Soybean yield: देश में इस बार 108 लाख टन सोयाबीन की पैदावार का अनुमान

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नई दिल्ली। Soybean yield: देश के कई हिस्सों में सूखे के बावजूद इस साल सोयाबीन के उत्पादन में ज्यादा गिरावट आने की आशंका नहीं है। सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के मुताबिक, मौजूदा खरीफ सीजन में देश में करीब 108 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हो सकता है।

यह पिछले साल के मुकाबले करीब 2 फीसदी कम है। महाराष्ट्र में सूखे के कारण उत्पादन में बड़ी गिरावट आने की आशंका है। हालांकि, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अच्छी पैदावार से इस नुकसान की काफी हद तक भरपाई हो सकती है।

सोपा के पहले फसल अनुमान के मुताबिक, इस खरीफ सीजन में देश का कुल सोयाबीन उत्पादन 107.93 लाख टन रह सकता है। पिछले साल यह 110.26 लाख टन था। सोयाबीन खरीफ सीजन की प्रमुख तिलहन फसल है। इससे खाने का तेल बनाया जाता है। इसके अलावा सोयाबीन से निकलने वाले उत्पादों का इस्तेमाल पोल्ट्री उद्योग में मुर्गियों के चारे के लिए भी होता है।

सोपा के मुताबिक, देश के सबसे बड़े सोयाबीन उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में इस साल उत्पादन 32.2 फीसदी बढ़कर 57.16 लाख टन पहुंच सकता है। पिछले साल राज्य में 43.24 लाख टन सोयाबीन का उत्पादन हुआ था।

मध्य प्रदेश में सोयाबीन की बुवाई का रकबा भी बढ़ा है। पिछले साल 48.64 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी, जबकि इस साल यह बढ़कर 52.09 लाख हेक्टेयर हो गया। वहीं, प्रति हेक्टेयर औसत पैदावार 889 किलोग्राम से बढ़कर 1,108 किलोग्राम रहने की उम्मीद है। राजस्थान में भी सोयाबीन की अच्छी फसल होने का अनुमान है। यहां उत्पादन 48.2 फीसदी बढ़कर 9.47 लाख टन पहुंच सकता है।

सोपा के कार्यकारी निदेशक डीएन पाठक ने कहा कि इस बार मध्य प्रदेश में सोयाबीन की फसल अच्छी रही है। राजस्थान में भी पैदावार बेहतर हुई है। इन दोनों राज्यों में उत्पादन बढ़ने से महाराष्ट्र में हुए नुकसान की लगभग भरपाई हो गई है।

उन्होंने बताया कि इस साल देशभर में सोयाबीन की बुवाई का रकबा पिछले सीजन के मुकाबले करीब पांच लाख हेक्टेयर ज्यादा रहा। इस साल महाराष्ट्र में सूखे का सोयाबीन की फसल पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है। राज्य में उत्पादन 33.2 फीसदी घटकर 34.88 लाख टन रहने का अनुमान है।

महाराष्ट्र के अलावा कर्नाटक और तेलंगाना में भी लंबे समय तक बारिश नहीं होने से फसल प्रभावित हुई है। खासकर फसल बढ़ने के जरूरी समय पर मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होने से पैदावार को नुकसान पहुंचा। इन तीनों राज्यों में कुल 7.02 लाख हेक्टेयर में बोई गई सोयाबीन की फसल पूरी तरह खराब हो गई। इस वजह से इन खेतों में फसल की कटाई नहीं हो सकी।

चालू खरीफ सीजन में देशभर में 117.73 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हुई थी। पिछले साल यह रकबा 112.14 लाख हेक्टेयर था। यानी इस बार सोयाबीन की बुवाई करीब 5 फीसदी ज्यादा जमीन पर हुई। हालांकि, सूखे और मिट्टी में नमी की कमी से 7.76 लाख हेक्टेयर में फसल प्रभावित हुई। इसके चलते कटाई के लिए उपलब्ध रकबा घटकर 109.98 लाख हेक्टेयर रह गया।

सोपा के मुताबिक, इस साल कटाई वाले खेतों में प्रति हेक्टेयर औसत पैदावार 981 किलोग्राम रहने का अनुमान है। पिछले खरीफ सीजन में यह 983 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी। इस तरह बुवाई का रकबा बढ़ने के बावजूद सूखे से फसल खराब होने के कारण देश का कुल सोयाबीन उत्पादन पिछले साल के मुकाबले 2.11 फीसदी घटकर 107.93 लाख टन रहने का अनुमान है।