नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) जल्द ही इस ट्रेनसेट का प्रोडक्शन शुरू करने जा रही है।
आईसीएफ को कुल 50 ऐसी ट्रेनसेट तैयार करनी हैं। ICF के जनरल मैनेजर मनीष अग्रवाल ने चेन्नई के एम अरुण स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान इसकी जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि 24 कोच वाली स्वदेशी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट के लिए जरूरी उत्पादन ड्रॉइंग तैयार हो चुकी हैं। इनमें कोच की संरचना, एक कोच से दूसरे कोच को जोड़ने की व्यवस्था और अंडरफ्रेम में लगाए जाने वाले उपकरणों से जुड़ी डिजाइन शामिल हैं। इससे इसके निर्माण का रास्ता साफ हो गया है और जल्द ही उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है।
फिलहाल देश में केवल एक वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चल रही है, जो हावड़ा से कामाख्या के बीच चलती है। इस ट्रेन में कुल 16 कोच हैं, जिनमें 11 थर्ड एसी, 4 सेकंड एसी और एक फर्स्ट एसी कोच शामिल हैं।
रेलवे आने वाले महीनों में ऐसी और ट्रेनों को सर्विस में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। नई 24 कोच वाली ट्रेनसेट मौजूदा ट्रेन की तुलना में ज्यादा यात्रियों को सफर की सुविधा देगी।
स्लीपर कोच होने के कारण लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए यह ट्रेन खास तौर पर उपयोगी होगी। रेलवे का लक्ष्य आधुनिक, तेज और आरामदायक ट्रेनों के जरिए लंबी दूरी की रेल यात्रा को बेहतर बनाना है।
अमृत भारत ट्रेन का वैरिएंट 3.0
ICF के जनरल मैनेजर ने अमृत भारत ट्रेन के वैरिएंट 3.0 को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगली पीढ़ी की अमृत भारत ट्रेनों में एसी, सामान्य और स्लीपर श्रेणी के कोच होंगे। इससे यात्रियों को किफायती और आरामदायक यात्रा का विकल्प मिलेगा।
वर्तमान में अमृत भारत ट्रेनों में सामान्य और स्लीपर कैटेगरी के कोच ही होते हैं। इसके अलावा आईसीएफ ने वंदे भारत तकनीक पर आधारित मालगाड़ी के क्षेत्र में भी काम किया है।
फैक्ट्री ने फ्रेट इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट यानी फ्रेट ईएमयू ट्रेनसेट विकसित किए हैं। इनसे स्वदेशी ट्रेनसेट तकनीक का इस्तेमाल यात्री ट्रेनों से आगे बढ़ाकर माल परिवहन में भी किया जा सकेगा। खासकर सफेद वस्तुओं के परिवहन में इन ट्रेनसेट से बदलाव आने की संभावना जताई गई है।
आईसीएफ ने हाल के वर्षों में कई अन्य तकनीकी विकास भी किए हैं। इनमें मुंबई की उपनगरीय सेवाओं के लिए देश का पहला 15 कोच वाला ईएमयू रेक और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए स्वचालित स्लाइडिंग दरवाजों से लैस गैर-एसी ईएमयू कोच शामिल हैं।
इसके अलावा कोलकाता मेट्रो के कोचों के अंदरूनी हिस्से को भी बेहतर बनाया गया है। इनमें बेहतर एल्युमिनियम पैनलिंग, छत और सिंगल-पीस साइडवॉल पैनल लगाए गए हैं।

