मासिक फ्री सेल कोटा कम आवंटित होने से चीनी के दाम बढ़े, देखिये वीडियो

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नई दिल्ली। पिछले दिनों चीनी के दाम में आई जबरदस्त तेजी के लिए सटोरिया लिवाली (स्पेक्यूलेशन) को जिम्मेवार माना जा रहा है मगर इसके साथ-साथ घरेलू मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए मासिक फ्री सेल कोटा कम आवंटित होना भी इसका एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है।

मई में चीनी का औसत खुदरा मूल्य 45-47 रुपए प्रति किलो चल रहा था जो मध्य अगस्त तक आते-आते उछलकर 65-67 रुपए और कहीं-कहीं 70 रुपए प्रति किलो हो गया।

अक्टूबर 2025 से मई 2026 के बीच चीनी की घरेलू बिक्री का कोटा मिलों द्वारा किए गए कुल डिस्पैच की तुलना में 7 प्रतिशत छोटा रहा। उपभोक्ताओं की मांग में बढ़ोत्तरी होने के बावजूद चीनी का फ्री सेल मासिक कोटा पिछले सीजन के लगभग बराबर या कुछ छोटा आवंटित हुआ। इससे बाजार में आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति जटिल बनी रही और बाद में कीमतों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होने लगी।

केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय द्वारा वर्तमान मार्केटिंग सीजन में अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के 11 महीनों में कुल मिलाकर 245.50 लाख टन चीनी की घरेलू बिक्री का कोटा घोषित (आवंटित) किया गया।

यदि सितम्बर 2025 की भांति सितम्बर 2026 के लिए 23.50 लाख टन कोटे का आंवटन हुआ तो 2025-26 के सम्पूर्ण मार्केटिंग सीजन का कुल कोटा 269 लाख टन तक ही पहुंच सकेगा जो 2024-25 के पूरे मार्केटिंग सीजन के आवंटित कोटा 275.50 लाख टन से 2.4 प्रतिशत या 6.50 लाख टन कम होगा।

विशेषज्ञों के अनुसार उद्योग के पास सीमित स्टॉक को देखते हुए सरकार को चीनी का कोटा आवंटित करने में सावधानी दिखानी पड़ी। इस नई रणनीति का मुख्य उद्देश्य चीनी के स्टॉक में संतुलन बनाए रखना था।

समझा जाता है कि सरकार को इस बात के पक्के सबूत मिल गए कि कुछ मिलों द्वारा नियत कोटे से अधिक मात्रा में चीनी की बिक्री की गई। मौजूदा मार्केटिंग सीजन अगले महीने (सितम्बर) के अंत में समाप्त हो जाएगा इसलिए अब 2026-27 सीजन के लिए चीनी के बकाया स्टॉक की हकीकत जानने के लिए बाजार उत्सुक है।