कोटा। कुन्हाड़ी स्थित ऋद्धि-सिद्धि नगर के चंद्रप्रभु जिनालय में आयोजित धर्मसभा में गणधर मुनि विवर्धन सागर महाराज ने सोमवार को सत्य, सदाचार और पापों से बचने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को जीवन में सत्य का पालन करना चाहिए। सत्य बोलने से वचन सिद्धि होती है और जीवन में नैतिकता का विकास होता है।
मुनिश्री ने तत्त्वार्थ संग्रह की गाथाओं का उल्लेख करते हुए मिथ्यात्व और अविरति सहित पांच पापों के आस्रव के कारणों को समझाया। उन्होंने कहा कि जब अशुभ आस्रव कम होता है, तब पुण्य में वृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
व्यक्ति के चेहरे और व्यवहार से उसके मन की स्थिति झलकती है। बनावटी मुस्कान और स्वाभाविक हंसी में अंतर होता है। आचार्य अपने शिष्यों की गतिविधियों पर ध्यान रखते हैं और उनकी त्रुटियों का सुधार करते हैं।
मंदिर अध्यक्ष राजेन्द्र गोधा एवं मंत्री पंकज खटोड ने बताया कि शीतलनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक दिवस पर जिनालय में निर्वाण लाडू अर्पित किया गया। सभा में प्रकाश पहाड़िया, टीकम पाटनी, कैलाश बज, राकेश खटोड़, नेमीचंद जैन, ऋषभ बाकलीवाल, महावीर लुहाड़िया, पदम बज और महेंद्र गोधा सहित समाजजन उपस्थित रहे।

