सोयाबीन समेत अधिकांश खरीफ फसलों के भाव मजबूत रहने का अनुमान

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नई दिल्ली। आगामी महीनों के दौरान अधिकांश खरीफ फसलों का थोक मंडी भाव मजबूत रह सकता है फिलहाल बाजरा, धान, मूंग, सोयाबीन एवं मूंगफली का दाम 2026-27 सीजन के लिए निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की तुलना में 0.6 प्रतिशत से लेकर 31 प्रतिशत तक नीचे चल रहा है।

आगामी समय में भी बाजरा एवं मूंग का मूल्य कुछ नीचे रह सकता है लेकिन अन्य जिंसों का दाम एमएसपी के आसपास या इससे कुछ ऊपर रहने की उम्मीद है।

कुछ खरीफ कालीन फसलों की कटाई-तैयारी एवं मंडियों में आवक आरंभ हो गई है। शीर्ष उत्पादक राज्यों के किसानों को इस बार अपने उत्पादों का ऊंचा एवं आकर्षक मूल्य हासिल होने की उम्मीद है। लेकिन मूंग एवं बाजरा की कीमतों में तेजी आने की संभावना कम है।

वर्तमान समय में अगले एमएसपी के मुकाबले मूंग का भाव 13 प्रतिशत एवं बाजरा का दाम 31 प्रतिशत पीछे चल रहा है। 1 अक्टूबर से सामान्य श्रेणी के गैर बासमती धान की सरकारी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य पर आरंभ हो जाएगी।

जिन 14 खरीफ फसलों के लिए एमएसपी का निर्धारण होता है उसमें से 9 जिंसों का भाव 4 सितम्बर को या तो एमएसपी के बराबर या उससे ऊपर चल रहा था। इसमें मक्का, ज्वार, अरहर (तुवर), उड़द एवं सोयाबीन भी शामिल था।

एगमार्कनेट के आंकड़ों से पता चलता है कि खरीफ सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न-धान का औसत थोक बाजार भाव उत्तर प्रदेश में 1965 रुपए प्रति क्विंटल या लेकिन सरकारी खरीद आरंभ होने पर इसके दाम में सुधार आ सकता है।

हालांकि अल नीनो एवं कमजोर मानसून के कारण खरीफ फसलों को कुछ नुकसान होने की आशंका व्यक्त की जा रही है लेकिन फिर भी कुछ जिंसों का औसत मंडी भाव अभी ऋणात्मक जोन में ही चल रहा है। लेकिन मक्का, ज्वार, तुवर और उड़द का औसत भाव घनात्मक जोन में है।

धान के दाम कोई विशेष समस्या नहीं है। सोयाबीन का दाम भी ऊंचा चल रहा है। मूंगफली की फसल गुजरात में अच्छी हालत में है जो इसका सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त है।

वहां नए माल की आवक शुरू होने पर उसकी सरकारी खरीद भी आरंभ हो सकती है। सोयाबीन, तुवर एवं उड़द का थोक मंडी भाव नीचे आया तो इसकी खरीद के लिए सरकारी एजेंसियां सक्रिय हो जाएंगी।