‘एक शाम शहीदों के नाम’ जनप्रतिनिधियों के स्वागत के नाम रही, दर्शकों को तरसा मंच

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​लाखों रुपये देकर बुलाये सुरेश वाडकर नहीं छोड़ पाए देशभक्ति का रंग

​कोटा। कोटा दशहरा मेले में शनिवार को विजयश्री रंगमंच पर ‘एक शाम शहीदों के नाम’ के सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया, जिसमें देश के ख्यातनाम और प्रतिष्ठित पार्श्व गायक पद्मश्री सुरेश वाडेकर ने अपनी सुरमयी आवाज़ में देश के वीर सपूतों और अमर शहीदों को स्वरांजलि अर्पित की। कार्यक्रम के बीच में अतिथियों और जनप्रतिनिधियों के स्वागत से संगीत का कार्यक्रम पूरी तरह प्रभावित हुआ।

गायक को भी कोटा दशहरा का ऐसा माहौल देखकर बड़ा अटपटा ला रहा था। ऐसा लगता था कि संगीत संध्या नहीं बल्कि जनप्रतिनिधियों के स्वागत का कार्यक्रम हो रहा हो। इस दौरान विभिन्न नगर निकायों के जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और भारी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। कार्यक्रम में कोटा की महापौर अनुसुइया गोस्वामी तथा मेला अधिकारी ओपी मेहरा ने उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।

​कार्यक्रम की शुरुआत सुरेश वाडेकर ने पारंपरिक और पवित्र गणेश वंदना के साथ की, जिसने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई लोकप्रिय और कालजयी गीत पेश किए। ‘मेरे प्यारे वतन’ और ‘मेरे देश की धरती, सोना उगले’ जैसे देशभक्ति गीत पेश किये। ‘मैं हूं प्रेम रोगी मेरी दवा तो कराओ’ और ‘लगी आज सावन की झड़ी’ जैसे गीतों ने पुरानी यादों को ताजा कर दिया।

दर्शकों को तरसी एक शाम शहीदों के नाम
कार्यक्रम के अंत तक पूरे कार्यक्रम में दर्शकों की कमी खलती रही। जनप्रतिनिधियों को कार्यकम के दौरान सबसे ज्यादा चिंता कलाकारों के साथ अपने फोटो खिंचवाने की रहती है। लाखों रूपये खर्च कर कलाकारों को जिस कार्यक्रम के लिए बुलाया जाता है, वह लोगों तक पहुंचे इसकी आयोजकों को कोई चिंता नहीं रहती। बस एक फोटो हो जाए। कार्यक्रम के दौरान पूरे टाइम एंकर भी इसी में लगे रहते हैं।

माइक की लचर व्यवस्था
पूरे कार्यक्रम के दौरान सुरेश वाडकर का कार्यक्रम माइक की लचर व्यवस्था के कारण अपना रंग नहीं जमा पाया। वाडकर के बार-बार माइक पर बोलने के बाद भी आयोजकों ने माइक की व्यवस्था में सुधार नहीं किया। न गायक की आवाज साफ़ सुनाई दे रही थी और न साजों की। हारमोनियम का माइक तो पूरे समय बंद रहा।