Wednesday, July 8, 2026
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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की अगली किश्त जारी

नई दिल्ली । सरकार आज से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की अगली किश्त जारी कर रहा है। यह वर्ष 2017-18 की दूसरी किश्त है। वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में बताया है कि इन बॉन्ड्स की बिक्री बैंक, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसएचसीआईएल), अधिकृत पोस्ट ऑफिस और एनएसई व बीएसई के जरिए की जाएगी।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड फिजिकल गोल्ड में निवेश करने का एक विकल्प है। इस स्कीम को पिछले वर्ष नवंबर में लॉन्च किया गया था। रिजर्व बैंक सरकार की ओर से बॉन्ड जारी करता है। स्कीम का उदेश्य फिजिकल गोल्ड की मांग को कम करना और घरेलू बचत के लिए नए विकल्प की ओर लोगों का रुझान बदलना था, ताकि वे फाइनेंशियल सेविंग के लिए सोने की खरीद कर पाएं।

कैसे तय होगी बॉन्ड की कीमत:
भारत बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन लिमिटेड की ओर से दी गई कीमत पर इस बॉन्ड की कीमत तय होगी। वहीं इस बॉन्ड की कीमत रुपए में तय की जाएगी।

कितनी सीमा तक खरीद पाएंगे बॉन्ड:
नियम के मुताबिक गोल्ड बॉन्ड में 8 साल के लिए निवेश करना जरूरी है, जिसे कम से कम 5 साल के लिए बनाए रहना होगा। कम से कम 1 ग्राम सोने और अधिकतम 500 ग्राम सोने के लिए बॉन्ड खरीदे जा सकते हैं। बॉन्ड खरीद के लिए पेमेंट अगर कैश से करनी है तो अधिकतम 20,000 रुपए कैश दे सकते हैं। वहीं इससे ऊपर की पेमेंट चेक या नेट बैंकिंग के जरिए करनी होगी। जानिए गोल्ड बॉन्ड में निवेश के क्या हैं फायदे:

गोल्ड बॉन्ड में मिलता है बेहतर रिटर्न:
गोल्ड बॉण्ड में निवेश करने पर अच्छा ब्याज मिलता है। इसमें ब्याज सहित सोने की कीमतों में आई तेजी के अनुसार रिटर्न भी मिलता है। इसमें निवेश करने से डीमैट और ईटीएफ जैसे कोई शुल्क नहीं लगाए जाते हैं। गोल्ड बॉण्ड की ब्याज दर 2.75 फीसदी है। इस पर मिलने वाला ब्याज सोने के मौजूदा भाव के हिसाब से तय किया जाता है।

इसमें निवेश के साथ बचत भी:
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गोल्ड बॉण्ड को डिजिटल फॉर्म में सुरक्षित रखा जा सकता है। वहीं दूसरी ओर इसे अपने घर या डीमेट एकाउंट में भी रखा जा सकता है। इससे तरह लॉकर पर होने वाला खर्च भी बच जाएगा।

धोखाधड़ी की नहीं है कोई चिंता:
गोल्ड बॉण्ड में किसी तरह की धोखाधड़ी और अशुद्धता की संभावना नहीं होती है। गोल्ड बॉण्ड में मिलने वाला सोना शत प्रतिशत शुद्ध सोने की ही वैल्यु देता है।

कैपिटल गेन टैक्स की भी हो सकती है बचत:
गोल्ड बॉण्ड की कीमतें सोने की कीमतों में अस्थिरता पर निर्भर करती है। सोने की कीमतों में गिरावट गोल्ड बॉण्ड पर नकारात्मक रिटर्न देता है।  अस्थिरता को कम करने के लिए सरकार लंबी अवधि वाले गोल्ड बॉण्ड जारी कर रही है।

इसमें निवेश की अवधि 8 वर्ष होती है, लेकिन आप 5 वर्ष के बाद भी अपने पैसे निकाल सकते हैं। पांच वर्ष के बाद पैसे निकालने पर कैपिटल गेन टैक्स भी नहीं लगाया जाता है।

गोल्ड बॉण्ड होती है सरकारी गारंटी:
गोल्ड बॉण्ड भारत सरकार की ओर से दी गई सॉवरन गारंटी होती है। लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि यह हमेशा सकारात्मक रिटर्न्स ही देगा।

बढ़वा सकते हैं गोल्ड बॉण्ड की मैच्योरिटी:
गोल्ड बॉण्ड की अवधि मैच्योरिटी पीरियड के बाद तीन वर्ष के लिए और बढ़वाई जा सकती है। इसकी मदद से मैच्योरिटी के समय बाजार के नकारात्मक संकेतों से बचा जा सकता है।

गोल्ड बॉण्ड के एवज में मिल सकता है लोन:
जरूरत पड़ने पर गोल्ड बॉण्ड के एवज में बैंक से लोन भी लिया जा सकता है। गोल्ड बॉण्ड पेपर को लोन के लिए कोलैटर्ल के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह पोस्ट ऑफिस की नैश्नल सेविंग सर्टिफिकेट के जैसा होता है।

दो माह में मिलेगा निर्यातकों को जीएसटी रिफंड: अढिया

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नई दिल्ली । सरकार निर्यातकों के सभी जीएसटी रिफंड दो महीने के भीतर क्लीयर कर देगी। इससे उन्हें नवंबर तक अपने रिफंड मिल जाएंगे। यही नहीं, अगले छह माह तक निर्यातकों से कोई टैक्स नहीं वसूला जाएगा, क्योंकि जीएसटी काउंसिल ने वस्तु व सेवा कर लागू होने से पहले वाली व्यवस्था बहाल करने का फैसला किया है। राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने एक साक्षात्कार में यह जानकारी दी।

अढिया ने कहा कि जुलाई-अगस्त के दौरान इंटीग्रेटेड जीएसटी (आइजीएसटी) के रूप में 67,000 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं। इसमें से केवल 5,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये ही निर्यातकों के जीएसटी रिफंड के रूप में लंबित हैं। जहां तक चालू वित्त वर्ष के बाकी महीनों का सवाल है, तो उन्हें अब मार्च तक निर्यात की जाने वाली वस्तुओं पर कोई टैक्स अदा नहीं करना होगा।

अगले वित्त वर्ष की शुरुआत यानी पहली अप्रैल से निर्यातकों के लिए एक ई-वॉलेट सेवा लांच की जाएगी। यह सेवा निर्यातकों को सांकेतिक क्रेडिट प्रदान करेगी। इसका इस्तेमाल निर्यातक जीएसटी चुकाने के लिए कर सकेंगे। वॉलेट में मौजूद क्रेडिट को दूसरों को ट्रांसफर किया जा सकेगा।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में केंद्र व राज्य सरकारों के आधा दर्जन अप्रत्यक्ष कर समाहित हैं। चूंकि जीएसटी व्यवस्था में निर्यातकों को किसी तरह की छूट नहीं दी गई है, इसलिए उन्हें मैन्यूफैक्चर्ड गुड्स पर पहले आइजीएसटी अदा करना होता है। इससे निर्यातकों के सामने नकदी का संकट पैदा हो जाता है।

निर्यातकों को राहत देने के लिए जीएसटी काउंसिल ने पैकेज देने का फैसला किया था। इसके तहत खुद वस्तुओं का उत्पादन करने वाले निर्यातकों के लिए कोई टैक्स नहीं देना होगा। उनसे 0.1 फीसद का मामूली टैक्स लिया जाएगा, जो निर्यात करने वाले सामान की मैन्यूफैक्चरिंग खुद नहीं करते हैं।

सोने के लेनदेन की सूचना के लिए नई सीमा जल्द
अढिया ने यह भी कहा कि सरकार काले धन को सराफा बाजार में जाने से रोकने के लिए सोने व अन्य कीमती धातुओं के लेनदेन की अनिवार्य सूचना देने के संबंध में नई सीमा जल्द घोषित कर देगी। बीते शुक्रवार को ही सरकार ने अपने अगस्त के उस आदेश को पलट दिया था जिसके तहत रत्न और आभूषण के कारोबारियों को मनी लांडिंग रोकथाम कानून के दायरे में लाया गया था।

इसकी वजह से धनतेरस और दिवाली के त्योहारी माहौल में सोने के कारोबार में खासा इजाफा हो सकता है। बीते दिन के फैसले की वजह से यह माना जा रहा है कि अब 50,000 रुपये से ऊपर की खरीद पर पैन और आधार नंबर देने की अनिवार्यता नहीं रह गई है।

देश भर में आज से दो दिन के लिए 93 लाख ट्रकों का चक्का जाम

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नई दिल्ली। जीएसटी और डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ देश भर के ट्रक ऑपरेटरों का दो दिन का चक्का जाम रविवार आधी रात से शुरू हो गया। ट्रक ऑपरेटरों ने धमकी दी है कि दो दिन की इस सांकेतिक हड़ताल के बावजूद उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो दिवाली के आसपास अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो सकती है।

ट्रक ऑपरेटरों की मांग है कि जीएसटी में उन्हें राहत दी जाए और पुराने ट्रक बेचने पर लगने वाले 28 फीसदी टैक्स के प्रावधान को खत्म किया जाए। दो दिन की इस हड़ताल से दो हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका है।

ऑल इंडिया मोटर्स ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के उत्तरी भारत के उपाध्यक्ष हरीश सब्बरवाल के मुताबिक, 48 घंटे तक देश भर के 93 लाख ट्रकों का चक्का जाम रहेगा। 50 लाख बसों के ऑपरेटर भी हमारी यूनियन के सदस्य हैं, लेकिन फिलहाल उन्हें हड़ताल में शामिल नहीं किया गया है।

जीएसटी और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के खिलाफ ट्रांस्पोर्टरों की देशव्यापी हड़ताल का खामियाजा देश की जनता को भुगतना पड़ेगा। पहले ही कई फलों और सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल मुसीबत और बढ़ा सकती है।

आजापुर एपीएमसी सचिव सतनाम सिंह का कहना है कि मंडी में हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से फलों की सप्लाई होती है। सब्जियों की सप्लाई दिल्ली से सटे राज्यों हरियाणा, उत्तर प्रदेश और एनसीआर के गांवों से होती है।

ऐसे में फलों और सब्जियों की मांग के हिसाब से आपूर्ति न होने से दामों में इजाफा होने की संभावना है। खासकर प्याज और मंहगी सब्जियों पर हड़ताल का असर पड़ेगा। जिन सब्जियों के दाम कम है, उनपर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

पब्लिक का होगा नुकसान
ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल का सीधा नुकसान आम जनता को होगा, क्योंकि हड़ताल होने से सब्जियों और फलों के लिए दोगुने और चौगुने दाम देने पड़ेंगे। देखा जाए तो पहले से ही सब्जियों और फलों के दाम काफी बढ़े हुए हैं। जानकारों के मुताबिक फूल गोभी, पत्तागोभी, परवल के अलावा प्याज के दामों पर खास असर पड़ेगा।

सेंसेक्स और निफ्टी ने पकड़ी रफ्तार, निफ्टी 10000 के पार

नई दिल्ली। एशियाई बाजारों में तेजी के बावजूद भारतीय शेयर बाजार सामान्य स्तर पर खुले। 30 शेयरो का बीएसई सेंसेक्स 12.67 पॉइंट लुढ़ककर 31,801.55 पर खुला तो 50 शेयरों का एनएसई निफ्टी भी 7.90 पॉइंट गिरकर 9,971.80 अंक पर खुला। हालांकि, थोड़ी देर में सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों ने ही मजबूती हासिल की और निफ्टी 10,000 के पार ट्रेड करने लगा।

बीएसई पर हर तीन में दो शेयर मजबूत हो रहे थे। स्पार्क टीबीजेड, टाइटन कंपनी, शोभा, शक्ति पंप्स, स्पेशलिटी रेस्ट्रॉन्ट्स और जयप्रकाश असोसिएट्स के शेयर 2 से 6 प्रतिशत तक चढ़े जबकि अडानी एंटरप्राइजेज, ओबीसी और वीए टेक के शेयरों में 2 से 4 प्रतिशत की कमजोरी देखी गई। 9:41 बजे सेंसेक्स 85.60 अंक चढ़कर 31,899 जबकि निफ्टी 24.65 अंक मजबूत होकर 10,004 अंक पर ट्रेड कर रहा था।

NCML देती है स्टॉक पर फाइनेंस और ऑनलाइन ट्रेडिंग की सुविधा

कोटा। निजी क्षेत्र में अन्न भंडारण की अग्रणी संस्था NCML (नेशनल कोलेटरल मैनेजमेंट सर्विसेज लिमिटेड) द्वारा एक चर्चा संगोष्ठी का आयोजन शनिवार को एक होटल में किया गया। 

चर्चा संगोष्ठी का विषय खरीफ फसलों का उत्पादन भंडारण वितरण योजना एवं विपणन रहा कार्यक्रम में कोटा के प्रमुख व्यापारी गण ने भाग लिया। 

NCML कंपनी द्वारा आयोजित इस चर्चा संगोष्ठी का शुभारंभ कंपनी के डिप्टी सीईओ अनुपम कोशिक एवं संजीव छाबड़ा एवं जोनल हेड  सुरेश चंद केसरी द्वारा अपने विचार प्रकट करके किया।   

कौशिक ने बताया कि किस तरह से NCML ने अपनी सर्विस से निरंतर ग्राहकों को संतुष्ट किया है एवं वेयरहाउसिंग में अपना प्रथम स्थान बनाया हुआ है। 

NCML निरंतर नए सर्विस जैसे कि कंपनी द्वारा स्टॉक पर फाइनेंस, स्ट्रोक की ऑनलाइन ट्रेडिंग का संचालन सुचारु रुप से कर रही है जिससे कि ग्राहक अपने व्यापार का विस्तार कर सकते हैं

संगोष्ठी में सोयाबीन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के लिए चाय पर चर्चा का आयोजन किया गया।  जिसमें 
भामाशाह अनाज मंडी के व्यापारियों ने हिस्सा लिया एवं सोयाबीन के भविष्य पर अपना पक्ष रखा। 

इस साल बारिश कम होने से सोयाबीन के उत्पादन में कमी रहेगी एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मांग तेज नहीं होने से भाव में ज्यादा सुधार की संभावना नजर नहीं आती |

कार्यक्रम में विभिन्न बैंकों के पदाधिकारियों ने भी हिस्सा लिया एवं कृषि उत्पादन के भंडारण पर मिलने वाले लोन के बारे में भी अवगत कराया। 

कंपनी ने NCML द्वारा दी जाने वाले फंडिंग पर भी चर्चा की गई जिसमें व्यापारियों को अगर बैंक से फंडिंग ना मिले तो इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है। 

कंपनी द्वारा प्रारंभ किए गए cके बारे में जानकारी भुवन  द्वारा दी गई इसके माध्यम से कोई भी व्यापारी अपना माल सही मूल्य में कहीं पर भी खरीद व बेच सकता है। 

कार्यक्रम में सभी व्यापारियों का एनसीडेक्स पर सोयाबीन लगाने वह जल्दी डीमेट होने के लिए विभिन्न पहलुओं पर चर्चा गौतम वशिष्ठ द्वारा दी गई। 

कार्यक्रम के अंत में कंपनी के क्षेत्रीय प्रबंधक अजय अग्रवाल ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी व्यापारियों का धन्यवाद किया। 

अब जीएसटी कंपोजीशन स्कीम में पंजीकरण 31 मार्च 18 तक

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  • राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने LEN-DEN NEWS से कहा कि व्यापारी अगले साल 31 मार्च तक कंपोजीशन स्कीम में पंजीकरण करा सकते हैं। यह सुविधा सिर्फ व्यापारियों, मैन्यूफैक्चरिंग यूनिटों और रेस्तरां सेवा प्रदाताओं को ही प्राप्त है।

नई दिल्ली । छोटे और मझोले कारोबारियों को दिवाली से पहले एक और तोहफा देते हुए जीएसटी काउंसिल ने कंपोजीशन स्कीम में पंजीकरण कराने की सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2018 कर दी है। ऐसा होने पर सालाना एक करोड़ रुपये तक टर्नओवर वाले कारोबारी इस योजना का चुनाव कर सकेंगे।

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की शुक्रवार को हुई 22 में बैठक में यह अहम फैसला किया गया। कंपोजीशन स्कीम की अंतिम तिथि इस साल 30 सितंबर को समाप्त हो गई थी।

इस स्कीम में अब तक 15.47 लाख व्यापारी पंजीकरण करा चुके हैं। इसमें सबसे अधिक व्यापारी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात के हैं।

इससे पहले जीएसटी काउंसिल ने हैदराबाद में हुई बैठक में कंपोजीशन स्कीम 16 सितंबर से 30 सितंबर तक खोलने का फैसला किया था। इस दौरान पांच लाख से अधिक व्यापारियों ने इसके तहत पंजीकरण कराया था।

राजस्व सचिव हसमुख अढिया ने LEN-DEN NEWS से कहा कि व्यापारी अगले साल 31 मार्च तक कंपोजीशन स्कीम में पंजीकरण करा सकते हैं। कंपोजीशन स्कीम की सुविधा सिर्फ व्यापारियों, मैन्यूफैक्चरिंग यूनिटों और रेस्तरां सेवा प्रदाताओं को ही प्राप्त है।

इसके तहत पंजीकृत व्यापारियों को अपने टर्नओवर का मात्र एक प्रतिशत और मैन्यूफैक्चरर को दो प्रतिशत जीएसटी का भुगतान करना होता है। वही रेस्तरां सेवा प्रदान करने वाले व्यवसायियों को इस स्कीम के तहत पांच प्रतिशत की दर से जीएसटी अदा करना होता है।

कंपोजीशन स्कीम में पंजीकृत व्यापारियों को सबसे बड़ी सुविधा यह है कि उन्हें हर माह जीएसटी का रिटर्न दाखिल नहीं करना पड़ता। वे तीन माह में सिर्फ एक बार जीएसटी रिटर्न दाखिल कर सकते हैं।

हालांकि कंपोजीशन स्कीम के तहत पंजीकृत व्यापारी अंतरराज्यीय बिक्री नहीं कर सकते। वैसे तंबाकू उत्पाद बनाने वाली यूनिटों को कंपोजीशन स्कीम की सुविधा नहीं मिल सकती है।

किंगफिशर मामला: बैंकों के निदेशक, अधिकारी भी जांच के घेरे में

नयी दिल्ली। भगोड़े कारोबारी विजय माल्या के खिलाफ कई एजेंसियों की जांच के जोर पकड़ने के बाद बैंकों के कई कार्यकारी एवं निदेशक तथा सरकारी अधिकारी जांच के घेरे में हैं। बंद हो चुके किंगफिशर एयरलाइंस को ऋण देने में नियमों का उल्लंघन करने को लेकर यह जाँच हो रही है। नियामकीय एवं बैंकिंग सूत्रों ने इसकी जानकारी दी।

गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय एसएफआईओ किंगफिशर एयरलाइंस मामले में हुई गड़बड़ियों के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने वाला है। सूत्रों ने बताया कि जांच एजेंसी ने माल्या, किंगफिशर एयरलाइंस एवं अधिकारियों द्वारा गलत किये जाने के संकेत दिये हैं तथा कंपनी संचालन में गंभीर गड़बड़ियों का अंदेशा जताया है।

सूत्रों ने बताया कि एयरलाइंस को बिना पर्याप्त आधार के ऋण देने में बैंक अधिकारियों की भूमिका तथा माल्या से कुछ सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत की विस्तृत जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि एसएफआईओ को जिन भी बैंकों द्वारा खामी मिली है वे सभी जांच के दायरे में हैं।

एक सूत्र ने कहा, कंपनी का बही-खाता कभी भी अच्छा नहीं था। उसकी क्रेडिट रेटिंग भी ऋण देने के लिए आवश्यक स्तर से कम थी। उसके बाद भी बैंकों ने प्रक्रिया को अनदेखा करते हुए ऋण दिया।

सूत्रों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने यह भी पाया है कि किंगफिशर ब्रांड के मूल्यांकन के संबंध में बैंकों ने एक ही मूल्यांकन के आधार पर ऋण देने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी। हालांकि इसके लिए कम से कम दो अलग मूल्यांकन रिपोर्ट अनिवार्य था।

कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय के अधिकारी एसएफआईओ की रिपोर्ट पर टिप्पणी देने के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। माल्या ने भी सवालों का तत्काल जवाब नहीं दिया है। सूत्रों के अनुसार, एजेंसियों ने एयरलाइंस को ऋण देने वाले बैंकों से कुछ जानकारियां भी मांगी हैं

देरी के कारण खारिज नहीं किये जा सकते बीमा दावे : सुप्रीम कोर्ट

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि यदि किसी बीमा का दावा करने में देरी होती है और उपभोक्ता देरी की संतोषजनक वजह बताता है तो उसे खारिज नहीं किया जा सकता है। न्यायालय ने वाहन मालिक का बीमा दावा खारिज किये जाने के संबंध में सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ ने कहा कि बीमा दावे पूरी तरह तकनीकी आधार पर खारिज करने से बीमा उद्योग में बीमाधारकों का भरोसा कम होगा। न्यायालय ने सुनवाई करते हुए रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी को निर्देश दिया कि वह चोरी हुए वाहन के मालिक को 8.35 लाख रुपये का भुगतान करे।

हिसार के रहने वाले उपभोक्ता का ट्रक चोरी हो गया था। इस सिलसिले में बीमा को लेकर उनके दावे को देरी की वजह से खारिज कर दिया गया था। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटान आयोग ने इस मामले में कहा था कि दावे में देरी को आधार बनाकर बीमा कंपनियां दावे को खारिज कर सकती हैं। वाहन मालिक ने आयोग के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।

पीठ ने कहा, अगर दावे में देरी की वजह को संतोषजनक तरीके से स्पष्ट कर दिया जाता है तो ऐसे दावे देरी के आधार पर खारिज नहीं किये जा सकते हैं। यहां यह भी कह देना जरूरी है कि पहले से सत्यापित और जांचकर्ता द्वारा सही पाये जा चुके दावों को खारिज करना उचित एवं तर्कसंगत नहीं है।

न्यायालय ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए है। उसने कहा, यह एक लाभदायक कानून है और इसके अनुपालन में उदारता होनी चाहिए। इस अधिनियम के तहत किये गये दावों की सुनवाई करते हुए यह प्रशंसनीय तथ्य नहीं भूलना चाहिए।

न्यायालय ने कहा कि कोई व्यक्ति जिसका वाहन खो गया हो वह दावा करने के लिए सीधा बीमा कंपनी नहीं जा सकता है। वह संभव है कि पहले अपना वाहन खोजने की कोशिश करे। न्यायालय ने कहा, यह सच है कि वाहन मालिक को चोरी के तुरंत बाद बीमा कंपनी को अवगत कराना चाहिए।

हालांकि इस शर्त को सही दावों को सुलटाने में अनिवार्य नहीं होना चाहिए। खासकर तब जब दावा करने या सूचित करने में देरी की वजह कुछ ऐसी हो जिसे टाला ही नहीं जा सकता है। दावे को खारिज करने का बीमा कंपनी का निर्णय वैध आधार पर ही होना चाहिए।

त्योहारों पर कोटा जंक्शन से चलेंगी 3 स्पेशल ट्रेन

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कोटा। रेल प्रशासन ने त्यौहारों को देखते हुए कोटा से तीन विशेष ट्रेन चलाने का फैसला किया है। ये ट्रेनें कोटा से निजामुद्दीन, झालावाड़ और पटना के लिए चलेंगी।

कोटा से निजामुद्दीन के बीच ट्रेन 31 अक्टूबर तक रात 09.10 बजे प्रस्थान करके प्रातः 04.25 बजे निजामुद्दीन पहुंचेगी। वापसी में निजामुद्दीन से प्रातः 04.15 बजे प्रस्थान करके दोपहर 01.15 बजे कोटा आएगी।

16 कोच की इस गाड़ी में 2 एसएलआर, 7 सामान्य द्वितीय श्रेणी, 5 शयनयान श्रेणी तथा 1 कोच तृतीय श्रेणी वातानुकूलित कोच रहेगा। झालावाड़ सिटी ट्रेन 31 अक्टूबर तक प्रतिदिन शाम 7.10 बजे रवाना होकर रात 09.25 बजे झालावाड़ सिटी पहुंचेगी।

वापसी में प्रतिदिन सुबह 6.00 बजे रवाना होकर सुबह 08.05 बजे कोटा आएगी। 11 कोच की इस गाड़ी में 2 एसएलआर, 9 सामान्य द्वितीय श्रेणी कोच रहेंगे। यह ट्रेन पूरे अक्टूबर चलेगी और दोनों ओर 31-31 फेरे करेगी।

 

कोटा-पटना के बीच 13, 16, 19 को चलेगी ट्रेन
कोटा से पटना विशेष ट्रेन 13, 16 एवं 19 अक्टूबर को चलेगी। यह गाड़ी कोटा से दोपहर 12.30 बजे प्रस्थान करके दूसरे दिन दोपहर 12.15 बजे पटना पहुंचेगी वापसी में पटना से कोटा 14 अक्टूबर 17 अक्टूबर को चलेगी।

तिमाही नतीजे तय करेंगे शेयर बाजार की चाल

वैश्विक बाजारों के प्रदर्शन, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) और घरेलू संस्थापक निवेशकों (डीआईआई) द्वारा किए गए निवेश, डॉलर के खिलाफ रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों का प्रदर्शन मिलकर बाजार की चाल तय करेंगे

मुंबई। अगले सप्ताह शेयर बाजार की चाल घरेलू और वैश्विक व्यापक आर्थिक आंकड़े, प्रमुख कंपनियों की दूसरी तिमाही के नतीजे, वैश्विक बाजारों के प्रदर्शन, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) और घरेलू संस्थापक निवेशकों (डीआईआई) द्वारा किए गए निवेश, डॉलर के खिलाफ रुपये की चाल और कच्चे तेल की कीमतों का प्रदर्शन मिलकर तय करेंगे।

अगले सप्ताह जिन कंपनियों के तिमाही नतीजे जारी होंगे। उनमें इंडसइंड बैंक और टीसीएस गुरुवार को अपनी चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा करेंगे। कोटक महिंद्रा बैंक शुक्रवार को अपने नतीजे जारी करेगी।

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की शनिवार  को हुई 22वीं बैठक में छोटे व्यापारियों को राहत देते हुए उन्हें हर महीने रिटर्न भरने से छूट देने का फैसला लिया गया है।

डेढ़ करोड़ रुपये तक के टर्नओवर पर पहले हर महीने रिटर्न भरने का प्रावधान था जिसे अब त्रैमासिक कर दिया गया है। इसके अलावा 50,000 रुपये तक की खरीद पर पैन की अनिवार्यता को भी खत्म कर दिया गया है। सरकार ने जेम्स एंड ज्वेलरी पर से जीएसटी हटा लिया है।

इसके अलावा जीएसटी परिषद ने ‘कंपोजिशन’ योजना अपनाने वाली कंपनियों के लिए कारोबार की सीमा 75 लाख रुपये से बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दी। इस योजना के तहत एसएमई को कड़ी औपचारिकताओं को पूरा किये बिना एक से पांच प्रतिशत के दायरे में कर भुगतान की सुविधा दी गई है।

परिषद ने उन करदाताओं को तथाकथित ‘कपोजिशन स्कीम’ का विकल्प देने का फैसला किया है जिनका सालाना कारोबार एक करोड़ रुपये या उससे कम है। अब तक यह सीमा 75 लाख रुपये थी। साथ ही जीएसटी परिषद ने करीब 27 वस्तुओं पर कर की दरों में संशोधन किया है।

इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (आईईएक्स) का आईपीओ सोमवार को खुलेगा और बुधवार को बंद होगा। इस आईपीओ का प्राइस बैंड 1645 रुपये से 1,650 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया है। आईईएक्स भारत के प्रमुख बिजली ट्रेडिंग प्लेटफार्म है।

जनरल इंश्योरेंस कंपनी जनरल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का आईपीओ बुधवार को खुलेगा और शुक्रवार को बंद होगा। कंपनी ने इसकी कीमत 855 रुपये से 912 रुपये प्रति शेयर तय की है।