नितिन गडकरी का E100 पेट्रोल का सपना टूटा, बंद करने पड़े 394 पंप, जानिए क्यों

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नई दिल्ली। E20 पेट्रोल को लेकर देशभर में मची रार के बीच अब लोग E100 पेट्रोल खरीदने से बच रहे हैं। इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां ( OMCs ) फिलहाल बड़े पैमाने पर E85 (85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल) ईंधन स्टेशनों के विस्तार से बच रही हैं।

उद्योग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, कंपनियां E100 (100% इथेनॉल) के प्रयोग में नुकसान झेलने के बाद अब काफी सतर्क हो गई हैं। लगभग 400 E100 पायलट आउटलेट्स पर मांग शून्य के बराबर रहने के कारण, कंपनियां चाहती हैं कि सरकार के इथेनॉल ब्लेंडेड ईंधन को बढ़ावा देने के अभियान से पहले देश में फ्लेक्स-फ्यूल (Flex-Fuel) वाहनों की बिक्री बढ़े।

400 से घटकर 6 हुए पेट्रोल पंप
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हमने शुरुआत में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत करीब 400 पेट्रोल पंपों पर E100 ईंधन पेश किया था, लेकिन वहां इसकी मांग न के बराबर रही। इसके बाद हमें मजबूरी में इन आउटलेट्स को घटाकर महज 5 से 6 तक सीमित करना पड़ा क्योंकि कोई खरीदार ही नहीं था। यानी 390 से ज्यादा पेट्रोप पंप से इसकी बिक्री बंद करनी पड़ी। सरकार भले ही दबाव बना रही है, लेकिन हम देखना चाहते हैं कि आगे बाजार का रुख क्या रहता है।’

क्या है सबसे बड़ा कारण
E100 पूरी तरह से शुद्ध इथेनॉल ईंधन है, जबकि E85 में 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल होता है। इन दोनों ही ईंधनों को चलाने के लिए विशेष रूप से तैयार फ्लेक्स-फ्यूल इंजन की आवश्यकता होती है। बाजार में इन वाहनों की कमी के कारण इस ईंधन का विस्तार अटक गया है।

अधिकारी ने आगे कहा कि ऑटो कंपनियां अभी सिर्फ फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां लॉन्च कर रही हैं। मौजूदा माहौल को देखते हुए इनकी बिक्री इतनी ज्यादा नहीं होने वाली कि हर जगह नए डिस्पेंसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर (पंप मशीनें) लगाने का खर्च निकाला जा सके। जब तक गाड़ियां सड़कों पर नहीं दिखेंगी, तब तक और अधिक E85 पंप लगाना ‘घोड़े के आगे गाड़ी बांधने’ जैसा होगा।

कौन सी गाड़ी किस ईंधन के लिए?

  • सरकार अब E25 के रोल-आउट की गति भी धीमी कर सकती है। इसके पीछे मुख्य चिंता यह है कि ज्यादा इथेनॉल मौजूदा गाड़ियों के इंजनों को नुकसान पहुंचा सकता है।
  • साल 2012 से मार्च 2023 के बीच बनी गाड़ियां सिर्फ 10% इथेनॉल मिश्रण (E10) के लिए डिजाइन की गई थीं।
  • वहीं अप्रैल 2025 से पहले बने वाहन भी पूरी तरह E20 अनुकूल नहीं हैं।

इथेनॉल के इस्तेमाल से खर्च ज्यादा
तेल कंपनियों का मानना है कि E85 की बिक्री न होने की एक बड़ी वजह पेट्रोल और इसके बीच कम कीमतों का अंतर होना भी है। दिल्ली में जहां पेट्रोल करीब 102.12 रुपये प्रति लीटर है, वहीं E85 को 82.12 रुपये प्रति लीटर पर लॉन्च किया गया है।