भारत की अमेरिका से आयात पर प्रस्तावित एक्स्ट्रा 12.5% टैरिफ वापस लेने की अपील

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नई दिल्‍ली। भारत ने अमेरिका से अपील की है कि वह भारतीय आयात पर अतिरिक्त 12.5% टैरिफ लगाने के अपने प्रस्ताव को वापस ले ले। जबरन मजदूरी से जुड़े व्यापार तौर-तरीकों की ‘सेक्शन 301’ जांच के तहत इसे लगाने का प्रस्‍ताव है। भारत का कहना है कि इस कदम के समर्थन में पर्याप्त सबूत या कंट्री-स्‍पेसिफिक असेसमेंट नहीं है।

6 जुलाई को ‘यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव’ (USTR) के कार्यालय को सौंपी गई विस्तृत रिपोर्ट में भारत ने तर्क दिया कि जांच से यह साबित नहीं होता कि उसके कानून या नीतियां ‘सेक्शन 301’ के तहत ‘अनुचित’ व्यापार व्यवहार के दायरे में आती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने यह भी कहा कि वॉशिंगटन यह साबित करने में विफल रहा है कि भारत का रेगुलेटरी फ्रेमवर्क अमेरिकी उद्योग को कोई मापने योग्य नुकसान पहुंचाता है।

60 अर्थव्यवस्थाओं की जांच
यह घटनाक्रम तब हुआ जब USTR ने इस साल मार्च में दो अलग-अलग ‘सेक्शन 301’ जांच शुरू कीं। इनमें जबरन मजदूरी और औद्योगिक अतिरिक्त क्षमता से जुड़ी चिंताओं के आधार पर 60 अर्थव्यवस्थाओं की जांच की गई। जबरन मजदूरी की जांच के नतीजों के आधार पर अमेरिकी व्यापार निकाय ने जून में 54 अर्थव्यवस्थाओं से होने वाले आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा।

लग सकता है अतिरिक्त 12.5% टैरिफ
इस प्रस्ताव के तहत, भारत उन 48 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है जिन पर अतिरिक्त 12.5% टैरिफ लग सकता है। वहीं, कनाडा, यूरोपीय संघ (ईयू), इंडोनेशिया, मैक्सिको, इक्वाडोर और पाकिस्तान जैसे देशों पर 10% का कम टैरिफ लगेगा। यह प्रस्ताव अभी परामर्श के चरण में है। इसे लागू नहीं किया गया है।

भारत का यह है तर्क
भारत ने तर्क दिया कि USTR ने हर अर्थव्यवस्था के कानूनी ढांचे और लागू करने के तंत्र का अलग-अलग मूल्यांकन करने के बजाय एक व्यापक नजरिया अपनाया है। भारत का कहना है कि जांच के नतीजे यह पर्याप्त रूप से साबित नहीं करते कि भारत की मौजूदा नीतियां व्यापार को विकृत करती हैं या निर्यातकों को अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ देती हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘सामने रखे गए दावों, पहचानी गई कमियों और पर्याप्त आधार की कमी को देखते हुए भारत अमेरिका से अपील करता है कि वह भारत पर टैरिफ लगाने के प्रस्ताव पर दोबारा विचार करे। भारत किसी भी विशिष्ट चिंता पर परामर्श और बातचीत के जरिये USTR के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ने के लिए तैयार है।’

जांच में कोई सबूत नहीं
सरकार ने आगे तर्क दिया कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं दिया गया है जो भारत के निर्यात क्षेत्रों को जबरन मजदूरी से जोड़ता हो या यह साबित करता हो कि जबरदस्ती मजदूरी से बने सामानों के आयात पर रोक न होने से अमेरिकी व्यवसायों को नुकसान होता है।