्थी मुनि दीक्षा तथा वकीलचंद जैन क्षुल्लक दीक्षा ग्रहण करेंगे।

चातुर्मास आत्मशुद्धि और धर्म साधना का श्रेष्ठ अवसर
अपने मंगल प्रवचनों में गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने कहा कि चातुर्मास केवल साधुओं का वर्षायोग नहीं, बल्कि प्रत्येक श्रावक-श्राविका के आत्मपरिवर्तन का पावन काल है। इस अवधि में संयम, स्वाध्याय, तप, सामायिक, प्रतिक्रमण, दान, सेवा और धर्मचिंतन के माध्यम से आत्मा को निर्मल बनाने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि चातुर्मास की पूर्णता केवल मुनिसंघ के ठहरने से नहीं होती, बल्कि श्रद्धालु श्रावकों की सक्रिय सहभागिता से ही यह सफल होता है। मुनि और श्रावक एक-दूसरे के पूरक हैं। मुनि धर्म का मार्ग दिखाते हैं और श्रावक उस मार्ग पर चलकर धर्म प्रभावना को समाज तक पहुंचाते हैं।

यदि दोनों का समन्वय बना रहे तो धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराएं सदैव जीवंत रहती हैं। उन्होंने सभी से चातुर्मास का अधिकतम लाभ उठाते हुए आत्मकल्याण की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया।