नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों का पैसा निकालने का सिलसिला थम नहीं रहा है। अक्टूबर में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) करीब 52,000 करोड़ रुपये के शेयर बेच चुके हैं। यह बिकवाली ऐसे समय में हो रही है, जब दुनिया भर में आर्थिक और राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है।
अमेरिका में बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से दूरी बना रहे हैं। हालांकि, 16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने थोड़ी खरीदारी की, जिससे बिकवाली का दबाव कम होने के संकेत मिले हैं। सवाल यह है कि क्या विदेशी निवेशकों का रुख अब बदलने वाला है या आने वाले दिनों में फिर बिकवाली बढ़ सकती है?
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (सीडीएसएल) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में विदेशी निवेशकों की बिकवाली से पहले सितंबर में भी भारतीय शेयर बाजार से 35,861 करोड़ रुपये निकाले गए थे। हालांकि, इससे पहले जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में पैसा लगाया था। लेकिन सितंबर से शुरू हुई बिकवाली अक्टूबर में और तेज हो गई।
इस साल अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से कुल 3.12 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। यह रकम पूरे 2025 में निकाले गए 1.66 लाख करोड़ रुपये से करीब 88 फीसदी ज्यादा है।
चॉइस वेल्थ के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफिसर धीरज गौड़ के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली के पीछे कई वैश्विक वजहें हैं। अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। इसके अलावा डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौती बनी हुई हैं। अमेरिका में महंगाई उम्मीद के मुताबिक कम नहीं हो रही है। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने की आशंका बढ़ी है।
अगर अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो वहां के बॉन्ड और दूसरी संपत्तियां विदेशी निवेशकों को ज्यादा आकर्षक लग सकती हैं। ऐसे में भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकलने का दबाव बढ़ता है। गौड़ ने बताया कि उत्तरी एशिया के शेयर बाजारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी भी विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही है। इससे भारतीय बाजार की ओर आने वाला निवेश प्रभावित हो रहा है।
लगातार बिकवाली के बीच 16 अक्टूबर को विदेशी निवेशक थोड़े खरीदार बने। हालांकि, जानकार इसे विदेशी निवेशकों के रुख में बड़े बदलाव का संकेत नहीं मान रहे हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार के मुताबिक, अमेरिकी 10 साल के सरकारी बॉन्ड का रिटर्न 5.3 फीसदी से ऊपर के स्तर से घटकर 5.08 फीसदी पर आ गया। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती आने से भी विदेशी निवेशकों का रुख कुछ नरम हुआ।
विजयकुमार के मुताबिक, इन वजहों से विदेशी निवेशकों की बिकवाली में अस्थायी बदलाव आया। हालांकि, सिर्फ एक दिन की खरीदारी से यह नहीं कहा जा सकता कि विदेशी निवेशक अब लगातार भारतीय शेयर खरीदेंगे।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली सभी सेक्टरों में एक जैसी नहीं रही है। विजयकुमार के मुताबिक, विदेशी निवेशक वित्तीय सेवा कंपनियों और तेल से जुड़े कारोबार वाली कंपनियों के शेयर लगातार बेच रहे हैं। दूसरी ओर, वे कंज्यूमर सर्विसेज से जुड़ी कंपनियों में निवेश कर रहे हैं। इनमें डिजिटल प्लेटफॉर्म, मनोरंजन, रेस्तरां और स्वास्थ्य सेवाएं देने वाली कंपनियां शामिल हैं। इससे पता चलता है कि विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पूरी तरह बाहर नहीं निकल रहे हैं, बल्कि कुछ सेक्टरों से पैसा निकालकर दूसरे सेक्टरों में लगा रहे हैं।
बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) पवित्रो मुखर्जी के मुताबिक, विदेशी निवेशकों की बिकवाली में तेज कमी और शुक्रवार को खरीदारी की वापसी से संकेत मिलता है कि निवेशकों का भरोसा कुछ हद तक स्थिर हो रहा है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में सुधार की राह में बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर ब्रेंट क्रूड की कीमतों और अमेरिका-ईरान संबंधों में होने वाले घटनाक्रम पर रहेगी। इसके अलावा घरेलू बाजार में कंपनियों के वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के नतीजे भी अहम होंगे। अच्छे नतीजे निवेशकों का भरोसा बढ़ा सकते हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन बाजार पर दबाव डाल सकता है।
बॉन्ड बाजार में विदेशी निवेशकों का क्या रुख रहा?
सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड बाजार में भी अलग-अलग निवेश रास्तों से पैसा निकाला और लगाया। फुली एक्सेसिबल रूट (एफएआर) के जरिए उन्होंने 1,620 करोड़ रुपये और वॉलंटरी रिटेंशन रूट (वीआरआर) के जरिए 772 करोड़ रुपये निकाले। हालांकि, सामान्य निवेश मार्ग से उन्होंने 3,387 करोड़ रुपये लगाए। इस तरह इन तीनों रास्तों को मिलाकर सितंबर में बॉन्ड बाजार में करीब 995 करोड़ रुपये का शुद्ध विदेशी निवेश आया।

