Friday, July 10, 2026
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पैराडाइज पेपर्स में कुछ खाते पहले से जांच के घेरे में: CBDT

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नई दिल्ली। टैक्स हेवंस में और उनको जरिया बनाकर नामचीन लोगों और बिजनस हाउसेज की ओर से किए गए जिन निवेशों के बारे में पैराडाइज पेपर्स में खुलासा किया गया है, उनमें से कुछ विदेशी अकाउंट्स की जांच तो भारतीय टैक्स अधिकारी पहले से कर रहे थे।

हालांकि सोमवार को एक मल्टी-एजेंसी ग्रुप बनाने का निर्णय भी किया गया, जो पैराडाइज पेपर्स से जुड़ी जांच पर नजर रखेगा। टैक्स डिपार्टमेंट ने अपने अधिकारियों को अलर्ट किया है कि जो नई सूचना सामने आई है, उसका उपयोग वे जांच में करें।

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) के चेयरमन सुशील चंद्रा ने ईटी को बताया, ‘इनमें से कुछ मामलों की जांच तो हम पहले से कर रहे हैं। जो भी ताजा जानकारी होगी, उसकी और जांच की जाएगी।’

पैराडाइज पेपर्स का संबंध बरमूडा और दूसरी जगहों पर कार्यालय रखने वाली एक विदेशी लॉ फर्म एपलबी से लीक हुए डॉक्युमेंट्स से है।

इनमें पिछले लगभग 50 वर्षों के करीब 70 लाख लोन अग्रीमेंट्स, फाइनैंशल स्टेटमेंट्स, ईमेल्स, ट्रस्ट डीड्स और दूसरे पेपरवर्क शामिल हैं।

इस डेटा का मिलान संबंधित इकाइयों की ओर से दाखिल इनकम टैक्स रिटर्न से किया जाएगा। चंद्रा ने कहा, ‘जांच से जुड़े सभी महानिदेशकों को अलर्ट कर दिया गया है। ऐक्शन लेने लायक हर जानकारी पर ऐक्शन लिया जाएगा।’

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि जिन इकाइयों और लोगों ने 2015 में डिसक्लोजर स्कीम में विदेशी संपत्ति का खुलासा किया था, उन्हें उससे मिलने वाली इम्यूनिटी मिलती रहेगी। पैराडाइज पेपर्स पर गौर करने वाले मल्टी-एजेंसी ग्रुप का नेतृत्व CBDT के चेयरमैन करेंगे।

इस ग्रुप में एन्फोर्समेंट डायरेक्टरेट, आरबीआई और फाइनैंशल इंटेलिजेंस यूनिट के प्रतिनिधि होंगे। CBDT ने प्रेस रिलीज में यह भी बताया कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच इकाइयों को अलर्ट कर दिया गया है कि वे तत्काल उचित कार्रवाई करने के लिए ताजा खुलासों पर गौर करें।

रिलीज में कहा गया, ‘बताया गया है कि विदेशी इकाइयों के कई मामलों की पहले ही फास्ट ट्रैक जांच की जा रही है। जैसे ही और जानकारी सामने आएगी, कानून के मुताबिक तेजी से ऐक्शन लिया जाएगा।’

इंटरनैशनल कंसोर्शियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स की पड़ताल पर आधारित पैराडाइज पेपर्स से संकेत मिल रहा है कि विभिन्न देशों के व्यक्तियों की विदेशी इकाइयों के डेटा में शामिल 180 देशों में नामों की संख्या के आधार पर भारत 19वें स्थान पर है।

CBDT के बयान में कहा गया कि इस लिस्ट में कथित तौर पर 714 भारतीयों के नाम हैं। उसने कहा कि लीक हुए डॉक्युमेंट्स में एक छोटी फैमिली ओंड ट्रस्ट कंपनी एशियासिटी (सिंगापुर) की फाइल्स और 19 सीक्रेसी ज्यूरिसडिक्शंस में कंपनी रजिस्ट्रीज के दस्तावेज शामिल हैं। अभी कुछ ही भारतीयों के नामों का खुलासा हुआ है।

पेटीएम से जुड़ा भीम UPI, जानें कैसे करें इस्तेमाल

नई दिल्ली। पेटीएम ने अपने प्लैटफॉर्म पर सरकार के भीम UPI इंटरफेस को लाने का ऐलान किया है। कम्पनी ने कहा है कि यूजर पेटीएम के ऐप से ही अपने यूपीआई आईडी बना सकेंगे। पेटीएम का कहना है कि वह आगे जाकर यूपीआई का सबसे बड़ा इशुअर और अक्वायरर बनना चाहता है।

भीमका यूपीआई आईडी पेटीएम में रजिस्टर हो चुका ग्राहक का मोबाइल नंबर ही होगा। इसे बाद में बदला भी जा सकता है और कई सारे अकाउंट्स से भी जोड़ा जा सकता है।

यूजर अपनी आईडी को अपने किसी सेविंग बैंक अकाउंट से भी जोड़ सकेंगे। आपस में जोड़ने के बाद वे अलग-अलग बैंकों और भीम UPI ऐप्स के बीच ट्रांजैक्शन शुरू कर पाएंगे। आगे देखें, कैसे कर सकते हैं इसका इस्तेमाल…

पेटीएम पर भीम UPI कैसे करें इस्तेमाल?
पेटीएम ऐप खोलने पर यूजरों को नया भीम UPI विकल्प दिखाई देगा। उसके बाद उन्हें भीम UPI विकल्प चुनना होगा और आगे की प्रक्रिया के लिए एक बैंक अकाउंट सिलेक्ट करना होगा।

पेटीएम अकाउंट से जुड़े नंबर के बैंक द्वारा वेरिफाई किए जाने का इंतजार करना होगा। नंबर वेरिफाई होने के बाद अपना M पिन सेट करना होगा जिसके बाद ट्रांजैक्शन शुरू कर सकेंगे।

दूसरे फीचर
पेटीएम के मुताबिक, इस नए फीचर के साथ यूजरों को बेनेफिशरी ऐड करने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा या पैसा पाने के लिए IFSC कोड नहीं डालना पड़ेगा। पेटीएम मर्चेंट भी अपने मौजूदा बैंक अकाउंट्स को पेटीएम भीम UPI ID से जोड़कर पैसा पा सकेंगे।

बता दें, कि नैशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के दिशानिर्देशों के मुताबिक, यूजर भीम UPI ID का इस्तेमाल कर एक दिन में 1 लाख रु ही भेज सकेंगे। एक दिन में कितने पैसे रिसीव किए जा सकते हैं, इसपर अभी कोई लिमिट नहीं लगाई गई है।

नई डिवाइस पर गए तो?
इसके बाद यूजर अपने डिवाइस को यूं ही नहीं बदल पाएंगे। पेटीएम पहले मोबाइल नंबर और डिवाइस को वेरिफाई करेगी तब पेटीएम फर्स्ट पर BHIM UPI के लिए रजिस्टर कर सकेंगे।

‘अगर आप BHIM UPI के ट्रांजैक्शन के लिए अलग डिवाइस का इस्तेमाल करना चाहते हैं तो आपको मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया से गुजरना होगा। आपके नए डिवाइस में उस मोबाइल नंबर का सिम कार्ड होना चाहिए जिसे आपने पेटीएम पर रजिस्टर किया है।’

ऐंड्ऱ़ॉयड और iOS दोनों पर आएगा
पेटीएम का कहना है कि यह फीचर फिलहाल ऐंड्रॉयड ऐप के बीटा वर्जन में टेस्ट किया जा रहा है। बहुत जल्द ऐप के iOS वर्जन को भी भीम UPI का सपॉर्ट मिलेगा।

क्या है भीम UPI
याद दिला दें, कि BHIM UPI या यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस एक तरीका है जिससे यूजर तुरंत पैसे भेज और पा सकते हैं। यह यूजरों के बैंक अकाउंट्स से लिंक्ड होता है जिससे बिना किसी वॉलिट के दखल के पैसा सीधे अकाउंट में आता है या अकाउंट से निकलता है। इसके लिए यूजरों को एक यूनीक आईडी बनानी पड़ती है।

ऑनलाइन बिक रहे 500 और 1000 के पुराने नोट, कीमत जानकर उड़ जाएंगे होश

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पिछले साल 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपये के नोटों के चलन पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सभी लोगों को बैंक जाकर इन नोटों को बदलवाना अनिवार्य था। कई ऐसे लोग भी थे, जो समय से अपने सभी पुराने नोट बदल नहीं सके।

ये अब अपने पुराने नोट उसकी वास्तविक कीमत से ज्यादा मूल्य पर ऑनलाइन नीलाम कर रहे हैं। इस काम के लिए वे ‘ई-बे’ जैसी साइट का इस्तेमाल करते हैं। पुराने नोटों का कलेक्शन करने के शौकीन इन नोटों के खरीदार बनते हैं।

कई लोगों को एंटीक चीजें सहेजने का शौक होता है। ये पुरानी कार, पुरानी करेंसी आदि को पास रखते हैं। ऐसे में कई वेबसाइट हैं, जो ऐसी चीजों की ऑनलाइन नीलामी करती हैं।

ऐसी ही साइटों पर 500 और 1000 के पुराने नोट उपलब्ध हैं। वैसे पुरानी चीजों को सहजने की प्रवति नई नहीं है। ऐसा नोटबंदी से पहले भी होता रहा है। 

कलेक्शन करने वालों के लिए बूम
प्रचलन से हट गए नोटों को लोग अपनी रुचि के अनुसार संग्रहालय या घर के किसी कोने में सहेजकर रखते थे। देश ही नहीं, ऐसा विदेश में भी होता है। नोट जितना पुराना होता जाता है, उसकी कीमत उतनी ही बढ़ती जाती है।

GST: फोन करके पूछेंगे अफसर, क्यों नहीं दाखिल किया रिटर्न

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कानपुर। रिटर्न न दाखिल करने वाले व्यापारियों के लिए बुरी खबर। अब जीएसटी में नए-नए पंजीकृत व्यापारियों से वाणिज्य कर अफसर पूछेंगे कि आपने रिटर्न अभी तक क्यों नहीं जमा किया। जवाब संतोषजनक न मिलने पर जांच की जाएगी। 

जीएसटी में नए पंजीकृत व्यापारियों के लिए विशेष निगरानी की व्यवस्था की गई है। अपर मुख्य सचिव ने सभी अफसरों को निर्देश दिए हैं कि जो व्यापारी रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे हैं, उन्हें टेलीफोन किया जाए। अफसर फोन करके पूछेंगे कि आखिर रिटर्न क्यों नहीं जमा किया है और जल्द से जल्द जमा कराएं। 

इसके बावजूद रिटर्न न भरने वाले व्यापारियों की जांच के आदेश दिए हैं कि वास्तव में वे कारोबार कर भी रहे हैं या नहीं। कहीं कागजी फर्म बनाकर तो टैक्स की हेराफेरी नहीं की जा रही है। इसके लिए अधिकारी व्यापार स्थल और गोदाम का दौरा करेंगे और अपनी रिपोर्ट मुख्यालय भेजेंगे। 

व्यापार स्थल की जांच के दौरान कारोबार पाया गया तो व्यापारी से परेशानी पूछी जाएगी। अधिकारी उसका निराकरण करेंगे और हेल्पडेस्क के माध्यम से रिटर्न दाखिल कराया जाएगा। इस संबंध में जीएसटी की पूरी शीट जोनवार अफसरों को भेज दी गई है।

प्रत्येक अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से ऐसे व्यापारियों की जानकारी दे दी गई है जिन्होंने रिटर्न दाखिल नहीं किया है। इस काम की निगरानी सीधे कमिश्नर करेंगे।

कालेधन पर वार: हजारों रिटर्न और बेनामी संपत्तियां जांच के घेरे में

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20 हजार संदिग्ध ITR की जांच शुरू, कर चोरी की सबसे अधिक आशंका वाले  एक लाख रिटर्न की भी पहचान की है

नई दिल्ली। आयकर विभाग 20 हजार से अधिक संदिग्ध आईटी रिटर्न की जांच कराएगा, वहीं बेनामी संपत्तियों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।

आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को बताया कि नोटबंदी से पहले और बाद में इन लोगों के रिटर्न में भारी अंतर देखने को मिला है, जिसके बाद यह फैसला लिया गया है।  सूत्रों ने बताया कि विभाग ने 20,572 आईटी रिटर्न को विस्तृत जांच के लिए चुना है।

इनके अलावा विभाग ने कर चोरी की सबसे अधिक आशंका वाले  एक लाख रिटर्न की भी पहचान की है, जिनकी जांच की जा सकती है। उन्होंने बताया कि आयकर विभाग लोगों से रिकॉर्ड जमा करता है।

इसके बाद अधिकारी इन दस्तावेजों की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करते हैं कि जानकारी गलत तो नहीं है या फिर कर चोरी तो नहीं की गई है। सूत्रों के मुताबिक विभाग ने इस साल 31 जनवरी को ‘ऑपरेशन क्लीन मनी ’चलाया था।

इसका मकसद पिछले साल 8 नवंबर को 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट चलन से बाहर किए जाने के बाद बैंकों में जमा कराए गए कालेधन का पता लगाना था। 

23.22 लाख संदिग्ध खातों की पहचान 
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक विभाग ने नोटबंदी के बाद 23.22 लाख खातों में से 17.73 लाख संदिग्ध मामलों की पहचान की है।

इनमें 3.68 लाख करोड़ रुपये की राशि जमा कराई गई। इन मामलों में संबंधित लोगों को नोटिस भेजा गया। इनमें से 11.8 लाख ने ऑनलाइन माध्यमों से जवाब दाखिल कर दिया है। 

बेनामी संपत्तियों पर सरकार सख्त, 1833 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त 
केंद्र सरकार ने बेनामी संपत्तियों के लेकर सख्त रुख अपना लिया है। सीबीडीटी के चेयरमैन सुशील चंद्र ने सोमवार को कहा कि आयकर विभाग बेनामी संपत्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रखेगा।

सीबीडीटी के चेयरमैन ने कहा, मैं आपको यह आश्वासन दे सकता हूं कि यह जांच कभी बंद नहीं होगी। हम इस तरह की संपत्तियों के बारे में हर उपलब्ध स्रोतों से सूचना एसवं आंकड़े जमा कर रहे हैं।

इस तरह की और भी संपत्तियों की पहचान की जाएगी और उन्हें जब्त किया जाएगा। आयकर विभाग ने बेनामी संपत्तियों के खिलाफ जारी कार्रवाई के तहत अब तक 1833 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने सोमवार को इसकी जानकारी दी। अक्तूबर तक उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 1833 करोड़ रुपये की 541 संपत्तियां जब्त की गईं। इसके लिए 517 से अधिक नोटिस जारी किए गए थे।

केंद्र और राज्य सरकारों के बीच जीएसटी करदाताओं का विभाजन जल्द हो

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नई दिल्ली। सरकार ने जीएसटी के करदाताओं यानी व्यापारियों का केंद्र व राज्यों के बीच विभाजन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का निर्देश दिया है।

केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) की अध्यक्ष वनजा एन. सरना ने इस संबंध में देश भर में सभी जोन के मुख्य आयुक्तों को पत्र लिखकर कहा है कि यह काम जल्द निपटाया जाए ताकि व्यवसायियों को अपने क्षेत्रधिकारी के संबंध में स्पष्टता हो सके।

सूत्रों ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच जीएसटी के असेसीज का बंटवारा कंप्यूटर सिस्टम के माध्यम से किया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर केंद्र और राज्यों के अधिकारी आपस में मिल-बैठकर भी यह तय कर रहे हैं कि करदाता किसके अधीन होने चाहिए। जीएसटी में करीब एक करोड़ कारोबारी पंजीकृत हैं।

सालाना 1.5 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले 90 प्रतिशत करदाताओं पर प्रशासनिक नियंत्रण राज्यों का होगा जबकि शेष 10 प्रतिशत पर केंद्र के अधीन आएंगे।

सालाना डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले असेसीज में से केंद्र और राज्यों के पास 50:50 में होंगे। जीएसटी काउंसिल ने 20 सितंबर को एक आदेश जारी कर केंद्र और राज्यों के बीच असेसीज के बंटवारे की प्रक्रिया बतायी थी।

मेरठ जोन ने करदाताओं के विभाजन के लिए जरूरी आदेश जारी कर दिये है जबकि दूसरे जोन में भी यह प्रक्रिया पूरी की जा रही है। यही वजह है कि सीबीईसी ने यह ताजा निर्देश आयुक्तों को भेजा है।

रिटर्न की समीक्षा कर सकती है सरकार
सरकार जीएसटी के हर महीने तीन रिटर्न दाखिल करने के प्रावधान की समीक्षा कर सकती है ताकि व्यापारियों के लिए नये टैक्स का अनुपालन आसान बनाया जा सके।

इस समय उन्हें जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-2 और जीएसटीआर-3 हर महीने भरना होता है। इनमें व्यापारियों को खरीदारों और सप्लायरों की जानकारी देनी होती है ताकि करारोपण और इनपुट टैक्स क्रेडिट का मिलान किया जा सके।

जुलाई के रिटर्न भरने में इन्वॉयस के मिलान में दिक्कतें आने की शिकायतों के बाद समीक्षा की संभावना है। एक अधिकारी ने बताया कि इस बात की समीक्षा हो सकती है कि इन्वॉयस का मिलान आवश्यक है या नहीं।

33 अंक की मामूली बढ़त के साथ खुला शेयर बाजार

नई दिल्ली। मंगलवार को शेयर बाजार मामूली बढ़त के साथ खुला। सेंसेक्स ने 33,788 पर शुरुआत की, वहीं निफ्टी 10,477 पर खुला। सुबह 10 बजे तक सेंसेक्स 33 अंक की बढ़त के साथ 33,764 पर कारोबार कर रहा है, जबकि निफ्टी 2 अंको की मामूली गिरावट के साथ 10,449 पर कोरोबार कर रहा है।

शुरुआती घंटे में बाजार में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी खरीदारी नजर आ रही है। रियल्टी, एफएमसीजी, मेटल, फार्मा, कैपिटल गुड्स, पावर और ऑइल ऐंड गैस के शेयरों में अच्छी खरीदारी का माहौल दिख रहा है। हालांकि कंन्ज्यूमर ड्यूरेबल्स के शेयर थोड़े दबाव में लग रहे हैं।

सोमवार को सेंसेक्स नया रेकॉर्ड बनाते हुए हुए 33,800 तक पहुंचा, वहीं निफ्टी भी 10,490 के स्तर तक पहुंचा। सोमवार को सेंसेक्स को 33,731 पर बंद हुआ था, वहीं निफ्टी 10,451 के स्तर पर बंद हुआ था।

भूखंडों की लॉटरी नहीं निकालने पर मंडी सचिव को नोटिस

थोक फल सब्जी मंडी समिति की बैठक आज, आवंटन के मामले पर भी होगी चर्चा

कोटा। एरोड्रम सर्किल के पास स्थित थोक फल सब्जी मंडी के यार्ड 2 में 348 भूखंडों की लॉटरी के मामले में बार-बार पत्राचार करने पर क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक हरिशरण मिश्रा ने सचिव हेमलता मीणा को नोटिस जारी किया है। उनसे सात दिन में इसका स्पष्टीकरण मांगा गया है।

भूखंडों की लॉटरी निकालने को लेकर सभी जगह से आदेश जारी होने के बावजूद मंडी समिति इसकी पालना नहीं कर रही। जिससे 72 किसान, 10 विकलांग, 262 व्यापारी 4 विधवा इसका लाभ नहीं उठा पा रहे। बरसों से यह मामला समिति द्वारा लटकाया हुआ है।

विधानसभा में भी यह मामला विधायक प्रहलाद गुंजल द्वारा उठाया गया था, जिसमें मंत्री ने दो माह में इसकी लाटरी निकलवाने के लिए कहा था। उसकी भी पालना नहीं हो पाई। मंडी समिति सचिव हेमलता मीणा इस मामले को बार-बार लटका रही है।

वे कृषि विपणन विभाग से मार्गदर्शन की बात कहकर इस मामले को लटका रही है। इस पर क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक मिश्रा ने उन्हें नोटिस जारी किया है। इसमें कहा है कि फल मंडी समिति ने 9 अगस्त 17 को लाटरी के मामले में मार्गदर्शन मांगा था, जिसका जवाब 9 अगस्त-17 को ही भेज दिया गया था।

बार-बार एक ही प्रकरण को लेकर अनावश्यक पत्राचार कर राजकीय समय एवं संसाधनों का नुकसान किया जा रहा है। इससे यह भी लग रहा है कि सचिव राजकीय कार्य को निष्पादन नहीं कर पा रही है।

पोर्टल पर दिया गलत जवाब
उन्होंने नोटिस में लिखा कि संपर्क पोर्टल पर लोगों ने जो परिवाद दिया है, उसमें भी गलत जवाब दिया जा रहा है। कहा जा रहा है कि उनसे मार्गदर्शन मांगा गया है। इस प्रकार परिवादियों को गुमराह किया जा रहा है। यह राजकीय कार्य संपादन में घोर लापरवाही का रवैया है।

इस कृत्य से परिवादियों के प्रकरणों का निस्तारण नहीं हो पाया है। इसलिए इस संबंध में सात दिन में अपना जवाब दें। उन्होंने कि पूरा मामला साफ है, फिर भी पता नहीं क्यों इस मामले को लटकाया जा रहा है।

जवाब आने पर आगे की कार्रवाई होगी। उधर, मंडी समिति ने इस मामले में 7 नवंबर को दोपहर 12 बजे मंडी कार्यालय में बैठक का आयोजन किया है।

नोटबंदी के बाद एक साल में 25% घटी गोल्ड की डिमांड

कोलकाता। पिछले साल 8 नवंबर को मोदी सरकार के नोटबंदी का ऐलान करने के बाद एक साल में देश में सोने की डिमांड 25 फीसदी कम हुई है।

बुलियन ट्रेडर्स और जूलर्स का कहना है कि गोल्ड ट्रेड बी2बी (बिजनस टु बिजनस) कारोबार में कालेधन की एंट्री बंद हो गई है, लेकिन बी2सी (बिजनस टु कन्ज़्यूमर) सौदों में इसका दखल अभी भी बना हुआ है।

ऑल इंडिया जेम ऐंड जूलरी ट्रेड फेडरेशन के चेयरमैन नितिन खंडेलवाल ने ईटी को बताया, ‘नोटबंदी के बाद शुरुआती महीनों में कारोबार तकरीबन 75 फीसदी गिर गया था।

हालांकि, सिस्टम में करंसी की सप्लाई बढ़ने के साथ धीरे-धीरे डिमांड बढ़ी है। हालांकि, पिछले साल की तुलना में ओवरऑल डिमांड अभी भी 25 फीसदी कम है।’

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, 2016 में इंडिया में गोल्ड डिमांड 675.5 टन थी, जो 2015 से 21 फीसदी कम थी। जूलर्स की हड़ताल, बड़ी खरीदारी के लिए पैन कार्ड को अनिवार्य बनाया जाना और नोटबंदी इसकी बड़ी वजहें थीं। 2015 में गोल्ड की डिमांड 857.2 टन थी।

जनवरी और फरवरी में भी नोटबंदी का असर जारी रहा। हालांकि, अक्षय तृतीया पर डिमांड में कुछ तेजी आई। डब्ल्यूजीसी के आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल-जून तिमाही में मांग 37 फीसदी बढ़ी थी।

 खंडेलवाल ने बताया, ‘1 जुलाई को जीएसटी में गोल्ड पर 3 फीसदी टैक्स लगाने से डिमांड फिर घट गई।’ इंडिया बुलियन ऐंड जूलरी असोसिएशन (आईबीजेए) के नैशनल सेक्रटरी सुरेंद्र मेहता ने कहा, ‘नोटबंदी के बाद से स्मगलिंग में बड़ी गिरावट आई है क्योंकि मार्केट में कम पूंजी थी और निगरानी सख्त हुई।’

मेहता ने कहा कि बी2सी कारोबार में अभी भी कालाधन चल रहा है, लेकिन बी2बी लेवल पर अवैध ट्रेड तकरीबन खत्म हो गया है। खंडेलवाल ने जूलरी बिजनस में कालेधन की एंट्री से इनकार किया।

जीजेएफ के चेयरमैन ने कहा, ‘कालाधन केवल बुलियन बिजनस में जा सकता है न कि गोल्ड जूलरी में।’ खंडेलवाल और मेहता दोनों का मानना है कि धीरे-धीरे ही सही लेकिन रूरल डिमांड बढ़ रही है।

उन्होंने बताया, ‘कई राज्यों में बारिश की वजह से खरीफ फसलों पर बुरा असर पड़ा है। किसानों को फिर से बुआई के लिए कैश की जरूरत है। उन्हें फसल की अच्छी कीमत भी नहीं मिल रही है। इसलिए किसानों की तरफ से गोल्ड की खरीदारी घटी है।’

नोटबंदी के एक साल बाद मोदी कल पेश करेंगे पार्ट 2 का रोडमैप!

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नई दिल्ली। नोटबंदी के एक साल बाद आगे की रणनीति किस तरह हो, इस बारे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 8 नवंबर को रोडमैप पेश कर सकते हैं। इसे किस तरह पेश किया जाय, इस बारे में हाई लेवल पर विचार का दौर जारी है।

10 नवंबर को पहले ही सभी केंद्रीय मंत्रियों की मीटिंग बुलाई गई है जिसमें करप्शन के खिलाफ अगली जंग के बारे में डिटेल प्लान पेश किया जाएगा।

विपक्ष की आलोचना को दरिकनार करते हुए पीएम मोदी की अगुआई में केंद्र सरकार ने नोटबंदी के एक साल पूरा होने पर 8 नवंबर को ‘ऐंटी ब्लैक मनी डे’ मनाने का फैसला लिया है। विपक्ष ने इस दिन पूरे देश में विरोध दिवस बनाने का ऐलान किया।

पार्ट 2 का प्लान तैयार
सूत्रों के अनुसार पीएम मोदी ने नोटबंदी के बाद अपना अगला टारगेट बेनामी संपत्ति को बनाया है और इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर पूरे देश में अभियान चलाया जाएगा। दरअसल नोटबंदी के एक साल बाद सरकार करप्शन के खिलाफ जंग को जारी रखने का मजबूत संकेत देना चाहती है।

सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित अभियान में अगर मालिकाना हक के कानूनी सबूत नहीं मिले तो बेनामी संपत्तियों को सरकार अपने कब्जे में ले सकती है।

इन बेनामी संपत्तियों को भी गरीबों के लिए किसी योजना से जोड़ा जाएगा जैसे ब्लैक मनी के लिए दोबारा लाई डिस्कलोजर स्कीम के तहत राशि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में डाली गई थी।

सरकार को उम्मीद है कि बेनामी संपत्ति के खिलाफ प्रस्तावित अभियान में कई बड़े सफेदपोश नेताओं पर गाज भी गिर सकती है।

मोदी सरकार 2019 के आम चुनाव तक इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहती है और करप्शन के मुद्दे पर ही वह चुनाव लड़ने की रणनीति बना चुकी है।

सरकार का मानना है कि एक साल बाद जब नोटबंदी के बाद हालात सुधर चुके हैं तो दूसरा अभियान शुरू होने से इसका सकारात्मक संदेश खासकर गरीबों के बीच जा सकता है कि काला धन रखने वाले अमीरों के खिलाफ सख्त अभियान जारी है।

इसके अलावा करप्शन को रोकने के लिए बने इस लंबित बिल या पहल पर पीएम नरेन्द्र मोदी ठोस और निर्णायक कदम उठा सकते हैं।