जयपुर। Kharif Crop: राजस्थान में खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में काफी पीछे चल रही है। राज्य कृषि विभाग के अनुसार 17 जुलाई तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई 110.10 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष के 131.00 लाख हेक्टेयर की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत कम है। सामान्य खरीफ क्षेत्र 164.10 लाख हेक्टेयर के मुकाबले अब तक केवल 67 प्रतिशत क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है।
अनाज फसलों में मक्का का रकबा घटकर 8.62 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष 9.24 लाख हेक्टेयर था। धान की बुवाई 1.91 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले वर्ष यह 2.33 लाख हेक्टेयर थी। ज्वार का रकबा भी घटकर 4.89 लाख हेक्टेयर रह गया, जो एक वर्ष पहले 5.97 लाख हेक्टेयर था।
दलहनों में मूंग की बुवाई घटकर 18.20 लाख हेक्टेयर रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 19.60 लाख हेक्टेयर थी। हालांकि उड़द का रकबा बढ़कर 3.09 लाख हेक्टेयर हो गया, जो पिछले वर्ष 2.76 लाख हेक्टेयर था। इसके बावजूद राज्य में कुल दलहन क्षेत्र घटकर 26.60 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष 30.60 लाख हेक्टेयर था।
तिलहनों में मूंगफली का रकबा बढ़कर 9.87 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि पिछले वर्ष यह 8.78 लाख हेक्टेयर था। दूसरी ओर सोयाबीन की बुवाई घटकर 8.55 लाख हेक्टेयर रह गई, जो पिछले वर्ष 9.46 लाख हेक्टेयर थी। कुल तिलहन क्षेत्र मामूली घटकर 19.50 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष यह 19.80 लाख हेक्टेयर था।
कपास का रकबा घटकर 5.26 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले वर्ष 6.20 लाख हेक्टेयर था। वहीं ग्वार की बुवाई में भी बड़ी गिरावट दर्ज हुई और इसका क्षेत्र 15.30 लाख हेक्टेयर से घटकर 11.50 लाख हेक्टेयर रह गया। दूसरी ओर गन्ने का रकबा बढ़कर 0.05 लाख हेक्टेयर (4,625 हेक्टेयर) हो गया, जो पिछले वर्ष 0.04 लाख हेक्टेयर (3,674 हेक्टेयर) था।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार 1 जून से 20 जुलाई के दौरान राजस्थान में 104.4 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम है। राज्य में मानसून 2 जुलाई को पहुंचा, जो सामान्य तिथि 25 जून से सात दिन देर से था।
जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से बुवाई को गति मिली, लेकिन बाद में लगातार पड़े सूखे अंतराल (ड्राई स्पेल) के कारण बुवाई की रफ्तार धीमी पड़ गई और यह पिछले वर्ष के स्तर तक नहीं पहुंच सकी। कमजोर मानसून और वर्षा की अनिश्चितता के चलते राज्य में खरीफ उत्पादन को लेकर चिंता बनी हुई है।

