Monday, June 29, 2026
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अब टोल प्लाजा पर बिना रुके निकलेंगे वाहन, फास्टैग लेन चालू

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फास्टैग लगे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और वे तेजी से बिना किसी रुकावट आगे जा सकेंगे।

नई दिल्ली। देशभर में राष्ट्रीय राजमार्गों के सभी टोल प्लाजा पर शुक्रवार से से फास्टैग लेन चालू कर दी गई है। इससे इन टोल प्लाजा पर वाहनों को रुकने की जरूरत नहीं होगी और वे तेजी से निकल सकेंगे।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बयान में कहा कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने इलेक्ट्रानिक टोल संग्रहण में पहली उपलब्धि हासिल की है।

आज से सभी टोल प्लाजा पर एक प्रतिबद्ध फास्टैग लेन चालू कर दी गई है। फास्टैग लगे वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी और वे तेजी से बिना किसी रुकावट आगे जा सकेंगे।

फास्टैग आरएफआईडी टैग है, जो बैंकों और साझा सेवा केंद्रों के जरिए ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों तरीके से उपलब्ध हैं। बयान में कहा गया है कि हजारों की संख्या में लोगों ने दो सप्ताह से भी कम समय में इस ऐप को डाउनलोड किया है और फास्टैग खरीदा है।

31 अगस्त, 2017 तक फास्टैग की पहुंच बढ़कर 18 प्रतिशत हो गई है। सरकार ने 1 अक्टूबर, 2017 से बेचे जाने वाले सभी वाहनों पर फास्टैग को अनिवार्य कर दिया है।

20 लाख तक टर्नओवर वाले भी GST दायरे में हों 

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ज्ञान संगम में पीएम नरेंद्र मोदी ने दी हिदायत, अभी सालाना 20 लाख रुपए तक टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है।  

नई दिल्ली| प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सालाना 20 लाख रुपए से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों को भी जीएसटी के दायरे में लाने की बात कही है।

शुक्रवार को दूसरे ‘राजस्व ज्ञान संगम’ का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा, ‘सभी ट्रेडर्स को जीएसटी का पूरा लाभ मिले, इसके लिए हमें छोटे कारोबारियों को भी जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराने की कोशिश करनी चाहिए। उन्हें भी जिनका टर्नओवर 20 लाख रुपए से कम है।’

दो दिवसीय ‘संगम’ में सीबीडीटी और सीबीईसी के वरिष्ठ अधिकारी भाग ले रहे हैं। दो माह में 17 लाख नए ट्रेडर जीएसटी में रजिस्टर्ड हुए हैं। अभी सालाना 20 लाख रुपए तक टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं है। उन्हें जीएसटी नहीं चुकाना पड़ता। हालांकि दूसरे राज्यों में सप्लाई करने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी है।

मोदी की राजस्व अधिकारियों को सलाह

  • टैक्स अधिकारी ‘वर्क कल्चर’ बदलें, 2022 तक व्यवस्था दुरुस्त करने का लक्ष्य तय करें।
  • डाटा एनालिटिक्स टूल का इस्तेमाल करके टैक्स अफसर अघोषित आय का पता लगाएं।
  • टैक्स अफसरों-करदाताओं का आमना-सामना कम हो। ई-असेसमेंट को बढ़ावा दिया जाए।
  • लोगों का डर खत्म करने के लिए टैक्स अफसर करदाताओं के साथ दोस्ताना रवैया अपनाएं।

ब्लू व्हेल गेम सर्च करने में कोटा पहले स्थान पर

50 दिन तक यह गेम मानसिक रूप से खिलाड़ियों को उत्तेजित करता है और अलग अलग तरह के टास्क देता रहता है, आखिर में आत्महत्या के लिए उकसाता है।

कोटा। ब्लू व्हेल गेम सर्च करने में राजस्थान में कोटा अव्वल है, जयपुर दूसरे नंबर पर आता है। यह जानकारी गूगल से मिली रेटिंग के आधार पर सामने आई है। ऐसा गेम जो अपने अंतिम टास्क में खिलाड़ी को आत्महत्या के लिए प्रेरित करता है।

देश के कई राज्यों में इससे बच्चों की मौत तक हो चुकी है। केंद्र सरकार इस गेम पर प्रतिबंध लगा चुकी है। गूगल ट्रेंड पर नजर डाली जाए तो पिछले तीस दिनों में इस गेम की प्रति दिलचस्पी कोटा में भी बढ़ चुकी है।

हैरानी की बात यह है कि जनसंख्या और क्षेत्रफल के लिहाज से कई गुना बड़ा जयपुर भी कोटा से पीछे है। कोटा को गूगल ट्रेंड्स ने 100 और जयपुर के 80 अंक देकर रेटिंग की है। इसके बाद जोधपुर और भांकरोटा के नाम शामिल हैं।

50 दिन तक यह गेम मानसिक रूप से खिलाड़ियों को उत्तेजित करता है और अलग अलग तरह के टास्क देता रहता है, आखिर में आत्महत्या के लिए उकसाया जाता है। जोधपुर भी कोटा से बड़ा शहर है और यहां पर टीन एजर्स की संख्या काफी है।

गूगल ट्रेंड के आधार पर मिली यह जानकारी
इस ट्रेंड्स के बाद साफ है कि कोटा के बच्चे इस खतरनाक और माइंड वॉश कर देने वाले खेल में काफी रुचि ले रहे हैं। देश भर के बच्चे यहां पर आते हैं। ऐसे में एडमिनिस्ट्रेशन और काउंसलर्स की जिम्मेदारी है कि इसकी मॉनिटरिंग की जाए।

कोटा में स्टूडेंट्स की संख्या काफी अधिक है। 1.25 लाख बच्चे तो कोचिंग के ही हैं। इसके अलावा स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में भी बच्चे हैं। टीन एजर्स का रुझान इस गेम की ओर अधिक है।

पैरेंट्स भी निभाएं जिम्मेदारी: पैरेंट्सइस गेम को बच्चों को डाउनलोड नहीं करने दें। अगर गेम डाउनलोड कर लिया है तो उसको अनइंस्टॉल करवाकर बच्चे की एक्टिविटी पर नजर रखें। बच्चा इस गेम के बारे में दोस्तों से बात कर रहा है तो उन्हें समझाएं।

एक करोड़ से ऊपर की प्रॉपर्टी खरीदने वालों पर आयकर का शिकंजा

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इस साल 1 करोड़ रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी खरीदी है और साथ में रिटर्न भी फाइल नहीं किया है, डिपार्टमेंट को ऐसे 14 हजार से अधिक ट्रांजेक्शन के बारे में पता चला है।

नई दिल्ली। काले धन पर शिकंजा कसने के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने अब उन लोगों पर अपनी नजरें टेढ़ी कर दी हैं, जिन्होंने इस साल 1 करोड़ रुपये से अधिक की प्रॉपर्टी खरीदी है और साथ में रिटर्न भी फाइल नहीं किया है। डिपार्टमेंट को ऐसे 14 हजार से अधिक ट्रांजेक्शन के बारे में पता चला है। 

इस अभियान में इसके अलावा ऐसे कई व्यक्तियों और क्लस्टर के बारे में पता चला है, जिन्होंने संदिग्ध ट्रांजेक्शन किए हैं। अभी इनके बारे में जांच चल रही है। 

नोटबंदी के बाद से बढ़ गया है काले धन पर शिकंजा
नोटबंदी के बाद से काले धन पर आईटी डिपार्टमेंट ने शिकंजा काफी बढ़ा दिया है। ऑपरेशन क्लीन मनी के तहत इनकम टैक्स डिपार्टमेंट काफी सारे ऐसे लोगों का पता लगा चुका है, जिन्होंने बड़े ट्रांजेक्शन के बारे में जानकारी नहीं दी है। 

जेटली ने किया था इशारा
वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि नोटबंदी और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से नकद लेन-देन करना मुश्किल होगा। इससे कर अनुपालन बेहतर होगा और कर का दायरा बढ़ेगा।

जेटली ने 23 जुलाई को कहा था कि सरकार विदेश में काला धन रखने और देश के अंदर काला धन में धंधा करने वालों तथा मुखौटा कंपनियों पर लगाम लगाने के लिए कानून लेकर आई है।

दिल्ली इकोनॉमिक कॉनक्लेव में वित्त मंत्री ने कहा कि देश ने कर अनुपालन नहीं होने के ढेरों मामलों और बड़े पैमाने पर सिस्टम के बाहर होने वाले लेन-देन जैसे भारतीय चलनों का समाधान ढूंढ़ लिया है। उन्होंने कहा, ‘इस स्थिति से निपटने में करीब करीब बेबसी सी नजर आती रही है।

हर साल वित्त विधेयक के जरिये हम कुछ बदलावों की घोषणा करते थे जिसका बहुत ही आंशिक असर होता था। मैं समझता हूं कि इन आंशिक बदलावों का स्थायी असर कोई बहुत बड़ा नहीं था।’ उन्होंने कहा, ‘इसलिए, एक बड़ा बदलाव लाने के लिए कई कदम उठाए जाने थे।

संपूर्णता में देखने पर (हम पाते हैं कि इस) सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का दीर्घकालिक प्रभाव होगा तथा इसके पीछे व्यापक नैतिक औचित्य होगा।’

वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि सरकार इलेक्शन बॉन्ड के मैकेनिज्म को लेकर सक्रियता से काम कर रही है। सरकार ने राजनीतिक दलों को चंदा देने की पूरी प्रक्रिया को साफ सुथरा बनाने के लिए बजट में ‘इलेक्शन बॉन्ड’ की घोषणा की थी। 

जेटली ने कहा कि अभी तक कोई भी राजनीतिक दल इस बारे में सुझाव देने के लिये आगे नहीं आया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राजनीतिक चंदा देने के मामले में पारदर्शिता लाने के ध्येय से इस साल के बजट में राजनीतिक दलों को नकद राशि के रूप में चंदा देने की सीमा 2,000 रुपये तय कर दी थी। साथ ही बड़ी राशि का चंदा देने के लिए चुनाव बॉन्ड शुरू करने की घोषणा की थी।

बस और ट्रेन का टिकट खरीदने के लिए डिजिटल पेमेंट जरूरी

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नई दिल्ली। 2 अक्टूबर से बस, रेलवे का टिकट खरीदने, हाउस टैक्स का पेमेंट आदि करने के लिए आपको नगद पैसा रखने की जरुरत नहीं पड़ेगी। इसके लिए आपको डिजिटल तरीके से पेमेंट करना होगा।

इतना ही नहीं केंद्र सरकार अपने सभी विभाग और उन एजेंसियों को भी डिजिटल पेमेंट लेना जरूरी कर सकती है, जिनका आम जनता से सीधे ताल्लुक रहता है। 

भीम ऐप, भारत क्यूआर कोड का होगा इस्तेमाल
 डिजिटल पेमेंट सरल करने के लिए भीम ऐप और भारत क्यूआर कोड की मदद ली जाएगी। इसके साथ ही सरकार डिजिटल पेमेंट करने वालों को इंसेंटिव देने पर भी विचार कर रही है। यह कैंपेन 2 अक्टूबर से शुरू होकर के 26 जनवरी तक चलेगा। 

रेलवे जल्द शुरू करेगा डिजिटल तरीके से टिकट पेमेंट लेना
प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी ने कहा कि सरकारी एजेंसियों को होने वाले पेमेंट का प्रतिशत बहुत ज्यादा है और अगर इनको डिजिटल तरीके से किया गया तो फिर इलेक्ट्रोनिक पेमेंट करने में काफी ग्रोथ दिख सकती है।

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मंत्रालय जल्द ही देश के सभी 14 लाख रिजर्वेशन काउंटर पर भारत क्यूआर कोड को लगाने जा रहा है। हमने टारगेट किया है कि आधे से ज्यादा टिकट काउंटर पर होने वाले ट्रांजेक्शन डिजिटल हो सकें।

रेलवे हर साल करीब 52 हजार करोड़ रुपये का टिकट बेचता है और इसमें से 60 फीसदी ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल के जरिए बेचे जाते हैं। बाकी 40 फीसदी कैश में रिजर्वेशन काउंटर के जरिए बिकते हैं। 

जीएसटी की 4 दरों में से एक दर हो सकती है कम

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नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) काउंसिल मौजूदा दो जीसटी दरों 12 और 18 फीसद की जगह एक जीएसटी दर बनाने पर विचार कर सकती हैं। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को यह जानकारी दी है।

वस्तु एवं सेवा कर कानून पूरे देश में 1 जुलाई को लागू कर दिया गया था। द इकोनोमिस्ट की ओर से आयोजित भारत शिखर सम्मेलन में बोलते हुए जेटली ने कहा, “मैं ऐसी स्थिति को देखता हूं जहां टैक्स कंप्लाइंस अधिक है और ट्रांजिशन स्मूथ (सहज) है।

जीएसटी काउंसल जो कि इस समय चुनौतियों के प्रति संवेदनशील है मुद्रास्फीति के प्रभाव को ध्यान में रखते हुए उपयुक्त निर्णय (कर स्लैब पर) ले सकती है।” मौजूदा समय में जीएसटी के अंतर्गत 1,200 उत्पाद में से 7 फीसद एग्जेंप्ट लिस्ट में जबकि 14 फीसद लोअर टैक्स ब्रैकेट (5 फीसद) पर सीमत हैं।

इसके अलावा 17 फीसद उत्पाद 12 फीसद के टैक्स ब्रैकेट में हैं और 43 फीसद 18 फीसद के टैक्स ब्रैकेट में। इनमें से सिर्फ 19 फीसद उत्पादों को ही टॉप टैक्स ब्रैकेट यानी 28 फीसद के स्लैब में रखा गया है।

जीएसटी काउंसिल की 21वीं बैठक हैदराबाद में 9 सितंबर को, कानून लागू होने के बाद हैदराबाद में होगी। यह काउंसिल की 21वीं बैठक होगी। यह जानकारी तेलंगाना सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है। देश में जीएसटी लागू होने के बाद यह काउंसिल की तीसरी बैठक होगी, जिसका गठन बीते साल सितंबर में किया गया था।

गौरतलब है कि बीती 1 जुलाई 2017 को ही देशभर में वस्तु एवं सेवा कर कानून जीएसटी लागू कर दिया गया था।अधिकारी ने बताया, “यह बैठक हैदराबाद में होगी। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली इस बैठक की अध्यक्षता करेंगे।

इस बैठक में किन मुद्दों पर बात होगी इस पर जल्द फैसला किया जाएगा। हमारी (तेलंगाना) सरकार बीडी उद्योग और ग्रेनाइट के लिए रियायत जैसे अन्य विषयों के अलावा सरकारी परियोजनाओं के लिए कर छूट का मुद्दा उठाने जा रही है।”

कीमतों पर अंकुश के लिए मिस्र से 2,400 टन प्याज आयात

नयी दिल्ली। प्याज कीमत में तेजी को लेकर चिंतित सरकार ने आज कहा कि इसकी घरेलू आपूर्ति बढ़ाने के लिए निजी व्यापारियों द्वारा मिस्र से 2,400 टन प्याज का आयात किया गया है। सरकार ने संकेत दिया है कि यदि कीमतें अधिक बढ़ती हैं तो और भी आयात की व्यवस्था की जा सकती है।

उपभोक्ता मामलों का मंत्रालय प्याज कीमतों की करीब से निगरानी कर रहा है। जो गुणवत्ता के आधार पर अधिकांश खुदरा बाजारों में प्याज 40 से 50 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रहा है।

व्यापारियों के साथ समीक्षा बैठक के बाद मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, मिस्र से आयात हो रहा है। निजी व्यापारियों ने पहले ही 2,400 टन के लिए आर्डर किया हुआ है। इसके खेप मुंबई बंदरगाह पर उतर रही है।

उन्होंने कहा कि प्याज के आयात की 9,000 टन की एक और खेप के जल्द आने की उम्मीद है। अगर प्याज की कीमतों में असामान्य ढंग से आगे और वृद्धि होती है तो निजी व्यापारियों को पड़ोसी देशों से और आयात को तैयार रहने को कहा गया है।

अवधिपार ऋण चुकाने वाले किसानों का 50 % ब्याज माफ

सरकार ने 31 मार्च, 2018 तक ऋण का चुकारा करने पर 50 प्रतिशत तक ब्याज माफ किया है

जयपुर। सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक ने शुक्रवार को बताया कि प्रदेश के जिन किसानों का ऋण अवधिपार हो चुका है, ऎसे किसानों को सरकार ने राहत प्रदान करते हुए 31 मार्च, 2018 तक ऋण का चुकारा करने पर 50 प्रतिशत तक ब्याज माफ किया है।

किलक ने बताया कि मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे किसानों के प्रति संवेदनशील है और मुख्यमंत्री ने 15 अगस्त, 2017 को किसानों को राहत देने के लिए सहकारी भूमि विकास बैंकों के अवधिपार ऋणियों का 50 प्रतिशत तक ब्याज माफ करने की घोषणा की थी।

उन्होंने बताया कि ज्यादा से ज्यादा किसानों को फायदा मिले इसके लिए एक जुलाई से जिन किसानों ने ऋण का चुकारा कर दिया है उनकों भी योजना का लाभ मिलेगा।

सहकारिता मंत्री ने बताया कि यह योजना प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों के सभी प्रकार के कृषि एवं अकृषि ऋणों पर लागू होगी, जो एक जुलाई, 2017 को अवधिपार हो चुके हैं।

मुख्यमंत्री राजे ने किसानों को ऋण का चुकारा करने में हो रही परेशानियों के मद्देनजर राहत देने की घोषणा की थी।किलक ने बताया कि इस योजना में ऋणी किसानों का दण्डनीय ब्याज एवं वसूली खर्च की राशि को 100 प्रतिशत माफ किया गया है।

सहकारिता मंत्री ने बताया कि ऎसे अवधिपार ऋणी किसान जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उनके परिवार को किसान की मृत्यु तिथि से सम्पूर्ण बकाया ब्याज, दण्डनीय ब्याज एवं वसूली खर्च को पूर्णतया माफ कर राहत दी गई है। उन्होंने प्रदेश के किसानों का आह्वान किया है कि योजना की तय अवधि में ऋण जमा कराकर छूट का फायदा उठाएं।

एसएलडीबी के प्रबंध निदेशक विजय शर्मा ने बताया कि इस योजना का फायदा 36 प्राथमिक भूमि विकास बैंकों एवं उनकी 133 शाखाओं के माध्यम से ऋण लेने वाले किसानाें को मिलेगा।

उन्होंने बताया कि एक अप्रेल, 2014 के पश्चात् वितरित किए गए दीर्घकालीन कृषि ऋणों के अवधिपार ऋणियों को योजना में शामिल नहीं किया गया है क्योंकि उन्हें ऋणों का समय पर चुकारा करने पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान मिल रहा है।

वैश्विक संकेतों से सोने में सुधार, चांदी 41,000 पार

वैश्विक बाजार में सोने के भाव 10 माह के उच्च स्तर पर चले जाने का असर सोने -चांदी की कीमतों पर पड़ा

नयी दिल्ली। विदेशी बाजारों में सोने का भाव 10 माह के उच्च स्तर पर चले जाने और स्थानीय आभूषण विक्रेताओं की ओर से लिवाली बढ़ने के चलते राष्ट्रीय राजधानी के सर्राफा बाजार में आज सोना 150 रुपये सुधरकर 30,200 रुपये प्रति दस ग्राम पर हो गया।

औद्योगिक इकाइयों और सिक्का ढालने वालों की ओर से मांग समर्थन बढ़ने से चांदी भी 700 रुपये चढ़कर 41,200 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। सर्राफा कारोबारियों का कहना है कि स्थानीय हाजिर बाजारों में स्थानीय आभूषण विनिर्माताओं की ओर से बढ़ी मांग और उत्तर कोरिया को लेकर तनाव कम होने से वैश्विक बाजार में सोने के भाव 10 माह के उच्च स्तर पर चले जाने का असर स्थानीय बाजार में दिखा।

न्यूयॉर्क में कल के कारोबार में सोना 0.97% चढ़कर 1,320 डालर प्रति औंस और चांदी 0.86% सुधरकर 17.54 डालर प्रति औंस पर चल रही। दिल्ली में 99.9% और 99.5% शुद्धता वाला सोना दोनों 150 रुपये की चढ़कर क्रमशः 30,200 रुपये और 30,050 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। पिछले दो दिन में इसमें 400 रुपये की गिरावट आई थी।

हालांकि गिन्नी का भाव 24,600 रुपये प्रति आठ ग्राम पर स्थिर रहा।  सोने की तरह चांदी हाजिर कीमत 700 रुपये सुधरकर 41,200 रुपये प्रति किलोग्राम रही जबकि साप्ताहिक डिलीवरी चांदी की कीमत 565 रुपये चढ़कर 39,780 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई। हालांकि चांदी सिक्का लिवाल 74,000 रुपये तथा बिकवाल 75,000 रुपये प्रति सैकड़ा पर स्थिर रहे।

सब्सिडी वाला रसोई गैस सिलेंडर सात रुपये महंगा

नयी दिल्ली। सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर एलपीजी की कीमत में सात रुपये प्रति सिलेंडर से अधिक की बढ़ोतरी की गई है। यह सरकार के हर माह सिलेंडर की कीमत में वृद्धि करने के निर्णय के अनुरूप है जिससे कि इस वित्त वर्ष के अंत तक सभी तरह की सब्सिडी को खत्म किया जा सके। विमान ईंधन एटीएफ के दाम भी चार प्रतिशत बढ़ाए गए हैं।

देश की सबसे बड़ी पेट्रोलियम कंपनी इंडियन ऑयल कारपोरेशन के अनुसार सब्सिडी वाले 14.2 किलोग्राम के एलपीजी सिलेंडर की नयी कीमत दिल्ली में 487.18 रुपये हो गई है जो पहले 479.77 रुपये थी।

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 31 जुलाई को लोकसभा में कहा था कि सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की सभी पेट्रोलियम कंपनियों से कहा है कि अगले साल मार्च के अंत तक सभी तरह की सब्सिडी को खत्म करने के लिए वे हर महीने रसोई गैस सिलेंडर के दाम 4 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाएं।

इससे पहले एक अगस्त को तेल कंपनियों ने 2.31 रुपये प्रति सिलेंडर की वृद्धि की थी इसलिए इसको बराबरी पर लाने के लिए इस बार ज्यादा वृद्धि की गई है।