नई दिल्ली। Stock Market This Week: भारतीय शेयर बाजार के लिए आने वाला सप्ताह काफी अहम रहने वाला है। पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिका के महंगाई के आंकड़े बाजार की चाल तय करने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत और दुनिया भर के बाजारों के रुझान पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला था। 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 749.08 अंक यानी 0.96 फीसदी गिरा। वहीं, NSE निफ्टी 277.95 अंक यानी 1.14 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। इसके साथ निफ्टी में लगातार चौथे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई। यह पिछले पांच महीनों में निफ्टी की गिरावट का सबसे लंबा दौर रहा।
महंगा कच्चा तेल बढ़ा रहे चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी चिंताओं ने दुनियाभर के ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। पिछले सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमत 8 फीसदी से ज्यादा बढ़ी, जबकि WTI क्रूड में 9 फीसदी से अधिक की तेजी आई। ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में कच्चे तेल के महंगा होने से देश में महंगाई बढ़ने और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने का खतरा रहता है। इसका असर कंपनियों की लागत और मुनाफे पर भी पड़ सकता है।
रिलायंस ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और रिसर्च हेड अजित मिश्रा ने कहा कि इस सप्ताह बाजार वैश्विक मौद्रिक नीति, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर संवेदनशील रह सकता है। अमेरिकी रोजगार के मजबूत आंकड़ों के बाद निवेशकों की नजर फेडरल रिजर्व की सितंबर की नीति को लेकर बनी उम्मीदों पर रहेगी।
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान के मुताबिक, अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली का दबाव बढ़ा है। इसके साथ ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेजी ने भारत के राजकोषीय और महंगाई से जुड़े जोखिम भी बढ़ाए हैं। हालांकि, भारत की Q1FY27 वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही है, जो बाजार की उम्मीदों से बेहतर है। निर्यात और निवेश में मजबूत बढ़ोतरी ने अर्थव्यवस्था को सहारा दिया है।
मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के रिसर्च हेड डॉ. रवि सिंह ने कहा कि भारतीय शेयर बाजार लगातार चौथे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। ब्रेंट क्रूड करीब 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच महंगा कच्चा तेल बाजार पर सबसे बड़ा दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, अमेरिका की 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 2023 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव भी बढ़ा है।
अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से तय होगी आगे की दिशा
अगले सप्ताह दुनियाभर के बाजारों की नजर अमेरिका से आने वाले महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। हाल ही में अमेरिका के रोजगार के आंकड़े उम्मीद से बेहतर आए हैं। गैर-कृषि क्षेत्र में 1.62 लाख नई नौकरियां जुड़ीं, जबकि बाजार को करीब 53,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी। वहीं, बेरोजगारी दर 4.1 फीसदी पर स्थिर रही।
मजबूत रोजगार आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदें बदली हैं। अब महंगाई के आंकड़े यह समझने में अहम होंगे कि आगे ब्याज दरों को लेकर फेड का रुख क्या रह सकता है। इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों पर भी निवेशकों की नजर रहेगी।
DII ने संभाला बाजार
पिछले सप्ताह विदेशी निवेशकों ने लगातार तीसरे हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली की। उन्होंने करीब 5,612 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 23,156 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर काफी हद तक कम हो गया।
भारतीय रुपये में भी पिछले सप्ताह मजबूती देखने को मिली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की FCNR (B) विशेष स्वैप विंडो 31 अगस्त को तय समय से एक महीने पहले ही बंद कर दी गई। इसके जरिए 52 अरब डॉलर से ज्यादा की NRI जमा राशि जुटाई गई। पूरे सप्ताह में रुपया करीब 1 फीसदी मजबूत हुआ और 94.48 के स्तर पर बंद हुआ।

