Thursday, July 16, 2026
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सेंसेक्स 1470 अंक लुढ़ककर 74563 पर बंद, निवेशकों के 10 लाख करोड़ डूबे

नई दिल्ली। Stock Market Closed 13 March: ईरान युद्ध का भारतीय शेयर मार्केट पर बुरा असर दिखाई दे रहा है। शुक्रवार 13 मार्च को लगातार तीसरे दिन बाजार में बड़ी गिरावट रही। सेंसेक्स 1400 अंक से ज्यादा अंक गिरकर बंद हुआ। मार्केट में गिरावट से निवेशकों को 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ।

सेंसेक्स 1.93 प्रतिशत या फिर 1470.50 अंक की गिरावट के बाद 74563.92 अंक पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 2.06 प्रतिशत या फिर 488.05 अंक की गिरावट के बाद 23151.10 अंक पर बंद हुआ है।

बता दें, सेंसेक्स का इंट्रा-डे लो लेवल 74454.60 अंक और निफ्टी का इंट्रा-डे लो लेवल 23,112 अंक रहा है। एलटी के शेयरों में सबसे अधिक 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, टाटा स्टील के शेयरों की कीमतों में 5.30 प्रतिशत, एसबीआई के शेयरों में 3 प्रतिशत और बीईएल, मारुति, अल्ट्राटेक, महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयरों में भी 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आज दर्ज की गई है।

टॉप लूजर्स एंड गेनर्स
सेंसेक्स की कंपनियों में एलएंडटी का शेयर सबसे ज्यादा 7.5 प्रतिशत टूट गया। टाटा स्टील, एसबीआई, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, मारुति, अल्ट्रा सीमेंट, एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, एचसीएल टेक, इटरनल और इंडिगो प्रमुख रूप से लाभ में रहे। दूसरी तरफ, सिर्फ हिंदुस्तान यूनिलीवर और भारती एयरटेल हरे निशान में रहे।

बाजार में गिरावट की वजह

  • फिर लटक सकती है यूएस-इंडिया डील
    रायटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने को कुछ महीनों के लिए टालने का फैसला किया है। इसका कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के व्यापारिक साझेदार देशों के साथ कथित तौर पर ज्यादा औद्योगिक क्षमता को लेकर नई जांच शुरू करना है। इससे पिछले महीने बनी शुरुआती सहमति के बाद फिर से तनाव बढ़ गया है।
  • ईरान-यूएस संकट लंबा चलने की आशंका
    अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय तक चलने वाले संभावित संघर्ष की चिंता के कारण नकारात्मक वैश्विक संकेतों के बीच गिरावट का सिलसिला जारी है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले सार्वजनिक बयान में कहा कि दुश्मन ताकतों पर अतिरिक्त दबाव बनाने के लिए होरमुज़ जलडमरूमध्य को बंद ही रखा जाना चाहिए। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने इसे दुश्मनों पर दबाव बनाने के लिए एक ‘रणनीतिक साधन’ के रूप में इस्तेमाल करने की बात कही।
  • FIIs की तेज बिकवाली
    पहले से ही बिकवाल बने हुए विदेशी निवेशकों ने ईरान और अमेरिका में तनाव के बीच अपनी बिकवाली तेजी कर दी है। इसके चलते इंडेक्स में भारी वजन रखने वाले शेयर गिर रहे हैं और इसका बाजार की चाल पर बड़ा असर पड़ रहा है। बेंचमार्क सूचकांकों की तरह व्यापक बाजारों में भी गिरावट देखी गई। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक क्रमशः 2.62 प्रतिशत और 2.52 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी मेटल सूचकांक करीब 5 प्रतिशत गिरकर सबसे ज्यादा प्रभावित रहा। इसके अलावा निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी मीडिया सूचकांकों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा।

ऑटोमैटिक वैरिएंट्स के साथ लॉन्च हुई नई किआ सोनेट, जानिए कीमत

नई दिल्ली। किआ इंडिया (Kia India) आपके लिए एक शानदार मौका लेकर आई है। कंपनी ने अपनी मशहूर कॉम्पैक्ट एसयूवी ‘Kia Sonet’ का MY26 एडिशन पेश किया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका बजट-फ्रेंडली ऑटोमैटिक पोर्टफोलियो है।

अब किया ने डीजल ऑटोमैटिक और टर्बो पेट्रोल (7DCT) के नए वैरिएंट्स लॉन्च किए हैं जिनकी शुरुआती कीमत 10 लाख रुपये से भी कम रखी गई है। यह कदम उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो कम बजट में लग्जरी और कंफर्ट की तलाश में रहते हैं। आइए जानते हैं पूरी खबर को विस्तार से।

मौजूदा समय में शहरों की भागदौड़ और ट्रैफिक जाम में मैनुअल कार चलाना वाकई सिरदर्द बन जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए किआ ने अपनी सोनट को और भी ज्यादा ‘एक्सेसिबल’ बना दिया है। नई अपडेट के साथ, 1.5-लीटर डीजल 6-स्पीड ऑटोमैटिक अब HTE(O), HTK(O), HTK+ और HTK+(O) जैसे कई वैरिएंट्स में उपलब्ध है। इसके अलावा, 1.0-लीटर टर्बो पेट्रोल 7DCT का ऑप्शन भी HTK(O) और HTK+(O) ट्रिम्स में दिया गया है। यानी अब आपको ऑटोमैटिक का मजा लेने के लिए टॉप-मॉडल पर लाखों रुपये खर्च करने की मजबूरी नहीं रही।

किआ सोनट ने इस सेगमेंट में एक नया बेंचमार्क सेट किया है। दरअसल, यह अपने सेगमेंट की पहली ऐसी एसयूवी बन गई है जो 10 लाख रुपये से कम कीमत में 6AT (डीजल) और 7DCT (पेट्रोल) दोनों टेक्नोलॉजी का ऑप्शन देती है।

उन ग्राहकों के लिए यह बड़ी राहत है जो डीजल इंजन की शानदार माइलेज और पावर के साथ-साथ ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का आराम चाहते हैं। चाहे ऑफिस जाने के लिए शहर की भीड़ हो या हाईवे की लंबी यात्रा, सोनट का यह नया अपडेट ड्राइविंग को बेहद रिलैक्स्ड और थकान-मुक्त बना देगा।

किया इंडिया के सीनियर वाइस-प्रेसिडेंट (सेल्स एंड मार्केटिंग), अतुल सूद ने कहा, “हम लगातार अपने ग्राहकों की जरूरतों को समझ रहे हैं। मॉडल ईयर 2026 अपडेट के साथ हमारा मकसद ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को ऑटोमैटिक मोबिलिटी का अनुभव देना है।”

सोनट का यह नया अवतार अपनी कैटेगरी में एक लीडर के तौर पर उभरा है जो फीचर्स, परफॉरमेंस और वैल्यू फॉर मनी का बेहतरीन मिश्रण है। अगर आप भी नई एसयूवी लेने का मन बना रहे हैं तो किआ का यह लेटेस्ट एडिशन आपके लिए एक शानदार ऑप्शन हो सकता है।

Weather Alert: राजस्थान के 8 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी

जयपुर। मौसम विभाग ने 14 मार्च को राजस्थान के 8 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। राजस्थान में भीषण गर्मी के बीच गुरुवार को मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिला।

जयपुर, अजमेर और भरतपुर संभाग के अधिकांश इलाकों तथा बीकानेर और जोधपुर संभाग के कुछ जिलों में आसमान में बादल छाए रहे। मौसम में आए इस बदलाव से दिन के तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई और लोगों को हीटवेव से राहत मिली।

मौसम विभाग के अनुसार अगले 10 से 12 दिनों के दौरान राज्य में दो वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय होने की संभावना है। इनके प्रभाव से कई इलाकों में बादल छाने, हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने के आसार हैं।

इन मौसम प्रणालियों के असर से अगले दो सप्ताह तक प्रदेश में गर्मी सामान्य स्तर पर रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने 14 मार्च को राज्य के 8 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है।

गुरुवार को राज्य में सबसे अधिक तापमान कोटा में दर्ज किया गया, जहां अधिकतम तापमान 38.4 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं बाड़मेर में पिछले कुछ दिनों से 40 से 41 डिग्री के बीच बना हुआ तापमान गिरकर 39.4 डिग्री सेल्सियस पर आ गया।

राजधानी जयपुर में भी सुबह से मौसम में हल्का बदलाव नजर आया। आसमान में हल्के बादल छाए रहने से दोपहर की धूप कमजोर रही। दोपहर से शाम तक हल्की धूलभरी हवाएं भी चलीं, जिससे तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

मौसम विभाग के अनुसार दूसरा वेदर सिस्टम 19 मार्च से सक्रिय होगा, जिसका असर 19 से 21 मार्च के बीच देखने को मिल सकता है। इस दौरान प्रदेश के कुछ इलाकों में बादल छाए रहने के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश या बूंदाबांदी होने की संभावना है। इन दोनों सिस्टम के प्रभाव से राजस्थान में 23-24 मार्च तक तापमान सामान्य बने रहने की संभावना जताई गई है।

सुप्रीम कोर्ट का पीरियड्स लीव याचिका पर सुनवाई से इनकार, जानिए क्या बोला

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महिलाओं कर्मचारियों और छात्राओं के लिए देशभर में मासिक धर्म अवकाश नीति की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।

अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ऐसी नीति अनजाने में लैंगिक रूढ़िवादिता को बढ़ावा दे सकती है और इससे महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि और नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से कतराने लगेंगे।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ऐसी मांगें अनजाने में महिलाओं के बारे में रूढ़िवादी सोच को भी मजबूत कर सकती हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि मासिक धर्म को किसी कमजोरी या हीनता के रूप में पेश करना सही नहीं है।

हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित सक्षम प्राधिकारी इस विषय पर दी गई याचिकाकर्ता की प्रतिनिधित्व पर विचार कर सकते हैं और सभी हितधारकों से परामर्श करके नीति बनाने की संभावना की जांच कर सकते हैं।

यह याचिका शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने दायर की थी, जिसमें महिलाओं के लिए छात्रों और कामकाजी महिलाओं दोनों के लिए मासिक धर्म अवकाश की राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एम. आर. शमशाद ने बताया कि कुछ राज्य और संस्थान पहले ही इस दिशा में कदम उठा चुके हैं। उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां स्कूलों में कुछ राहत दी गई है और कई निजी कंपनियां भी स्वेच्छा से कर्मचारियों को यह अवकाश दे रही हैं।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि स्वैच्छिक रूप से दी गई ऐसी सुविधाएं अच्छी हैं, लेकिन अगर इसे कानून के जरिए अनिवार्य बना दिया गया तो इसके सामाजिक और पेशेवर प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे यह धारणा बन सकती है कि महिलाओं को अतिरिक्त छुट्टियां मिलेंगी, जिससे उनके रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही संबंधित अधिकारियों को इस विषय पर प्रतिनिधित्व दे चुके हैं, इसलिए बार-बार अदालत से आदेश मांगने की आवश्यकता नहीं है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए संबंधित अधिकारियों को प्रतिनिधित्व पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।

राहत: अमरीका ने भारत के लिए समुद्र में फंसे रूसी तेल से प्रतिबंध हटाया

वाशिंगटन। Iran War Updates: ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध और आसमान छूती तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने एक चौंकाने वाला फैसला लिया है।

अमेरिका ने गुरुवार को समुद्र में फंसे हुए रूसी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी रूप से हटा दिया है। यह कदम वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाने और 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी कीमतों को नीचे लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

अमेरिकी वित्त विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) द्वारा जारी नए ‘जनरल लाइसेंस’ के तहत यह छूट केवल 11 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी। यह अनुमति केवल उसी रूसी तेल के लिए है जो 12 मार्च की मध्यरात्रि से पहले जहाजों पर लोड किया जा चुका था और वर्तमान में समुद्र में है। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट के अनुसार, इस कदम से बाजार में करोड़ों बैरल कच्चा तेल उपलब्ध होगा, जिससे ईरान संकट के कारण बढ़ी कीमतों पर लगाम लगेगी।

यूक्रेन युद्ध के बाद लगाए थे प्रतिबंध
आपको बता दें कि साल 2022 में यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से अमेरिका और G7 देशों ने रूसी तेल पर कड़ा ‘प्राइस कैप’ और प्रतिबंध लगाए थे। लेकिन अब मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने अमेरिका को अपनी प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। इसे रूस को सजा देने के अमेरिकी प्रयासों में एक बड़े टर्निंग पॉइंट के रूप में देखा जा रहा है।

तेल की कीमतों में इस उछाल का मुख्य कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभावी रूप से बंद होना है। ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने इस रणनीतिक मार्ग को अवरुद्ध करने के संकेत दिए हैं, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें फिर से 100 डॉलर के पार चली गई हैं। हॉर्मुज मार्ग बंद होने से दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति ठप होने का खतरा पैदा हो गया है।

रूस को फायदा नहीं, वित्त मंत्री का दावा
वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट ने सोशल मीडिया एक्स पर स्पष्ट किया कि यह एक अल्पकालिक उपाय है। उन्होंने कहा, “यह कदम केवल ट्रांजिट में मौजूद तेल पर लागू होता है और इससे रूसी सरकार को कोई सार्थक वित्तीय लाभ नहीं होगा। राष्ट्रपति ट्रंप वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता को बढ़ावा देने और कीमतों को कम रखने के लिए यह निर्णायक कार्रवाई कर रहे हैं।”

एस्कॉर्ट के लिए तैयारी नहीं US की नौसेना
अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया कि तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए अमेरिकी नौसेना अभी पूरी तरह तैयार नहीं है। उन्होंने कहा, “अमेरिकी नौसेना वर्तमान में हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार नहीं है।” इसमें अभी और समय लग सकता है, यही कारण है कि अमेरिका ने वैकल्पिक मार्ग के रूप में रूसी तेल की आपूर्ति को मंजूरी दी है।

अमेरिका के इस फैसले से भारत और चीन जैसे देशों को बड़ी राहत मिल सकती है, जो समुद्र में फंसे हुए रूसी कार्गो को अब बिना किसी कानूनी डर के खरीद सकेंगे। हालांकि यह देखना बाकी है कि क्या 11 अप्रैल तक की यह छोटी सी छूट वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ी मंदी से बचा पाएगी या नहीं।

खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से खुदरा महंगाई दर फरवरी में बढ़कर 3.21% हुई

नई दिल्ली। खाने-पीने की चीजों और सोने-चांदी के दाम बढ़ने से फरवरी में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.21% हो गई। जनवरी में यह 2.74% थी। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में खाने-पीने की चीजों में रिटेल इंफ्लेशन जनवरी के 2.13% से बढ़कर 3.47% हो गई।

कंस्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित आंकड़ों के मुताबिक, शहरी इलाकों में रिटेल इंफ्लेशन 3.02% और ग्रामीण क्षेत्रों में 3.37% रही। वहीं फूड इंफ्लेशन शहरों में 3.48% और गांवों में 3.46% रही। ये आंकड़े बेस ईयर 2024 के साथ पिछले महीने जारी नई CPI सीरीज पर आधारित हैं।

टमाटर भी हुआ महंगा
फरवरी में मुख्य रूप से सोना, चांदी, डायमंड, प्लैटिनम जूलरी, खोपरा, टमाटर और गोभी के दाम तेजी से बढ़े। टमाटर के दाम सालभर पहले से 45.29% और गोभी के 43.77% बढ़े। वहीं लहसुन, आलू, प्याज, अरहर और लीची में दाम घटे।

कोर इंफ्लेशन 3.4% पर स्टेबल रही। क्रूड ऑयल के बढ़ते दाम से रिटेल इंफ्लेशन बढ़ सकती है। अगर क्रूड ऑयल के औसत सालाना भाव 100 डॉलर प्रति बैरल या ज्यादा रहे तो वित्त वर्ष 2027 में महंगाई 5% से ज्यादा हो सकती है। हमारा अनुमान है कि अगली मीटिंग में RBI पॉलिसी रेट में बदलाव नहीं करेगा।

Stock Market: सेंसेक्स 1486 अंक टूटा, निवेशकों के नौ लाख करोड़ साफ

नई दिल्ली। Stock Market Update 13 March 14.04 PM: शेयर मार्केट अब बड़ी गिरावट की ओर बढ़ रहा है। दोपहर 2:04 बजे यह 1486.59 अंक या 1.96 प्रतिशत की गिरावट लेकर 74,547.83 पर कारोबार कर रहा था। इस गिरावट के चलते निवेशकों के एक दिन में ₹9 लाख करोड़ साफ हो गए।

इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 (Nifty-50) 150 से ज्यादा अंक की गिरावट लेकर 23,462 पर खुला। शुरूआती कारोबार में गिरावट सिमित रही लेकिन दोपहर होते ही बिकवाली की गति तेज हो गई। दोपहर 2:06 बजे यह 484.70 अंक या 2.05 फीसदी की गिरावट लेकर 23,154.45 पर था।

आज सुबह शेयर मार्केट की शुरुआत बड़ी गिरावट के साथ हुई। बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 590 अंकों का गोता लगाकर 75444 पर खुला। जबकि, एनएसई का 50 शेयरों वाला इंडेक्स निफ्टी ने शुक्रवार के कारोबार की शुरुआत गिरावट के शतक के साथ की। आज निफ्टी 176 अंक नीचे 23462 के लेवल पर खुला।

ग्लोबल मार्केट के संकेत

  • एशियन मार्केट
    कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से मुद्रास्फीति की आशंका बढ़ने से एशियाई बाजारों में शुक्रवार को गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्केई 225 में 2 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि टॉपिक्स 1.4 प्रतिशत गिर गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3 प्रतिशत और कोस्डैक 2 प्रतिशत गिर गया। हांगकांग के हैंग सेंग इंडेक्स ने कम खुलने का संकेत दिया।
  • कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और कमजोर येन के बीच जापानी सरकारी बॉन्ड (जेजीबी) की पैदावार में वृद्धि हुई क्योंकि अमेरिका-ईरान युद्ध ने मुद्रास्फीति की आशंकाओं को बढ़ा दिया। बेंचमार्क 10-वर्षीय JGB यील्ड 2.5 बेसिस पॉइंट बढ़कर 2.205 प्रतिशत हो गई, जबकि पांच साल की यील्ड 2 bps से बढ़कर 1.645 प्रतिशत हो गई।
  • गिफ्ट निफ्टी टुडे
    गिफ्ट निफ्टी 23,555 के आसपास कारोबार कर रहा था, जो निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले बंद भाव से करीब 173 अंकों की छूट है। यह भारतीय शेयर बाजार के सूचकांकों के लिए नकारात्मक शुरुआत का संकेत देता है।
  • वॉल स्ट्रीट
    अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के बाद बंद हुआ। डॉऊ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 739.42 अंक या 1.56 प्रतिशत गिरकर 46,677.85 पर आ गया, जबकि एसएंडपी 500 103.22 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 6,672.58 पर आ गया। नैस्डैक कंपोजिट 404.15 अंक या 1.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,311.98 पर बंद हुआ। एनवीडिया के शेयर की कीमत 1.53 प्रतिशत गिर गई, एएमडी शेयर की कीमत 3.46 प्रतिशत गिर गई, ऐप्पल के शेयर 1.94 प्रतिशत गिर गए, इंटेल के शेयर 5.69 प्रतिशत फिसल गए, अमेज़न शेयर की कीमत 1.47 प्रतिशत गिर गई जबकि टेस्ला के शेयर की कीमत 3.14 प्रतिशत गिर गई।

पीएम किसान निधि की 22वीं किस्त आज होगी जारी, आपका नाम लिस्ट में चेक करें

नई दिल्ली। PM Kisan Nidhi : आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के गुवाहाटी से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan) योजना की 22वीं किस्त जारी करेंगे। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) प्रणाली के जरिए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी।

पीएम किसान की 22वीं किस्त के रूप में 2000-2000 रुपये आपके खाते में आएंगे कि नहीं, इसके लिए पीएम किसान की ताजा लिस्ट में अपना नाम चेक करें। इसके लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। आप अपने मोबाइल से घर बैठे अपना नहीं बल्कि पूरे गांव के लाभार्थियों का नाम लेटेस्ट लिस्ट में देख सकते हैं।

इसके लिए आपको इन स्टेप्स को फॉलो करना है…

  1. पीएम किसान सम्मान निधि की आधिकारिक वेबसाइट https://pmkisan.gov.in/ पर जाएं और Benificiary List को टैप करें।
  2. एक नया पेज खुलेगा जिसमें Benificiary List लिखा होगा। यहां आप राज्य, जिला, तहसील भरें। ब्लॉक और गांव चुनें।
  3. इसके बाद Get Report पर टैप करें।
  4. आपके सामने पूरे गांव की सबसे ताजी लिस्ट खुल जाएगी।
  5. इसमें जिसका नाम होगा, उनके खाते में 13 मार्च को 2000 रुपये गिरेंगे।

किस्तों पर नजर
इस योजना की 21वीं किस्त 19 नवंबर 2025 को तमिलनाडु के कोयंबटूर में जारी की गई थी। उस समय 9 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ पहुंचा और 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की गई थी। इससे पहले अगस्त 2025 में जारी 20वीं किस्त में 9.8 करोड़ किसानों को शामिल किया गया था, जिनमें से 2.4 करोड़ महिला किसान थीं। यह योजना किसानों को खेती के लिए जरूरी सामान खरीदने, फसल की अच्छी देखभाल करने और अनौपचारिक कर्ज पर उनकी निर्भरता कम करने में मदद करती है।

डिजिटल हुई किसान सम्मान योजना
पिछले कुछ वर्षों में इस योजना ने रजिस्ट्रेशन और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को काफी मजबूत किया है। फरवरी 2020 में लॉन्च किया गया पीएम-किसान मोबाइल ऐप किसानों को खुद को रजिस्टर करने, अपनी किस्त की स्थिति देखने और ई-केवाईसी पूरी करने की सुविधा देता है। हाल ही में 24 फरवरी 2026 को इस योजना ने अपने सात साल पूरे किए, जिसकी जानकारी आधिकारिक पीएम-किसान हैंडल ने सोशल मीडिया पर साझा की।

भारत के 20 से ज्‍यादा ऑयल टैंकर होर्मुज स्‍ट्रेट में फंसे, निकालने के लिए ईरान से वार्ता

नई दिल्‍ली। होर्मुज स्‍ट्रेट में भारत के 20 से ज्‍यादा टैंकर फंसे हैं। इन टैंकरों में तेल और गैस है। ईरान के साथ भारत सरकार बातचीत कर रही है। इसका मकसद इन टैंकरों को सुरक्षित रास्‍ता उपलब्‍ध कराना है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट से इसका पता चलता है। रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत विदेश मंत्रालय देख रहा है।

ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बीच फारस की खाड़ी (पर्शियन गल्‍फ) को ओमान की खाड़ी से जोड़ने वाला पतला पानी का रास्ता अभी बंद है। दुनिया का पांचवां हिस्सा कच्चा तेल (क्रूड) आमतौर पर होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है।

ये टैंकर ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद से होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हुए हैं। इनमें लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी), लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) और कच्चा तेल (क्रूड) है।

इससे पहले दिन में इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया था कि विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची ने बातचीत की थी। इस बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पानी के रास्ते से गुजरने की अनुमति दी थी। फिर विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता रणधीर जायसवाल ने भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत का जिक्र किया। लेकिन, ज्‍यादा डिटेल साझा करने से मना कर दिया।

एक-दूसरे के संपर्क में हैं ईरान और भारत
जयशंकर ने इस हफ्ते की शुरुआत में ट्वीट करके कहा था कि उन्होंने अपने अराघची से बात की है। दोनों पक्ष संपर्क में रहने पर सहमत हुए हैं। हालांकि, उन्होंने जहाजों का जिक्र नहीं किया। इस बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरुवार को संसद में कहा कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है।

पुरी ने बताया, ‘आधुनिक एनर्जी इतिहास में दुनिया ने ऐसा समय पहले कभी नहीं देखा…भारत की क्रूड सप्लाई की स्थिति सुरक्षित है और जो वॉल्यूम मिला है, वह होर्मुज से मिलने वाले क्रूड से ज्‍यादा है। संकट से पहले भारत का लगभग 45 फीसदी क्रूड इंपोर्ट होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से होता था। प्रधानमंत्री की शानदार डिप्लोमैटिक पहुंच और गुडविल की वजह से भारत ने उतना क्रूड वॉल्यूम हासिल किया है, जितना उसी समय में होर्मुज स्ट्रेट से मिल सकता था।’

नॉन-होर्मुज रूट से ऑयल इंपोर्ट में बढ़ोतरी
मंत्री ने आगे कहा कि तेल रिफाइनरियां हाई कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर काम कर रही हैं। इनमें से कई 100 फीसदी से भी ज्‍यादा हैं। पुरी ने कहा कि नॉन-होर्मुज देशों से क्रूड ऑयल के इंपोर्ट में भी करीब 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, लड़ाई शुरू होने पर यह 55 फीसदी थी।

उन्‍होंने संसद को बताया, ‘रिफाइनरियां हाई कैपेसिटी यूटिलाइजेशन पर काम कर रही हैं। कई मामलों में वे 100% से भी ज्‍यादा काम कर रही हैं। पेट्रोल, डीजल, केरोसीन, एटीएफ या फ्यूल ऑयल की कोई कमी नहीं है। पेट्रोल, डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल, केरोसीन और फ्यूल ऑयल की अवेलेबिलिटी पूरी तरह से पक्की है। देश भर के रिटेल आउटलेट्स में स्टॉक है। इन प्रोडक्ट्स के लिए सप्लाई चेन नॉर्मल तरीके से काम कर रही है।’

पाकिस्‍तानी नौसेना ने स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज में नहीं रखा कदम, जानिए क्यों पीछे हटी

इस्लामाबाद। पाकिस्तानी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फंसे अपने मालवाहक जहाजों को एस्कॉर्ट करने से पीछे हट गई है। उसने खुद स्वीकार किया है कि वह इसके लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को न तो पार करेगी और ना ही फारस की खाड़ी में कोई अभियान चलाएगी। इसके इतर, पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज अरब सागर में ही रुके रहेंगे।

माना जा रहा है कि पाकिस्तानी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के बारूदी सुरंगों से डर गई है। अमेरिका ने दावा किया है कि ईरान ने इस इलाके को समुद्री बारूदी सुरंगों से पाट दिया है, जिससे न सिर्फ युद्धपोतों बल्कि मालवाहक जहाजों के लिए भी खतरा बढ़ गया है।

पाकिस्तानी मीडिया ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया है कि पाकिस्तानी नौसेना होर्मुज जलडमरूमध्य पर नहीं, बल्कि अपने समुद्री मार्गों पर मर्चेंट शिप को एस्कॉर्ट कर रही हैं। इस ऑपरेशन की सीधी जानकारी रखने वाले एक सिक्योरिटी ऑफिसर ने बुधवार को कन्फर्म किया कि यह अहम रास्ता बंद होने से दुनिया भर में एनर्जी संकट के बीच हुआ है।

उसने कहा कि यह ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर सिर्फ पाकिस्तान की अपनी समुद्री कम्युनिकेशन लाइनों पर फोकस है, खासकर कराची को खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर से जोड़ने वाले रूट पर। इन ऑपरेशन को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को एस्कॉर्ट करने के तौर पर गलत नहीं समझना चाहिए।

पाकिस्तानी मिलिट्री के मीडिया विंग ने सोमवार को अनाउंस किया कि नौसेना ने ‘ऑपरेशन मुहाफिज-उल-बहर’ शुरू किया है। इसमें पाकिस्तानी नौसेना के जहाज मर्चेंट शिप को एस्कॉर्ट कर रहे हैं ताकि देश की एनर्जी सप्लाई बिना रुके चलती रहे और कम्युनिकेशन की समुद्री लाइनों की सिक्योरिटी बनी रहे। ISPR ने सोमवार को घोषणा की थी कि नेवी पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉर्पोरेशन (PNSC) के साथ मिलकर मर्चेंट जहाजों को एस्कॉर्ट करने के लिए ऑपरेशन कर रही है।

होर्मुज जलडमरूमध्य इतना जरूरी क्यों है?
होर्मुज जलडमरूमध्य अरब की खाड़ी का पतला मुहाना है, जिससे दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है। ईरान के खिलाफ US-इजरायल युद्ध ने अहम रास्ते पर टैंकर ट्रैफिक रोक दिया है। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में कई जहाजों पर हमला किया है और वहां से गुजरने की कोशिश करने वाले किसी भी जहाज को धमकी दी है। मिलिट्री के मीडिया विंग ने अपने पहले के बयान में कहा, “पाकिस्तान का लगभग 90 परसेंट ट्रेड समुद्र के रास्ते होता है, इस ऑपरेशन का मकसद यह पक्का करना है कि ज़रूरी समुद्री रास्ते सुरक्षित, सिक्योर और बिना रुकावट के रहें।”