नई दिल्ली। प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र और कर्नाटक में सूखे की स्थिति के कारण देश में उत्पादन कम होने की आशंका हैं। घरेलू बाजार में चीनी की कमी न हो इसके लिए सरकार एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में एथेनॉल बनाने के लिए गन्ना के रस, सिरप और बी-हैवी मोलासेस के डायवर्जन पर रोक लगाने की तैयारी कर रही है। 2025-26 में एथेनॉल उत्पादन में चीनी की हिस्सेदारी करीब 10 फीसदी थी।
एथेनॉल साल की शुरुआत में सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने के अनिवार्य लक्ष्य को पूरा करने के लिए एथेनॉल में डायवर्ट किए जा सकने वाले गन्ने के रस, सिरप और बी-हैवी मोलासेस की मात्रा तय करती है। एथेनाल आपूर्ति साल एक नवंबर से 31 अक्टूबर तक चलता है, जबकि चीनी का सीजन 1 अक्टूबर से 30 सितंबर तक होता है।
चीनी मिलों ने 2025-26 सीजन के दौरान करीब 30 लाख टन चीनी, यानी कुल उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत, एथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट की थी। चीनी उद्योग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक नए सीजन के लिए शुरुआती चीनी स्टॉक 1 अक्टूबर को करीब 37.5 लाख टन था, जबकि एक साल पहले यह लगभग 50 लाख टन था।
चीनी की कीमतें काबू में रखने की योजना
देश में चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार निर्यात पर रोक, आयात की मंजूरी जैसे कदम पहले ही उठा चुकी है। चालू चीनी सीजन में भी चीनी का आयात करना पड़ सकता है। लेकिन अलनीनों के कारण वैश्विक स्तर पर भी चीनी का उत्पादन कम का अनुमान लगा जा रहा है।
वैश्विक जरुरतों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं, ऐसे में आयातित चीनी महंगी होगी। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार घरेलू जरुरतों को पूरा करने के लिए एथेनॉल डायवर्जन पर रोक लगाने की तैयारी में हैं। जिसकी अधिसूचना सरकार 31 अक्टूबर के पहले निकाल सकती हैं।
चीनी सप्लाई की बढ़ी चिंता
डायवर्जन पर रोक लगाने से मिलें उपलब्ध गन्ने से ज़्यादा चीनी निकाल पाएंगी, जिससे घरेलू सप्लाई बेहतर होगी और खपत की जरूरतें पूरी हो सकेंगी। उद्योग जगत से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक चीनी सीजन 2025-26 में चीनी का उत्पादन अनुमान से कम हुआ है।
शुरुआती अनुमान लगभग 343 लाख टन का था, लेकिन अगस्त में उत्पादन का अनुमान करीब 306 लाख टन लगाया गया, जिसमें एथेनॉल के लिए इस्तेमाल की गई चीनी भी शामिल है। एथेनॉल के लिए इस्तेमाल की गई चीनी को हटाने के बाद, शुद्ध चीनी उत्पादन लगभग 279 लाख टन रहा, जबकि देश में सामान्य खपत की ज़रूरत 280-285 लाख टन है।
प्रभावित नहीं होगा एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 में करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में लगभग 9 प्रतिशत रह गया है। वहीं, अब देश में एथेनॉल उत्पादन का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अनाज, खासकर मक्का, से आता है। इससे चीनी आधारित कच्चे माल पर निर्भरता कम हुई है।
एथेनॉल इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि चीनी आधारित फीडस्टॉक पर प्रतिबंध के बावजूद पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। चीनी मिलों को चीनी से बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद है, इसलिए उनके परिचालन पर भी इसका असर सीमित रह सकता है।

