Saturday, July 18, 2026
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क्या भारत में 16 साल से कम वालों के लिए बैन होगा सोशल मीडिया?

नई दिल्ली। डिजिटल दौर में जहां स्मार्टफोन और सोशल मीडिया लोगों की रोज की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं, वहीं बच्चों में बढ़ती स्क्रीन की लत को लेकर चिंताओं पर भी चर्चा हो रही है।

भारत सरकार विचार कर रही है कि सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के लिए न्यूनतम आयु तय की जाए और इसकी शुरुआत कर्नाटक से हो सकती है। कर्नाटक सरकार नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर एज-बेस्ड रिस्ट्रिक्शंस लगा सकती है। इस मुद्दे पर राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने यूनिवर्सिटी हेड्स और एजुकेशन एक्सपर्ट्स के साथ बात शुरू की है, जिससे यह समझा जा सके कि सोशल मीडिया और मोबाइल फोन्स का किशोरों पर क्या असर पड़ रहा है।

सरकार के सामने सबसे बड़ी चिंता बच्चों में बढ़ते डिजिटल एडिक्शन की है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इंटरनेट पर ज्यादा वक्त बिताने से स्टूडेंट्स की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

इसके अलावा शारीरिक स्वास्थ्य, क्रिएटिव थिंकिंग और सोशल बिहेवियर पर भी नेगेटिव असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन देखने से बच्चों का फोकस कम हो सकता है और वे असली सोशल कनेक्शंस से दूर हो सकते हैं। दुनियाभर में यह बड़ा मुद्दा बन रहा है और बच्चों को स्क्रीन से दूर रखे जाने की वकालत होती रही है।

ऑनलाइन कंटेंट को लेकर भी चर्चा
पॉलिसी-मेकिंग से जुड़ी चर्चा में हानिकारक ऑनलाइन कंटेंट का मुद्दा भी बड़ा है। ऑफीशियल्स ने इस बात पर चिंता जताई है कि बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग की आदत पड़ सकती है, नशे से जुड़े कंटेंट का उनपर असर पड़ सकता है और गलत कंटेंट तक पहुंच आसान हो सकती है।

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार अलग-अलग डिपार्टमेंट्स के साथ मिलकर स्थिति का एनालिसिस कर रही है। हालांकि अभी तक कोई आखिरी फैसला नहीं किया गया है, लेकिन लगातार हो रही मीटिंग्स से संकेत मिले हैं कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।

अन्य देशों ने भी उठाए ऐसे कदम
राज्य प्रशासन अंतरराष्ट्रीय मामलों का भी उदाहरण ले रहा है और उन्हें स्टडी कर रहा है। Australia जैसे देशों ने 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग को इस्तेमाल करने के कदम उठाए हैं। कर्नाटक यह समझना चाहता है कि ऐसे नियमों को वहां कैसे लागू किया गया और उनका सकारात्मक असर क्या पड़ा है। बता दें, केंद्र सरकार भी ऐसे ही नियम बनाने पर विचार कर रही है और सोशल मीडिया का इस्तेमाल अवयस्कों के लिए नियंत्रित करना चाहती है।

1 अप्रैल से बदलेगा टोल वसूली का तरीका, जीपीएस प्रणाली से होगा भुगतान

नई दिल्ली। देश में टोल वसूली की व्यवस्था एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर बढ़ रही है। पहले नकद भुगतान का दौर था, फिर फास्टैग (FASTag) लागू हुआ और अब सरकार टोल कलेक्शन को जीपीएस (GPS) तकनीक से जोड़ने की तैयारी कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दावा किया जा रहा है कि इस नई व्यवस्था से समय और धन दोनों की बचत होगी। साथ ही सरकार को भी राजस्व में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। लेकिन इन फायदों के बीच आम लोगों के मन में दो अहम सवाल उठ रहे हैं। पहला, क्या इससे जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा? और दूसरा, क्या इससे निजी जानकारी की सुरक्षा प्रभावित होगी?

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि 1 अप्रैल 2026 से टोल भुगतान प्रणाली में बड़ा परिवर्तन किया जाएगा। इस तारीख के बाद टोल प्लाजा पर नकद भुगतान की सुविधा समाप्त कर दी जाएगी और केवल फास्टैग या यूपीआई के माध्यम से ही शुल्क लिया जाएगा। हालांकि वर्तमान में भी लगभग 98 प्रतिशत टोल लेनदेन फास्टैग के जरिए ही हो रहे हैं।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में संकेत दिया था कि वर्ष 2026 के अंत तक टोल संग्रह को पूरी तरह जीपीएस तकनीक से जोड़ दिया जाएगा। इसका अर्थ है कि भविष्य में टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और सैटेलाइट आधारित प्रणाली के जरिए दूरी के हिसाब से शुल्क स्वतः कट जाएगा।

जीपीएस प्रणाली कैसे करेगी काम
जीपीएस आधारित टोल प्रणाली में वाहन में लगे डिवाइस या ट्रैकिंग तकनीक के जरिए यह तय किया जाएगा कि वाहन ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर कितनी दूरी तय की। उसी अनुपात में शुल्क सीधे बैंक खाते या लिंक्ड वॉलेट से काट लिया जाएगा। इससे लंबी कतारों और जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि इस प्रणाली से टोल चोरी और राजस्व रिसाव पर भी नियंत्रण पाया जा सकेगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर साल लगभग 1500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त बचत संभव है। फिलहाल इस तकनीक का परीक्षण कुछ चुनिंदा मार्गों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया जा रहा है। यदि परिणाम संतोषजनक रहे तो इसे 2026 के अंत तक देशभर में लागू किया जा सकता है।

आपकी जेब पर पड़ेगा असर
दूरी आधारित टोल प्रणाली का अर्थ यह है कि जितनी दूरी तय करेंगे, उतना ही भुगतान करेंगे। ऐसे में जो लोग कम दूरी के लिए हाईवे का उपयोग करते हैं, उन्हें फायदा मिल सकता है। वहीं लंबी दूरी तय करने वालों के लिए कुल खर्च मौजूदा व्यवस्था के बराबर या थोड़ा अधिक भी हो सकता है। अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार दरें किस तरह तय करती है।

प्राइवेसी को लेकर सवाल
सबसे बड़ी चिंता डेटा सुरक्षा को लेकर है। जीपीएस आधारित प्रणाली में वाहन की लोकेशन और मूवमेंट से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड होगी। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि इस डेटा का उपयोग केवल टोल वसूली तक सीमित रहे और इसका दुरुपयोग न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत डेटा प्रोटेक्शन कानून और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था इस दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।

Stock Market: सेंसेक्स 480 अंक उछलकर 83294 पर बंद, निफ्टी 25700 के पार

नई दिल्ली। Stock Market Closed February 23: शेयर बाजार कारोबारी सप्ताह के अंतिम दिन सोमवार को हरे निशान पर बन हुआ। 30 संवेदी सूचकांक वाला सेंसेक्स 0.58 प्रतिशत की तेजी या फिर 479.95 अंक की उछाल के बाद 83,294.66 अंक पर बंद हुआ है। वहीं, निफ्टी 0.55 प्रतिशत या फिर 141.75 अंक की तेजी के साथ 25713 अंक पर बंद हुआ था।

सेंसेक्स की 30 में 20 कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली है। वहीं, 10 कंपनियों के शेयरों में गिरावट आई है। अडानी पोर्ट्स, कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में 2-2 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है।

वैश्विक बाजारों से पॉजिटिव संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार सप्ताह के पहले ट्रेडिंग सेशन यानी सोमवार (23 फरवरी) को मजबूती के साथ बंद हुए। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donal Trump) के कुछ टैरिफ नियमों को खारिज कर दिया है।

कोर्ट के इसे फैसला का बाजार के सेंटीमेंट्स पर पॉजिटिव असर पड़ा है। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा और बाजार में खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज शेयरों में बढ़त ने भी बाजार को सपोर्ट दिया। हालांकि, आईटी शेयरों में दबाव ने बाजार की बढ़त को थोड़ा सीमित करा।

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 100 से ज्यादा अंक चढ़कर 82,906 पर खुला। खुलते ही इसमें तेजी देखने को मिली और 83 हजार के पार चला गया। कारोबार के दौरान यह 650 अंक तक चढ़ गया था। अंत में 479.95 अंक या 0.58 फीसदी की बढ़त लेकर 83,294.66 पर बंद हुआ।

इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) भी मजबूती के साथ 25,678 अंक पर खुला और खुलने के कुछ ही देर में 25,700 के ऊपर चला गया। अंत में 141.75 अंक या 0.55 फीसदी की बढ़त के साथ 25,713 पर बंद हुआ।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च प्रमुख विनोद नायर ने कहा, ”अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट की तरफ से ट्रंप की रेसिप्रोकल टैरिफ नीति के खिलाफ दिए गए फैसले का घरेलू बाजारों ने स्वागत किया। निवेशक अब ट्रंप की संशोधित रणनीति और अन्य देशों के साथ संभावित पुनर्विचार की सीमा को लेकर अधिक स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। कमजोर अमेरिकी डॉलर और 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड की घटती यील्ड रेट वैश्विक बाजार में शॉर्ट टर्ममें सतर्कता का माहौल बना सकती हैं।”

उन्होंने कहा, ”सेक्टोरल देखा जाए तो एआई से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण आईटी इंडेक्स पर दबाव बना रहा। हालांकि, निवेशकों ने घरेलू विषयों को प्राथमिकता दी। बैंकों, बिजली, उपभोक्ता वस्तु और उपभोक्ता विवेकाधीन श्रेणी के शेयरों में मांग मजबूत रहने और आर्थिक सुधार की उम्मीद के चलते तेजी देखी गई।”

टॉप गेनर्स एंड लूजर्स
सेंसेक्स की कंपनियों में अदाणी पोर्ट्स, कोटक बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, एक्सिस बैंक और एचयूएल प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। वहीं गिरावट वाले शेयरों में इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक और ट्रेंट प्रमुख रहे।

सेक्टोरल मोर्चे पर निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.3 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई। इसके बाद ऑटो, उपभोक्ता वस्तु, फार्मा और तेल एवं गैस इंडेक्स में तेजी रही। बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 2 प्रतिशत की बढ़त रही, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स 2.45 प्रतिशत ऊपर रहा।

Trump Tariffs: अमेरिका कल से अवैध टैरिफ की वसूली रोक देगा, जानिए ऐसा क्यों

वाशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के बड़े फैसले के बाद अब अमेरिका अवैध टैरिफ की वसूली रोकने जा रहा है। अमेरिका की कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन एजेंसी ने इसका ऐलान किया है।

कस्टम एजेंसी ने कहा है कि वह इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनोमिक पॉवर्स एक्ट यानी IEEPA के तहत लगाए गए टैरिफ की वसूली मंगलवार रात 12:01 बजे EST (0501 GMT) से बंद कर देगी। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के तीन दिन बाद उठाया गया है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए इन टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर दिया गया था।

एजेंसी ने शिपर्स को अपने कार्गो सिस्टम मैसेजिंग सर्विस (CSMS) के जरिए भेजे गए संदेश में बताया है कि मंगलवार से ट्रंप के पहले के IEEPA से जुड़े सभी टैरिफ कोड निष्क्रिय कर दिए जाएंगे। यानी इन आदेशों से जुड़े किसी भी टैरिफ की वसूली अब नहीं होगी।

IEEPA टैरिफ की वसूली रोकने का यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार को रद्द किए गए टैरिफ की जगह दूसरे कानूनी प्रावधान के तहत नया 15 फीसदी ग्लोबल टैरिफ लागू किया है। हालांकि कस्टम्स एजेंसी के संदेश में आयातकों को संभावित रिफंड के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी।

संदेश में साफ किया गया है कि यह रोक ट्रंप द्वारा लगाए गए अन्य टैरिफ पर लागू नहीं होगी। इसमें सेक्शन 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा आधार पर लगाए गए टैरिफ और सेक्शन 301 के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार से जुड़े टैरिफ शामिल हैं।

एजेंसी ने कहा, “CBP जरूरत पड़ने पर CSMS संदेशों के जरिए ट्रेड कम्युनिटी को अतिरिक्त दिशा-निर्देश देगा।” रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद IEEPA टैरिफ से अमेरिकी ट्रेजरी को मिले 175 अरब डॉलर से ज्यादा राजस्व पर संभावित रिफंड का सवाल खड़ा हो गया है।

इससे पहले अमेरिका के उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को अपने फैसले में कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम’ का उपयोग करके टैरिफ लगाकर अपने अधिकारों का उल्लंघन किया है।

कोर्ट के अनुसार टैरिफ लगाने की शक्ति मुख्य रूप से कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के पास है। सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ में यह निर्णय 6-3 के बहुमत से दिया गया। फैसला आने के तुरंत बाद ट्रंप ने दुनिया भर के देशों पर दस प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया था।

उच्चतम न्यायालय के झटके के बाद ट्रंप ने एक नए कानून का सहारा लिया। इस धारा 122 कहती है कि राष्ट्रपति ‘गंभीर भुगतान संतुलन घाटे’ को सुधारने के लिए 15 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लगा सकते हैं, लेकिन ये टैरिफ केवल 150 दिनों के लिए प्रभावी रह सकते हैं। इसे आगे बढ़ाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य होगी।

श्री मथुराधीश मंदिर कॉरिडोर 66.25 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया पहले चरण का शिलान्यास

कोटा। शहर में श्री मथुराधीश मंदिर काॅरिडोर के पहले चरण का निर्माण जल्द शुरू हो जाएगा। इसके लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को प्रथम चरण के कार्य का शिलान्यास कर दिया।

इस दौरान उर्जा मंत्री हीरालाल नागर, कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा सहित जिला प्रशासनिक अधिकारी और काफी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। इस प्रोजेक्ट में सड़कों का चौड़ा करना, मंदिर परिक्रमा मार्ग का सौंदर्यीकरण, पार्किंग सुविधा और यात्रियों के लिए होटल निर्माण शामिल है, जिस पर कुल 66.25 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जिसमें पहले चरण में 18.24 करोड़ रुपए के सिविल कार्य प्रस्तावित हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरल ने इस मौके पर कहा कि यह मंदिर वल्लभ संप्रदाय के पुष्टिमार्ग की पहली पीठ है, जहां भक्तों की आस्था का केंद्र है। आज का ये दिन हमारे लिए दिव्य उत्सव का दिन है। प्रथम पीठ मथुराधीश मंदिर की आने वाले समय में देश और दुनियां के धर्मिक पर्यटनों के लिए विशेष आस्था का केन्द्र बनेगा।

इस परकोटे के जो बाजार, जो हमारी विरासत है, जिस गलियों के अंदर हम सबने अपने जीवन को बिताया है, आज समय आ गया है कि हम इस परकोटे की विरासत को देश और दुनिया के सामने रखे।

मथुराधीश मंदिर जहां पर देश और दुनियां के भक्त आते है, इसलिए आज इसके आध्यात्मिक उर्जा और हमारे आस्था के केन्द्र मंदिरों के पुर्ननिर्माण का समय आ गया है। जब देश का पुर्नविकास हो रहा हो, आस्था के केन्द्रों का पुर्नविकास किया जा रहा है तो भारत की वल्लभ संप्रदाय की प्रथम पीठ मथुराधीश का विकास कैसे रोक सकते थे।

मथुराधीश मंदिर के काॅरिडोर निर्माण के पहले चरण में मंदिर को चंबल रिवर फ्रंट से जोड़ने के लिए करीब 200 मीटर लंबा और 40 फीट चैड़ा एलिवेटेड रोड बनेगा। पहले यह एलिवेटेड रोड मंदिर से भट्टजी घाट की पुलिया तक ही प्रस्तावित था, जिसे अब इसे रिवर फ्रंट के गणेश पोल घाट तक बढ़ाया है। जिससे मंदिर और रिवर फ्रंट के बीच एक नया कनेक्टिंग कॉरिडोर विकसित हो जाएगा। इसके साथ ही एलिवेटेड रोड के नीचे भी सड़क चैड़ी की जाएगी।

सामान्य दिनों में मथुराधीश जी के दर्शन करने के लिए करीब एक हजार भक्त आते हैं। लेकिन रविवार और अन्य अवकाश वाले दिनों में भक्तों की संख्या तीन से चार हजार पहुंच जाती है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद गढ़ पैलेस स्थित साई बाबा मंदिर से सीधे मंदिर तक पहुंच आसान हो जाएगी।

दोनों काम के लिए 23 मकानों व मंदिर की लगभग 15 हजार वर्गफीट भूमि का अधिग्रहण होगा। जिसमें पहले चरण के बाद टिपटा चैराहा भूरिया गणेशजी मंदिर से पाटनपोल दरवाजे व परिक्रमा मार्ग का हैरिटेज लुक में सौंदर्याकरण प्रस्तावित है।

Isuzu V-Cross नए अंदाज में लॉन्च, जानिए कीमत और फीचर्स

नई दिल्ली। इसुज़ु इंडिया ने भारतीय सड़कों पर अपनी धाक जमाने के लिए 2026 V-Cross पिक-अप को नए अवतार में उतार दिया है। भारतीय मार्केट में इसकी एक्स-शोरूम कीमत 25.50 लाख से लेकर 30.28 लाख रुपये तक जाएगी।

इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि इसुज़ु ने इसके 4×2 वैरिएंट्स को हमेशा के लिए विदा कर दिया है। यानी अब यह दमदार पिक-अप केवल 4×4 वर्जन में ही उपलब्ध होगी। हल्के विजुअल अपडेट्स और प्रीमियम फीचर्स से लैस यह नई वी-क्रॉस सीधे तौर पर टोयोटा हिलक्स (Toyota Hilux) को कड़ी टक्कर देगी।

एक्सटीरियर
डिजाइन की बात करें तो 2026 मॉडल के फ्रंट लुक को काफी रिफ्रेश किया गया है। इसके ग्रिल और बंपर में मामूली लेकिन प्रभावी बदलाव किए गए हैं। ग्रिल पर अब एक नया ब्लैक लोअर लिप दिया गया है, जबकि बंपर की क्लैडिंग को पहले के मुकाबले कम कर दिया गया है।

हालांकि, कंपनी ने फॉक्स स्किड प्लेट को हटा दिया है, लेकिन सिग्नेचर LED प्रोजेक्टर हेडलैम्प्स और फॉग लैम्प्स को बरकरार रखा गया है। साइड प्रोफाइल में सबसे बड़ा बदलाव इसके नए डिजाइन वाले 18-इंच के अलॉय व्हील्स हैं।

केबिन
इंटीरियर की बात करें तो इसमें नई 10.3-इंच की ‘फ्लोटिंग’ टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट यूनिट है, जिसने पुराने 9-इंच के सिस्टम की जगह ली है। यह नया सिस्टम वायरलेस एप्पल कारप्ले एंड एंड्रॉइड ऑटो कनेक्टिविटी के साथ आता है। इसके अलावा, ड्राइविंग को सेफ और कंफर्टेबल बनाने के लिए अब इसमें 360-डिग्री कैमरा और टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम (TPMS) जैसे मॉडर्न फीचर्स भी जोड़ दिए गए हैं। म्यूजिक लवर्स के लिए इसमें 8-स्पीकर वाला दमदार साउंड सिस्टम दिया गया है।

पावरट्रेन
पावरट्रेन की बात करें तो इसुज़ु वी-क्रॉस में वही भरोसेमंद 1.9-लीटर का 4-सिलेंडर टर्बोचार्ज्ड डीजल इंजन मिलता है। इस इंजन को 6-स्पीड मैनुअल और 6-स्पीड ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है। सेफ्टी के लिहाज से इसमें 6-एयरबैग्स, इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल (ESC), और हिल डिसेंट कंट्रोल जैसे फीचर्स मिलते हैं। यह कुल तीन वैरिएंट्स, Z (MT), Z Prestige (MT), और Z Prestige (AT) में उपलब्ध होगी। ग्राहक इसे सात कलर ऑप्शन में चुन सकते हैं।

टैरिफ में वृद्धि को लेकर ईयू की अमेरिका को चेतावनी, भारत ने भी लिया फैसला

नई दिल्ली। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ पर फैसले के बाद दुनिया के अलग-अलग रंग दिखाई देने लगे हैं। यूरोपीय संघ (EU) ने अमेरिका से कहा है कि वह टैरिफ में कोई भी वृद्धि स्वीकार नहीं करेगा।

यह बात तब सामने आई जब शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को रद्द कर दिया था। इसके बाद ट्रंप ने भारत समेत दुनिया के कई देशों पर नए शुल्क लगा दिए थे। इसके बाद भारत ने भी कुछ फैसले लिए हैं। भारत-अमेरिका के वार्ताकारों के बीच अगले हफ्ते वॉशिंगटन में होने वाली मीटिंग टल गई है। इस मीटिंग के तहत दोनों पक्ष अंतरिम व्‍यापार समझौते को आगे बढ़ाने वाले वाले थे।

यूरोपीय आयोग 27 ईयू देशों की ओर से व्यापार नीतियों पर बातचीत करता है। उसने संडे को कहा कि अमेरिका को पिछले साल हुए ईयू-अमेरिका व्यापार समझौते की शर्तों का पालन करना चाहिए।

आयोग ने कहा कि अमेरिका को इस बारे में पूरी जानकारी देनी चाहिए कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद क्या कदम उठाने वाला है। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के वैश्विक टैरिफ को खारिज कर दिया था। इसके तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने 10% का अस्थायी शुल्क लगाया, जिसे अगले ही दिन बढ़ाकर 15% कर दिया गया।

यूरोपीय आयोग ने कहा कि यह स्थिति निष्पक्ष, संतुलित और आपसी लाभ वाले ट्रांसअटलांटिक व्यापार और निवेश के लिए अच्छी नहीं है, जैसा कि पिछले साल के व्यापार समझौते में तय हुआ था। आयोग ने जोर देकर कहा कि एक सौदा, सौदा ही होता है। आयोग की यह प्रतिक्रिया शुक्रवार की शुरुआती प्रतिक्रिया से कहीं ज्यादा सख्त थी। पहले आयोग ने केवल इतना कहा था कि वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के नतीजों का अध्ययन कर रहा है और अमेरिकी प्रशासन के संपर्क में है।

कितना है ईयू पर टैरिफ
पिछले साल के व्यापार समझौते के तहत, ईयू के ज्यादातर सामानों पर 15% अमेरिकी टैरिफ तय किया गया था। हालांकि, स्टील जैसे कुछ खास सामानों पर अलग शुल्क थे। इस समझौते में विमानों और उनके पुर्जों जैसे कुछ उत्पादों पर शून्य टैरिफ की भी अनुमति थी। इसके बदले में, EU ने कई अमेरिकी सामानों पर आयात शुल्क हटा दिया था और ज्यादा शुल्क लगाने की धमकी वापस ले ली थी।

भारत मोड़ने जा रहा पाकिस्तान जाने वाला रावी का पानी, चिनाब से भी हटेगी गाद

नई दिल्ली। भारत ने पाकिस्तान की ओर जाने वाली रावी नदी के पानी पर रोक लगाने का प्लान बनाया है। दरअसल, मार्च, 2026 के आखिर में शाहपुर कंडी बांध का काम पूरा होने वाला है। इस बांध से रावी के अतिरिक्त पानी को पाकिस्तान की तरफ जाने से रोका जा सकेगा।

आने वाली गर्मियों में जब पानी की कमी होती है, तो उस वक्त पानी की मांग बढ़ जाती है। इस बीच, भारत ने चिनाब नदी से गाद हटाने का काम शुरू कर दिया है। ऐसे में पहले से ही भारत के सिंधु जल संधि को रोकने से पानी की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान को और बड़ा झटका लगने वाला है।

भारत की शाहपुर कंडी बांध परियोजना पंजाब-जम्मू-कश्मीर सीमा पर स्थित है। पंजाब के पठानकोट जिले में स्थित इस बांध के बनने से भारत रावी के पानी के बहाव को नियंत्रित कर सकेगा। पहले पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी की वजह से रावी का पानी बेकार चला जाता था। इस बांध के बनने से क्षेत्रीय जल प्रबंधन में अहम बदलाव आएगा।

रावी के पानी पर अधिकार के बाद भी रावी में बाढ़ आने पर अतिरिक्त पानी पाकिस्तान पहुंच जाता है। यह माधोपुर हेडवर्क्स के जरिये पाकिस्तान में जाता है। दरअसल, भारत के पास रावी के पानी को मोड़ने के लिए अब तक पर्याप्त क्षमता नहीं थी। मगर, अब नए बने शाहपुर कंडी बांध से रावी के पानी को मोड़ा जा सकेगा।

शाहपुर कंडी बैराज का काम दशकों से राज्यों के बीच विवाद के चलते लंबित रहा है। अब इस बांध से रावी के पानी का स्थानीय पर इस्तेमाल के लिए हो सकेगा। यह बैराज करीब 11,500 क्यूसेक्स पानी को स्टोर कर पाएगा और उसके बहाव को नियंत्रित कर सकेगा।

शाहपुर कंडी बांध को बनाने में तब तेजी आई, जब भारत ने 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। उस हमले में 25 पर्यटकों की जान चली गई थी।

चिनाब पर जलाशय की क्षमता भी बढ़ाई गई
विद्युत संयंत्र की मूल जलाशय क्षमता 284.00 मिलियन घन मीटर (एमसीएम) थी, जो मई 2025 के जलस्तर सर्वेक्षण के अनुसार घटकर मात्र 9.91 एमसीएम रह गई थी।
हालांकि, सिंधु जल संधि के निलंबन और गाद हटाने के कार्य के प्रारंभ होने के बाद, जनवरी 2026 तक इसकी क्षमता बढ़कर 14 एमसीएम हो गई है।

पाकिस्तान को 80 अरब क्यूबिक मीटर पानी की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि, भारत पूर्वी नदियों पर अपने संधि अधिकारों के दायरे में बना हुआ है, लेकिन व्यापक निलंबन पाकिस्तान की 80 अरब क्यूबिक मीटर सालाना पानी की जरूरतों पर दबाव और बढ़ा देता है।

1960 की सिंधु जल संधि क्या कहती है
ऐतिहासिक रूप से 1960 की सिंधु जल संधि के तहत भारत को पूर्व की ओर बहने वाली नदियों रावी, ब्यास और सतलुज के पानी पर अधिकार मिला हुआ है। भारत बिना किसी रोकथाम के इन नदियों का पानी अपनी सिंचाई, बिजली पैदा करने और स्टोरेज के काम में इस्तेमाल कर सकता है।

चांदी एक झटके में 15 हजार से अधिक महंगी हुई, सोना 3000 रुपये उछला

नई दिल्ली। Gold-Silver Price 23 Feb: एमसीएक्स पर अप्रैल गोल्ड फ्यूचर कांट्रैक्ट आज 1.94 पर्सेंट ऊपर 159921 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला। जबकि, सिल्वर मार्च फ्यूचर 5.79 पर्सेंट की उड़ान के साथ 267600 रुपये प्रति किलो के रेट से खुला। सोना करीब 3000 रुपये महंगा होकर अब 1,56,993 रुपए प्रति दस ग्राम हो गया है।

चांदी के भाव में 15,558 रुपये प्रति किलोग्राम उछल गए। 20 फरवरी को एमसीएक्स पर सोना करीब 153000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। जबकि, चांदी 252042 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी।

सुबह 8 बजे सोने और चांदी के भाव में जबरदस्त उछाल देखने को मिला। सोने की कीमतों में 1.61% और चांदी की कीमतों में 5% तक की तेजी दर्ज की गई। यह तेजी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद आई है, जिसमें अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक ग्लोबल टैरिफ को खारिज कर दिया।

निवेशक अब इसके बाद अमेरिका की ओर से संभावित नए कदमों का आकलन कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में आज स्पॉट गोल्ड की कीमत 1.61% बढ़कर 5,160 डॉलर प्रति औंस और चांदी की कीमत 5% उछलकर 86 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

सोना-चांदी के दाम क्यों बढ़ रहे
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया भर पर “पारस्परिक” टैरिफ लगाने के लिए आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करके अपने अधिकार का उल्लंघन किया था। इस फैसले के साथ ही ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में लगाए गए कई महत्वपूर्ण टैरिफ अब समाप्त हो गए हैं।

अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। ट्रंप ने ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर चेतावनी दी है, जिससे क्षेत्र में टकराव की आशंका और बढ़ गई है। ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले से वहां पहले से मौजूद आंतरिक अस्थिरता और गहरी हो सकती है और यह अमेरिका के लिए एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है।

नई ऊंचाई छूने की संभावना
एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर ने सोने की कीमतों के तकनीकी परिदृश्य पर कहा कि कीमतों में हालिया गिरावट मुनाफावसूली का हिस्सा है और व्यापक रुझान तेजी वाला ही बना हुआ है। उन्होंने कहा कि 4,500-4,700 डॉलर के बीच मजबूत खरीदारी देखी जा रही है और अगर कीमतें 5,100-5,200 डॉलर के स्तर को पार कर जाती हैं, तो नई ऊंचाई छूने की संभावना बन सकती है।

वहीं, चांदी के भाव पर पोनमुडी ने कहा कि हालिया गिरावट के बावजूद, बड़े समय के फ्रेम में तेजी वाली संरचना बरकरार है। 65-70 डॉलर के बीच मजबूत खरीदारी का समर्थन स्तर है। अगर यह आधार बना रहता है और कीमतें 85-92 डॉलर के स्तर को पार करके वापसी करती हैं, तो तेजी का रुख फिर से मजबूत हो सकता है। मिड टू लॉन्ग टर्म नजरिए से चांदी के लिए संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।

Stock Market Update: बाजार खुलने के 15 मिनट बाद ही बाजार लाल निशान पर

नई दिल्ली। Stock Market Update : शेयर मार्केट की शुरुआत कारोबारी सप्ताह के पहले दिन सोमवार को शानदार रही। लेकिन 15 मिनट के अंदर ही यह 83,461.31 अंक पर चला गया जो कि पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले 658.89 अंक ऊपर है। लेकिन तब भी आज AU स्मॉल फाइनेंस बैंक (AUBank) का शेयर सुबह साढ़े नौ बजे सात फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया। 

सुबह 9:45 बजे बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स अब 502 अंक ऊपर 83317 के लेवल पर पर पहुंच गया है। दूसरी एनएसई का 50 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 167 अंकों की तेजी के साथ 25739 पर ट्रैंड करता नजर आया।

सेंसेक्स में एक्सिस बैंक, अडानी पोर्ट्स, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, कोटक बैंक, बजाज फाइनेंस, स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक टॉप गेनर हैं। जबकि, टॉप लूजर की लिस्ट में इन्फोसिस, सन फार्मा, एशियन पेंट्स, इंडिगो, एचसीएल टेक और बजाज फिनसर्व हैं।

बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स अब 92 अंक ऊपर 82906 के लेवल पर खुला। जबकि, एनएसई का 50 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स निफ्टी 107 अंकों की तेजी के साथ 25678 के लेवल पर खुलने में कामयाब रहा। चंद मिनट बाद ही सेंसेक्स 329 अंकों की बढ़त के साथ 83144 के लेवल पर पहुंच गया।

ग्लोबल मार्केट के संकेत

  • एशियन मार्केट
    ट्रंप के टैरिफ वाले घटनाक्रम के बीच एशियाई बाजारों में उछाल देखा जा रहा है। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.7% की छलांग लगाकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हांगकांग के हैंग सेंग के फ्यूचर भी तेजी के संकेत दे रहे हैं। चीन और जापान के बाजार छुट्टी के कारण बंद हैं, लेकिन निक्की के फ्यूचर में मजबूती है।
  • गिफ्ट निफ्टी
    गिफ्ट निफ्टी भी 25,750 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से करीब 167 अंक ज्यादा है। यानी भारतीय बाजार में आज गैप-अप ओपनिंग होने के आसार काफी मजबूत हैं।
  • वॉल स्ट्रीट
    अमेरिका की बात करें तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर वहां भी खूब दिखा। डॉऊ जोन्स, एसएंडपी 500 और नैस्डैक सभी हरे निशान पर बंद हुए। खास बात यह रही कि एनवीडिया, एप्पल, मेटा और अमेजन जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के शेयरों में भी खासी तेजी रही।