आध्यात्मिक लक्ष्य से दुर्लभ मनुष्य जीवन को सार्थक करें: मुनि विवर्धनसागर

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कोटा। रिद्धि-सिद्धि नगर, कुन्हाड़ी स्थित अतिशयकारी चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में चातुर्मासिक प्रवास के दौरान रविवार को धर्मसभा आयोजित हुई। धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्रवर्तक मुनि विश्वनायक सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ है, लेकिन मनुष्य का अधिकांश जीवन संकल्प-विकल्प और सांसारिक उलझनों में ही बीत जाता है। इसका प्रमुख कारण जीवन में आध्यात्मिक लक्ष्य का अभाव है।

उन्होंने कहा कि दुर्लभ मनुष्य जीवन के साथ जैनधर्म, गुरु, जिनवाणी और स्वाध्याय का मिलना सौभाग्य की बात है। अब आवश्यकता इस बात की है कि व्यक्ति अपने जीवन का आध्यात्मिक लक्ष्य निर्धारित करे। संसार से एक दिन सभी को विदा होना है, इसलिए सद्गति और आत्मकल्याण की तैयारी इसी जीवन में करनी चाहिए।

वहीं गणधर मुनि विवर्धनसागर महाराज ने द्रव्यसंग्रह की गाथाओं के माध्यम से सिद्ध भगवान के स्वरूप और गुणों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सिद्ध भगवान शाश्वत सिद्ध अवस्था में विराजमान हैं। सिद्ध पर्याय प्राप्त करने के बाद जीव को किसी अन्य संसारी पर्याय को ग्रहण नहीं करना पड़ता।

इसके विपरीत सांसारिक अवस्था में जीव सुख-सुविधाओं और सांसारिक उपलब्धियों के बीच भी वास्तविक शांति प्राप्त नहीं कर पाता। पुत्र, परिवार, घर और धन-संपदा होने पर भी संसार में दुख और असंतोष बना रहता है।

धर्मसभा में सकल समाज महामंत्री पदम बडला, अध्यक्ष प्रकाश बज, जितेंद्र धनोपिया, पुष्प लुहाड़िया, जम्बू गोधा, पारस कासलीवाल, महेंद्र ठाई, आशीष साकुनिया, ऋषभ बाकलीवाल, लवेश जैन, आशीष ठोला सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु उपस्थित रहे।