Saturday, July 11, 2026
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शादियों की डिमांड से सोने में सुधार, चांदी भी चमकी

नई दिल्ली/कोटा । दिल्ली के सर्राफा बाजार में लगातार दूसरे दिन सोने की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई है। सकारात्मक वैश्विक संकेत और घरेलू ज्वैलर्स की ओर से शादी के सीजन में मांग को पूरा करने के लिए हो रही खरीदारी के चलते सोना 60 रुपये चढ़कर 30450 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर हो गया है।

हालांकि चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इंडस्ट्रीयल यूनिट्स और सिक्का निर्माताओं की ओर से कमजोर उठान के चलते चांदी 125 रुपये गिरकर 40575 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है।

व्यापारियों का मानना है कि सकारात्मक वैश्विक संकेत के अलावा, घरेलू हाजिर बाजार में स्थानीय ज्वैलर्स की ओर से शादी के सीजन में बढ़ी खरीदारी के चलते पीली धातु की कीमतों में बढ़त देखने को मिली है। बीते मंगलवार के सत्र में सोने की कीमतों में 255 रुपये की तेजी दर्ज की गई थी।

वैश्विक बाजार में सिंगापुर में सोना 0.20 फीसद की बढ़त के साथ 1277.30 डॉलर प्रति औंस और चांदी 0.38 फीसद की तेजी के साथ 16.97 डॉलर प्रति औंस के स्तर आ गई है।

देश की राजधानी दिल्ली में 99.9 फीसद और 99.5 फीसद शुद्धता वाला सोना 60 रुपये बढ़कर क्रमश: 30450 रुपये और 30300 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गया है।  गिन्नी के भाव हालांकि 24700 रुपये प्रति आठ ग्राम के स्तर पर बरकरार रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर चांदी 125 रुपये की कमजोरी के साथ 40575 रुपये और साप्ताहिक आधारिक डिलिवरी 150 की कमजोरी के साथ 39675 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गया है। चांदी के सिक्कों का भाव हालांकि 74000 रुपये लिवाल और 75000 रुपये बिकवाल प्रति सैंकड़ा के स्तर पर बरकरार है।

कोटा सर्राफा
चांदी 40200 रुपए प्रति किलो। 
सोना केटबरी 30350 रुपए प्रति दस ग्राम, सोना 35400 रुपए प्रति तोला।
सोना शुद्ध 30500 रुपए प्रति दस ग्राम, सोना 35570 रुपए प्रति तोला।

सेंसेक्स 152 और निफ्टी 47 पॉइंट गिरकर बंद

मुंबई। शेयर बाजार बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 151.95 अंक टूटकर 33,218 और निफ्टी 47 पॉइंट कमजोर होकर 10,303 पर बंद हुआ।

इससे पहले फार्मा, सूचना प्रौद्योगिकी, टिकाऊ उपभोक्ता सामान और एफएमसीजी कंपनियों के शेयर में लिवाली के रुख से सेंसेक्स 53 अंक चढ़कर खुला। बंबई शेयर बाजार का 30 कंपनियों के शेयरों पर आधारित सेंसेक्स 52.74 अंक यानी 0.15% सुधरकर 33,423.50 अंक पर खुला।

पिछले सत्र के कारोबार में यह 360.43 अंक गिर गया था। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 कंपनियों के शेयरों पर आधारित निफ्टी 22.55 अंक यानी 0.21% चढ़कर 10,372.70 अंक पर खुला है।

ब्रोकरों के अनुसार, विदेशी कोष के निवेश और अन्य एशियाई बाजारों में बढ़त का असर बाजार की धारणा पर पड़ा है। कल विदेशी सांस्थानिक निवेशकों ने 461.47 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।

नोटबंदी की सालगिरह पर जयपुर में 50,000 लोगों ने गाया वंदे मातरम

जयपुर। नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर देश में जहां विपक्ष ब्लैक डे मना रहा है वहीं सरकार इसके फायदे भुनाते हुए एंटी ब्लैक डे का जगह-जगह आयोजन करा रही है।

इसी तर्ज पर जयपुर में प्रदेश सरकार के युवा बोर्ड ने हिंदू अध्यात्मिक व सेवा फाउंडेशन के साथ मिलकर सवाई माधोसिंह स्टेडियम में नोटबंदी की सालगिरह मनाया। इस भव्य आयोजन में करीब 50,000 हजार लोगों ने भाग लेकर सामूहिक रूप से वंदे मातरम गाया।

बता दें कि राजस्थान सरकार का यह कार्यक्रम जयपुर मेयर अशोक लाहोति के उस फैसले के कुछ दिन बाद आया है जिसमें जयपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के सभी कर्मचारियों को दफ्तर में काम की शुरुआत करने और छुट्टी के बाद अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत गाने को कहा गया था।

इवेंट के आयोजक राजस्थान यूथ बोर्ड के उपाध्यक्ष संदीप यादव ने कहा कि इस तरह के इवेंट युवाओं को सभ्यता और नैतिक मूल्यों से जोड़ते हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया इस कार्यक्रम की मुख्य अतिथि रहीं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ‘परिवार, पर्यावरण और राष्ट्र के लिए प्रेम बढ़ाना’ है।

बॉलिवुड इंडस्ट्री के दिग्गज संगीतकार कल्याणजी (कल्याणजी-आनंदजी) इस मौके पर हिंदी फिल्मों के देशभक्ति गीत बजाए। दो घंटे के इस कार्यक्रम में योग का सेशन भी हुआ, जिसका नेतृत्व वसुंधरा राजे ने किया।

मिल्क प्रोडक्ट को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में लाने की तैयारी

नई दिल्ली। उपभोक्ताओं के लिए दूध भले ही आवश्यक वस्तु की श्रेणी में हो, लेकिन यह फिलहाल आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में शुमार नहीं है।

इसी के चलते दुग्ध उत्पादकों और उपभोक्ताओं के हितों के मद्देनजर दूध को आवश्यक वस्तु अधिनियम की सूची में शामिल करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।

दूध की मांग व आपूर्ति में असंतुलन होने की दशा में कभी उपभोक्ताओं को तो कभी दूध उत्पादकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। दूध को आवश्यक वस्तु की श्रेणी में रखने पर विचार किया जा रहा है।

दुग्ध उत्पादन के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश बन गया है। इसके बावजूद दूध की मांग और आपूर्ति में कभी-कभी असंतुलन पैदा हो जाता है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है।

इससे दुग्ध उत्पादकों के साथ उपभोक्ताओं को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। केंद्रीय पशुधन और डेयरी मंत्रालय ने इस आशय का मसौदा तैयार किया है, जिसे सचिवों के अंतरमंत्रलयी समूह के पास विचार के लिए भेजा गया है।

सूत्रों के मुताबिक, सचिवों के समूह के फैसले के बाद दूध को आवश्यक वस्तु अधिनियम के दायरे में लाना आसान हो जाएगा। इसके बाद दूध के मूल्य में असंगत तौर पर उतार-चढ़ाव को रोकने में मदद मिलेगी। हालांकि, दूध की आपूर्ति में इसे आवश्यक वस्तु माना जाता है।

डिजिटल पेमेंट प्रोत्साहन का दूसरा चरण जनवरी से

नई दिल्ली । देश में डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहन करने के लिए सरकार अगले साल जनवरी से दूसरा चरण के लिए काम शुरू करने जा रही है। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक है।

डायरेक्टोरेट ऑफ एडवर्टाइजिंग एंड विजुअल पब्लिसिटी (डीएवीपी) डिजिटल पेमेंट के प्रोमोशन प्लान पर काम कर रही है। यह जनवरी में लॉन्च किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि सूचना और प्रसारण मंत्रालय मेटी (Meity) के साथ मिलकर इस प्लान को तैयार कर रहे हैं।

इसके लोगो और जिंगल तैयार किये जा रहे हैं। डीएवीपी पैनल की अगली बैठक एक हफ्ते के भीतर हो सकती है जिसमें इस प्लान को जमा करना है। एक प्रस्ताव रखा गया है कि हर मंत्रायल अपने अपने डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहित करने के प्लान के साथ आए।

बीते वर्ष नवंबर में देश में नोटबंदी लागू होने के बाद से सरकार डिजिटल पेमेंट को प्रोत्साहित कर रही है। ताकि देश कैशलैस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़े और साथ ही टैक्स आधार में इजाफा आ सके। प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों की भागेदारी से डिजिटल ट्रांजेक्शन की संख्या में तेजी दर्ज की गई है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के डेटा के मुताबिक देश में बीते वर्ष नवंबर से सितंबर, 2017 तक 9.33 करोड़ इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन हुए है, जिनका मूल्य 12.13 लाख करोड़ था।

दिसंबर 2016 में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन वॉल्यूम 95.75 करोड़ के स्तर पर सबसे ज्यादा थी। मूल्य के आधार पर मार्च 2017 तक इनका उच्चतम स्तर 1.49 लाख करोड़ रुपये रहा है।

अब आसान नहीं होगा दिवालिया घोषित होना

कठोर हुई दिवाला शोधन योजनाओं की स्वीकृति प्रक्रिया

नई दिल्ली। दिवाला शोधन योजनाओं (रेजॉलुशन प्लान्स) की स्वीकृति प्रक्रिया को अब पहले से कठोर कर दिया गया है। अब स्वीकृति से पहले आवेदक का पुराना इतिहास और उसकी विश्वसनीयता भी खंगाली जाएगी।

भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (इनसॉल्वंसी ऐंड बैंकरप्ट्सी बोर्ड ऑफ इंडिया) ने रेजॉलुशन प्लांस के बढ़ते आवेदन को देखते हुए यह कदम उठाया है।

मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, ‘अब किसी दिवाला शोधन योजना की स्वीकृति से पहले आवेदक कंपनी समेत उसके प्रवर्तकों (प्रमोटर्स) को कड़ी जांच से गुजरना होगा।

उनका पहले का कार्य इतिहास तथा उनकी विश्वसनीयता जांचने के बाद ही आवेदन को स्वीकृत किया जाएगा।’ इस बयान से यह साफ हो गया है कि अब प्रमोटर्स भी इस योजना के तहत आवेदन दे सकते हैं।

बोर्ड की ओर से लागू किए जानेवाले इन्सॉल्वंस ऐंड बैंकरप्ट्सी कोड के तहत हर रेजॉलुशन प्लान को कर्जदाताओं की कमिटी से हरी झंडी मिलनी जरूरी है। रेजॉलुशन प्रोसेस को 180 दिनों के अंदर पूरा किया जाना होता है, हालांकि इसकी मियाद बढ़ाने का भी प्रावधान है।

ज्यादा कैश जमा करने वालों सावधान!, बेनामी संपत्ति पर IT डिपार्टमेंट का एक्शन

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नई दिल्ली। भारतीय टैक्स अधिकारियों ने बेनामी संपत्ति पर कार्रवाई शुरू कर दी है। उनके निशाने पर वे लोग भी हैं, जिन्होंने नोटबंदी के बाद बड़ी मात्रा में कैश जमा किया था, लेकिन अब तक रिटर्न फाइल नहीं किया है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के एक टॉप ऑफिशियल ने बताया कि विभाग 541 प्रॉपर्टी जब्त कर चुका है और कुल करीब 1800 करोड़ रुपये के बैंक एकाउंट फ्रीज किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि जल्द और कार्रवाई हो सकती है।

अधिकारी ने बताया, ‘बड़ा फोकस बेनामी प्रॉपर्टी पर होगा और एक्शन उन लोगों पर लिया जाएगा, जिनके नोटबंदी के बाद के कैश डिपॉजिट्स नजरों में आए हैं, लेकिन उन्होंने अब तक रिटर्न फाइल नहीं किया है।’

अधिकारी ने बताया कि कुछ संपत्तियां हाई प्रोफाइल नेताओं और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी हैं। विभाग जब्त की गई कुछ संपत्तियों की नीलामी तय कानूनी प्रक्रिया से जल्द शुरू कर सकता है।

पिछले साल बनाए गए बेनामी कानून ने टैक्स अधिकारियों को ऐसी संपत्ति जब्त करने, उनकी फेयर मार्केट वैल्यू के 25 पर्सेंट तक पेनाल्टी लगाने का अधिकार दिया है। इस कानून के तहत दोषी को सात साल तक की जेल हो सकती है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने 4 नवंबर को हिमाचल प्रदेश में एक चुनावी भाषण में कहा था कि बेनामी संपत्तियों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा।

टैक्स डिपार्टमेंट ने जांच के लिए 20572 मामले चुने हैं। उसकी योजना ऐसे लोगों को इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 142(1) के तहत नोटिस भेजने की है, जिन्होंने रिमांडइर भेजे जाने के बाद भी 7 नवंबर की तय तारीख तक रिटर्न फाइल नहीं किए।

अधिकारी ने बताया कि रिटर्न और डिपॉजिट में बड़े अंतर वाले मामलों को एनफोर्समेंट एक्शन के लिए चुना जाएगा।
डिपार्टमेंट ने नोटबंदी का ऐलान होने के बाद ऑपरेशन क्लीन मनी शुरू किया था।

इस अभियान के पहले चरण में 11.7 लाख संदिग्ध मामलों की पहचान की गई थी। इनमें 3.68 लाख करोड़ रुपये और 23 लाख बैंक एकाउंट्स शामिल थे।

केवल 11.2 लाख लोगों ने टैक्स डिपार्टमेंट के एसएमएस और ईमेल का जवाब दिया था। उसके बाद ऑपरेशन क्लीन मनी 2.0 शुरू किया गया था। इसके साथ पहचान में आए ब्लैक मनी के मामलों के लिए अलग से एक पोर्टल लॉन्च किया गया था।

इसके अलावा नवंबर 2016 से मार्च 2017 के बीच 900 जगहों पर तलाशी ली गई, जिससे 900 करोड़ रुपये जब्त किए जा सके। इसमें 636 करोड़ रुपये नकद थे। करीब 8000 करोड़ रुपये की अघोषित आमदनी की बात सामने आई थी।

नोटबंदी: जूलर्स ने हवाला से खपाए 839 करोड़ रुपये

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लखनऊ। नोटबंदी के बाद 431 किलो ड्यूटी फ्री गोल्ड खपाकर चर्चा में आए नोएडा के नामी लाल महल जूलर्स के बारे में नया खुलासा हुआ है। इस जूलर ने 839.85 करोड़ रुपये का सोना और उससे बनी जूलरी नोएडा से दुबई, पक्के कागजों पर भेजी और भूल गया।

वहां से इसका पेमेंट नहीं आया। माना जा रहा है कि इस फर्म ने 12 करोड़ 92 लाख सात हजार 970 अमेरिकी डॉलर यानी 839.85 करोड़ रुपये हवाला के जरिए इधर-उधर कर दिए। यह खुलासा डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की पड़ताल में हुआ है।

आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी के बाद डीआरआई ने 22 व 23 दिसंबर को नोएडा स्पेशल इकनॉमिक जोन में स्थित लाल महल जूलर्स के ठिकानों पर छापे मारे थे। तब पता चला था कि इस फर्म ने 431 किलो ड्यूटी फ्री गोल्ड नोटबंदी के बाद घरेलू बाजार में खपा दिया।

डीआरआई ने जब कंपनी की एमडी अनीता गर्ग के दस्तावेज खंगाले तो पता चला कि उन्होंने बैंक में 12 करोड़ 55 लाख 73 हजार 212 यूएस डॉलर का भुगतान आने से जुड़ी ऐप्लिकेशन लगा रखी है। पड़ताल में यह रकम करीब 839 करोड़ 85 लाख रुपये निकली।

अब ईडी करेगी कार्रवाई
डीआरआई ने श्री लाल महल जूलर्स की एमडी अनीता गर्ग को जांच में सहयोग के लिए 13 बार समन भेजा लेकिन वह टालती रहीं। प्रेमचंद गर्ग और उनका बेटा देवाशीष गर्ग भी दावा करते रहे कि उनका लाल महल जूलर्स से कोई संबंध नहीं है। डीआरआई सूत्रों के अनुसार, तीनों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिल गए हैं।

अब डीआरआई यह मामला ईडी को देने की तैयारी में है। डीआरआई ने केस की जांच से जुड़ी करीब 200 पेज की रिपोर्ट ईडी को भेज दी है। ईडी जल्द ही इस मामले में फेमा और मनी लॉड्रिंग ऐक्ट के तहत केस दर्ज करेगी।

अपनी ही कंपनी को तो भेजी थी जूलरी
लाल महल जूलर्स प्रबंधन से जब डीआरआई ने पूछताछ की तो बताया गया कि ये जूलरी यूएई की फर्म डायमंड इंटरनैशनल ट्रेडिंग एफजेडसी, दुबई को भेजी गई थी। भुगतान नहीं मिला है, इसलिए इस कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

डीआरआई ने पड़ताल की तो पता चला कि लाल महल जूलर्स के मुख्य कर्ताधर्ता और अनीता गर्ग के पति प्रेमचंद गर्ग ने ही दुबई में डायमंड इंटरनैशनल ट्रेडिंग एफजेडसी कंपनी बनाई है।

प्रेमचंद ही उसका काम देखता है। प्रेमचंद की बेटी ईशा गर्ग के नाम पर भी दुबई में श्री लाल महल जूलर्स एलएलसी यूएई नाम की फर्म है। इसका खुलासा इनके अकाउंटेंट बलदेव चतुर्वेदी के ईमेल अकाउंट से हुआ है।

सोने की मात्रा लिखी, कीमत नहीं लिखी
श्री लाल महल जूलर्स ने डायमंड इंटरनैशनल ट्रेडिंग एफजेडसी को जो सोना भेजा, उसकी मात्रा का जिक्र तो कागजों में है लेकिन उस सोने का मूल्य कहीं नहीं लिखा। यहां से जो कड़े और सोने की चूड़ियां भेजी गईं और उन्हें गलाया गया, उसमें भी गलाए गए सोने की मात्रा का जिक्र है लेकिन कीमत का नहीं।

तेजी के साथ खुले बाजार, सेंसेक्स 33,404.21 और निफ्टी 10,362.10 पर

नई दिल्ली। मंगलवार को बड़ी गिरावट के साथ बंद होने के बाद देश के शेयर बाजार बुधवार को तेजी के साथ खुले। 30 शेयरों का बीएसई सेंसेक्स 33.45 पॉइंट चढ़कर 33,404.21 पर खुला तो निफ्टी ने भी बढ़त दिखाई और 50 शेयरों का यह एनएसई सूचकांक 11.90 अंक की तेजी से 10,362.10 पर खुला।

शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार 0.2 प्रतिशत मजबूत हुआ और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई पर 358 शेयरों में गिरावट के मुकाबले 818 शेयरों में तेजी देखी गई।

बुधवार के शुरुआती कारोबार में सिप्ला के शेयर 3 प्रतिशत बढ़ गए। अर्निंग्स के मोर्चे पर कंपनी की उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन की वजह से निवेशक इसके शेयर पर लट्टू हो गए।

वहीं, ल्युपिन के भी शेयरों ने 1.6 प्रतिशत के तेजी दिखाई। देश की सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल के शेयर 4 प्रतिशत कमजोरी के साथ खुले क्योंकि तीन निवेशकों ने आज कंपनी में अपनी-अपनी हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की।

इधर, अर्निंग्स के बाद डीसीबी श्रीराम, पोलरिस कंसल्टिंग, एलऐंडटी टेक्नॉलजी और बल्लारपुर इंडस्ट्रीज के शेयरों को 3 से 8 प्रतिशत मजबूती मिली जबकि मन्नापुरम फाइनैंस, विनती ऑर्गेनिक्स और टाटा कॉफी के शेयर 2 से 4 प्रतिशत तक कमजोर हो गए।

थोक फल, सब्जी मंडी प्याऊ : श्रमिकों के भुगतान में 3.50 लाख का घोटाला

कोटा। एरोड्रम चौराहे के पास स्थित थोक फल सब्जी मंडी में प्याऊ के श्रमिक लगाने को लेकर हुई वित्तीय अनियमितता के लिए सचिव हेमलता मीणा को दोषी माना गया है। 11 कर्मचारियों के नाम से भुगतान उठाकर साढ़े तीन लाख रुपए का घोटाला किया गया है।

उनके खिलाफ हुई जांच को कार्रवाई के लिए निदेशालय को भेजा गया है। इस बारे में सचिव से संपर्क किया लेकिन, उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार फल सब्जी मंडी में प्याऊ के लिए 11 श्रमिकों का ठेका दिया गया। जबकि यहां केवल तीन ही प्याऊ संचालित हो रही हैं। ठेकेदार ने सचिव से मिलकर यह खेल खेला।

इसमें 11 श्रमिकों को प्याऊ पर लगाना दिखाया गया, जबकि वे ठेकेदार के ही रिश्तेदार थे। जो व्यक्ति प्याऊ पर काम कर रहे थे, उनके नाम इसमें शामिल ही नहीं था। इस प्रकार लाखों का खेल चल रहा। इसकी शिकायत हुई तो कृषि विपणन विभाग के क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक हरिशरण मिश्रा को इसकी जांच सौंपी गई।

शिकायत के आधार पर जांच
इसमें साढ़े तीन लाख की वित्तीय अनियमितताएं मिली है। जिसके लिए सचिव हेमलता मीणा जिम्मेदार हैं। उनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए निदेशालय को लिखा गया है।
-हरिशरण मिश्रा, क्षेत्रीय संयुक्त निदेशक 

पैसा भी दिया जा रहा है कम : जांच में सामने आया कि श्रमिकों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जा रही है। यह 207 रुपए रोज है। इसमें 13.15 प्रतिशत पीएफ 4.75 प्रतिशत ईएसआई की कटौती भी शामिल है। जो तीन श्रमिक वहां काम कर रहे हैं, उन्हें केवल 4 हजार रुपए माह दिया जा रहा है।

पीएफ जमा, ईएसआई : जांच में पाया गया कि जिन 11 श्रमिकों को प्याऊ पर काम करना बताकर भुगतान उठाया जा रहा था, वे तो वहां काम ही नहीं करते थे। जांच अधिकारी ने स्वयं निरीक्षण किया तो यहां पर केवल तीन ही प्याऊ मिली, इनमें जो कर्मचारी काम कर रहे थे, वे पिछले पांच साल से थे।

लेकिन, ठेकेदार ने अपनी सूची में उनके नाम शामिल नहीं किए हुए थे, जिससे उनका तो पीएफ काटा जा रहा था, ईएसआई की सुविधा दी जा रही है। काम कर रहे श्रमिकों ने बताया कि वे ही पिछले पांच साल से काम कर रहे हैं। कोई दूसरा इसमें है नहीं। जिन 11 के नाम दिए गए हैं उनके नाम भी पीएफ ईएसआई की सुविधा नहीं है।

बिलों को वेरीफाई नहीं कराया
11कर्मचारियों के नाम से भुगतान उठाकर साढ़े तीन लाख रुपए का घोटाला किया गया है। इस सबके लिए सचिव को जिम्मेदार माना गया है। ठेकेदार के बिलों को प्रभारी कर्मचारी से वेरीफाई तक नहीं करवाया और सचिव ने उसका सीधा भुगतान करवा दिया। जिससे उन्हें इसमें दोषी माना गया है।