Monday, July 27, 2026
Home Blog Page 285

India-Us Deal: अमेरिका के साथ भारत की डील से चीन की बढ़ेगी बेचैनी, जानिए कैसे

नई दिल्‍ली। भारत और अमेरिका ने ‘महाडील’ की पूरी पिच तैयार कर ली है। शनिवार को दोनों ने आधिकारिक तौर पर अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क का ऐलान किया। यह समझौता चीन के दबदबे को चुनौती देगा।

इस डील के मार्च 2026 के मध्य तक फाइनल होने की उम्‍मीद है। यह व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) का शुरुआती कदम है। अमेरिका के साथ भारत की यह डील चीन की बेचैनी बढ़ाएगी। यह चीन के खिलाफ सप्‍लाई चेन को मजबूत करेगी।

साथ ही भारत को दुनिया के सबसे बड़े पावरसेंटर में अपने सामान को किफायती कीमतों पर बेचने का मौका देगी। भारत ने सबकुछ ठीक किया तो वह दुनिया पर राज कर सकता है। यूरोपीय संघ (ईयू) के बाद अमेरिका के साथ ट्रेड डील उसे दुनिया पर छा जाने का मौका देते हैं।

नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने भी अंतिम फ्रेमवर्क पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्‍होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क टेक्सटाइल, फार्मा, रत्न और फुटवियर जैसे सेक्टर में भारतीय निर्यात के लिए बड़े अवसर खोलता है।

शनिवार को भारत और अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर अंतरिम व्यापार समझौते के लिए फ्रेमवर्क की घोषणा की। इसके पीछे मंशा आपसी टैरिफ में कमी करना है ताकि द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाया जा सके। यह व्‍यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का रास्‍ता साफ करेगी।

भारत को इस डील से सीधा फायदा होगा। अमिताभ कांत के मुताबिक, अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क भारत को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले कॉम्पिटिटिव बढ़त देता है। यही नहीं, कृषि और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा भी करता है।

कांत ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर लिखा, ‘भारत और अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते से भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है। इससे हमारे निर्यातकों के लिए टेक्सटाइल, फार्मा, रत्न, फुटवियर और अन्य क्षेत्रों में बड़े अवसर खुलेंगे।

भारत को वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिद्वंद्वियों पर कॉम्पिटिटिव बढ़त मिलेगी। साथ ही हमारे कृषि और डेयरी सेक्टर की सुरक्षा होगी। लाखों नई नौकरियां (खासकर महिलाओं और युवाओं के लिए) पैदा होंगी। डिजिटल इन्‍फ्रास्ट्रक्चर और मेक-इन-इंडिया पहलों को बढ़ावा मिलेगा।’

चीन की बढ़ेगी बेचैनी
कांत ने इस अंतरिम समझौते को एक ‘रणनीतिक जीत’ करार दिया है। यह चीन के खिलाफ सप्लाई चेन को मजबूत करता है। साथ ही रुपये की स्थिरता को भी सपोर्ट करता है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो यह समझौता चीन के दबदबे को चुनौती देगा। कांत ने लिखा, ‘यह एक रणनीतिक जीत है जो चीन के खिलाफ सप्लाई चेन को मजबूत करती है। रुपये की स्‍टेबिलिटी को सपोर्ट करती है। पीएम नरेंद्र मोदी को उनके साहसिक नेतृत्व और विजन के लिए बहुत-बहुत बधाई। पीयूष गोयल को उनकी लगन और गतिशीलता के लिए और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल को उनके दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के लिए मेरी शुभकामनाएं। आपसी फायदेमंद द्विपक्षीय संबंध विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।’

Kota Mandi: NCDEX पर वायदा मंदा रहने से दो दिन में धनिया का भाव 400 रुपये टूटा

कोटा। Kota Mandi Price Today: भामाशाह अनाज मंडी में शनिवार को ऊँचे भाव पर लिवाली कमजोर रहने से सोयाबीन 100 रुपये, धनिया 200 रुपये और चना 50 रुपये मंदा रहा। एनसीडेक्स पर वायदा मंदा रहने से दो दिन में धनिया का भाव 400 रुपये टूट चुका है।

आवक की कमी से धान -1718 का भाव 100 रुपये उछल गया। मंडी में सभी कृषि जिंसों की मिलाकर करीब 60 हजार कट्टे और लहसुन की 1000 कट्टे की आवक रही। जिंसों के भाव रुपये प्रति क्विंटल इस प्रकार रहे-

गेहूं 2451 से 2520, ज्वार शंकर 1700 से 2300, ज्वार सफेद 2800 से 5000, बाजरा 2000 से 2350, मक्का लाल 1500 से 1750, मक्का सफेद 2500 से 2800, जौ 2000 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल।

धान सुगन्धा 2800 से 3201, धान (1509) 3000 से 3751, धान (1847) 3200 से 3651, धान (1718-1885) 3700 से 4300, धान (पूसा-1) 3400 से 4050, धान (1401-1846) 3800 से 4200, धान दागी 1200 से 2900 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन 4000 से 5801, सरसो 6200 से 6500, सरसों नयी 5300 से 6300, अलसी 7000 से 7800, तिल्ली 7000 से 10500 रुपये प्रति क्विंटल। मूंग 6000 से 6900, उड़द 4500 से 8200, चना देशी 4700 से 5201, चना मौसमी 4700 से 5150, चना पेप्सी 4800 से 5201, चना डंकी 3500 से 4700, चना काबुली 6000 से 7500 रुपये प्रति क्विंटल।

पुराना लहसुन 3000 से 9000, नया लहसुन 7500 से 10000, मैथी 4000 से 5200, धनिया बादामी 7500 से 8900, धनिया ईगल 9200 से 9600 रुपये प्रति क्विंटल।

India-Us Deal: अमेरिका को निर्यात होने वाले इन उत्पादों पर जीरो टैरिफ

अमेरिका भारत- ट्रेड डील पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की प्रेस कॉन्फ्रेंस

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के स्ट्रक्चर को अंतिम रूप दे दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस पर साइन भी कर दिए हैं। इसके बाद शनिवार को केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस डील की प्रमुख बातों को बताया।

इस डील के बाद भारत के सामानों पर अमेरिका एक्सपोर्ट करने पर अधिकतम 18 फीसदी ही टैरिफ लगेगा। वहीं ट्रेड डील के तहत कई चीजों को टैरिफ से मुक्त भी रखा है।

इन चीजों पर नहीं लगेगा कोई टैरिफ
पीयूष गोयल ने किसानों के हितों को सबसे ऊपर रखते हुए कहा कि इस समझौते से भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के प्रवेश मिलेगा। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया गया है कि इससे देश के किसानों को कोई नुकसान न हो।

उन्होंने बताया कि चाय, मसाले, कॉफी, नारियल तेल, कोपरा, और वनस्पति मोम जैसे उत्पादों पर अमेरिका में कोई आयात शुल्क नहीं लगेगा। इसके अलावा, केले, आम, अमरूद, एवोकाडो, कीवी, पपीता, अनानास, मशरूम, जड़ वाली सब्जियां, अनाज, जौ, बेकरी उत्पाद, कोको उत्पाद, तिल, खसखस और खट्टे फलों के रस जैसे कई फल, सब्जियां और कृषि उत्पाद भी बिना किसी शुल्क के अमेरिकी बाजार में पहुंचेंगे।

किसानों के हितों पर क्या बोले गोयल
गोयल ने दोहराया कि सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है जिससे किसानों के हितों को ठेस पहुंचे। उन्होंने कहा, ‘मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यह भारत-अमेरिका समझौता भारत के किसानों, MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) और हैंडिक्राफ्ट सेक्टर के हितों को किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुंचाता है।’

दवा निर्यात पर जीरो टैरिफ

  • गोयल ने बताया कि भारत से करीब 13 अरब डॉलर के दवा निर्यात पर भी अमेरिका में शून्य-शुल्क लगेगा।
  • रत्न और आभूषण (gems and jewellery) निर्यात को भी शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी, साथ ही कई अन्य उच्च-मूल्य वाले उत्पाद भी इसमें शामिल हैं।

स्मार्टफोन भी होंगे टैरिफ फ्री
भविष्य की ओर देखते हुए, गोयल ने कहा कि भारत से निर्यात होने वाले स्मार्टफोन पर भी भविष्य में शून्य-शुल्क लगेगा। उन्होंने यह भी बताया कि कई अन्य भारतीय निर्यात पर भी लगने वाले शुल्क को कम करके शून्य कर दिया जाएगा।

इनमें विमान और मशीनरी के पुर्जे, जेनेरिक दवाएं और फार्मास्यूटिकल्स, बंगाल, केरल और महाराष्ट्र से रत्न और हीरे, सिक्के, प्लैटिनम, घड़ियां, आवश्यक तेल, झूमर जैसे कुछ घर की सजावट के सामान, बीज, अकार्बनिक रसायन और यौगिक शामिल हैं। गोयल ने स्पष्ट किया कि इन उत्पादों पर कोई जवाबी शुल्क नहीं लगेगा। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका में इन पर शुल्क शून्य होगा।

डील में डेयरी प्रोडक्ट भी शामिल
इससे पहले पीयूष गोयल ने बताया था कि भारत-अमेरिका व्यापार सौदे में डेयरी उत्पाद, फल, सब्जियां, मसाले और अनाज जैसी चीजें शामिल हैं। इन सभी को इस तरह से सुरक्षित किया गया है कि हमारे देश के किसानों को कोई नुकसान न हो। उन्होंने एक्स पर लिखा कि यह समझौता भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि इस डील में किसानों की भलाई का ध्यान रखा गया है और इससे देश का विकास होगा।

भारत की किन चीजों को मिली सुरक्षा

  • फ्रोजन सब्जियां जैसे आलू, मटर, खीरा और गुरकिन। इसके अलावा बीन्स, अन्य फलियां (छिलके वाली या बिना छिलके वाली), अस्थायी रूप से संरक्षित सब्जियां जैसे खीरा और मशरूम (एगरिकस प्रजाति) और मिश्रित डिब्बाबंद सब्जियां। इन सब का आयात नहीं हो सकेगा।
  • डेयरी प्रोडक्ट जैसे दूध (तरल, पाउडर, कैंडीड आदि), पनीर (मोज़ेरेला, ब्लू वेन्ड, कसा हुआ/पाउडर आदि), क्रीम, मक्खन तेल, दही, पनीर और अन्य उत्पाद, छाछ, मट्ठा उत्पाद आदि, मक्खन और घी।अनाज में रागी, गेहूं, कोपरा, समाक, मक्का, बाजरा, चावल, जौ, जई, ज्वार, महीन आटा, और आटा (गेहूं, मक्का, चावल, बाजरा आदि)।
  • मसालों में काली मिर्च, लंबी, सूखी हरी मिर्च, दालचीनी (छाल, फूल आदि), धनिया, जीरा, हींग, अदरक, हल्दी, अजवाइन, मेथी, कैसिया, सरसों, राई, भूसी और अन्य पिसे हुए मसाले।

अमेरिका को क्या मिलेगा
अमेरिका की तरफ से भी कुछ जानकारी सामने आई है। व्हाइट हाउस ने बताया कि भारत अमेरिका से आने वाली औद्योगिक वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स को खत्म करेगा या कम करेगा। इसके अलावा, अमेरिका से आने वाले कई तरह के खाद्य और कृषि उत्पादों पर भी टैक्स कम होगा। इनमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (डीडीजी), पशु आहार के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्प्रिट जैसे उत्पाद शामिल हैं।

भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील से 30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार का रास्ता खुलेगा

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साइन कर दिए हैं। साथ ही यह भी साफ हो गया है कि अमेरिका से भारत क्या-क्या आएगा। वहीं केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को इस अंतरिम समझौते के ढांचे की सराहना की।

उन्होंने कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर के बाजार का रास्ता खुलेगा। यह समझौता खासकर छोटे और मध्यम उद्योगों (MSMEs), किसानों और मछुआरों के लिए बहुत फायदेमंद होगा।

गोयल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि इस समझौते से निर्यात में काफी बढ़ोतरी होगी और लाखों नई नौकरियां पैदा होंगी। इनमें से ज्यादातर नौकरियां महिलाओं और युवाओं के लिए होंगी।

उन्होंने लिखा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व में, भारत ने अमेरिका के साथ एक अंतरिम समझौते के ढांचे पर सहमति जताई है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का बाजार खुल जाएगा, खासकर MSMEs, किसानों और मछुआरों को इसका लाभ मिलेगा। निर्यात में वृद्धि से हमारे महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नई रोजगार के अवसर पैदा होंगे।’

किस सेक्टर को होगा फायदा

  1. वाणिज्य मंत्री ने यह भी बताया कि इस समझौते के तहत, अमेरिका भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ को घटाकर 18% कर देगा।
  2. इससे दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में भारत के लिए बड़े अवसर पैदा होंगे।
  3. कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक रसायन, घर की सजावट का सामान, हस्तनिर्मित वस्तुएं और कुछ खास मशीनरी जैसे क्षेत्रों को फायदा होगा।
  4. जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे, और विमान के पुर्जे जैसे कई सामानों पर टैरिफ शून्य हो जाएगा। इससे भारत की निर्यात क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और बढ़ावा मिलेगा।
  5. भारत को विमान के पुर्जों पर सेक्शन 232 के तहत छूट भी मिलेगी, ऑटो पार्ट्स पर टैरिफ रेट कोटा मिलेगा और जेनेरिक दवाओं पर बातचीत के नतीजे भी मिलेंगे, जिससे इन क्षेत्रों में निर्यात में ठोस लाभ होगा।

डेयरी प्रोडक्ट को रखा सुरक्षित
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस समझौते से भारत के किसानों और ग्रामीण आजीविका की सुरक्षा होगी। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि यह समझौता भारत के किसानों के हितों की रक्षा करने और ग्रामीण आजीविका को बनाए रखने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसमें मक्का, गेहूं, चावल, सोयाबीन, मुर्गी पालन, दूध, पनीर, इथेनॉल (ईंधन), तंबाकू, कुछ सब्जियां, मांस आदि जैसे संवेदनशील कृषि और डेयरी उत्पादों को पूरी तरह से सुरक्षित रखा गया है।

भारत आने वाले रूसी तेल के टैंकर चीन की ओर मुड़ गए, रूस ने ड्रैगन को दिया ऑफर

नई दिल्ली। Russian Crude Oil:भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील ने रूसी तेल के आयात पर भी ब्रेक लगा दिए हैं। अमेरिका ने भारत पर लगाए 50 में से 25 फीसदी टैरिफ सिर्फ इसी शर्त पर हटाया है कि दिल्ली रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करे। साथ ही भारत को अब अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदना होगा। इसका असर दिखाई भी दिया।

भारत ने अब रूस से तेल खरीदना काफी कम कर दिया है। वहीं रूस अब चीन को ज्यादा तेल बेच रहा है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद रूस ने तेल की कीमत और घटा दी है। उसने चीन को सस्ता तेल खरीदने का ऑफर भी दिया है।

रॉयटर्स के मुताबिक इस हफ्ते रूस से चीन को होने वाले तेल निर्यात पर छूट काफी बढ़ गई है। तेल बेचने वाले दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल खरीदार, चीन से मांग बढ़ाने के लिए दाम कम कर रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भारत से होने वाली संभावित बिक्री में कमी की भरपाई की जा सके।

अगर भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया, तो चीन ही सस्ते रूसी तेल का एकमात्र बड़ा खरीदार रह जाएगा। दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक रूस पहले से ही पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण भारत से घटती मांग से जूझ रहा है। इस वजह से रूस का तेल जहाजों में जमा हो रहा है।

चीन ने कितनी बढ़ाई खरीदारी

  • जनवरी 2026 रूस और चीन के बीच तेल व्यापार का सबसे मजबूत महीना साबित हुआ है।
  • केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में चीन का रूस से समुद्री रास्ते से कच्चा तेल आयात बढ़कर रिकॉर्ड 17 लाख बैरल प्रति दिन हो गया।
  • OilX के अनुसार चीन ने जनवरी में 16.4 लाख बैरल प्रति दिन रूसी तेल आयात किया जो मार्च 2024 के बाद सबसे ज्यादा था।
  • ऑइलप्राइसडॉटकॉम की एक खबर के मुताबिक जनवरी में समुद्र के रास्ते रूस से 18.6 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) तेल चीन भेजा गया। यह पिछले साल जनवरी 2025 के रिकॉर्ड को भी पार कर गया।

जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों (इनमें नताशा केनेवा भी शामिल हैं) ने 4 फरवरी के एक नोट में लिखा है कि चीन के स्वतंत्र रिफाइनर इस स्थिति का सबसे ज्यादा फायदा उठा रहे हैं। वे भारी छूट और घरेलू नीतियों के सहारे रूस से आने वाले ज्यादातर तेल को खरीद रहे हैं। इससे उनकी कमाई बढ़ रही है, उत्पादन बढ़ रहा है और रणनीतिक भंडार भी मजबूत हो रहा है।

जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों (इनमें नताशा केनेवा भी शामिल हैं) का मानना है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद भी भारत हर दिन 8 लाख से 10 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदेगा। यह भारत के कुल कच्चे तेल आयात का 17 से 21% होगा। पिछले साल जून में भारत रूस से हर दिन करीब 20 लाख बैरल तेल खरीद रहा था। केप्लर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात घटकर 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम है।

रूस ने कितनी बढ़ाई छूट

व्यापारिक सूत्रों के मुताबिक चीन को भेजे जाने वाले रूसी ESPO Blend तेल पर छूट इस हफ्ते बढ़कर लगभग 9 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। पिछले कुछ महीनों में यह छूट 7 से 8 डॉलर प्रति बैरल थी। वहीं बाल्टिक सागर से निर्यात होने वाले रूसी यूराल्स (Urals) ग्रेड तेल पर छूट लगभग 12 डॉलर प्रति बैरल है। यही यूराल्स तेल आमतौर पर भारत को भेजा जाता है। सूत्रों का कहना है कि यह छूट और भी बढ़ सकती है।

कारमित्रा और बैंकगुरुज़ का जयपुर में पहला अत्याधुनिक ईवी शोरूम शुरू

जयपुर। इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र में विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कारमित्रा और बैंकगुरुज़ ने जयपुर शहर में अपने पहले संयुक्त शोरूम का शुभारंभ किया।

किंग्स रोड, निर्माण नगर स्थित इस भव्य शोरूम का उद्घाटन राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के संयोजक डीडी कुमावत तथा नगर निगम जयपुर के पार्षद राजू अग्रवाल ने किया।

यह केंद्र इलेक्ट्रिक वाहन नेटवर्क के विस्तार का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां 60 किलोवाट क्षमता का आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन स्थापित किया गया है।

इसके साथ ही यह विनफास्ट कंपनी के वाहनों के लिए अधिकृत विद्युत वाहन सेवा केंद्र के रूप में भी कार्य करेगा। यहां कारमित्रा के माध्यम से वाहन साज-सज्जा और रखरखाव से संबंधित सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

शोरूम को ग्राहकों की सुविधा और आराम को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से विकसित किया गया है। वाहन चार्जिंग के दौरान ग्राहकों के लिए सुसज्जित प्रतीक्षालय की व्यवस्था की गई है।

मुख्य अतिथि डीडी कुमावत ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बताया। उद्घाटन के अवसर पर लगभग 250 आगंतुकों और विशिष्ट अतिथियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई तथा सभी ने इस आधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन केंद्र की सुविधाओं और अवधारणा की प्रशंसा की।

ब्रिटेन की अदालत ने नीरव मोदी के मुकदमे को स्थगित करने की याचिका खारिज की

नई दिल्ली। लंदन हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के बकाया लोन मामले में भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की उस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया, जिसमें उसने दृष्टिहीनता, अवसाद और जेल की बाध्यताओं के कारण अपने मुकदमे को स्थगित करने का अनुरोध किया।

जस्टिस साइमन टिंकलर ने कहा कि कैदी को किसी भी प्रकार की ‘महत्वपूर्ण क्षति’ का सामना नहीं करना पड़ेगा और 23 मार्च से शुरू होने वाले आठ दिवसीय मुकदमे के लिए उसे ‘‘समान अवसर’’ प्राप्त होगा। जस्टिस टिंकलर ने कहा, ‘दुर्भाग्यवश, मैं इस याचिका को नीरव मोदी द्वारा देरी करने के पैटर्न का हिस्सा मानता हूं।’

संघर्ष का सामना कर रहे नीरव मोदी
स्थगन याचिका के लिए मोदी की ओर से पेश हुए बैरिस्टर जेम्स किनमैन ने अपने मुवक्किल द्वारा सामना किए जा रहे ‘पूर्वाग्रह’ का मुद्दा उठाया, क्योंकि पिछले अक्टूबर में दक्षिण लंदन के एचएमपी थेम्साइड जेल से स्थानांतरित होने के बाद से उसे अदालती दस्तावेजों तक पहुंच प्राप्त करने में लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है।

क्या है मामला
नीरव (54) पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ लगभग दो अरब अमेरिकी डॉलर के धोखाधड़ी और धन शोधन मामले में भारत प्रत्यर्पित किए जाने का विरोध कर रहा है। वह उत्तरी लंदन की एचएमपी पेंटनविले जेल से वीडियोलिंक के माध्यम से 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बैंक ऑफ इंडिया के अलग मामले में मुकदमा पूर्व समीक्षा के लिए पेश हुआ।

क्या यौन मामलों में सहमति की उम्र घटाने पर खतरे में पड़ सकती है बच्चों की सुरक्षा?

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में बताया कि पॉक्सो अधिनियम 2012 के तहत 18 वर्ष से कम आयु का हर व्यक्ति बच्चा माना जाता है। सरकार ने कहा कि यौन गतिविधियों से जुड़े मामलों में सहमति की उम्र को कम करना या किसी तरह की छूट देना बच्चों की सुरक्षा को कमजोर कर सकता है।

केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि पॉक्सो अधिनियम में ‘सहमति’ (कंसेंट) शब्द की स्पष्ट परिभाषा नहीं दी गई है। कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के साथ किया गया यौन कृत्य अपराध माना जाता है, भले ही यह कहा जाए कि सहमति दी गई थी।

उन्होंने कहा कि सहमति की उम्र कम करना या इसमें किसी तरह की छूट देना बच्चों की सुरक्षा को कमजोर करेगा, शोषण का खतरा बढ़ाएगा और खासकर किशोर लड़कियों की सुरक्षा को लेकर भारत की प्रतिबद्धता को नुकसान पहुंचाएगा।

मंत्री यह जवाब के. सुब्बारायन और सेल्वराज वी. के सवाल पर दे रही थीं। उन्होंने पूछा था कि क्या केंद्र सरकार का ध्यान सुप्रीम कोर्ट की दो न्यायाधीशों की पीठ की उस चिंता पर गया है, जिसमें कहा गया था कि पॉक्सो कानून का बार-बार गलत इस्तेमाल हो रहा है और क्या ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ लाने पर विचार किया जा सकता है ताकि वास्तविक किशोर प्रेम संबंधों को पॉक्सो की सख्त धाराओं से बाहर रखा जा सके।

उम्र 18 साल रखना इसलिए जरूरी : सभी कानूनों में सहमति की उम्र 18 साल रखना इसलिए जरूरी है ताकि नाबालिगों के साथ छल, दबाव और शोषण को रोका जा सके, क्योंकि बच्चे यौन मामलों में कानूनी और मानसिक रूप से सही सहमति देने की क्षमता नहीं रखते।

सरकार ने सोच-समझकर लिया फैसला
अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि सहमति की उम्र 18 साल बनाए रखना सरकार का सोच-समझकर लिया गया फैसला है। उन्होंने बताया कि कानूनों में एकरूपता बनाए रखने के लिए अलग-अलग कानूनों में वयस्क होने की उम्र 18 साल तय की गई है। यही उम्र अन्य कानूनों में भी लागू है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता, 2023; पॉक्सो अधिनियम, 2012; बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006; हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956; किशोर न्याय (देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 और हिंदू अल्पसंख्यक एवं संरक्षकता अधिनियम, 1956 शामिल हैं।

मुंबई में इंडिगो विमान में तकनीकी खराबी से 210 यात्रियों की सांसें अटकीं

मुंबई। शुक्रवार की सुबह मुंबई हवाई अड्डे पर उस वक्त एक तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई जब देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो के एक विमान को लैंडिंग के दौरान तकनीकी खराबी का सामना करना पड़ा।

हालांकि, राहत की बात यह रही कि पायलटों की सूझबूझ से विमान को सुरक्षित उतार लिया गया और किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, यह घटना इंडिगो की फ्लाइट संख्या 6E2157 के साथ हुई, जिसमें 210 से अधिक यात्री सवार थे। यह विमान A321 नियो (A321 neo) श्रेणी का था।

लैंडिंग के महत्वपूर्ण चरण के दौरान विमान के लैंडिंग गियर लीवर में समस्या सामने आई। सूत्रों ने बताया कि सिस्टम का ‘ऑटोमैटिक मोड’ काम नहीं कर रहा था। इस तकनीकी खामी के चलते पायलटों को ‘मैनुअल मोड’ का उपयोग करना पड़ा ताकि विमान के पहिए सुरक्षित रूप से खोले जा सकें और लैंडिंग कराई जा सके।

विमान ने दोबारा भरी उड़ान
गनीमत रही कि विमान मुंबई एयरपोर्ट पर सुरक्षित रूप से लैंड कर गया। लैंडिंग के बाद तकनीकी टीम द्वारा समस्या की जांच की गई और उसे ठीक कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, मरम्मत के बाद इस विमान ने दिन में अपनी अन्य निर्धारित उड़ानें भी संचालित कीं। फिलहाल, इस घटना पर इंडिगो की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।

NEW START: संधि खत्म होते ही विश्व की दो महाशक्तियों में टकराव, जानिए क्यों

नई दिल्ली। NEW START: अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों के नियंत्रण के लिए की गई अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण न्यू START (New Strategic Arms Reduction Treaty) संधि थी, जो 5 फरवरी 2026 को आधिकारिक रूप से समाप्त हो गई। दुनिया की इस आखिरी परमाणु हथियार नियंत्रण संधि के समाप्त होते ही वैश्विक सुरक्षा को लेकर चिंताएँ और गहरा गई हैं।

इसी बीच, अमेरिका और चीन आपस में उलझ गए हैं। अमेरिका ने चीन पर गुप्त रूप से परमाणु परीक्षण करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ, चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “बेबुनियाद और झूठा प्रचार” बताया है।

दो महाशक्तियों के बीच यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और रूस जिनके पास दुनिया के सबसे ज़्यादा परमाणु हथियार हैं, ने माना है कि हथियार नियंत्रण पर नई बातचीत जल्द शुरू करना जरूरी है।

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरस्त्रीकरण सम्मेलन (Conference on Disarmament) में बोलते हुए, शीर्ष अमेरिकी हथियार नियंत्रण अधिकारी थॉमस डिनानो ने कहा कि चीन ने गुप्त परमाणु परीक्षण किए हैं और उन्हें छिपाने की कोशिश की है।

समाचार एजेंसी AP के अनुसार, उन्होंने कहा, “अमेरिकी सरकार को पता है कि चीन ने परमाणु विस्फोटक परीक्षण किए हैं, जिसमें सैकड़ों टन की निर्धारित क्षमता वाले परीक्षणों की तैयारी भी शामिल है।” अमेरिका का कहना है कि चीन की परमाणु नीति में “कोई सीमा नहीं, कोई पारदर्शिता नहीं, कोई निगरानी नहीं” है, जो वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

दूसरी तरफ, चीन ने अमेरिका के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। चीन के राजदूत शेन जियान ने कहा कि बीजिंग अब भी परमाणु परीक्षण पर स्वैच्छिक रोक का पालन कर रहा है। उन्होंने अमेरिका पर पलटवार करते हुए कहा कि ये आरोप “परमाणु निरस्त्रीकरण से ध्यान हटाने और अमेरिका की परमाणु प्रभुता को सही ठहराने की कोशिश” हैं। चीन का तर्क है कि उसका परमाणु भंडार अमेरिका और रूस की तुलना में अब भी काफी छोटा है और असली जिम्मेदारी इन्हीं दो देशों की बनती है।

हथियारों पर कोई कानूनी रोक नहीं
न्यू स्टार्ट संधि के खत्म होने के साथ ही पहली बार पिछले पचास वर्षों में ऐसा हुआ है कि अमेरिका और रूस के परमाणु हथियारों पर कोई कानूनी सीमा नहीं बची है। यह संधि दोनों देशों को अधिकतम 1,550 तैनात परमाणु हथियारों तक सीमित करती थी। इसके समाप्त होने के बाद अमेरिका और रूस के वार्ताकारों ने अबू धाबी में मुलाकात कर जल्द बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक साल के लिए संधि की शर्तें बनाए रखने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे स्वीकार नहीं किया। ट्रंप का कहना है कि कोई भी नया समझौता चीन को शामिल किए बिना अधूरा होगा।

अमेरिका का दबाव
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि चीन को शामिल किए बिना कोई भी समझौता अमेरिका और उसके सहयोगियों को “कम सुरक्षित” बनाएगा। अमेरिका का दावा है कि चीन का परमाणु भंडार 2020 में लगभग 200 था, जो अब बढ़कर 600 से अधिक हो गया है और 2030 तक 1,000 से ज़्यादा हो सकता है। वहीं, चीन ने इस पर साफ इनकार करते हुए कहा कि वह फिलहाल किसी त्रिपक्षीय समझौते में शामिल नहीं होगा।

किस देश के पास ज्यादा परमाणु हथियार
बता दें कि अमेरिका और रूस के पास मिलकर दुनिया के 80% से ज़्यादा परमाणु हथियार हैं, जबकि चीन का भंडार सबसे तेजी से बढ़ रहा है। न्यू स्टार्ट संधि के खत्म होने से दुनिया इस समय एक खतरनाक परमाणु शून्य में प्रवेश कर चुकी है, जहां अमेरिका तीन देशों का समझौता चाहता है, रूस और देशों को जोड़ने की बात करता है वहीं चीन बातचीत से दूरी बनाए हुए है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द कोई नया समझौता नहीं हुआ, तो दुनिया शीत युद्ध के बाद के सबसे अस्थिर परमाणु दौर में प्रवेश कर सकती है।