नई दिल्ली। उत्पादक मंडियों में तुवर की सप्लाई कमजोर पड़ने और दाल मिलर्स की मजबूत मांग के चलते बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ी है। खुदरा बाजार में अरहर दाल के दाम बढ़कर 150 रुपये प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गई।
आने वाले दिनों में त्योहारों से पहले दाल की कीमतों में और बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकती है। कीमतें बढ़ने की प्रमुख वजह कारोबारियों द्वारा अपने स्टॉक को बढ़ना माना जा रहा है जिसको देखते हुए सरकार दाल की कीमतों पर भी नकेल लगाने के लिए कुछ कदम उठा सकती है।
भारत में अरहर दाल (तूर दाल) का औसत मंडी भाव फिलहाल लगभग 11,394 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है। खुदरा बाजार (रिटेल) में अरहर दाल 130 से 160 प्रति किलोग्राम तक बिक रही है। पिछले एक महीने में अरहर की कीमत करीब 14% बढ़ी है।
तीन महीने की अवधि में इसके दाम में करीब 12% की तेजी दर्ज की गई है जबकि पिछले एक साल में अरहर दाल करीब 8 फीसदी महंगी हुई। अरहर के भाव बढ़ने के पीछे कमजोर मानसून और त्योहारों से पहले मिलर्स की बढ़ी हुई खरीद को इसकी सबसे बड़ी वजह बताया जा रहा है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के अनुसार देश की थोक मंड़ियों में तुअर दाल की औसत कीमत 20 सितंबर को 11393.5 रुपये प्रति क्विंटल चल थी। जबकि उरद दाल 11,274.57 रुपये, मूंग दाल 10,074.13 रुपये, मैसूर दाल 8025.03 रुपये और चना दाल 7,964.60 रुपये प्रति क्विंटल चल रही है। वहीं खुदरा बाजार में तुअर दाल 122.82 रुपये, उरद दाल, 121.67 रुपये, मसूर दाल 88.35 रुपये, चना दाल 86.71 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहे हैं
अरहर की कीमतों में तेजी के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। जिसमें मानसून के कमजोर रहने से अरहर की फसल और आने वाली सप्लाई पर इसका असर पड़ रहा है। खासकर त्योहारों का सीजन नजदीक आने के कारण मिलों की ओर से खरीद बढ़ने से बाजार में इसकी मांग बढ़ी है।
स्टॉकिस्ट ऊंचे भाव की उम्मीद में फिलहाल माल रोकने की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे घरेलू बाजार में उपलब्धता पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। स्टॉकिस्टों का मानना है कि त्योहारी सीजन में तुअर दाल 15 हजार के पार जा सकती है ।
सरकार जल्द उतार सकती है बफर स्टॉक
एग्री फॉर्मर एंड ट्रेड एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील बलदेव कहते हैं कि बाजार में माल नहीं है। पिछले दो सालों से दाल व्यापारियों को लगातार घाटा हो रहा था जिसके कारण व्यापारियों ने इस साल स्टॉक नहीं रखा था। जबकि सरकार के पास 43 लाख टन का बफर स्टॉक है। जिसमें 19.5 लाख टन चना, 10 लाख टन तुअर, 9 लाख टन मूंग और 5.6 लाख टन मसूर दाल का स्टॉक है। हमने सरकार से अनुरोध किया है कि वह बाजार में जल्द से जल्द बफर स्टॉक का माल उतारें। जितनी जल्द बफर स्टॉक की दाल बाजार में आएंगी उतनी जल्दी कीमतें काबू में होगी, देर करने पर कीमतें और तेजी से बढ़ेगी क्योंकि इस समय मांग बहुत ज्यादा है।
महंगी आयातित दाल
विदेशों से आयात की जाने वाली दाल घरेलू बाजार उपलब्ध दाल की अपेक्षा महंगी बैठ रही है। इसकी सबसे प्रमुख वजह वैश्विक तनाव के चलते सप्लाई में होने वाली देरी और महंगा शिप किराया है। ऊंची अंतरराष्ट्रीय कीमतों, महंगे आयात और अन्य लागतों के कारण आयातकों को भी ऊंचे भाव पर बिक्री करनी पड़ रही है। इससे घरेलू तुवर की कीमतों को आयात से मिलने वाला दबाव फिलहाल सीमित है और बाजार में तेजी की धारणा को समर्थन मिल रहा है। दलहन कारोबार पुखराज चोपड़ा कहते हैं कि आयातित दालों (चना और मसूर) पर 10 फीसदी आयात शुल्क लग रहा है उसमें कमी करने की जरुरत है।
अभी और महंगी होगी दाल
दाल कारोबारियों का कहना है कि बाजार की मौजूदा परिस्थितियों में तीन प्रमुख कारक है, उत्पादक मंडियों में सीमित आवक, दाल मिलर्स की मजबूत मांग और महंगी आयात पड़तल है जो तुवर की कीमतों को सहारा दे रहे हैं। इसके साथ ही त्योहारी मांग और कमजोर फसल की आशंका बाजार की तेजी को आगे भी समर्थन दे सकती है। यदि बाजार में सप्लाई नहीं सुधरी तो कीमतें तेजी से बढ़ेगी।
सरकार ने बढ़ाया अरहर का एमएसपी
किसानों को उनकी फसल का बेहतर कीमत दिलाने और बाजार में कीमतों को बहुत नीचे जाने से रोकनी के लिए सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) बढ़ाया है। अरहर का एमएसपी 450 रुपये बढ़ाकर 8,450 प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

