Monday, July 27, 2026
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Trump Tariff: ट्रंप ने भारत से डील में कर दिया गेम, शर्त तोड़ी तो एक्‍स्‍ट्रा टैरिफ वापस

नई दिल्‍ली। रूसी तेल खरीदने के लिए भारत पर लगे 25% एक्‍स्‍ट्रा टैरिफ हट गए हैं। अंतरिम व्‍यापार समझौते के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एग्‍जीक्‍यूटिव ऑर्डर जारी किए हैं। इसमें भारत को तत्काल यह राहत दी गई है।

हालांकि, एक्‍सपर्ट का कहना है कि इस रिलीफ से कहीं ज्‍यादा महत्वपूर्ण वो सख्त निगरानी तंत्र है जो इसके साथ आया है। जियो स्‍ट्रेटेजिस्‍ट ब्रह्मा चेलानी ने यह बात कही है। चेलानी ने सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर एक पोस्ट किया है।

इसमें उन्‍होंने कहा कि यह आदेश अमेरिकी वाणिज्य मंत्री को भारत के तेल स्रोत को ट्रैक करने का काम सौंपता है। इससे एक्‍शन के लिए एक साफ ट्रिगर बनता है। ट्रंप के ऑर्डर सशर्त हैं। इसका मतलब है कि शर्त टूटने पर 25% टैरिफ की वापसी हो सकती हैं।

एक्‍सपर्ट ने लिखा, ‘रूसी तेल पर ट्रंप के कार्यकारी आदेश में असली चुभन इसके निगरानी जनादेश में निहित है। यह औपचारिक रूप से वाणिज्य मंत्री को भारतीय तेल आयात पर नजर रखने का काम सौंपता है जो स्पष्ट ट्रिगर बनाता है। यह पता चलने पर कि भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूसी तेल का आयात फिर से शुरू कर दिया है, 25% अतिरिक्‍त (दंडात्मक) टैरिफ वापस लागू किया जा सकता है।’

चेलानी ने चेतावनी दी कि ‘अप्रत्यक्ष रूप से’ शब्द का समावेश प्रवर्तन के दायरे को काफी हद तक बढ़ा देता है। उन्‍होंने कहा, ‘शब्द ‘अप्रत्यक्ष रूप से’ एक वेटेड वर्ड है। यह यूरोपीय संघ या अमेरिका को बेचे जाने वाले भारतीय परिष्कृत ईंधन – डीजल, जेट ईंधन और अन्य उत्पादों – को दंडित करने का दरवाजा खोलता है। अगर वॉशिंगटन उसे रूसी कच्चे तेल से उत्पन्न मानता है।’

ब्रह्मा चेलानी ने यह भी बताया कि रियायती रूसी यूराल क्रूड को बाजार-मूल्य वाले अमेरिकी तेल से बदलना भारत के तेल आयात बिल में सालाना 4 अरब डॉलर तक की बढ़ोतरी कर सकता है। यह लंबी परिवहन दूरी के कारण और भी महंगा हो गया है। उन्‍होंने कहा, ‘वॉशिंगटन का इरादा साफ है- भारत की ऊर्जा सुरक्षा को ज्‍यादा महंगा और भौगोलिक रूप से दूर सप्‍लायर अमेरिका से जोड़ना।’

अमेरिका ने कहा है कि भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूसी तेल का आयात बंद करने के लिए प्रतिबद्धता जताई है। इस कदम से वॉशिंगटन ने पिछले अगस्त में भारतीय सामानों पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ को हटा दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से जारी एक कार्यकारी आदेश के अनुसार, भारत ने अगले 10 सालों में रक्षा सहयोग का विस्तार करने के लिए अमेरिका के साथ एक ढांचे के लिए भी प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, ट्रंप ने साफ कर दिया है कि टैरिफ रोलबैक सशर्त है।

आदेश का मतलब
चेलानी ने बताया कि कार्यकारी आदेश में अमेरिका भारत के तेल स्रोत पर बारीकी से नजर रखेगा। उन्‍होंने कहा, ‘वाणिज्य मंत्री, राज्य मंत्री, वित्त मंत्री और किसी भी अन्य वरिष्ठ अधिकारी के साथ समन्वय में जिसे वाणिज्य मंत्री उचित समझता है, यह निगरानी करेगा कि क्या भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूसी संघ के तेल का आयात फिर से शुरू करता है, जैसा कि कार्यकारी आदेश 14329 की धारा 7 में परिभाषित है।’

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिकी अधिकारियों की ओर से एक निर्धारण आगे की कार्रवाई को ट्रिगर कर सकता है। वह बोले, ‘अगर वाणिज्य मंत्री को पता चलता है कि भारत ने सीधे या परोक्ष रूप से रूसी संघ के तेल का आयात फिर से शुरू कर दिया है तो राज्य मंत्री, वित्त मंत्री, वाणिज्य मंत्री, गृह मंत्री, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि, राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के लिए राष्ट्रपति के सहायक, आर्थिक नीति के लिए राष्ट्रपति के सहायक और व्यापार और विनिर्माण के लिए राष्ट्रपति के सहायक और वरिष्ठ सलाहकार के साथ परामर्श में यह सिफारिश करेगा कि क्या और किस हद तक मुझे भारत के खिलाफ अतिरिक्त कार्रवाई करनी चाहिए।’

अमेरिकी डीडीजीएस के भारत में आयात पर ड्यूटी में छूट मिलेगी, पीयूष गोयल का दावा

नई दिल्ली। India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच होने वाले व्यापार समझौते के पहले चरण का ढांचा तैयार हो गया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने रविवार को बताया कि इस समझौते के तहत अमेरिका से आने वाले ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGS) पर कोटा के आधार पर ड्यूटी में छूट दी जाएगी।

DDGS एक तरह का पशु आहार है, जिसमें पोषण की मात्रा काफी ज्यादा होती है। इसमें प्रोटीन भी भरपूर होता है। पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में एनिमल हसबैंडरी और पोल्ट्री सेक्टर इस प्रोडक्ट की काफी मांग कर रहा है। पोल्ट्री कारोबार से जुड़े लोग इसे खास तौर पर पसंद करते हैं, क्योंकि इससे मुर्गियां ज्यादा सेहतमंद होती हैं। गोयल ने न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में कहा, “यह बहुत हाई प्रोटीन वाला फीड है, जिससे चिकन काफी ज्यादा हेल्दी हो जाता है।”

गोयल ने जोर देकर कहा कि भारत ने बाजार को बहुत सोच-समझकर और बैलेंस्ड तरीके से खोला है। DDGS पर सिर्फ कोटा के अंदर ही ड्यूटी छूट मिलेगी, ताकि घरेलू हितों को कोई नुकसान न हो। उन्होंने कहा, “कोटा पर DDGS अच्छा है इकोनॉमी के लिए।” कुछ एक्सपर्ट्स ने ड्यूटी कट पर चिंता जताई थी, लेकिन मंत्री ने साफ किया कि यह फैसला सबके हित में लिया गया है।

यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच व्यापार डील के पहले चरण से जुड़ा है, जिस पर मिड-मार्च तक साइन होने की उम्मीद है। दोनों देशों की ओर से जारी जॉइंट स्टेटमेंट में भी इसकी पुष्टि की गई है।

बता दें कि DDGS अमेरिका में एथनॉल बनाने की प्रक्रिया से निकलने वाला एक बाय-प्रोडक्ट है, जो पोषण से भरपूर होता है। यूएस ग्रेन्स एंड बायोप्रोडक्ट्स काउंसिल के मुताबिक, यह एनिमल फीड के तौर पर एनर्जी और प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है। अमेरिका के एथनॉल प्लांट्स में हर साल 15 बिलियन गैलन से ज्यादा एथनॉल और करीब 44 मिलियन मीट्रिक टन DDGS बनाने की क्षमता है।

यूएस ग्रेन्स एंड बायोप्रोडक्ट्स काउंसिल ने दुनिया भर में DDGS के फायदे बताने में अहम भूमिका निभाई है। साल 2009 में इसका एक्सपोर्ट करीब 5 मिलियन टन था, जो 2022-23 में बढ़कर 10 मिलियन मीट्रिक टन से ज्यादा हो गया। फिलहाल DDGS की सप्लाई 58 देशों तक पहुंच रही है।

मैक्सिको इसका सबसे बड़ा खरीदार है, जो कुल एक्सपोर्ट का 20 फीसदी से ज्यादा हिस्सा लेता है। इसके बाद साउथ कोरिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और कनाडा जैसे देश बड़े इंपोर्टर्स में शामिल हैं।

पीयूष गोयल ने कहा कि यह व्यापार समझौता इंडिया की ग्रोथ स्टोरी को आगे बढ़ाने में मदद करेगा। इससे भारतीय किसानों को भी फायदा मिलेगा, खासकर प्रोसेस्ड प्रोडक्ट्स के एक्सपोर्ट में। उन्होंने कहा कि सरकार का हर फैसला पूरी सोच-समझ के साथ लिया गया है और किसानों के हित को ध्यान में रखकर ही किया गया है।

SOPA ने किया था डीडीजीएस का विरोध
वहीं, सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) ने बयान जारी कर कहा कि अक्टूबर से शुरू होने वाले तेल वर्ष 2024-25 के पहले छह महीनों में एनिमल फीड सेगमेंट ने सोयाबीन खली का उठाना कम किया, जिसमें 7 प्रतिशत से ज्‍यादा की गिरावट देखी गई। चालू सीजन में अक्टूबर से मार्च के बीच फीड सेक्टर ने 32.50 लाख टन सोयाबीन खली का उठान किया, जबकि‍ पिछले सीजन में इसी अवधि के दौरान यह 35 लाख टन था। सोपा ने मांग में गिरावट के पीछे एनिमल फीड के रूप में डीडीजीएस को प्राथमिकता देना बताया, क्‍याेंकि यह पशुपालकों के लिए खली से सस्‍ता है.

होली पर 5 जोड़ी साप्ताहिक स्पेशल रेल सेवाओं की अवधि में विस्तार

कोटा। होली के अवसर पर विभिन्न दिशाओं में यात्रा करने वाले यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल से होकर गुजरने वाली पांच जोड़ी साप्ताहिक स्पेशल रेलसेवाओं की संचालन अवधि में विस्तार किया गया है। ये विशेष रेलसेवाएं पूर्व निर्धारित समय-सारणी के अनुसार अब मार्च माह तक संचालित की जाएंगी।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि यात्री मांग की समीक्षा के उपरांत यात्रियों को सुगम, सुरक्षित एवं सुविधाजनक रेल यात्रा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इन विशेष रेलसेवाओं की अवधि बढ़ाई गई है। ये रेलसेवाएं कोटा मंडल से होकर विभिन्न प्रमुख गंतव्यों के लिए संचालित होंगी।

विस्तारित अवधि वाली विशेष रेलसेवाएं

  1. गाड़ी संख्या 04715/04716 बीकानेर–साईनगर शिर्डी–बीकानेर साप्ताहिक स्पेशल रेलसेवा
    बीकानेर से दिनांक 07.03.2026 से 28.03.2026 तक तथा साईनगर शिर्डी से 08.03.2026 से 29.03.2026 तक संचालित की जाएगी।
  2. गाड़ी संख्या 04725/04726 हिसार–खडकी–हिसार साप्ताहिक स्पेशल रेलसेवा
    हिसार से 01.03.2026 से 29.03.2026 तक तथा खडकी से 02.03.2026 से 30.03.2026 तक संचालित की जाएगी।
  3. गाड़ी संख्या 09621/09622 अजमेर–बांद्रा टर्मिनस–अजमेर साप्ताहिक स्पेशल रेलसेवा
    अजमेर से 01.03.2026 से 29.03.2026 तक तथा बांद्रा टर्मिनस से 02.03.2026 से 30.03.2026 तक संचालित की जाएगी।
  4. गाड़ी संख्या 09625/09626 अजमेर–दौंड–अजमेर साप्ताहिक स्पेशल रेलसेवा
    अजमेर से 05.03.2026 से 26.03.2026 तक तथा दौंड से 06.03.2026 से 27.03.2026 तक संचालित की जाएगी।
    गाड़ी संख्या 09627/09628 अजमेर–सोलापुर–अजमेर साप्ताहिक स्पेशल रेलसेवा
  5. अजमेर से 04.03.2026 से 25.03.2026 तक तथा सोलापुर से 05.03.2026 से 26.03.2026 तक संचालित की जाएगी।

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से यात्रा से पूर्व गाड़ियों की स्थिति, समय-सारणी एवं ठहराव की विस्तृत जानकारी के लिए रेलवे की अधिकृत वेबसाइट अथवा एनटीईएस मोबाइल ऐप का उपयोग करने की सलाह दी है।

आरक्षित श्रेणी में यात्रा के दौरान आईडी नहीं दिखाने पर यात्रियों को बेटिकट माना जाएगा

कोटा। ट्रैन में आरक्षित श्रेणी में यात्रा करते समय यात्रियों के समूह में से कम से कम एक यात्री को निर्धारित पहचान पत्र मूल रूप में प्रस्तुत करना होगा। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो संबंधित सभी यात्रियों को बिना टिकट यात्रा करने वाला माना जाएगा और उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार यात्रा के दौरान निर्धारित पहचान पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, जिन यात्रियों ने किसी विशेष श्रेणी के लिए आरक्षित कोटे के अंतर्गत टिकट बुक कराया है अथवा किसी प्रकार की रियायत का लाभ लिया है, उन्हें अपनी पात्रता एवं दावे की पुष्टि हेतु वैध प्रमाण प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। प्रमाण प्रस्तुत न करने की स्थिति में रियायत अथवा आरक्षण सुविधा अमान्य मानी जाएगी।

रेलवे बोर्ड ने इन निर्देशों के सख्त अनुपालन पर विशेष जोर देते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्रों में संचालित रेल सेवाओं जैसे भारत–नेपाल, भारत–बांग्लादेश आदि मार्गों पर पहचान सत्यापन को और अधिक सतर्कता के साथ सुनिश्चित किया जाए।

रेलवे प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया है कि यात्रियों की सुविधा के साथ-साथ नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अनियमितता से बचा जा सके।

FPI: फरवरी में विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार में 8129 करोड़ का निवेश किया

नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार के लिए फरवरी का पहला हफ्ता एक बड़ी राहत लेकर आया है। पिछले तीन महीनों से लगातार बिकवाली कर रहे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का रुख अब बदल गया है और वे फिर से भारतीय बाजार में खरीदारी की ओर लौटे हैं।

फरवरी के पहले हफ्ते (6 फरवरी तक) में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 8,129 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है। इस बड़े बदलाव के पीछे भारत और अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील और ग्लोबल मार्केट में सुधरते हालात को मुख्य वजह माना जा रहा है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस डील से निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी है और भारतीय अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को लेकर उनका भरोसा फिर से बहाल हुआ है।

विदेशी निवेशकों की इस वापसी के कई ठोस कारण हैं। एंजेल वन के सीनियर एनालिस्ट वकारजावेद खान के मुताबिक, भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में मिली सफलता ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता को कम कर दिया है।

इसके साथ ही, हाल ही में पेश किए गए वित्त वर्ष 2026 के केंद्रीय बजट में दिए गए राजकोषीय प्रोत्साहन (fiscal stimulus) और सेक्टर-आधारित रियायतों ने भी निवेशकों को आकर्षित किया है।

वहीं, जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार का मानना है कि रुपये की मजबूती ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है। हाल ही में रुपया डॉलर के मुकाबले 90.30 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर गया था, लेकिन अब इसमें सुधार की उम्मीद दिख रही है। अनुमान है कि मार्च 2026 तक रुपया संभलकर 90 प्रति डॉलर के नीचे आ सकता है, जिससे विदेशी निवेश में और बढ़ोतरी हो सकती है।

2026 साल की शुरुआत भी खराब रही और निवेशकों ने 35,962 करोड़ रुपये बाहर निकाल लिए। मार्केट एक्सपर्ट्स के अनुसार, पिछले महीनों में अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल, डॉलर की उठापटक और व्यापारिक तनाव की वजह से विदेशी निवेशक पैसा निकाल रहे थे।

हालांकि, अब स्थितियां बदल रही हैं। मॉर्निंगस्टार इंडिया के हिमांशु श्रीवास्तव का कहना है कि घरेलू ब्याज दरों में स्थिरता की उम्मीद और भारत-अमेरिका के बीच बेहतर होते रिश्तों ने बाजार में नई जान फूंक दी है।

बाजार के जानकारों का कहना है कि अगर कंपनियों के नतीजे अच्छे रहे और वैश्विक स्तर पर व्यापारिक तनाव नहीं बढ़ा, तो आने वाले समय में निवेश की यह रफ्तार और तेज हो सकती है।

Income Tax: नई टैक्स व्यवस्था 1 अप्रैल से होगी लागू, स्टॉक मार्केट से वेतन तक बदलेगा

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नई दिल्ली। Income Tax new rules: 1 अप्रैल 2026 से प्रस्तावित ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 को लागू करने की तैयारी है। ये नियम नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 पर आधारित होंगे। सरकार का उद्देश्य टैक्स सिस्टम को ज्यादा पारदर्शी बनाना, नियमों की अस्पष्टता को खत्म करना और टैक्स चोरी पर सख्ती से रोक लगाना है।

आने वाले समय में टैक्स प्रशासन पूरी तरह डेटा पर आधारित होगा, जहां हर आय, खर्च और निवेश का डिजिटल रिकॉर्ड निर्णायक भूमिका निभाएगा।शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए नए नियम बेहद अहम हैं। अब स्टॉक एक्सचेंजों को हर तरह के लेनदेन का पूरा ऑडिट ट्रेल कम से कम सात साल तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।

यदि किसी ट्रेड में बाद में बदलाव किया जाता है, तो उसकी जानकारी हर महीने आयकर विभाग को देनी होगी। इसका मतलब यह है कि कोई भी ट्रांजेक्शन सिस्टम से पूरी तरह हटाया नहीं जा सकेगा। कैश मार्केट से लेकर डेरिवेटिव सेगमेंट तक हर गतिविधि पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

इसके साथ ही कैपिटल एसेट्स के होल्डिंग पीरियड को लेकर नियमों को और स्पष्ट किया गया है, ताकि शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स को लेकर भविष्य में विवाद न हों।

नौकरीपेशा लोगों के लिए बदलेगा नियम
नई टैक्स व्यवस्था सैलरी पाने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगी। कंपनी की ओर से मिलने वाली सुविधाएं जैसे रेंट फ्री घर, कार, बच्चों की पढ़ाई, क्लब मेंबरशिप, सस्ते लोन, यात्रा और खाने-पीने से जुड़े खर्च अब तय फॉर्मूले के आधार पर टैक्स के दायरे में आएंगे।

पहले इन सुविधाओं के मूल्यांकन को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं होती थीं, जिससे विवाद और कानूनी मामले सामने आते थे। नए नियमों में हर सुविधा के लिए स्पष्ट गणना, सीमा और कैप तय की गई है। इससे कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को पहले से पता रहेगा कि किस सुविधा पर कितना टैक्स देना होगा।

विदेशी कंपनियों पर सख्ती
नए इनकम टैक्स नियमों में विदेशी कंपनियों और नॉन रेजिडेंट्स पर भी फोकस किया गया है। जो विदेशी संस्थाएं भारत से कमाई तो करती हैं, लेकिन टैक्स से बच जाती थीं, उनके लिए अब नियम और कड़े होंगे।

यदि किसी विदेशी संपत्ति का मूल्य भारतीय संपत्तियों से जुड़ा है, तो तय फॉर्मूले के अनुसार उस पर भारत में टैक्स लगाया जाएगा। वहीं डिजिटल बिजनेस और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के लिए सिग्निफिकेंट इकोनॉमिक प्रेजेंस के मानकों को और सख्त किया गया है, ताकि भारत में होने वाली कमाई पर देश को उसका उचित टैक्स मिल सके।

इन नए नियमों का असर
ड्राफ्ट इनकम टैक्स रूल्स 2026 यह संकेत देते हैं कि आने वाले समय में टैक्स सिस्टम ज्यादा स्पष्ट, तकनीक आधारित और जवाबदेह होगा। निवेशक, नौकरीपेशा और विदेशी कंपनियां सभी इसके दायरे में आएंगे। अब टैक्स व्यवस्था में अनुमान की जगह साफ नियम और मजबूत डेटा ही आधार बनेंगे।

Stock Market: इस सप्ताह कैसी रहेगी बाजार की चाल, जानिए एक्सपर्ट की राय

नई दिल्ली। Stock Market This Week:आने वाले कारोबारी सप्ताह में शेयर बाजार का रुख कई अहम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर करेगा। महंगाई से जुड़े आंकड़े, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री गतिविधियां, वैश्विक बाजारों का मूड और तिमाही नतीजे निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

घरेलू मोर्चे पर 12 फरवरी को जारी होने वाले खुदरा महंगाई के आंकड़े बाजार के लिए बेहद अहम रहेंगे। इसके अलावा 13 फरवरी को सामने आने वाला विदेशी मुद्रा भंडार का डेटा भी निवेशकों को देश की बाहरी आर्थिक स्थिति और स्थिरता के संकेत देगा।

रिसर्च और ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार, इस हफ्ते कई महत्वपूर्ण ट्रिगर एक साथ देखने को मिल सकते हैं। Religare ब्रोकिंग लिमिटेड में रिसर्च के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा के मुताबिक, कॉरपोरेट नतीजों का सीजन अभी जारी है और टाइटन कंपनी तथा महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी दिग्गज कंपनियों के तिमाही परिणाम शेयर-विशेष में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं।

वैश्विक स्तर पर निवेशकों की नजर अमेरिका के प्रमुख आर्थिक आंकड़ों और हालिया गिरावट के बाद नैस्डैक कंपोजिट के प्रदर्शन पर बनी रहेगी। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम और उनका कमोडिटी बाजार पर पड़ने वाला असर भी बाजार की चाल को प्रभावित कर सकता है।

आने वाले सप्ताह में तिमाही नतीजों को लेकर बाजार में हलचल बनी रहेगी। Q3 के नतीजों की कड़ी में अशोक लेलैंड, ओएनजीसी, बजाज इलेक्ट्रिकल्स और आयशर मोटर्स जैसी दिग्गज कंपनियां अपने वित्तीय परिणाम पेश करने वाली हैं, जिससे संबंधित शेयरों में गतिविधि तेज हो सकती है।

इसी बीच, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों को लेकर एक अहम प्रगति देखने को मिली है। शनिवार को दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सहमति जताई। इस समझौते के तहत द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए कई वस्तुओं पर आयात शुल्क घटाने का फैसला किया गया है।

समझौते के अनुसार, अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को मौजूदा 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करेगा। वहीं भारत, अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं के साथ-साथ कई कृषि और खाद्य उत्पादों पर आयात शुल्क को खत्म या कम करेगा। इनमें पशु आहार से जुड़ी वस्तुएं, ड्राई फ्रूट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स शामिल हैं।

बाजार के मौजूदा रुझान पर टिप्पणी करते हुए एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने कहा कि अब जबकि यूनियन बजट 2026 और आरबीआई की मौद्रिक नीति को बाजार ने काफी हद तक पचा लिया है, निवेशकों का फोकस आगे की रणनीति पर शिफ्ट हो गया है। अब नजरें सरकारी योजनाओं के अमल, कैपेक्स की रफ्तार और वास्तविक खर्च पर टिकी हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बाजार का रुख फिलहाल सतर्क लेकिन सकारात्मक बना हुआ है। आने वाले दिनों में बाजार की चाल वैश्विक संकेतों, विदेशी पूंजी प्रवाह और खासकर मिडिल-ईस्ट में भू-राजनीतिक घटनाक्रम से प्रभावित रह सकती है।

पिछले सप्ताह शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स में 2,857 अंकों से ज्यादा की उछाल दर्ज की गई, जबकि निफ्टी करीब 870 अंकों की मजबूती के साथ बंद हुआ। इस तेजी ने निवेशकों के भरोसे को और मजबूत किया है।

Market Cap: आठ शीर्ष कंपनियों की मार्केट वैल्यू 4.55 लाख करोड़ रुपए बढ़ी

नई दिल्ली। Market Cap: पिछले सप्ताह शेयर बाजार में आई तेज़ी का असर देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों पर साफ़ तौर पर देखने को मिला। शीर्ष 10 कंपनियों में से 8 कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 4.55 लाख करोड़ रुपये बढ़ गया। इस बढ़त में रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे आगे रही।

सप्ताह के दौरान बीएसई सेंसेक्स 2,857.46 अंक यानी 3.53 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ। बाजार की इस सकारात्मक चाल ने निवेशकों की संपत्ति में बड़ा इजाफा किया।

टॉप-10 कंपनियों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बजाज फाइनेंस, भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और हिंदुस्तान यूनिलीवर के बाजार मूल्य में बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) और इंफोसिस ऐसी कंपनियां रहीं, जिनका बाजार पूंजीकरण इस दौरान घटा।

इन 8 शीर्ष कंपनियों की मार्केट वैल्यू बढ़ी

  • रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाजार पूंजीकरण में लगभग 1.42 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही कंपनी का कुल बाजार मूल्य बढ़कर करीब 19.63 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
  • भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के निवेशकों के लिए सप्ताह राहत भरा रहा। कंपनी की बाजार हैसियत में करीब 64,926 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ, जिससे इसका कुल मार्केट कैप बढ़कर लगभग 5.70 लाख करोड़ रुपये हो गया।
  • टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज भारती एयरटेल ने भी शानदार प्रदर्शन किया। कंपनी की वैल्यू में 52,500 करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी हुई और इसका बाजार पूंजीकरण 11.62 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया।
  • वहीं आईसीआईसीआई बैंक की मार्केट वैल्यू में भी लगभग 52,477 करोड़ रुपये का उछाल देखा गया।
  • फाइनेंशियल सेक्टर की अन्य बड़ी कंपनियों में बजाज फाइनेंस की बाजार कीमत करीब 48,660 करोड़ रुपये बढ़ी।
  • भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की वैल्यू में लगभग 45,461 करोड़ रुपये का इजाफा दर्ज किया गया।
  • इसके अलावा, एचडीएफसी बैंक की मार्केट कैप में 32,350 करोड़ रुपये की मजबूती आई।
  • हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यू भी करीब 17,058 करोड़ रुपये बढ़ी।

इन दो कंपनियों की घटी

  • देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस (TCS) की बाजार वैल्यू में लगभग 88,173 करोड़ रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई।
  • इसी तरह इंफोसिस के मार्केट कैप में भी करीब 63,463 करोड़ रुपये की कमी आई।

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर टेक कंपनियों में कमजोरी, ऊंचे वैल्यूएशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेज विकास से जुड़ी चिंताओं के चलते आईटी शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।

मार्केट वैल्यू के लिहाज से अब भी रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी बनी हुई है। इसके बाद क्रमशः एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई, इंफोसिस, बजाज फाइनेंस, एलआईसी और हिंदुस्तान यूनिलीवर शीर्ष कंपनियों की सूची में शामिल हैं।

सैमसंग एवं मोटोरोला के यह स्मार्टफोन 10 हजार रुपये तक सस्ते, जानिए ऑफर्स

नई दिल्ली। अमेजन इंडिया पर सैमसंग का फ्लिप फोन 10 हजार रुपये की छूट के साथ मिल रहा है। वहीं, मोटोरोला पर 10500 रुपये का डिस्काउंट दिया जा रहा है। अमेजन की डील में आप इन फोन को कैशबैक और एक्सचेंज बोनस के साथ भी खरीद सकते हैं।

ध्यान रहे कि एक्सचेंज ऑफर में मिलने वाला अडिशनल डिस्काउंट आपके पुराने फोन की कंडीशन, ब्रैंड और कंपनी की एक्सचेंज पॉलिसी पर निर्भर करेगा। आइए डीटेल में जानते हैं इन डिवाइसेज पर दिए जा रहे ऑफर के बारे में।

Motorola razr 60 Ultra
16जीबी रैम और 512जीबी के इंटनरल स्टोरेज वाले इस फोन की कीमत अमेजन पर 79999 रुपये है। 28 फरवरी तक आप इस फोन को 10500 रुपये के फ्लैट डिस्काउंट के साथ खरीद सकते हैं। फोन पर 3999 रुपये तक का कैशबैक भी दिया जा रहा है। फोन पर 41100 रुपये तक का एक्सचेंज ऑफर भी दिया जा रहा है।

फीचर्स की बात करें, तो फोन में में 6.96 इंच का FlexView 1.5K pOLED LTPO मेन डिस्प्ले दिया गया है। यह डिस्प्ले 165Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। फोन में 4 इंच का सेकेंडरी डिस्प्ले दिया गया है। यह QuickView pOLED LTPO डिस्प्ले 165Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। प्रोसेसर के तौर पर फोन में आपको स्नैपड्रैगन 8 एलीट देखने को मिलेगा।

Motorola razr
फोटोग्राफी के लिए फोन में 50 मेगापिक्सल का मेन कैमरा दिया गया है। इसके अलावा आपको 50 मेगापिक्सल का एक अल्ट्रावाइड सेंसर भी मिलेगा। फोन का मेन कैमरा OIS फीचर को सपोर्ट करता है। सेल्फी के लिए कंपनी इस फोन में 50 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा भी दे रही है। फोन को पावर देने के लिए इसमें 4700mAh की बैटरी लगी है। यह बैटरी 68 वॉट की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

Samsung Galaxy Z Flip7 FE 5G
8जीबी रैम और 128जीबी के इंटरनल स्टोरेज वाले इस फोन की कीमत 89999 रुपये है। फोन पर 28 फरवरी तक 10 हजार रुपये का बैंक डिस्काउंट दिया जा रहा है। इस फोन को आप 4499 रुपये तक के कैशबैक के साथ भी खरीद सकते हैं। एक्सचेंज ऑफर में यह फोन 49,100 रुपये तक सस्ता हो सकता है। फीचर्स की बात करें तो कंपनी इस फोन में 6.7 इंच का फुल एचडी+ Dynamic AMOLED 2x Infinity Flex मेन डिस्प्ले दे रही है। डिस्प्ले 120Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है।

फोन में ऑफर किए जा रहे कवर डिस्प्ले का साइज 3.4 इंच है। यह एक सुपर एमोलेड डिस्प्ले और 60Hz के रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। डिस्प्ले प्रोटेक्शन के लिए कंपनी गोरिल्ला ग्लास विक्टस 2 भी ऑफर कर रही है। प्रोसेसर के तौर पर आपको इसमें Exynos 2400 चिपसेट देखने को मिलेगा।

Samsung Galaxy Z flip 7 FE
फोटोग्राफी के लिए फोन में 50 मेगापिक्सल के मेन कैमरा के साथ एक 2 मेगापिक्सल का अल्ट्रावाइड ऐंगल कैमरा लगा है। वहीं, सेल्फी के लिए फोन में कंपनी 10 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा ऑफर कर रही है। फोन की बैटरी 4000mAh की है, जो 25 वॉट की फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। फोन ऐंड्रॉयड 16 पर बेस्ड OneUI 8 पर काम करता है। आपको इस फोन में स्टीरियो स्पीकर्स के साथ डॉल्बी ऐटमॉस देखने को मिलेगा।

Russian oil Import: रूसी तेल की खरीद पर ट्रंप के दावे से गहराया सस्पेंस

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने उस कार्यकारी आदेश को भी वापस ले लिया, जिसमें भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया गया था। हालांकि, रूसी तेल को लेकर स्थिति अब भी कूटनीतिक रहस्यों में लिपटी हुई है।

राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए गए कार्यकारी आदेश में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भारत ने रूस से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से तेल आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है।

भारत ने अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदने और अगले 10 वर्षों के लिए रक्षा सहयोग बढ़ाने का आश्वासन दिया है। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि अमेरिकी वाणिज्य सचिव को पता चलता है कि भारत ने दोबारा रूसी तेल खरीदना शुरू किया है तो 25% का दंडात्मक शुल्क दोबारा लगाया जा सकता है।

ट्रंप के इस बड़े दावे पर भारत सरकार की ओर से शनिवार को कोई सीधा खंडन या पुष्टि नहीं आई है। जब अधिकारियों से ट्रंप के इस दावे पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के गुरुवार के बयान का हवाला दिया।

भारत के द्वारा कहा गया है कि, “1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और बदलते बाजार को देखते हुए अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना हमारी रणनीति का मूल आधार है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखने के लिए सीधे तौर पर किसी दबाव में झुकने की बात सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं करना चाहता, भले ही हालिया हफ्तों में रूसी तेल के आयात में भारी गिरावट दर्ज की गई हो।

तेल पर सस्पेंस के बावजूद, भारतीय निर्यातकों के लिए यह समझौता संजीवनी जैसा है। भारतीय सामानों पर प्रभावी शुल्क 50% से घटकर 18% पर आ जाएगा। कपड़ा, रत्न-आभूषण, फार्मा और विमानन पुर्जों पर से अतिरिक्त शुल्क हटा लिए गए हैं। बदले में भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों (बादाम, अखरोट, सोयाबीन तेल) और औद्योगिक सामानों पर टैरिफ कम करने के साथ ही अगले 5 वर्षों में 500 अरब डॉलर की खरीदारी के लिए सहमत हुआ है।

क्या भारत रूस को छोड़ देगा
आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2025 में भारत का रूसी तेल आयात 38 महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीद और अमेरिका से LNG आयात बढ़ाने के विकल्प खुले रखे हैं। रूस के क्रेमलिन प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि उन्हें भारत की ओर से तेल खरीद बंद करने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। वे भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को महत्व देते हैं।