कोटा। श्रीकृष्ण चैतन्य प्रेम भक्ति धाम, धरणीधर चौराहा स्थित श्री गौर राधा गोविन्द मंदिर, गणेश नगर में नंदोत्सव महामहोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। शनिवार को प्रातः 5.30 बजे मंगल आरती के साथ महोत्सव का शुभारंभ हुआ। इसके बाद भव्य हरिनाम संकीर्तन यात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालु भक्ति में झूमते-गाते नगर भ्रमण करते हुए भगवान श्रीकृष्ण के नाम का संकीर्तन करते रहे।
मीडिया प्रभारी रवि कुमार झंवर ने बताया कि पूरे दिन मंदिर परिसर हरिनाम संकीर्तन, भजनों की रसवर्षा और संतों के आध्यात्मिक संदेशों से गुंजायमान रहा। नारायण दास एवं ललित कृष्ण दास ने बताया संकीर्तन के दौरान पारंपरिक ब्रज बधाई गीतों ने वातावरण को और भक्तिमय बना दिया।
नगाड़ा जोर से बजाते, मैं तो नृत्य करन को आई”,‘नंद जू के आंगन में बाजत बधैया’, ‘नंद बाबा के घर आज भयो उजियारो’, ‘आज नंद के घर लाला भयो’ सहित लोकगीतों की धुन पर श्रद्धालु जमकर झूमे। भक्तों ने नृत्य-गायन के साथ भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की बधाइयां बांटीं।
सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक मंदिर परिसर में हरिनाम संकीर्तन, भजन-सत्संग, गुरु पूजन, ठाकुरजी की भोग आरती एवं दिव्य दर्शन का आयोजन हुआ। ठाकुरजी के फूल बंगला दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहे। मंदिर को रंग-बिरंगे गुब्बारों एवं आकर्षक सजावट से सजाया गया था। महोत्सव में सैकड़ों श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई।
आचार्य हरे कृष्ण दास ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि श्रीहरिनाम संकीर्तन केवल भक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि मनुष्य के अंतर्मन को निर्मल करने वाली आध्यात्मिक साधना है। भगवान श्रीकृष्ण के पावन नाम का सामूहिक संकीर्तन करने से मन में सकारात्मकता, शांति और भक्ति का भाव जागृत होता है। नंदोत्सव भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य की आनंदमयी स्मृति का पर्व है, जो हमें प्रेम, करुणा, समर्पण और सद्भाव का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि ब्रज की परंपरा में नंदोत्सव केवल उत्सव नहीं, बल्कि भगवान के प्रति वात्सल्य और प्रेम की अभिव्यक्ति है। जब श्रद्धालु मिलकर हरिनाम संकीर्तन और पारंपरिक ब्रज बधाई गीतों का गायन करते हैं, तो वातावरण भक्तिमय हो उठता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को अपने जीवन में उतारते हुए सेवा, सदाचार और प्रेम को अपनाएं।

