Monday, July 27, 2026
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India-US Deal: भारत और अमेरिका ट्रेड डील ने भारतीय किसानों की चिंता बढ़ाई

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील की कई चीजें सामने आ गई हैं। इस डील में पशुओं का चारा भी शामिल है जो अमेरिका से भारत आएगा। इसे लेकर भारतीय किसानों के बीच चिंताएं बढ़ गई हैं। खासकर पशुओं के चारे के तौर पर मक्का और सोयाबीन तेल के आयात को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

भारत ने मक्का और सोयाबीन पर अपनी सुरक्षा बनाए रखी है। ये दोनों ही फसलें अमेरिका में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) यानी आनुवंशिक रूप से संशोधित होती हैं। लेकिन, भारत ने पशुओं के चारे के लिए सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs) और लाल ज्वार ( red sorghum ) के आयात पर सहमति जताई है। इसके अलावा मेवे (tree nuts), ताजे व प्रोसेस्ड फल और सोयाबीन तेल का भी आयात होगा।

किसानों की चिंता
पशुओं के चारे के आयात को मंजूरी मिलने से किसान संगठनों में बेचैनी है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक किसानों के संगठनों का कहना है कि DDGs, जो मक्के से बनता है, वह भी जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) होता है। उन्होंने सोयाबीन तेल के आयात पर भी सवाल उठाए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े भारतीय किसान संघ (BKS) ने भी इस मामले में स्पष्टीकरण मांगा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आश्वासन दिया है कि हमारी सभी फसलें सुरक्षित हैं।

सरकार और किसानों का तर्क
सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs) और लाल ज्वार का आयात पशुधन क्षेत्र के लिए फायदेमंद हो सकता है। प्रोसेसिंग के बाद GM के सभी निशान मिट जाते हैं। यह आयात देश के पशुधन को बेहतर और सस्ता चारा उपलब्ध कराने के लिए है, जिससे दूध और मांस जैसे उत्पादों की लागत कम हो सकती है। किसान संगठनों का कहना है कि DDGs मुख्य रूप से जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) अमेरिकी मक्के से आएंगे। इनकी गुणवत्ता सही नहीं होगी। साथ ही सोयाबीन तेल का भी आयात होगा। इससे किसानों की इनकम प्रभावित होगी। किसान संगठन सरकार से और अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

DDGs पर रार
भारत में DDGs मक्के और चावल से एक उप-उत्पाद (byproduct) के रूप में निकाले जाते हैं। इनकी गुणवत्ता ब्रॉयलर मुर्गियों और डेयरी गायों के चारे के लिए उपयुक्त नहीं होती है। अमेरिका में मक्के से इथेनॉल प्रोडक्शन के उप-उत्पाद (byproduct) के रूप में बनने वाले DDGs की गुणवत्ता बेहतर और कीमत भी कम होती है।

सोयाबीन तेल पर सवाल

  • किसान समूहों ने सोयाबीन तेल के आयात पर भी सवाल उठाए।
  • उनका कहना है कि अमेरिका ट्रांसजेनिक किस्मों का सोयाबीन पैदा करता है।
  • किसान समूहों का मानना है कि सोयाबीन तेल के आयात से लाखों सोयाबीन किसानों पर बुरा असर पड़ेगा।

इनकम पर भी असर
किसान संगठनों ने यह भी कहा कि DDGs और लाल ज्वार के आयात से लाखों किसानों की आय प्रभावित होगी, जो जानवरों और मुर्गीपालन के लिए चारा और दाना उगाने वाली फसलें उगाते हैं। वहीं सोयाबीन तेल के आयात से भी आर्थिक नुकसान होगा। BKS के अखिल भारतीय महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा कि सरकार को इस पर अपनी स्थिति और स्पष्टता से पेश करनी चाहिए।

Soybean Price: क्रशिंग प्लांट्स की डिमांड से सोयाबीन की कीमतें मज़बूत

नई दिल्ली। हाल के दिनों में सोयाबीन तेल और सोयामील की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण क्रशिंग और प्रोसेसिंग यूनिट्स से सोयाबीन की ज़बरदस्त डिमांड बनी हुई है। महाराष्ट्र और राजस्थान में सरकारी खरीद से भी सोयाबीन की कीमतों में मज़बूती आई है।

मध्य प्रदेश में भावांतर पेमेंट स्कीम चालू है। विदेशों से सोयाबीन तेल का इंपोर्ट काफ़ी कम रहा है, और अर्जेंटीना के कई हिस्सों में पड़े भयंकर सूखे ने सोयाबीन की फ़सल के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है।

प्लांट डिलेवरी भाव
31 जनवरी से 6 फरवरी के हफ़्ते के दौरान, तीन सबसे ज़्यादा सोयाबीन उगाने वाले राज्यों – मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान – में सोयाबीन की प्लांट डिलीवरी की कीमतें 100-150 रुपये प्रति क्विंटल बढ़कर 5800-6000 रुपये प्रति क्विंटल हो गईं। सोयाबीन के लिए मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) 5328 रुपये प्रति क्विंटल तय है, जबकि प्लांट डिलीवरी की कीमत कई दिनों से इससे काफ़ी ज़्यादा है।

मंडियों (थोक बाज़ार) में सोयाबीन की आवक कम हो गई है। देश भर में 3 और 4 फरवरी को 2.50-2.50 लाख बैग सोयाबीन सप्लाई किए गए, और 6 फरवरी को 2.80 लाख बैग सप्लाई किए गए, हर बैग का वज़न 100 kg है।

डीओसी
इस हफ़्ते, महाराष्ट्र में सोयाबीन DOC की कीमतों में मिले-जुले कारोबार के बीच 500 से 1500 रुपये प्रति टन का उतार-चढ़ाव देखा गया, लेकिन फिर भी यह 45000-46000 रुपये प्रति टन की रेंज में रही। ज़्यादा कीमतों से सोयामील एक्सपोर्ट पर असर पड़ने की संभावना है।

सोयाबीन रिफाइंड तेल
जहां तक ​​रिफाइंड सोयाबीन तेल की बात है, इसकी कीमतों में भी कुछ सुधार देखा गया। कोटा में इसकी कीमत 10 रुपये बढ़कर 1410 रुपये प्रति 10 kg हो गई, जबकि कांडला और हल्दिया में यह 5 रुपये बढ़कर 1365 रुपये प्रति 10 kg पर पहुंच गई।

Turmeric Price: कम उत्पादन से हल्दी के भाव में जल्द ही तेजी का अनुमान

नई दिल्ली। चालू सीजन के दौरान उत्पादक केन्द्रों पर अधिक बिजाई के बावजूद हल्दी उत्पादन में कोई विशेष बढ़ोत्तरी के अनुमान नहीं है। क्योंकि उत्पादक केन्द्रों पर बेमौसमी बारिश के चलते तमिलनाडु को छोड़कर अन्य राज्यों में हल्दी फसल को नुकसान हुआ है। जिस कारण से उत्पादन गत वर्ष से मामूली अधिक रहने की संभावना है।

गत वर्ष देश में हल्दी का उत्पादन 72/75 लाख बोरी का रहा था जोकि इस वर्ष 80/82 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। वर्ष 2024 में उत्पादन 50/55 लाख बोरी का माना गया था।

व्यापारियों का कहना है कि उत्पादक केन्द्रों पर इस वर्ष हल्दी के बिजाई क्षेत्रफल में लगभग 30/35 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई थी लेकिन प्रतिकूल मौसम के चलते फसल को नुकसान होने से प्रति हेक्टेयर उत्पादकता प्रभावित हो रही है। वर्तमान में मंडियों में जो आवक हो रही है उसकी क्वालिटी हल्की है।

सूत्रों का कहना है कि चालू सीजन के दौरान मराठवाड़ा लाइन (बसमत, हिंगोली, नान्देड) पर हल्दी का उत्पादन 32/35 लाख बोरी के आसपास रहेगा। जबकि सांगली लाइन पर उत्पादन 10/12 लाख बोरी होने के पूर्वानुमान लगाए जा रहे हैं।

निजामाबाद लाइन पर उत्पादन 12/13 लाख बोरी होने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। वारंगल लाइन पर उत्पादन 1.50/2 लाख बोरी एवं दुगीराला, कडप्पा लाइन पर उत्पादन 2.50/3 लाख बोरी होने के अनुमान है। इरोड एवं सेलम लाइन पर उत्पादन 14/15 लाख बोरी होने के समाचार है। अन्य क्षेत्रों में उत्पादन 5/6 लाख बोरी माना जा रहा है।

चालू सीजन के दौरान नए मालों की आवक में विलम्ब होने के साथ-साथ आवक भी गत वर्ष की तुलना में कम हो रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार गत वर्ष 3 फरवरी को निजामाबाद में नई हल्दी की आवक 13500 बोरी की हो रही थी। जोकि 10 फरवरी को 2500 बोरी की हो गई है।

लेकिन वर्तमान में निजामाबाद मंडी में नई हल्दी की आवक 8000/8500 बोरी की हो रही है। सांगली एवं इरोड मंडी में भी आवक गत वर्ष की तुलना में कम चल रही है।

चालू सप्ताह के दौरान वायदा में भाव मंदे के साथ बोले जाने के कारण हाजिर बाजारों में भी हल्दी के दाम मंदे के साथ बोले गए। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में मांग का अभाव होने के कारण भाव घट रहे हैं। आगामी दिनों में अन्य उत्पादक केन्द्रों की मंडियों पर भी आवक शुरू जो जाने के कारण अभी कीमतों में तेजी की संभावना नहीं है।

चालू सप्ताह के दौरान हल्दी के हाजिर भाव 200/300 रुपए प्रति क्विंटल तक मंदे के साथ बोले गए। सूत्रों का कहना है कि आगामी दिनों में मराठवाड़ा लाइन पर नई फसल की आवक शुरू हो जाएगी। जिस कारण से फरवरी-मार्च माह में अधिक तेजी के आसार नहीं है।

लेकिन खपत की तुलना में कुल उपलब्धता कम रहने के कारण वर्ष 2026 में हल्दी के दामों में अच्छी तेजी देखी जा सकती है। वर्तमान में दिल्ली बाजार में हल्दी सिंगल पॉलिश गट्ठा का भाव 153/155 रुपए प्रति किलो बोला जा रहा है जोकि जनवरी माह में शुरू में भाव 160/162 रुपए का स्तर छू गया था। सितम्बर- 2025 में नीचे में भाव 126/128 रुपए बन गया था।

मसाला बोर्ड द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-नवम्बर-2025 के दौरान हल्दी का निर्यात 127530 टन का रहा और निर्यात से प्राप्त आय 1951.34 करोड़ की रही। अप्रैल नवम्बर- 2024 के दौरान हल्दी का निर्यात 121601 टन का किया गया था और प्राप्त आय 1984.47 करोड़ की रही थी। वर्ष 2024-25 (मार्च-अप्रैल) के दौरान हल्दी का कुल निर्यात 176325 टन का किया गया था। वर्ष 2020-21 में हल्दी का रिकॉर्ड निर्यात 183868 टन का रहा था।

Mustard Crop: नई फसल की आवक बढ़ने से सरसों का भाव नरम रहने का अनुमान

नई दिल्ली। दोनों शीर्ष उत्पादक प्रांतों- राजस्थान एवं उत्तर प्रदेश की कुछ मंडियों में सरसों के नए माल की थोड़ी बहुत आवक शुरू हो गई है जबकि आगामी दिनों में इसकी आपूर्ति की रफ्तार तेज होने की संभावना है।

बिजाई क्षेत्र में करीब 2.80 लाख हेक्टेयर की वृद्धि एवं मौसम की अनुकूल स्थिति के कारण इस बार सरसों का उत्पादन बेहतर होने के आसार हैं लेकिन कीमतों में बदलाव इसकी मांग एवं सरकारी खरीद पर निर्भर करेगा। 31 जनवरी- 6 फरवरी वाले सप्ताह के दौरान आमतौर पर सरसों के थोक मंडी भाव में 100-150 रुपए प्रति क्विंटल की नरमी देखी गई।

42 प्रतिशत कंडीशन वाली सरसों का दाम दिल्ली में 150 रुपए घटकर 7000 रुपए प्रति क्विंटल तथा जयपुर में 50 रुपए गिरकर 7350 रुपए प्रति क्विंटल रह गया। हालांकि गुजरात की मंडियां कुछ तेज रही क्योंकि वहां नीचे मूल्य पर इसकी अच्छी लिवाली हुई लेकिन हरियाणा एवं मध्य प्रदेश की मंडियों में कीमत 150 रुपए प्रति क्विंटल तक घट गई।

राजस्थान में मिश्रित रुख देखा गया। नए माल की छिटपुट आपूर्ति के बावजूद राज्य में सरसों का दाम सरकारी समर्थन मूल्य से ऊंचा चल रहा है जिससे किसानों को राहत मिल रही है। फसल की हालत अच्छी बताई जा रही है। सरसों का भाव उत्तर प्रदेश के हापुड़ में 100 रुपए तथा आगरा में 250 रुपए प्रति क्विंटल नरम रहा।

सरसों में नरमी से सरसों तेल- एक्सपेलर एवं कच्ची घानी की कीमतों में भी 1-2 रुपए प्रति किलो की गिरावट आई। दिल्ली में एक्सपेलर का भाव 20 रुपए घटकर 1455 रुपए प्रति 10 किलो तथा चरखी दादरी में 1465 रुपए प्रति 10 किलो। कोटा में कच्ची घानी सरसों तेल का दाम 65 रुपए घटकर 1455 रुपए प्रति 10 किलो पर आ गया।

प्रमुख उत्पादक राज्यों की महत्वपूर्ण मंडियों में सरसों की आवक कम हो रही है क्योंकि नए माल की जोरदार आवक शुरू होने से पूर्व इसकी आपूर्ति का ऑफ सीजन रहता है। वैसे लग्नसरा का सीजन होने से कीमतों में ज्यादा नरमी आना मुश्किल लगता है।

सरकारी एजेंसियों के पास सरसों का सीमित स्टॉक बचा हुआ है लेकिन तेल मिलों को समुचित मात्रा में कच्चा माल प्राप्त हो रहा है। सरसों खल तथा डीओसी में कारोबार सामान्य से कम होने के कारण भाव लगभग स्थिर या कुछ नरम रहा।

India-US Trade Deal: भारत में क्‍या होगा सस्‍ता, कैसे होगा आम आदमी को फायदा

नई दिल्‍ली। India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका ने एक नए अंतरिम व्यापार ढांचे का ऐलान किया है। इसके तहत अमेरिका से आने वाली शराब, मेवे और सोयाबीन तेल जैसे कई उत्पाद भारत में सस्ते हो सकते हैं। दोनों देशों ने कई वस्तुओं पर इम्‍पोर्ट ड्यूटी कम करने पर सहमति जताई है।

इसका मकसद द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना है। इस नए फ्रेमवर्क को ‘जल्द’ लागू किया जाएगा। नई दिल्‍ली और वॉशिंगटन ऐसे फायदे वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को अंतिम रूप देने की दिशा में काम करेंगे जिससे दोनों को प्रॉफिट हो।

अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को मौजूदा 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करेगा। वहीं, भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अलग-अलग प्रकार के अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों पर इम्‍पोर्ट ड्यूटी खत्‍म करेगा या कम करेगा।

भारत की ओर से शुल्क कटौती की संभावना वाले उत्पादों में सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु आहार के लिए इस्तेमाल होने वाला लाल ज्वार, ट्री नट्स, फ्रेश प्रोसेस्‍ड फल, सोयाबीन तेल, साथ ही शराब और स्पिरिट शामिल हैं। इन शुल्कों में कमी से लागत कम होने की उम्मीद है। इससे भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए कीमतें सस्ती हो सकती हैं।

500 अरब डॉलर की खरीद करेगा भारत
शुल्क कटौती के अलावा दोनों पक्षों ने गहरे वाणिज्यिक जुड़ाव का संकेत दिया है। एक ज्‍वाइंट स्‍टेटमेंट के अनुसार, भारत ने अगले पांच सालों में अमेरिकी ऊर्जा उत्पादों, विमानों और विमान के पुर्जों, कीमती धातुओं, प्रौद्योगिकी उत्पादों और कोकिंग कोल के 500 अरब डॉलर डॉलर के मूल्य के उत्पाद खरीदने की मंशा व्यक्त की है।

अमेरिका और भारत को पारस्परिक और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार के संबंध में अंतरिम समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क पर पहुंचने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।

भारत-अमेरिका का संयुक्‍त बयान
इसके अलावा एक कार्यकारी आदेश के जरिये अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर पिछले साल अगस्त में लगाए गए 25 फीसदी टैरिफ या अतिरिक्त आयात शुल्क को हटा दिया है। उन्होंने कहा कि भारत ने ‘महत्वपूर्ण कदम’ उठाए हैं और नई दिल्ली ने मॉस्को से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से तेल का आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है।

एक्‍सपोर्टर्स को कहां होगा फायदा
टैरिफ में कमी से भारत के श्रम-गहन क्षेत्रों जैसे कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, जैविक रसायन, गृह सज्जा, कारीगर उत्पाद और कुछ मशीनरी के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।

कौन से प्रोडक्‍ट्स पर जीरो टैरिफ
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बताया है कि इस समझौते के तहत कई भारतीय निर्यात वस्तुओं पर अमेरिका में शून्य टैरिफ लगेगा। इनमें रत्न और हीरे, फार्मास्युटिकल उत्पाद, विमान के पुर्जे और स्मार्टफोन शामिल हैं। इसके अलावा, मसाले, चाय, कॉफी, नारियल तेल, काजू, और अलग-अलग फल और सब्जियां जैसे एवोकाडो, केला, आम, अनानास और मशरूम पर भी शून्य टैरिफ लागू होगा। कुछ बेकरी उत्पादों को भी इस सूची में शामिल किया गया है।

आम आदमी को क्या फायदा
इससे इन क्षेत्रों में भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और बढ़ावा मिलेगा। भारत को विमान के पुर्जों पर सेक्‍शन 232 के तहत छूट, ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ दर कोटा और जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स पर बातचीत के नतीजे भी मिलेंगे। इससे इन क्षेत्रों में एक्‍सपोर्ट बेनिफिट होगा। इस डेवलपमेंट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अंतरिम व्यापार समझौता किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर खोलेगा। महिलाओं और युवाओं के लिए रोजगार सृजित करके ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करेगा। पीयूष गोयल ने कहा कि अंतरिम समझौते से भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से एमएसएमई, किसानों और मछुआरों के लिए 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का बाजार खुलेगा। कारण है कि भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ पहले के 50 फीसदी से घटकर 18 फीसदी रह जाएगा।

India-US Deal: जीएम फसलों की अनुमति पर स्थिति स्पष्ट करे सरकार: किसान संघ

कोटा। India-US Trade Deal: देश में किसानों के सबसे बड़े संगठन भारतीय किसान संघ ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पर अपना वक्तव्य जारी करते हुए कहा है कि भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौता देखने में अच्छा है, लेकिन कईं विषयों पर स्पष्टता की जरुरत है।

भारतीय किसान संघ के महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा कि वाणिज्य मंत्री के अनुसार गेहूं, चावल जैसा अनाज, दूध एवं डेयरी उत्पाद, फल सब्जी और मसालें ये सभी व्यापार समझौते से बाहर रखे गए हैं। इसके लिए भारत सरकार को बहुत बहुत धन्यवाद करते हैं।

उन्होंने कहा कि इसमें जो शब्द “किसानों से जुड़े संवेदनशील उत्पाद” का प्रयोग किया गया है। इस बारे में सरकार को और भी स्पष्टता के साथ पक्ष रखना चाहिए। विशेषकर अमेरिका के जो जीएम उत्पाद हैं, जिन्हें वहां आमतौर पर जानवरों के खाद्य के लिए प्रयोग किया जाता है, ऐसे उत्पाद किसी भी स्थिति में, किसी भी नाम और शर्त पर देश में नहीं आना चाहिए। यह भारतीय किसान संघ की स्पष्ट मांग है।

भारतीय किसान संघ के प्रान्त अध्यक्ष शंकरलाल नागर और महामंत्री अंबालाल शर्मा ने कहा कि हमारे देश में खाद्यान फसलों में जीएम को अनुमति नहीं है, शोध हो रहा है, जांच पड़ताल चल रही है। मनुष्य और जीवजगत के स्वास्थ्य के ऊपर इनके नकारात्मक प्रभाव की जानकारी एकत्र हो रही है और ये असफल फसल जैसा साबित हो रहा है।

इसलिए देश में इसका विरोध भी हो रहा है। व्यापार से आगे भारत की जनता का स्वास्थ्य, भारत की जैव विविधता, भारत में शोध का स्त्रोत इन सभी को सुरक्षित रखना है तो जी.एम. फसलों को रोकना पडेगा। ऐसा अभी तक के जीएम फसलों की स्थिति के आधार पर निश्चित किया जा सकता है।

प्रान्त प्रचार प्रमुख आशीष मेहता ने कहा कि अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते पर इन विषयों पर सरकार की पूर्ण स्पष्टता के बाद ही किसान संघ अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करेगा।

मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट में राजस्थान के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता दी

भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अग्रवाल ने पत्रकार वार्ता में गिनाई मोदी सरकार की उपलब्धियां

कोटा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान के गौरवशाली अतीत ऐतिहासिक विरासत तथा राष्ट्रीय अखंडता की रक्षा में अतुलनीय महत्व को देखते हुये केन्द्र सरकार के फंड से राजस्थान के आर्थिक, भौतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विकास को हमेशा प्राथमिकता दी है। यह बात पत्रकार वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री राज्यसभा के सदस्य एवं राजस्थान के प्रभारी डॉ राधामोहन दास अग्रवाल ने कही।

राष्ट्रीय महामंत्री अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री के गरीबोंन्मुखी योजनाओं का राजस्थान बहुत बड़ा लाभार्थी है। राजस्थान में जनधन योजना के अंतर्गत 3.8 करोड बैंक एकाउंट खोले गए, 1.53 करोड एवं 2.99 करोड़ लोगों को क्रमशः जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ मिला।

मुद्रा योजना के तहत 1.17 लाख करोड़ रुपए दिये गये। 2.72 लाख स्ट्रीट-वेण्डर्स को पीएम स्वनिधि योजना को लाभ मिला। किसानों को 61.4 लाख किसान क्रेडिट कार्ड वितरित किये गये, जल जीवन मिशन के माध्यम से 62.5 लाख घरों में पाईप के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया गया।

गरीब महिलाओं को 73.8 लाख निःशुल्क गैस कनेक्शन दिये गये। 4.40 करोड परिवार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अतर्गत निःशुल्क अनाज पाते हैं। 2.28 करोड परिवारों के लिये के 5 लाख रुपए प्रतिवर्ष की निःशुल्क इलाज की व्यवस्था की गई और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 71.7 लाख किसानों को 6000 रुपए प्रतिवर्ष सीधे उनके बैंक खातों में दिये जाते है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा सरकार वास्तविक गरीबो के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का निरंतर प्रयास कर रही है। आम व्यक्ति की क्रय शक्ति बढे और उसका जीवन खुशहाल हो इस तरह की सेकडों योजनाओं का लाभ सीधे जनशक्ति को प्राप्त हो रहा है। स्वतंत्रता के इतिहास में भारत आम लोगो को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के कार्यकाल में सर्वाधिक सफल हो रहा है।

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने राजस्थान सरकार को कर के हिस्से के रूप में 11 सालों में 5.7 लाख करोड व अनुदान के रुप में 2.61 लाख करोड़ रुपए दिये तथा पूंजीगत व्यय के लिये 5 साल में 31,949 करोड़ अर्थात कुल मिलाकर 8.63 लाख करोड़ रुपए दिये हैं।

कांग्रेस सरकार ने प्रतिवर्ष 160 किमी नई रेल लाइन डाली थीं और 27 किमी रेल लाईन का प्रतिवर्ष विद्युतीकरण किया था। उसकी तुलना में मोदी सरकार 374 किमी प्रतिवर्ष नई रेल लाइन बिछा रही है और 499 किमी प्रतिवर्ष रेल लाईन का विद्युतिकरण कर रही है।

इसके अलावा 51,814 करोड रुपए की लागत से 4,791 किमी लम्बाई को 32 योजनाओं पर काम चल रहा है। मोदी जी राजस्थान के आबूरोड से लेकर उदयपुर तक 85 रेलवे स्टेशनों का अमृत भारत स्कीम के तहत सौंदर्यीकरण कर रहे है।

राष्ट्रीय महामंत्री ने कहा कि राजस्थान में 10,733 किमी राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण हुआ है। इसके अतिरिक्त 46,165 करोड़ रुपए की लागत से राजस्थान में 4 ग्रीनकोल्ड कॉरिडोर बन रहे हैं। अलवर, भरतपुर, टोक, बूंदी और कोटा को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का निर्माण चल रहा है।

प्रधानमंत्री ने पर्यटन को बढाने के लिये स्वदेश दर्शन स्कीम के तहत 283 करोड़ रुपए की लागत से डेजर्ट सर्किट, कृष्णा तथा स्पिरिचुअल सर्किट के निर्माण को स्वीकृति दी है। 42,000 करोड रुपए की लागत से देश का सबसे बडा (4×700मेगावाट) न्यूक्लियर पावर प्लान्ट और 19,210 करोड़ की लागत से रिन्यूबल एनर्जी का प्रोजेक्ट चल रहा है।

एनपीए श्रेणी के खाताधारक एकमुश्त ऋण समाधान योजना का लाभ उठाएं: बिरला

कोटा नागरिक सहकारी बैंक संचालक मण्डल व ऋण समिति की बैठक आयोजित

कोटा। कोटा नागरिक सहकारी बैंक लिमिटेड कोटा की संचालक मण्डल एवं ऋण समिति की बैठक शनिवार को रावतभाटा रोड स्थित प्रधान कार्यालय में बैंक अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई।

बैंक अध्यक्ष राजेश कृष्ण बिरला ने बताया कि ऋण धारकों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लागू एकमुश्त ऋण समाधान योजना 2025 (संशोधित) के अंतर्गत सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। योजना के तहत 13 सदस्यों को 21.84 लाख रुपये की ऋण माफी प्रदान की गई है, जिससे संबंधित ऋण धारकों को आर्थिक संबल मिला है।

24 नए सदस्यों को सदस्यता प्रदान की गई, वहीं 13 सदस्यों को कुल 81.70 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। बिरला ने बताया कि ओटीएस योजना का लाभ लेने के लिए 31 मार्च 2026 तक का समय निर्धारित किया गया है। उन्होंने एनपीए श्रेणी के ऋण धारकों से निर्धारित समयावधि में इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की है।

प्रबंध संचालक बीना बैरवा ने बताया कि बैठक में सीआरआर एवं एसएलआर की अनुपालना, ओटीएस योजना, जमाओं की समीक्षा, एनपीए वसूली, बैंक ग्राहक सेवा, सुरक्षा व्यवस्था, इंटर-ब्रांच एवं बैंक रीकन्सिलिएशन, प्रतिभूति निवेश सहित कुल 32 बिंदुओं के एजेंडे पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रबंध संचालक ने बताया कि बैंक की वित्तीय स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है। बैंक का एनपीए घटा है तथा मार्च 2025 में जमाएं 83,440.38 लाख रुपये से बढ़कर 84,079.53 लाख रुपये हो गई हैं।

बैठक में बोर्ड संचालक महेन्द्र कुमार शर्मा, सुरेश चंद्र काबरा, ओमप्रकाश मेहरा, शैलेन्द्र ऋषि, महावीर सुवालका, अशोक मीणा एवं नंदलाल प्रजापति, सहवरित संचालक,अरुण भार्गव बोम अध्यक्ष ओम माहेश्वरी तथा सदस्य सुरेन्द्र गोयल विचित्र एवं राजेन्द्र कुमार जैन उपस्थित रहे।

विज्ञान नगर में विराट हिंदू सम्मेलन आज, 2000 लोगों के शामिल होने की संभावना

कोटा। विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन रविवार को आर्य समाज भवन में विज्ञान नगर आयोजित किया जायेगा। सम्मेलन में 2000 लोगों के शामिल होने की संभावना है।

सम्मेलन की जानकारी देते हुए अनिल जैन ठौरा ने बताया कि लक्ष्मण दास महाराज एवं साध्वी मधु महाराज का सानिध्य प्राप्त होगा। सम्मेलन की अध्यक्षता डॉ. रामावतार अग्रवाल करेंगे, जबकि दीप प्रज्वलन डॉ. सुशील सोनी द्वारा किया जाएगा।

वहीं वैदिक विद्वान अग्निमित्र शास्त्री संस्कृति संरक्षण को लेकर अपनी ओजस्वी वाणी से उपस्थित जनसमूह को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महानगर प्रचारक विष्णु भाई रहेंगे।

सम्मेलन के दौरान मलखंभ प्रदर्शन, कथक नृत्य एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। रामकृष्ण शर्मा ने बताया कि प्रातः 8:30 बजे आर्य समाज परिसर में विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।

सम्मेलन को सफल एवं भव्य बनाने के लिए बृजमोहन पंचोली, प्यार जोशी, चेतन जैन, सुरेश लखेरा, विनोद बाहुबली, श्याम शर्मा, गोवर्धनलाल, नेमीचंद, कमलाकांत एवं सुभाष बाबू सहित अनेक कार्यकर्ताओं घर-घर आमंत्रण दिए है।

India-Us Deal: अमेरिका के साथ भारत की डील से चीन की बढ़ेगी बेचैनी, जानिए कैसे

नई दिल्‍ली। भारत और अमेरिका ने ‘महाडील’ की पूरी पिच तैयार कर ली है। शनिवार को दोनों ने आधिकारिक तौर पर अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क का ऐलान किया। यह समझौता चीन के दबदबे को चुनौती देगा।

इस डील के मार्च 2026 के मध्य तक फाइनल होने की उम्‍मीद है। यह व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का शुरुआती कदम है। अमेरिका के साथ भारत की यह डील चीन की बेचैनी बढ़ाएगी। यह चीन के खिलाफ सप्‍लाई चेन को मजबूत करेगी।

साथ ही भारत को दुनिया के सबसे बड़े पावरसेंटर में अपने सामान को किफायती कीमतों पर बेचने का मौका देगी। भारत ने सबकुछ ठीक किया तो वह दुनिया पर राज कर सकता है। यूरोपीय संघ (ईयू) के बाद अमेरिका के साथ ट्रेड डील उसे दुनिया पर छा जाने का मौका देते हैं।

नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने भी अंतिम फ्रेमवर्क पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्‍होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क टेक्सटाइल, फार्मा, रत्न और फुटवियर जैसे सेक्टर में भारतीय निर्यात के लिए बड़े अवसर खोलता है।

शनिवार को भारत और अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर अंतरिम व्यापार समझौते के लिए फ्रेमवर्क की घोषणा की। इसके पीछे मंशा आपसी टैरिफ में कमी करना है ताकि द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाया जा सके। यह व्‍यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का रास्‍ता साफ करेगी।

भारत को इस डील से सीधा फायदा होगा। अमिताभ कांत के मुताबिक, अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क भारत को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले कॉम्पिटिटिव बढ़त देता है। यही नहीं, कृषि और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा भी करता है।

कांत ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर लिखा, ‘भारत और अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते से भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इससे हमारे निर्यातकों के लिए टेक्सटाइल, फार्मा, रत्न, फुटवियर और अन्य क्षेत्रों में बड़े अवसर खुलेंगे।

भारत को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिद्वंद्वियों पर कॉम्पिटिटिव बढ़त मिलेगी। साथ ही हमारे कृषि और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा होगी। लाखों नई नौकरियां (खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए) पैदा होंगी। डिजिटल इन्‍फ्रास्ट्रक्चर और मेक-इन-इंडिया पहलों को बढ़ावा मिलेगा।’

चीन की बढ़ेगी बेचैनी
कांत ने इस अंतरिम समझौते को एक ‘रणनीतिक जीत’ करार दिया है। यह चीन के खिलाफ सप्लाई चेन को मजबूत करता है। साथ ही रुपये की स्थिरता को भी सपोर्ट करता है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो यह समझौता चीन के दबदबे को चुनौती देगा। कांत ने लिखा, ‘यह एक रणनीतिक जीत है जो चीन के खिलाफ सप्लाई चेन को मजबूत करती है। रुपये की स्‍टेबिलिटी को सपोर्ट करती है। पीएम नरेंद्र मोदी को उनके साहसिक नेतृत्व और विजन के लिए बहुत-बहुत बधाई। पीयूष गोयल को उनकी लगन और गतिशीलता के लिए और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल को उनके दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के लिए मेरी शुभकामनाएं। आपसी फायदेमंद द्विपक्षीय संबंध विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।’