Kota Dussehra: तृप्ति के भजनों से शरद पूर्णिमा की रात में बही भक्ति की बयार

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कोटा। Kota Dussehra 2026: दशहरा मेला 2026 के अंतर्गत रविवार को शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में विजयश्री रंगमंच पर भजन संध्या का आयोजन किया गया। पार्श्वगायिका तृप्ति शाक्य ने अपनी सुमधुर, मनमोहक एवं ओजस्वी आवाज से ऐसा समां बांधा कि पूरा रंगमंच भक्ति रस में सराबोर हो गया। इस दौरान एक से बढ़कर एक भजनों की बहती संगीतमय सरिता में उपस्थित हज़ारों श्रोता देर रात तक गोते लगाते रहे।

​कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती और भगवान गणपति की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। मंच संभालते ही गायिका तृप्ति शाक्य ने अपने कालजयी भजनों की श्रृंखला से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सांस्कृतिक कार्यक्रम का आगाज़ भगवान श्री गणेश की आराधना ‘देवा ओ देवा गणपति देवा…’ की सुमधुर वंदना से हुआ। फिर तृप्ति शाक्य ने लता मंगेशकर के गाये गीत ईश्वर सत्य है, सत्य ही शिव है, शिव ही सुंदर है..जागो उठकर देखो, सत्यम शिवम सुंदरम! गीत के साथ भजन संध्या की शुरुआत की।

जब उन्होंने अपना सबसे लोकप्रिय भजन ‘कभी राम बनकर कभी श्याम बनकर चले आना’ छेड़ा, तो दर्शक दीर्घा में बैठे श्रोता भक्ति भाव में डूबकर झूमने लगे। इसके पश्चात उन्होंने अध्यात्म और दर्शन से परिपूर्ण निर्गुण भजन ‘खिलौना माटी का’ सुनाकर वातावरण को गंभीर और भावुक बना दिया। कान्हा और राधा के पावन प्रेम पर आधारित ‘श्याम चूड़ी बेचने आया’ और ‘श्यामा आन बसो वृंदावन में’ जैसे भजनों ने दर्शकों को ब्रज की पावन भूमि का अहसास कराया।

​भजन संध्या के दौरान तृप्ति शाक्य ने विविध देवी-देवताओं की महिमा का बखान किया। उन्होंने देवी मां के प्रसिद्ध भजन ‘कभी दुर्गा बनकर कभी काली बनकर’, ‘मानो तो मैं गंगा मां हूँ’ तथा ‘अंबे तू है जगदंबे काली’ प्रस्तुत कर प्रांगण को शक्ति की उपासना से भर दिया।

इसके साथ ही ‘शिव शंकर चले रे कैलाश’, ‘सत्यम शिवम सुंदरम बोलके’ तथा ‘राम नाम की लूट है’ जैसे भजनों पर श्रोताओं ने भावविभोर होकर जयकारे लगाए। अंत में ‘काना बरसाने में आ जयो’, ‘कैसा चक्कर चलाया श्याम’ और पारंपरिक ‘आरती कुंज बिहारी की’ के साथ भक्ति और संगीत कार्यक्रम का समापन किया।

किसान रंगमंच पर लोकनृत्यों की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

राष्ट्रीय दशहरा मेला 2026 के द्वितीय चरण के अंतर्गत मेला परिसर स्थित ‘किसान रंगमंच’ पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय एवं आमंत्रित कलाकारों ने अपनी सुमधुर गायकी और मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। रंग-बिरंगी रोशनी और संगीत की मधुर तानों के बीच कलाकारों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुति पर दर्शक देर रात तक झूमते नजर आए।

गायकों ने सदाबहार हिंदी गीत ‘आने से उसके आए बहार…’ की सुरीली प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर नृत्य कलाकारों ने भी अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ‘तुझ पर बलिहारी जाऊं कसम राम की…’ गाने पर कलाकारों द्वारा दी गई भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा। इसके बाद ‘मैं हूं खलनायक…’ गीत पर कलाकारों के समूह ने ऊर्जावान ग्रुप डांस प्रस्तुत कर रंगमंच पर जबरदस्त तालियां बटोरीं।