Friday, June 26, 2026
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डिजिटल साक्षरता एवं डिजिटल पेमेंट भविष्य की जरूरत-ओम बिरला

कोटा । सांसद ओम बिरला ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिकी भुगतान और प्लास्टिक मनी का उपयोग न केवल सुरक्षित  है, बल्कि गोपनीयता, अनुकूलता, अच्छे लेन -देन और कम वित्तीय जोखिम के लिए सूचना- तकनीकी युग में आवश्यक है । डिजिटल साक्षरता एवं डिजिटल पेमेंट भविष्य की आवश्यकता है। देश की वर्तमान परिस्थितियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने डिजिटल भुगतान की अन्य उपयोगिताओं का भी उल्लेख किया।

वे बुधवार को डिजिटल पेमेन्ट एवं डिजिटल लिटरेसी पर राज्य स्तरीय सेमिनार को सम्बोधित कर रहे थे। कोटा के राजरानी टावर में राष्ट्रव्यापी अभियान डिजिटल भुगतान की पहल पर इस सेमिनार का आयोजन किया था। बिरला ने कहा कि इसके प्रयोग से कालाधान, भ्रष्टाचार, कर चोरी और आतंकवादी गतिविधियों पर रोक लगेगी।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार कम नकदी अर्थव्यवस्था के निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध है और वित्तीय समावेशन के दायरे के तहत और अधिक लोगों को लाने के लिए प्रतिबद्ध है और नकद-रहित गांव के लिए बेंचमार्क है जिसे हमने निर्धारित किया है। आने वाले समय में डिजिटल साक्षरता एवं भुगतान के प्रयोग से नवयुवक वर्ग एवं समाज  लाभांवित होगा। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के  डिजिधन अभियान के माध्यम से हर ग्रामीण नागरिक, छोटे व्यापारी और व्यापारी को डिजिटल भुगतान अपनाने के लिए सक्षम करना चाहता है।

रा.इ.सू.प्रौ.सं के महानिदेशक डॉ अश्विनी कुमार शर्मा ने  कहा कि मोबाइल पहुंच में वृद्धि के साथ, नागरिकों और व्यापारियों ने वित्तीय माध्यमों को चुनना शुरू किया है। मोबाइल वित्तीय लेनदेन के प्रकार पॉइंट ऑफ पर्चेस (पीओपी) और प्वाइंट ऑफ, क्सपटेंस (पीओए), लोगों को वित्तीय समावेशन के दायरे में खींचने के साथ साथ शहरी और ग्रामीण भारत के बीच डिजिटल अन्तर को भी कम कर रहे है।

उन्होने कहा कि भारत सरकार की जीएसटी योजना मे डिजिटल साक्षरता एवं भुगतान हेतू यह प्रशिक्षण शिविर व्यापारी वर्ग के लिए अतिमहत्वपूर्ण होगा। विधायक  संदीप शर्मा  ने कहा कि डिजिटल भुगतान एवं साक्षरता भारत सरकार की मुद्रा के लेन-देन में पारदर्शिता लाने हेतु अच्छी पहल है ।आर.जी.सी.एस.एम. स्कील्स के चैयरमेन डॉ. के.पी. सिंह ने कहा कि व्यापारियों के लिए यह प्रशिक्षण बहुत लाभकारी है।

 

रिलायंस कॉम्युनिकेशंस से कोई सैलरी नहीं लेंगे -अनिल अंबानी

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कोलकाता। रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी ने इस वित्तीय वर्ष में संकट में चल रही अपनी टेलिकॉम कंपनी रिलायंस कॉम्युनिकेशंस से कोई सैलरी या कमिशन न लेने का फैसला लिया है। रिलायंस कॉम्युनिकेशंस ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा, ‘यह फैसला कंपनी प्रमोटर्स की ओर से लिया गया है। कंपनी के स्ट्रेटेजिक ट्रॉन्सफॉर्मेशन के लिए यह फैसला लिया गया है।’ इसके अलावा आरकॉम की मैनेजमेंट टीम भी अपनी 21 दिन की सैलरी छोड़ेगी।

देश की चौथी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी ने कहा कि यह कदम दिसंबर, 2017 तक उठाए जाएंगे। रिलायंस कॉम्युनिकेशंस पर बकाया कर्ज को चुकाने के लिए बैंकों से 7 महीने का वक्त मिलने के बाद कंपनी ने रकम बचाने की यह कवायद शुरू की है। पहली बार सालाना नुकसान और स्टॉक की कीमतों में गिरावट के चलते रिलायंस कॉम्युनिकेशंस मुश्किल के दौर से गुजर रही है।

इसके अलावा रिलायंस कॉम्युनिकेशंस ने एक बार फिर यह दोहराया कि एयरसेल और ब्रूकफील्ड के विलय की प्रक्रिया 30 सितंबर तक पूरी हो जाएगी। कंपनी का कहना है कि इन डील्स के पूरा होने के बाद रिलायंस कॉम्युनिकेशंस का 60 पर्सेंट यानी करीब 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज समाप्त हो जाएगा।

किसानों को तीन लाख तक के ऋण पर ब्याज में छूट मिलेगी, मोदी सरकार का फैसला

मोदी सरकार के इस फैसले के तहत किसानों को कर्ज के ब्याज पर अब पहले के मुकाबले ज्यादा छूट मिलेगी

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने किसानों के हित में एक बड़ा फैसला लिया है जिसके तहत अब किसानों को कर्ज के ब्याज पर ज्यादा छूट मिलेगी। इसका फायदा उन किसानों को मिलेगा जो एक साल में कर्ज को चुकाएंगे।कैबिनेट की आज की बैठक में ब्याज की दर तीन फीसदी से बढ़ाकर पांच फीसदी कर दी गई है।

मोदी सरकार के इस फैसले के तहत किसानों को कर्ज के ब्याज पर अब पहले के मुकाबले ज्यादा छूट मिलेगी।किसानों को तीन लाख तक के ऋण पर ब्याज में यह छूट मिलेगी। ब्याज में छूट तीन फीसदी से बढ़ाकर पांच फीसदी किया गया है। इसका फायदा उन्हीं किसानों को मिलेगा जो एक साल में ऋण चुकता करेंगे। कैबिनेट के इस फैसले से केंद्र पर 19 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। 

इसके अलावा कैबिनेट की बैठक में युवा मामलों के सहयोग पर भारत और अर्मेनिया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दी गई। आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में सहयोग के लिए भारत और बांग्लादेश के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही कृषि के क्षेत्र में सहयोग के संबंध में भारत और फिलिस्तीन के बीच समझौता ज्ञापन को मंजूरी दी गई।

 

 

मानवता शर्मसार ! देख कर भी प्रशासन का दिल नहीं पसीजा

कोटा । शहर में प्रशासन ने मंगलवार को हाई कोर्ट के आदेश पर एरोड्रम सर्किल और साजी देहड़ा के पास के अतिक्रमण हटाए। इस दौरान खाने बना रही खाना बदोश परिवारों और महिलाओं तक को दौड़ाया। यह देखकर मानवता शर्मसार हो गई ! मगर उनके दिल नहीं पसीजे।  फोटो में देखा जा सकता है कि कितनी बेरहमी से उन्हें हटाया गया है।

प्रशासन को शहर के बड़े पूंजीपतियों के अतिक्रमण नहीं दिखते। गाज झुग्गी झोपडी वालों पर ही गिरती। कोटा की पॉश कॉलोनी महावीर नगर पारिजात स्कीम में जाकर भी देखें, जहाँ 80 फ़ीट की रोड 20 फ़ीट रह गई। क्योंकि वहां महापौर का वार्ड है। आयकर भवन के पास राजनीतिक संरक्षण से करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीन पर अवैध बस्तियां बसा दी गई।

शक्तिनगर जहाँ सांसद का बंगला है। पार्किंग के नाम पर खुद ही सरकारी जमीं पर कब्ज़ा जमा लिया।अतिक्रमण हटने चाहिए, किन्तु पहले उन नेताओं के, जो वोट बैंक के लिए कभी उड़िया बस्ती तो कभी दुर्गा बस्ती बसते हैं।

नीट 2017 result: OMR शीट जारी, ऐसे चेक करें कितने जवाब हैं सही

नई दिल्ली। सीबीएसई  ने बुधवार को राष्ट्रीय मेडिकल दाखिला परीक्षा (NEET) 2017 की ओएमआर शीट जारी कर दी है। आंसर की 15 जून को जारी की जाएंगी। आंसर की को 16 जून को चैलेंज किया जा सकता है। ओएमआर शीट सीबीएसई की वेबसाइट www.cbseneet.nic.in पर देखी जा सकती हैं।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई को नीट 2017 का रिजल्ट जारी करने की अनुमति सोमवार को दे दी थी। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा था कि सीबीएसई 26 जून से पहले  नीट 2017 का रिजल्ट जारी कर दे। इसके बाद बोर्ड ने नीट का रिजल्ट जारी करने से पहले नीट-2017 की ओएमआर शीट जारी कर दी है। 

ऐसे करें NEET Result 2017 की ओएमआर शीट चेक
– ओएमआर शीट देखने के लिए सबसे पहले स्टूडेंट्स को नीट की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड के डालें। इसके बाद नीट 2017 ओएमआर शीट पर क्लिक करें। सब्मिट करने के बाद ओएमआर शीट दिख जाएगी।

आपको बता दें कि राष्ट्रीय मेडिकल दाखिला परीक्षा (NEET) 2017 के नतीजे पर मद्रास हाई कोर्ट ने रोक लगा कर रखी थी जिसकी सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा था कि सीबीएसई 26 जून से पहले  नीट 2017 का रिजल्ट जारी कर दे।

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सेबी से कमोडिटी एक्सचेंजों को मिली ऑप्शंस ट्रेडिंग की इजाजत

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नई दिल्ली। मार्केट रेगुलेटर सेबी ने कमोडिटीज मार्केट का दायरा बढ़ाने के लिए कमोडिटीज में ऑप्शन ट्रेडिंग की इजाजत दे दी है। हालांकि हर कमोडिटी एक्सचेंज शुरुआत में सिर्फ एक प्रॉडक्ट के लिए ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स ला पाएगा। सेबी ने ऑप्शन ट्रेडिंग की इजाजत देने के साथ ही रिस्क मैनेजमेंट के ठोस उपाय करने के लिए कहा है।

सेबी ने ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स जारी करने के लिए बड़ी सख्त अर्हताएं रखी हैं। उसने कहा है कि ऑप्शंस सिर्फ उन्हीं कमोडिटीज के फ्यूचर्स पर जारी की जा सकेंगी जो पिछले 12 महीने के टोटल ट्रेडिंग टर्नओवर के लिहाज से टॉप 5 में होंगी। इसके अलावा ऐसी कमोडिटीज का फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स का एवरेज डेली टर्नओवर पिछले एक साल में कम से कम 200 करोड़ रुपये (एग्री और एग्री प्रोसेस्ड कमोडिटीज) होना जरूरी होगा।

दूसरी कमोडिटीज के लिए इसकी मिनिमम लिमिट 1000 करोड़ रुपये लगाई गई है। मार्केट रेगुलेटर की तरफ से जारी सर्कुलर के मुताबिक, ‘जो कमोडिटी डेरिवेटिव्स एक्सचेंज ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स में ट्रेडिंग करना चाहते हैं उनको ऐसे कॉन्ट्रैक्ट्स लॉन्च करने से पहले सेबी की इजाजत लेनी होगी।’ एक्सचेंज लंबे समय से कमोडिटीज पर ऑप्शंस ट्रेडिंग की इजाजत देने की मांग करते रहे हैं।

सेबी पिछले साल ऑप्शंस ट्रेडिंग को इजाजत देने को राजी हुआ था लेकिन कुछ कानूनी जरूरतें पूरी करने में देर लगने से इसका एलान होने में देरी हुई।मार्केट रेगुलेटर सेबी ने गहन विचार विमर्श के बाद फैसला किया कि वह सीधे कमोडिटी के बजाय उसके फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट पर ऑप्शंस ट्रेडिंग की इजाजत देगा।

अब तक कमोडिटी एक्सचेंजों को सिर्फ फ्यूचर्स ट्रेडिंग की इजाजत मिली हुई थी। सेबी ने कमोडिटीज फ्यूचर्स के ऊपर जारी होने वाले ऑप्शंस में ट्रेडिंग के लिए प्रॉडक्ट डिजाइन और रिस्क मैनेजमेंट फ्रेमवर्क के सिलसिले में जरूरी गाइडलाइंस भी बनाए हैं। उसने कमोडिटी फ्यूचर्स पर जारी होने वाले ऑप्शंस के सेटलमेंट मेथड, पोजिशन लिमिट और ट्रेडिंग आवर्स संबंधी गाइडलाइंस भी जारी किए हैं।

अब ऑनलाइन टिकट बुकिंग होगी और आसान, मिलेगा कैशबैक भी

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नई दिल्ली । रेल यात्रियों की सहूलियतों को ध्यान में रखते हुए कई स्तर पर प्रयास हो रहे हैं। रेल यात्री अब अपने टिकट का भुगतान और आसानी से कर पाएंगे। यात्रियों के लिए नई सुविधा मुहैया कराते हुए IRCTC ने भुगतान के लिए एमवीसा पेमेंट भुगतान पद्धति (mVisa Payment Solution) को पेमेंट गेटवे से जोड़ा है। इसकी मदद से यात्री अपनी टिकट का भुगतान QR कोड़ स्कैन करके आसानी से अपने स्मार्टफोन से कर पाएंगे। साथ ही इस तरह भुगतान करने पर यात्रियों को कैशबैक ऑफर भी दिया जाएगा।

कैसे करेंगे इस्तेमाल
सबसे पहले अपने स्मार्टफोन में एमवीसा एप्लीकेशन को इंस्टॉल कीजिए। इसके बाद यूजर्स अपने वीजा डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या प्रीपेड अकाउंट को एमवीजा एप्लीकेशन के साथ जोड़ सकते हैं। इसके बाद इंडियन रेलवे केटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन की वेबसाइट पर अपने एमवीजा (mVisa) क्यूआर कोड को आसानी से स्कैन करके टिकट का भुगतान कर सकते हैं।

आईआरसीटीसी, जो कि इंडियन रेलवे की सहायक कंपनी है 4 सितंबर तक एक प्रमोशनल ऑफर की पेशकश कर रही है जिसमें एमवीजा स्कैन और आईआरसीटीसी वेबसाइट पर भुगतान के माध्यम से बुक कराई गईं रेल टिकटों पर 50 रुपए का कैशबैक दिया जाएगा। आईआरसीटीसी के सीएमडी एके मोनाचा ने बताया कि नई तकनीक हमारे प्लेटफॉर्म पर लोगों को आकर्षित करने में मददगार है।

भारत मौजूदा समय में दुनिया के अहम स्मार्टफोन बाजारों में से एक है। इसके साथ ही अगले पांच सालों के भीतर देश में एक बिलियन स्मार्टफोन की बिक्री का अनुमान है। मोनाचा ने कहा कि भारत में स्मार्टफोन को लेकर तेज होते रूझान को देखते हुए हम मोबाइल आधारित पेमेंट साल्यूशन की तरफ बढ़ रहे हैं जैसे कि एमवीजा जो कि आईआरसीटीसी की स्वाभाविक पसंद थी। 

जेईई एडवांस क्वालीफाई करने में राजस्थान दूसरे स्थान पर, यूपी नंबर वन

कोटा। राजस्थान के स्टूडेंट्स जेईई एडवांस में क्वालीफाई करने के मामले में देश में दूसरे स्थान पर गए हैं। इससे पहले जेईई मेन्स में राजस्थान तीसरे स्थान पर था। संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश ही हमसे आगे है, लेकिन प्रतिशत के लिहाज से राजस्थान ने उत्तर प्रदेश को पीछे छोड़ दिया।

यूपी के 22430 स्टूडेंट्स ने आवेदन किया था और उसमें से 7210 छात्रों ने आईआईटी काउंसलिंग के लिए क्वालीफाई किया। वहीं, राजस्थान से 17898 में से 6173 ने क्वालीफाई किया। उप्र के 32 और राजस्थान के 34 प्रतिशत स्टूडेंट्स सफल हुए। कुल छात्रों के लिहाज से राजस्थान का कुल क्वालीफाई प्रतिशत 12 है।

आईआईटी मद्रास ने स्टेटवाइज क्वालीफाई करने वाले छात्रों के आंकड़े जारी किए हैं। हालांकि यूपी के बड़ी संख्या में छात्र कोटा में कोचिंग करते हैं, लेकिन फॉर्म भरते समय वह अपना स्टेट यूपी भरते हैं। यूपी और राजस्थान के बाद आंधप्रदेश और तेलंगाना का नंबर आता है। साल 2015 में आईआईटी में सीट हासिल करने के मामले में राजस्थान ने यूपी सहित तेलंगाना और आंध्रप्रदेश को भी पीछे छोड़ दिया था।
उपलब्धि 6173 स्टूडेंट्स को आई काउंसलिंग कॉल, मेन्स में तीसरे स्थान पर रहे थे राज्य के 

यह हैं टॉप टेन स्टेट 

  • यूपी  224307210
  • राजस्थान 178986173
  • महाराष्ट्र 161734929
  • आंध्रप्रदेश  128973765
  • तेलंगाना 124943740
  • बिहार 118763378
  • मध्यप्रदेश  96383228
  • दिल्ली  87812340
  • पश्चिमबंगाल   60552114
  • हरियाणा56161944 

 

पेट्रोल-डीजल की दरें रोज बदलने के विरोध में 16 को बंद रहेंगे पंप

 संभाग के 180 पंपों पर रोज रेट बदलने में आएगी परेशानी, 75 फीसदी पंपों पर पुरानी मशीनें 

कोटा। सरकार देशभर में 16 जून से पेट्रोल और डीजल की कीमतें रोज बदलेंगी। यह रोज रात 12 बजे बदली जाएंगी। वहीं, पंप संचालकों का कहना है कि संभाग में 75 फीसदी पंपों पर पुरानी मशीनें लगी हुई हैं, जिन पर तुरंत दर चेंज नहीं हो पाएगी। इसके विरोध में देशभर में पंप संचालक 16 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दे चुके हैं।

 कंपनी, डीलर्स और पेट्रोलियम मंत्री के बीच मीटिंग 
कोटा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष तरुमीत सिंह बेदी ने बताया कि कोटा संभाग में 300 से ज्यादा पेट्रोल पंप हैं और इनमें से 180 पंपों पर पुरानी मशीनें हैं। ग्रामीण क्षेत्र में तो सभी जगह पुरानी मशीनें लगी हैं। रोज रात को 12 बजे रेट चेंज होगी तो इन पंपों पर रेट बदलने में काफी वक्त लगेगा। एक दिन की बात हो तो काम चलाया जा सकता है, लेकिन रोज करना संभव नहीं हो पाएगा।

कंपनी के भी एक-एक पंप हैं, ऐसे में सभी पंपों पर रेट चेंज करने की व्यवस्था कैसे होगी। इसके विरोध में फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर्स के आह्वान पर 16 जून से सभी पंप तो पेट्रोल-डीजल उठाएंगे ही बेचेंगे। जब तक व्यवस्था नहीं हो जाए तब तक सरकार को ऐसे निर्णय नहीं करने चाहिए। सरकार ऐसी व्यवस्था करे कि सभी पंपों पर रात को 12 बजे खुद रेट चेंज हो जाए।

 

लहसुन 7.84 लाख मीट्रिक टन हुआ, सरकार खरीदेगी सिर्फ 1.27%

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 स्कीम सिर्फ बेवकूफ बनाने के लिए ,कम भाव सुनकर किसान की मौत हुई थी, उसके घर में भरा है लहसुन -किसान नेता

कोटा। बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत सरकारी खरीद के बाद भी लहसुन किसानों को राहत नहीं मिलेगी। सरकार केवल 10 हजार मीट्रिक टन लहसुन खरीदेगी, जबकि हाड़ौती में 7.84 लाख मीट्रिक टन लहसुन की पैदावार हुई है।

केवल बारां जिले में ही 2.50 लाख मीट्रिक टन लहसुन का उत्पादन हुआ है। यानी सरकार सिर्फ 1.27 फीसदी हिस्सा ही खरीदेगी। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार की ये कोशिश नाकाफी है। इससे लहसुन किसानों में फसल बेचने के लिए मारामारी मचेगी। यह किसानों को बेवकूफ बनाने वाली स्कीम है। वहीं, सरकार के आदेश के बावजूद मंगलवार को किसी भी सेंटर पर लहसुन की खरीद नहीं हुई।

हाड़ौती किसान यूनियन के महामंत्री दशरथ कुमार ने बताया कि जितना खरीदने का लक्ष्य है उतना तो हाड़ौती की मंडियों में डेढ़ दिन में बिक जाता है। सरकार सारा लहसुन खरीदने की गारंटी ले और 5000 रुपए क्विंटल का भाव फिक्स करे। कम से कम 150 दिन लहसुन खरीदना चाहिए। किसान नेता चौथमल नागर ने कहा कि जो लहसुन सरकार खरीदने जा रही है वह 1 से 2 दिन में खरीदा जा सकता है।

रात को मिले आदेश

रात साढ़े 8 बजे राजफैड को आदेश मिले। इसके तहत 12 जुलाई तक 20 एमएम साइज से ज्यादा के लहसुन खरीदने के आदेश हैं। राजफैड के एरिया मैनेजर विष्णु दत्त शर्मा के अनुसार अभी दो से तीन दिन तो ट्रांसपोर्टेशन बारदाने की व्यवस्था करने में लगेंगे। क्षेत्र में स्टोरेज की व्यवस्था नहीं होने से लहसुन को तत्काल दिल्ली, चंडीगढ़ या साउथ की मंडियों में भेजना पड़ेगा। इसलिए कोटा को छोड़कर बाकी केंद्रों पर अगले दो दिनों तक खरीद होना मुश्किल है।

खरीदा जाएगा 20 एमएम साइज के ऊपर का लहसुन :

राजफैडके एरिया मैनेजर के अनुसार  20 एमएम साइज के ऊपर का लहसुन खरीदा जाएगा । 18 फीसदी लहसुन 20 से 30 एमएम का है। इसका भाव मंडियों में 900 से 1200 रुपए क्विंटल है। 70 फीसदी लहसुन 30 से 35 एमएम का है जो 1800 से 3000 से बिक रहा है। वर्ष 2012 में लहसुन का भाव 1000 क्विंटल से भी कम था। 

लहसुन पर सियासत

 भामाशाह मंडी में 10 दिन पहले लहसुन की कीमत घटने की खबर सुनकर सदमे से दम तोड़ने वाले किसान सत्यनारायण मीणा के घर रोण में हर दिन 25-30 नेता शोक जताने आते हैं। दिलासा देते हैं, दुख जताते हैं, सरकार से बात करने का भरोसा भी देते हैं। सत्यनारायण की मौत का सबब बनने वाला लहसुन घर में भरा पड़ा है, दाम बढ़ने के इंतजार में। बड़ौदा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक से भी 25 हजार का कर्ज ले रखा था। मंडी में लहसुन के भाव 21 रुपए किलो सुनकर उसकी जान चली गई। 800 किसान परिवार वाले रोण गांव में 80 फीसदी किसानों पर कर्ज है।