क्रूड ऑयल 6 महीने के उच्चतम स्तर से फिसला, सप्लाई का संकट बरकरार

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नई दिल्ली। कच्चे तेल की कीमतों में 26 अक्टूबर को गिरावट आई। पिछले सप्ताह के आखिर में करीब छह महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंचने के बाद कीमतें नीचे आईं। हालांकि, सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान अमेरिकी कच्चे तेल (WTI) का भाव 1.60 डॉलर यानी 1.55% गिरकर 101.67 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.56 डॉलर यानी 1.34% घटकर 115.16 डॉलर प्रति बैरल रही।

पिछले शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3 डॉलर बढ़ी थी। पूरे सप्ताह में ब्रेंट क्रूड करीब 6% चढ़ा, जबकि अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत 2.3% बढ़ी। कीमतों में इस तेजी की बड़ी वजह सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमलों से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका थी।

हूती विद्रोहियों ने शनिवार को सऊदी अरब के हवाई अड्डे और तेल से जुड़ी सुविधाओं पर हमले करने का दावा किया। सऊदी अरब ने रविवार को कहा कि उसने कई और मिसाइलों और ड्रोन को बीच में ही रोक दिया। पिछले हमलों में नुकसान के बाद सऊदी अरब ने रविवार को अपने मुख्य हवाई अड्डे पर सीमित उड़ानें फिर शुरू कर दीं।

हालांकि, हूती विद्रोहियों ने इस हवाई अड्डे को आगे भी निशाना बनाने की चेतावनी दी है। सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है। वहां तेल उत्पादन या निर्यात से जुड़ी सुविधाओं को नुकसान पहुंचने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई प्रभावित हो सकती है। इसी आशंका के कारण कीमतों में गिरावट के बावजूद बाजार में सतर्कता बनी हुई है।

पश्चिम एशिया में तनाव का असर तेल उत्पादन के साथ-साथ उसकी ढुलाई पर भी पड़ सकता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर के आसपास जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। इन रास्तों पर हमले या जहाजों की आवाजाही में रुकावट आने से तेल की डिलीवरी में देरी हो सकती है और ढुलाई का खर्च बढ़ सकता है।

तेल बाजार पर नजर रखने वाले कारोबारियों के लिए यह अहम है कि तेल उत्पादक देश सिर्फ उत्पादन ही नहीं बढ़ाएं, बल्कि उसे सुरक्षित तरीके से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक भी पहुंचा सकें।